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                <title>Education - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भोपाल में 12 जुलाई को होगा कालिदास राष्ट्रीय महर्षि ज्योतिष विज्ञान सम्मेलन का समापन</title>
                                    <description><![CDATA[दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से आए 300 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और शोधकर्ता वैदिक ज्योतिष, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर मंथन कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/kalidas-national-maharishi-astrology-science-conference-will-conclude-on-12th/article-58472"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kalidas-conference.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल में आयोजित दो दिवसीय कालिदास राष्ट्रीय महर्षि ज्योतिष विज्ञान सम्मेलन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। 12 जुलाई को सम्मेलन का समापन होगा, जिसमें देशभर से आए विद्वान, ज्योतिषाचार्य, शोधकर्ता और सांस्कृतिक विशेषज्ञ अंतिम सत्रों में भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक ज्योतिष और प्राचीन वैज्ञानिक विचारों पर गंभीर अकादमिक चर्चा को बढ़ावा देना है। इस आयोजन में 300 से अधिक विद्वानों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी दर्ज की गई है। दो दिनों तक चले विभिन्न तकनीकी और शैक्षणिक सत्रों में भारतीय ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं, शोध कार्यों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का मकसद केवल पारंपरिक ज्ञान को याद करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप समझना और शोध के माध्यम से आगे बढ़ाना भी है। यही कारण है कि इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन के दौरान वैदिक ज्योतिष, पंचांग विज्ञान, भारतीय दर्शन, खगोल विज्ञान, संस्कृति और शिक्षा जैसे विषयों पर कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया। कई वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक सोच और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियां केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज, शिक्षा और जीवन शैली के अनेक पहलुओं से भी जुड़ी रही हैं। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए शोध, उच्च शिक्षा और अकादमिक संस्थानों की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि प्राचीन ग्रंथों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक की मदद से संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनसे लाभ उठा सकें। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों को एक साझा मंच मिला, जहां उन्होंने अपने शोध अनुभव साझा किए और भारतीय ज्योतिष विज्ञान से जुड़े नए दृष्टिकोणों पर चर्चा की। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिनमें भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। इन प्रस्तुतियों ने सम्मेलन के शैक्षणिक वातावरण को सांस्कृतिक रंग भी प्रदान किया।</p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन के समापन दिवस पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अंतिम दिन समापन सत्र, विशिष्ट विद्वानों के मुख्य व्याख्यान और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा संवर्धन पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत शोधपत्रों और प्रमुख निष्कर्षों का भी सार प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से देशभर के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर नए शोध को प्रोत्साहन मिलता है। सम्मेलन में शामिल विद्वानों ने शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि प्राचीन ज्ञान को समकालीन संदर्भों में नई पहचान मिल सके। भोपाल में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। दो दिनों तक चले इस आयोजन ने न केवल देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर जोड़ा, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक ज्योतिष और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर नए विचारों और शोध को भी गति दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंदौर में आज होगा ‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’, 5 हजार युवा लेंगे विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। शिक्षा, स्टार्टअप, कौशल, खेल और नवाचार जैसे विषयों पर युवाओं से सीधा संवाद होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/my-youth-my-pride-conclave-2026-will-be-held-in-indore/article-58473"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/my-youth-my-pride-conclave.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंदौर आज प्रदेशभर के हजारों युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और नए विचारों का साक्षी बनने जा रहा है। