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                <title>D Gukesh - दैनिक जागरण</title>
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                <title>प्रज्ञानानंदा ने फिर किया कमाल, दुनिया के नंबर-1 कार्लसन को दूसरी बार हराया</title>
                                    <description><![CDATA[नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने सात दिनों के भीतर दूसरी बार मैग्नस कार्लसन को मात देकर इतिहास रच दिया, विश्वनाथन आनंद के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय बने।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/6a1ff2ff5dd58/article-54871"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/praggnanandhaa.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय शतरंज जगत के युवा सितारे आर. प्रज्ञानानंदा ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नॉर्वे चेस 2026 के आठवें राउंड में उन्होंने विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी और पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। यह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कार्लसन के खिलाफ उनकी दूसरी जीत है, जिसने शतरंज जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। सिर्फ 20 वर्ष की उम्र में प्रज्ञानानंदा ने जिस आत्मविश्वास और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया है, वह भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश करता है। खास बात यह है कि उन्होंने सात दिनों के भीतर दूसरी बार कार्लसन को हराया है। इससे पहले 28 मई को उन्होंने सफेद मोहरों से खेलते हुए नॉर्वे के दिग्गज खिलाड़ी को मात दी थी। अब काले मोहरों से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी क्षमता का और भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैग्नस कार्लसन को लगातार दो बार हराना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। कार्लसन पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व शतरंज पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं और उन्हें आधुनिक युग के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। ऐसे खिलाड़ी को एक ही टूर्नामेंट में दो बार हराना बेहद दुर्लभ उपलब्धि है। प्रज्ञानानंदा इस उपलब्धि को हासिल करने वाले भारत के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने वर्ष 2007 में लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार पराजित किया था। लगभग दो दशक बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने यह कारनामा दोहराया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपने खेल में आक्रामकता और धैर्य का शानदार संतुलन दिखाया है। कार्लसन के खिलाफ मुकाबले में भी उन्होंने शुरुआत से ही स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा। मैच के दौरान कई जटिल परिस्थितियां सामने आईं, लेकिन भारतीय ग्रैंडमास्टर ने अपने अनुभव और तैयारी के दम पर बढ़त हासिल कर ली। प्रज्ञानानंदा की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती है। बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते समय अक्सर युवा खिलाड़ी दबाव में आ जाते हैं, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने बार-बार साबित किया है कि वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के बाद टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी रोमांच बढ़ गया है। प्रज्ञानानंदा अब 12 अंकों के साथ शीर्ष खिलाड़ियों की दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। हालांकि टूर्नामेंट का नेतृत्व अभी अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो कर रहे हैं, जिनके 14 अंक हैं। आठवें दौर में एक और महत्वपूर्ण मुकाबले में फ्रांस के अलीरजा फिरोजा ने मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराकर बड़ा उलटफेर किया। फिरोजा ने समय के दबाव में शानदार एंडगेम खेलते हुए जीत दर्ज की। इस जीत के बाद उनके 13 अंक हो गए और वे खिताब की दौड़ में बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर वेस्ली सो और विंसेंट केमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद खेले गए अर्मागेडन मुकाबले में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक अर्जित किए। यही कारण है कि वे अभी भी अंक तालिका में सबसे आगे हैं। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की खास पहचान उसका अनूठा अर्मागेडन फॉर्मेट है। यदि क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो विजेता तय करने के लिए अर्मागेडन गेम खेला जाता है। इस फॉर्मेट में सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को अधिक समय मिलता है, लेकिन जीतना अनिवार्य होता है। यदि मुकाबला ड्रॉ होता है तो काले मोहरों वाला खिलाड़ी विजेता घोषित किया जाता है। इस प्रणाली से हर दौर में स्पष्ट परिणाम निकलता है और दर्शकों का रोमांच बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में रहा। हालांकि युवा भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अनुभवी कोनेरू हम्पी ने अर्मागेडन मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। महिला वर्ग में कजाकिस्तान की बिबिसारा असाउबायेवा फिलहाल शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं। प्रज्ञानानंदा की उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि भारतीय शतरंज के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई युवा ग्रैंडमास्टर्स तैयार किए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। डी गुकेश के विश्व चैंपियन बनने के बाद अब प्रज्ञानानंदा की सफलता ने भारत को शतरंज की नई महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है आने वाले वर्षों में प्रज्ञानानंदा विश्व चैंपियनशिप के प्रमुख दावेदार बन