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में<strong> </strong>‘माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब पांच हजार युवा भाग लेंगे। ‘वन स्टेट, वन जनरेशन, वन संकल्प’ थीम पर आधारित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके विचारों को नीति निर्माण की दिशा में स्थान देना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से शामिल होंगे और युवाओं को संबोधित करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुबह से ही प्रतिभागियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद है। प्रशासन और आयोजकों ने कार्यक्रम को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं ताकि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले युवाओं को बेहतर अनुभव मिल सके। यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि युवाओं के विचार, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को सामने लाने का एक बड़ा मंच माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दोपहर करीब 12 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे। इस दौरान वे विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे। आयोजन में शिक्षा, कौशल विकास, स्टार्टअप, एमएसएमई, खेल, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, पर्यटन, संस्कृति और जनभागीदारी जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े युवा शामिल होंगे। पूरे दिन अलग-अलग विषयों पर संवाद सत्र और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें प्रतिभागी अपने अनुभव, सुझाव और नए विचार साझा करेंगे। आयोजकों के अनुसार कॉन्क्लेव की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा केवल चर्चा ही नहीं करेंगे, बल्कि व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव भी तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक ‘युवा संकल्प’ दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसे भविष्य में विकास की योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल श्रोता बनाना नहीं, बल्कि उन्हें विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना है। इसी सोच के साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और युवा उद्यमी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे, जो प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉन्क्लेव में केवल संवाद और कार्यशालाएं ही नहीं, बल्कि कई प्रेरणादायी और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम की शुरुआत मोटर साइकिल और साइकिल रैली से होगी, जिसमें बड़ी संख्या में युवा भाग लेंगे। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, म्यूजिक स्टेज, संवादात्मक सत्र और इंदौरी फूड स्ट्रीट भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और उन्हें समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का सामूहिक संकल्प लेंगे। यह संकल्प केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के भविष्य को लेकर युवाओं की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाएगा। राज्य सरकार का भी मानना है कि विकसित मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब युवाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ेगी और उनके सुझावों को योजनाओं में स्थान मिलेगा। यही वजह है कि इस कॉन्क्लेव को केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं और शासन के बीच संवाद का प्रभावी मंच माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर दिन नया कौशल सीखने की आदत बदल सकती है आपकी जिंदगी, रोज़ 20 मिनट का निवेश देगा बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई भाषा, टेक्नोलॉजी या किसी उपयोगी स्किल पर रोज़ 15–20 मिनट देना भविष्य में करियर, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास के लिए साबित हो सकता है सबसे बड़ा निवेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-habit-of-learning-a-new-skill-every-day-can/article-58331"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/daily-learning.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में केवल डिग्री या पुराने अनुभव के भरोसे आगे बढ़ना आसान नहीं रह गया है। हर दिन नई तकनीकें आ रही हैं, काम करने के तरीके बदल रहे हैं और कंपनियां ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जो लगातार सीखते रहते हैं। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति रोज़ सिर्फ 15 से 20 मिनट किसी नई स्किल को सीखने के लिए निकालता है, तो यह छोटी-सी आदत आने वाले वर्षों में उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। सीखना केवल छात्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए। नौकरी करने वाले, व्यवसायी, गृहिणियां, वरिष्ठ नागरिक और युवा—हर व्यक्ति के लिए नई चीज़ें सीखना जरूरी है। इससे न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि दिमाग सक्रिय रहता है और आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई स्किल सीखने का मतलब हमेशा कोई बड़ा या कठिन कोर्स करना नहीं होता। आप नई भाषा सीख सकते हैं, कंप्यूटर की कोई नई तकनीक समझ सकते हैं, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, पब्लिक स्पीकिंग, डिजिटल मार्केटिंग, कोडिंग, फोटोग्राफी, लेखन, संगीत या किसी भी उपयोगी कला पर रोज़ थोड़ा समय दे सकते हैं। लगातार अभ्यास के साथ यही छोटी शुरुआत भविष्य में बड़ी उपलब्धियों का आधार बन सकती है। आज इंटरनेट ने सीखना पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों मुफ्त और पेड कोर्स उपलब्ध हैं। वीडियो, ई-बुक, पॉडकास्ट और ऑनलाइन क्लास के माध्यम से घर बैठे नई जानकारी हासिल की जा सकती है। यही कारण है कि अब सीखने के लिए उम्र, शहर या आर्थिक स्थिति जैसी सीमाएं पहले