सकते हैं। उनकी तकनीकी समझ, रणनीतिक सोच और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस 2026 में मैग्नस कार्लसन पर दर्ज यह दूसरी जीत प्रज्ञानानंदा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाएगी। इस प्रदर्शन ने यह संदेश भी दिया है कि भारतीय युवा खिलाड़ी अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व शतरंज के सबसे बड़े मंचों पर जीत हासिल करने की क्षमता रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:03:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा का कमाल, कार्लसन को हराकर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय ग्रैंडमास्टर ने दुनिया के नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में दी मात, गुकेश लगातार दूसरे दौर में हारे जबकि दिव्या देशमुख ने महिला वर्ग में शानदार जीत दर्ज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/praggnanandhas-feat-creates-history-by-defeating-carlsen-in-norway-chess/article-54417"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/norway-chess-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को टूर्नामेंट में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और सात बार के चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हरा दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए, बल्कि टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी मजबूत स्थिति बना ली। दूसरी ओर मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को लगातार दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए बिबिसारा असाउबायेवा को हराकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया।</p>
<p>नॉर्वे चेस के इस मुकाबले पर दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों की नजर थी, क्योंकि कार्लसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे थे। शुरुआत से ही मुकाबला बेहद संतुलित नजर आया। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआती चालों में काफी सतर्कता दिखाई, लेकिन मध्य खेल में प्रज्ञानानंदा ने बेहतरीन रणनीति के जरिए कार्लसन पर दबाव बनाना शुरू किया। समय कम होने के दौरान मैच और ज्यादा रोमांचक हो गया। आखिरकार भारतीय खिलाड़ी ने शानदार धैर्य दिखाते हुए कार्लसन को मात दे दी।</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब प्रज्ञानानंदा ने कार्लसन को क्लासिकल फॉर्मेट में हराया हो। इससे पहले भी वह नॉर्वे चेस 2024 में कार्लसन को पराजित कर चुके हैं। लगातार दूसरी बार दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराना भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर के आत्मविश्वास और तेजी से बढ़ते स्तर को दिखाता है। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि मुकाबला बेहद करीबी था और टाइम स्क्रैम्बल में नतीजा किसी भी दिशा में जा सकता था। उन्होंने माना कि कार्लसन जैसे खिलाड़ी के खिलाफ हर चाल पर दबाव महसूस होता है, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा।</p>
<p>इस जीत के बाद प्रज्ञानानंदा 4.5 अंक के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं मैग्नस कार्लसन इस हार के बाद छह खिलाड़ियों की तालिका में सबसे नीचे चले गए हैं। कार्लसन के लिए यह टूर्नामेंट अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। लगातार खराब नतीजों ने उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अभी टूर्नामेंट में कई मुकाबले बाकी हैं।</p>
<p>दूसरी तरफ भारतीय विश्व चैंपियन डी गुकेश की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनका मुकाबला लगभग पांच घंटे तक चला। क्लासिकल गेम ड्रॉ रहा, लेकिन आर्मगेडन टाईब्रेकर में फिरोजा ने बाजी मार ली। इस हार के बाद गुकेश की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी हार दर्ज हुई। युवा भारतीय खिलाड़ी इस समय 3.5 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं।</p>
<p>फिरोजा इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। मुकाबले के बाद वह व्हीलचेयर और मून बूट में दिखाई दिए, लेकिन इसका असर उनके खेल पर नहीं पड़ा। लगातार जीत के दम पर उन्होंने 7.5 अंक के साथ टूर्नामेंट में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। गुकेश के लिए आने वाला दौर और भी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि अगले मुकाबले में उनका सामना मैग्नस कार्लसन से होगा। शतरंज प्रशंसकों की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।</p>
<p>महिला वर्ग में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने टूर्नामेंट लीडर बिबिसारा असाउबायेवा को आर्मगेडन में हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह दिव्या की लगातार तीसरी टाईब्रेकर जीत रही। इस जीत के बाद वह 4.5 अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या का आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल कर रही है। वहीं भारत की अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को अन्ना मुजिचुक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हम्पी फिलहाल दो अंक के साथ तालिका में आखिरी स्थान पर हैं। हालांकि टूर्नामेंट अभी बाकी है और उनके पास वापसी का मौका रहेगा।</p>
<p>नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का यह सीजन भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रज्ञानानंदा, गुकेश और दिव्या जैसे युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के बड़े नामों को चुनौती दे रहे हैं। खास तौर पर प्रज्ञानानंदा की जीत ने भारतीय शतरंज जगत में नई ऊर्जा भर दी है। कम उम्र में जिस तरह उन्होंने कार्लसन जैसे दिग्गज को दो बार हराया है, उससे उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है।</p>