जितनी बड़ी बाधा नहीं रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">करियर के लिहाज से भी नई स्किल सीखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज कंपनियां केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यक्ति की वास्तविक क्षमता और नए कौशल को भी महत्व देती हैं। यदि किसी कर्मचारी के पास अतिरिक्त स्किल होती है, तो उसके प्रमोशन, बेहतर नौकरी और अधिक वेतन मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि कई लोग अपनी नियमित नौकरी के साथ-साथ नई तकनीक और डिजिटल स्किल सीखने पर भी ध्यान दे रहे हैं। रोज़ 15–20 मिनट सीखने की आदत लंबे समय में हजारों घंटे के अनुभव में बदल जाती है। शुरुआत में भले ही प्रगति धीमी लगे, लेकिन कुछ महीनों बाद इसका असर स्पष्ट दिखाई देने लगता है। धीरे-धीरे व्यक्ति पहले से अधिक आत्मनिर्भर, सक्षम और आत्मविश्वासी बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई भाषा सीखना भी एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। अंग्रेज़ी के अलावा स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, जापानी या किसी भारतीय भाषा का ज्ञान कई क्षेत्रों में नए अवसर खोल सकता है। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक स्किल आने वाले वर्षों में सबसे अधिक मांग वाली क्षमताओं में शामिल रहने वाली हैं। नई चीज़ें सीखने का फायदा केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता। इससे सोचने की क्षमता विकसित होती है, समस्या समाधान की योग्यता बढ़ती है और रचनात्मकता में भी सुधार आता है। शोध बताते हैं कि लगातार सीखने वाले लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और उम्र बढ़ने के साथ उनकी याददाश्त भी अधिक सक्रिय बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि नई आदत शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती निरंतरता बनाए रखना होती है। कई लोग उत्साह में शुरुआत तो करते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद समय की कमी या आलस के कारण छोड़ देते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआत छोटे लक्ष्य से करें। रोज़ केवल 15 मिनट तय करें और उसी समय पर सीखने की आदत बनाएं। धीरे-धीरे यह आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगी। सीखने के दौरान अपनी प्रगति को नोट करना भी उपयोगी माना जाता है। हर सप्ताह यह देखें कि आपने क्या नया सीखा और अगले सप्ताह का लक्ष्य क्या होगा। इससे प्रेरणा बनी रहती है और सीखने की गति भी बेहतर होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह धीरे-धीरे पीछे छूटने लगता है। वहीं, जो लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करता रहता है, उसके लिए नए अवसरों के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। यही वजह है कि सफल लोग पढ़ने, सीखने और खुद को बेहतर बनाने की आदत कभी नहीं छोड़ते। यदि आप भी अपने भविष्य को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो आज से ही रोज़ 15–20 मिनट किसी नई स्किल के लिए तय करें। यह समय भले ही छोटा लगे, लेकिन आने वाले वर्षों में यही आदत आपके करियर, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में बड़ा बदलाव ला सकती है। सीखने की यह यात्रा धीरे-धीरे आपको उन लोगों की कतार में खड़ा कर सकती है जो बदलते समय के साथ खुद को लगातार बेहतर बनाते रहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-habit-of-learning-a-new-skill-every-day-can/article-58331</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:07:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नसीहत, बोलीं- आत्मनिर्भर बनने के बाद करें शादी, शिक्षा के दौरान जिम्मेदार फैसले लें</title>
                                    <description><![CDATA[AKTU के 24वें दीक्षांत समारोह में छात्र-छात्राओं को जिम्मेदार जीवन, आत्मनिर्भरता और शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया संदेश; विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार की भी जरूरत बताई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/governor-anandiben-patels-advice-in-the-convocation-ceremony-was/article-58125"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/anandiben-patel.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जीवन के बड़े फैसले सोच-समझकर लें और पहले अपने भविष्य को मजबूत बनाने पर ध्यान दें। राज्यपाल ने अपने भाषण में कहा कि पढ़ाई के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनका असर केवल संबंधित परिवार पर ही नहीं बल्कि समाज और सरकारी व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में जिम्मेदारी और परिपक्वता का परिचय देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। उनके अनुसार यदि दो लोग एक-दूसरे को पसंद करते हैं और साथ जीवन बिताना चाहते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विवाह का निर्णय तब लेना चाहिए जब दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएं। उनका कहना था कि आत्मनिर्भरता से परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है और जीवन अधिक संतुलित बनता है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक निजी अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर गया था तो उन्होंने उससे कहा था कि यदि उसे कोई जीवनसाथी पसंद हो तो वह परिवार को बताए, लेकिन सबसे पहले अपने करियर और भविष्य को मजबूत बनाए। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए युवाओं को करियर और शिक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कुलाधिपति ने डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल डिग्रियों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से विद्यार्थियों को भविष्य में दस्तावेजों के प्रबंधन में सुविधा मिलेगी। समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां भी प्रदान की गईं और विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न शिक्षण संस्थानों के निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर ऐसी कमियां देखने को मिलीं, जिन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्रावासों की स्थिति, कक्षाओं की संरचना और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कुछ छात्रावासों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था और अध्ययन सामग्री रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं दिखाई दी। इसके अलावा पानी की टंकियों की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों की ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों की मेस व्यवस्था को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी होनी चाहिए। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, एक्सपायरी डेट और स्वच्छता जैसे पहलुओं पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका मानना था कि स्वस्थ भोजन विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकारी बजट का उपयोग केवल खर्च दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे विद्यार्थियों को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पुस्तकालय, हॉस्टल या अन्य सुविधाएं ऐसी जगह बनाई जाएं जहां उनका उपयोग करना ही कठिन हो, तो इससे संसाधनों का उद्देश्य पूरा नहीं होता। इसलिए योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में व्यावहारिक सोच अपनाना जरूरी है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने देश की रक्षा क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर बन रहा है और पहले जिन सैन्य उपकरणों का आयात किया जाता था, अब देश उनके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसे देश की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">दीक्षांत समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिनकी राज्यपाल ने सराहना की। कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया भी है। समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, अनुशासन और जिम्मेदार निर्णय किसी भी युवा के सफल भविष्य की मजबूत नींव होते हैं। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने करियर, परिवार और समाज के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं तथा देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओबीसी छात्रों के लिए सुनहरा अवसर, गोगांव खेल परिसर में प्रवेश प्रक्रिया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[6 जुलाई तक निशुल्क आवेदन, 7 जुलाई को होगी शारीरिक दक्षता परीक्षा; चयनित विद्यार्थियों को आवास, भोजन, छात्रवृत्ति समेत सभी सुविधाएं मिलेंगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/golden-opportunity-for-obc-students-admission-process-started-in-gogaon/article-57784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gogawan-sports-complex.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिभाशाली और खेलों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। खरगोन जिले के शासकीय बालक खेल परिसर (अन्य पिछड़ा वर्ग), गोगांव में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस खेल परिसर में प्रवेश केवल ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए होगा। इच्छुक अभ्यर्थी 6 जुलाई 2026 की शाम 4 बजे तक निशुल्क आवेदन जमा कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया 7 जुलाई को आयोजित होने वाली शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर पूरी की जाएगी।</p>
<p>खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा संबंधित प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इस खेल परिसर का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश एवं देश का नाम रोशन कर सकें। खेल परिसर में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न खेलों का नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।</p>
<p>प्रवेश प्रक्रिया के तहत कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं में अध्ययनरत अथवा प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्रता के अनुसार कक्षा 6वीं के लिए न्यूनतम आयु 11 वर्ष, कक्षा 7वीं के लिए 12 वर्ष और कक्षा 8वीं के लिए 13 वर्ष निर्धारित की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खेल प्रतिभा रखने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ अच्छे शारीरिक गठन और फिटनेस वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क रखी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र भी बिना किसी शुल्क के आवेदन कर सकें। आवेदन पत्र कार्यालयीन दिवसों में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, बाजार चौक, गोगांव स्थित खेल परिसर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। निर्धारित तिथि तक आवेदन जमा करना अनिवार्य होगा। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।</p>
<p>चयन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण 7 जुलाई को आयोजित होने वाली शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से खेल परिसर में आयोजित की जाएगी। इसमें अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता, दौड़, फुर्ती, संतुलन, सहनशक्ति और खेल प्रतिभा का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी। विभाग का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का चयन करना है, जिनमें भविष्य में उत्कृष्ट खिलाड़ी बनने की क्षमता हो।</p>
<p>शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों को आवश्यक दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपनी पिछली कक्षा की अंकसूची, वैध जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाते की छायाप्रति, दो पासपोर्ट आकार के रंगीन फोटो और स्पोर्ट्स किट साथ लानी होगी। स्पोर्ट्स किट में टी-शर्ट, निकर तथा खेल जूते पहनकर आना अनिवार्य किया गया है ताकि परीक्षा निष्पक्ष और सुविधाजनक ढंग से आयोजित की जा सके।</p>
<p>चयनित विद्यार्थियों को शासन की ओर से कई महत्वपूर्ण सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें छात्रावास में आवास, पौष्टिक भोजन, नाश्ता, स्कूल गणवेश, ट्रैकसूट, खेल जूते, मोजे, छात्रवृत्ति और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। इसके अलावा विद्यार्थियों को नियमित खेल प्रशिक्षण, फिटनेस कार्यक्रम और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन भी मिलेगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के खेल परिसर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए बड़े अवसर साबित हो रहे हैं। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बेहतर प्रशिक्षण नहीं ले पाते, लेकिन सरकारी खेल परिसरों के माध्यम से उन्हें आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाती है। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर मंच मिलता है।</p>
<p>खेल परिसर में विद्यार्थियों की पढ़ाई और खेल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नियमित शैक्षणिक कक्षाओं के साथ-साथ सुबह और शाम खेल प्रशिक्षण कराया जाता है। प्रशिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी कौशल और मानसिक मजबूती पर भी लगातार काम किया जाता है। इससे छात्र भविष्य में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो पाते हैं।</p>
<p>राज्य सरकार लगातार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। खेल परिसरों के माध्यम से खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गोगांव खेल परिसर में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया भी इसी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर खेल वातावरण उपलब्ध कराना है।</p>
<p>खेल विभाग ने पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से समय रहते आवेदन करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थी सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय पर आवेदन जमा करें और शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होकर इस अवसर का लाभ उठाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड: 45 सूत्रीय एजेंडे पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभागवार समीक्षा बैठकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, निवेश, पर्यटन, कृषि, हवाई सेवाओं और प्रशासनिक सुधार सहित 45 बिंदुओं पर मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-seek-answers-from-ministers-on-45-point/article-57747"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद सरकार की प्राथमिकताओं और विभागीय कार्यों की व्यापक समीक्षा करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इसके लिए 45 सूत्रीय एजेंडा तैयार कर सभी विभागों को भेज दिया है। समीक्षा बैठकों में मंत्रियों के साथ अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। प्रत्येक विभाग से अब तक हुए कार्यों का लेखा-जोखा लिया जाएगा और अगले ढाई वर्षों के लिए कार्ययोजना भी तय की जाएगी। पहले इन बैठकों का आयोजन 8 मई से प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। अब नई तारीख जल्द जारी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि आगामी वर्षों के लिए विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करना भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री सभी विभागों के कार्यों की अलग-अलग समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विभाग से योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित परियोजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति मांगी जाएगी। समीक्षा के दौरान समय-सीमा में काम पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान पर विशेष जोर रहेगा। सरकार चाहती है कि विकास योजनाओं का लाभ तय समय में लोगों तक पहुंचे और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो। इसी उद्देश्य से सभी विभागों के लिए अलग-अलग एजेंडा तैयार किया गया है। राजस्व एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में स्वामित्व योजना प्रमुख विषय रहेगा। मुख्यमंत्री ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर निशुल्क रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री