<p>टूर्नामेंट में आर्मगेडन फॉर्मेट भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। शतरंज में आर्मगेडन एक सडन-डेथ टाईब्रेकर होता है, जिसमें ड्रॉ की कोई संभावना नहीं रहती। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ होने पर परिणाम निकालने के लिए यह फॉर्मेट अपनाया जाता है। इस प्रारूप में खिलाड़ियों पर समय का अतिरिक्त दबाव रहता है और छोटी गलती भी हार का कारण बन सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विश्व शतरंज में भारत की नई पीढ़ी तेजी से अपनी जगह बना रही है। आने वाले मुकाबलों में भी सभी की नजर प्रज्ञानानंदा और गुकेश पर बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:25:57 +0530</pubDate>
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                <title>नॉर्वे चेस में वर्ल्ड चैंपियन गुकेश को वेस्ली ने हराया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रज्ञानानंदा भी हारकर पिछड़े, दिव्या देशमुख ने हम्पी को हराकर शानदार जीत दर्ज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/6a16d3d8a3376/article-54354"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/norway-chess-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="text-align:left;">नॉर्वे चेस 2026 टूर्नामेंट के दूसरे राउंड में भारतीय खिलाड़ियों के लिए दिन मिला-जुला रहा, जहां वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश और आर. प्रज्ञानानंदा को अपने-अपने मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि महिला वर्ग में दिव्या देशमुख ने शानदार जीत दर्ज कर देश को गर्व महसूस कराया। यह राउंड बेहद रोमांचक रहा, जिसमें कई मुकाबले आखिरी चरण तक गए और परिणाम आर्मगेडन तक तय हुए। टूर्नामेंट में अब प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी होती जा रही है, जहां हर अंक खिलाड़ियों की रैंकिंग और स्थिति पर बड़ा असर डाल रहा है।</span></p>
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<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड चैंपियन डी. गुकेश का मुकाबला अमेरिका के अनुभवी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो से हुआ। यह मैच काफी लंबा और रणनीतिक रहा, जिसमें गुकेश ने शुरुआत से ही मजबूत पकड़ बनाई और मध्य गेम तक वेस्ली सो पर दबाव बनाए रखा। क्लासिकल गेम 116 चालों तक चला और अंत में ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन इसके बाद हुए आर्मगेडन टाईब्रेकर में वेस्ली सो ने बाजी मार ली। इस हार के बाद गुकेश को बड़ा झटका लगा, हालांकि उनका प्रदर्शन फिर भी काफी प्रतिस्पर्धी रहा। मैच के बाद वेस्ली सो ने टिप्पणी की कि गुकेश का खेल उनकी रैंकिंग के स्तर जैसा प्रभावी नहीं दिखा, जिसने इस मुकाबले को और चर्चा में ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी राउंड में भारत के एक और युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा को फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। प्रज्ञानानंदा ने शुरुआती चरण में शानदार स्थिति बना ली थी और ऐसा लग रहा था कि वे आसानी से मैच जीत सकते हैं, लेकिन मध्य चरण में कुछ रणनीतिक गलतियों के कारण उनका नियंत्रण कमजोर पड़ गया। इसका फायदा उठाते हुए फिरोजा ने जोरदार वापसी की और मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ अलीरेजा फिरोजा लगातार दूसरी जीत दर्ज करते हुए 6 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं, जिससे वह इस टूर्नामेंट के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डिफेंडिंग चैंपियन मैग्नस कार्लसन ने भी अपने अनुभव का प्रदर्शन करते हुए जर्मनी के विंसेंट कीमर के खिलाफ कड़ी चुनौती का सामना किया। क्लासिकल मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ, लेकिन आर्मगेडन में कार्लसन ने दबाव में बेहतर खेल दिखाते हुए जीत हासिल की। हालांकि, कीमर ने पूरे मैच में शानदार प्रदर्शन किया और दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को कड़ी टक्कर देकर सभी का ध्यान खींचा। इस मुकाबले ने यह साबित किया कि नॉर्वे चेस में कोई भी खिलाड़ी आसानी से जीत हासिल नहीं कर सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">महिला वर्ग में भारत के लिए सबसे बड़ी खुशी दिव्या देशमुख की जीत रही, जिन्होंने अनुभवी ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी को आर्मगेडन में हराकर शानदार प्रदर्शन किया। यह जीत दिव्या के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने एक दिग्गज खिलाड़ी के खिलाफ दबाव में बेहतरीन खेल दिखाया। इस जीत के साथ दिव्या संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं और उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। मैच के बाद उन्होंने कहा कि नॉर्वे चेस का आर्मगेडन प्रारूप और “कन्फेशन रूम” अनुभव उन्हें बहुत पसंद आ रहा है, जहां खिलाड़ी अपने विचार दर्शकों के साथ साझा करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राउंड-2 के बाद अंक तालिका में अलीरेजा फिरोजा 6 अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि गुकेश और वेस्ली सो 2.5 अंकों के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। महिला वर्ग में बिबिसारा असाउबायेवा 4.5 अंकों के साथ आगे चल रही हैं। टूर्नामेंट अब धीरे-धीरे निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है, जहां हर मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह राउंड सीख और चुनौतियों से भरा रहा। जहां गुकेश और प्रज्ञानानंदा को हार का सामना करना पड़ा, वहीं दिव्या देशमुख की जीत ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए। आने वाले राउंड में सभी खिलाड़ियों पर दबाव और बढ़ेगा और दर्शकों को और भी रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।</p>
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 17:06:28 +0530</pubDate>
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