के माध्यम से 50 लाख पट्टों के सिंगल क्लिक वितरण और नई आबादी भूमि के चिन्हांकन की प्रगति की समीक्षा करेंगे। ग्राम पंचायतों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को तेज करने और ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद कम करना और संपत्ति के अधिकारों को स्पष्ट करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की समीक्षा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव प्रस्तावित है। सरकार राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव समीक्षा बैठक में प्रमुख विषय रहेगा। इसी तरह मेडिकल यूनिवर्सिटी को भी तीन भागों में विभाजित करने की योजना पर चर्चा होगी। सरकार सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का दोपहर की पाली में महाविद्यालयों, कोचिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर भी रिपोर्ट लेगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन लाने की नीति पर भी विचार किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था, सीवेज प्रबंधन और नई फायर सेफ्टी नीति समीक्षा बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। सरकार शहरी निकायों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के साथ अग्निशमन सेवाओं की एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग से प्रदेश में कैंसर अस्पतालों के विस्तार की कार्ययोजना मांगी जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। सरकार जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की तैयारियां अभी से शुरू कर रही है। औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग को निवेश आकर्षित करने के लिए नई रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल में आईटी नॉलेज सिटी और उज्जैन में डीप टेक पार्क विकसित करने की योजना पर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उद्योगों में निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियों पर भी चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को उभरते हुए औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। पर्यटन विभाग की समीक्षा में राम वन पथ गमन और कृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति प्रमुख विषय होगी। मुख्यमंत्री इन परियोजनाओं की समय-सीमा तय करने और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर विभाग से रिपोर्ट लेंगे। विमानन विभाग को उज्जैन के दताना-मताना क्षेत्र में नए हवाई अड्डे के निर्माण, भूमि अधिग्रहण और पीपीपी मॉडल पर परियोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रदेश के छोटे शहरों में हवाई सेवाओं के विस्तार और एयर कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। समीक्षा बैठकों में वित्त विभाग से लाड़ली बहना और किसान सम्मान जैसी डीबीटी योजनाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने का मॉडल मांगा जाएगा। कृषि विभाग के साथ मंडी शुल्क में और राहत देने तथा किसानों के लिए बिजली सब्सिडी आधारित सिंचाई योजनाओं पर चर्चा होगी। सरकार अग्निवीर योजना से जुड़े युवाओं को राज्य की सरकारी भर्तियों में आरक्षण देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। गृह विभाग से लंबे समय से लंबित पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन और प्रमुख मंदिरों में होमगार्ड पदों के सृजन की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा जेलों और मंडियों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करने, सार्वजनिक भूमि के पुनर्विकास, बीएचईएल भोपाल की भूमि उपयोग रणनीति, यूनियन कार्बाइड की जमीन के उपयोग, सार्वजनिक पार्कों में पीपीपी मॉडल पर खेल और मनोरंजन सुविधाएं विकसित करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय समीक्षा केवल प्रगति रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि अगले ढाई वर्षों के विकास रोडमैप को अंतिम रूप देने का आधार भी बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, निवेश, पर्यटन, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों पर लिए जाने वाले फैसले राज्य की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्कूलों में मंत्रोच्चार पर याचिका खारिज, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सबूत के साथ दोबारा आने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने फिलहाल हस्तक्षेप से इनकार किया, कहा- आदेश लागू होने के ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/chhattisgarh-high-court-rejects-petition-on-chanting-in-schools-asks/article-57670"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने संबंधी राज्य शासन के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका फिलहाल खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसे कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि संबंधित आदेश का वास्तव में स्कूलों में पालन शुरू हो चुका है। ऐसे में न्यायालय ने इस स्तर पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि भविष्य में आदेश के अमल से जुड़े ठोस प्रमाण सामने आते हैं तो याचिकाकर्ता नई याचिका दाखिल कर सकते हैं। इस फैसले के बाद फिलहाल इस मुद्दे पर कानूनी राहत नहीं मिली है, लेकिन अदालत ने भविष्य के लिए कानूनी रास्ता खुला रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने का प्रावधान बताया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह आदेश संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि इस आदेश को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. अमीर खान ने पक्ष रखा और कहा कि इस आदेश से संविधान के मूल प्रावधान प्रभावित होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सबसे पहले इस बात पर जोर दिया कि अदालत किसी भी प्रशासनिक आदेश में तभी हस्तक्षेप करती है, जब उसके लागू होने या उससे प्रभावित होने के स्पष्ट और ठोस प्रमाण उपलब्ध हों। अदालत ने कहा कि मौजूदा याचिका में ऐसे दस्तावेज, वीडियो या अन्य सामग्री प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह साबित हो सके कि राज्य सरकार का आदेश वास्तव में स्कूलों में लागू किया जा चुका है। केवल आशंका या संभावना के आधार पर न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। इसी कारण अदालत ने फिलहाल याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता डॉ. अमीर खान के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल में इस आदेश का पालन कराए जाने के प्रमाण सामने आते हैं, तो याचिकाकर्ता उन साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर रखकर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वीडियो, फोटो, आधिकारिक दस्तावेज या अन्य विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध होती है, तो उसके आधार पर नई याचिका पर विचार किया जा सकता है। इस टिप्पणी को मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने कानूनी चुनौती का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस फैसले के बाद फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर कोई न्यायिक रोक नहीं लगी है। हालांकि अदालत ने आदेश की वैधता पर कोई अंतिम टिप्पणी भी नहीं की है। न्यायालय का पूरा फोकस इस बात पर रहा कि याचिका में प्रस्तुत तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने इस मामले में प्रक्रिया संबंधी सिद्धांतों का पालन करते हुए फैसला दिया है। किसी भी नीति या प्रशासनिक आदेश को चुनौती देने के लिए उसके प्रभाव या क्रियान्वयन के पर्याप्त प्रमाण होना आवश्यक माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है। एक पक्ष का मानना है कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम स्कूलों में कराए जा सकते हैं, जबकि दूसरा पक्ष इसे संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के संदर्भ में देख रहा है। हालांकि इन सभी मुद्दों पर हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की और केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर केवल याचिका की स्वीकार्यता पर विचार कर रही थी, न कि आदेश की संवैधानिक वैधता पर। भविष्य में यदि किसी स्कूल में आदेश के पालन के प्रमाण सामने आते हैं और उसके आधार पर नई याचिका दायर होती है, तो अदालत उस समय मामले के संवैधानिक पहलुओं पर भी विस्तार से विचार कर सकती है। फिलहाल इस फैसले से यह संदेश गया है कि न्यायालय केवल अनुमान या आशंका के आधार पर हस्तक्षेप नहीं करेगा, बल्कि ठोस तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता देगा। यही वजह है कि याचिकाकर्ता को दोबारा याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:22:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में प्रोफेसर पर छात्रा से अश्लील हरकत का आरोप, थप्पड़ मारने का VIDEO वायरल; शिकायत के बाद हुआ समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[युवती ने प्रोफेसर पर अश्लील संदेश और संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया, हंगामे के बाद मामला समझौते तक पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-video-of-professor-slapping-student-accused-of-obscene/article-57673"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raigarh-human-trafficking1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा जगत और समाज दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लैलूंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लंबे समय से उसे अश्लील संदेश भेज रहा था और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। आरोपों से परेशान होकर युवती अपने मंगेतर के साथ प्रोफेसर के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच विवाद हुआ और युवती ने गुस्से में प्रोफेसर को थप्पड़ मार दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर रेमन भार्गव लैलूंगा के शासकीय महाविद्यालय कुंजारा में पदस्थ हैं। युवती का कहना है कि वह प्रोफेसर की पड़ोसी है और पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उसने आरोप लगाया कि प्रोफेसर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अश्लील संदेश भेजता था और कई बार संबंध बनाने का दबाव भी डाल चुका था। कई बार समझाने और मना करने के बावजूद उसकी हरकतें बंद नहीं हुईं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती के मुताबिक उसकी जल्द ही शादी होने वाली है। ऐसे में वह लगातार मिल रही आपत्तिजनक गतिविधियों से बेहद परेशान थी। उसने बताया कि प्रोफेसर की हरकतों के कारण उसकी निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित हो रही थीं। जब हालात असहनीय हो गए तो उसने परिवार और अपने मंगेतर को पूरी जानकारी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद युवती अपने मंगेतर के साथ आरोपी प्रोफेसर के घर पहुंची। वहां पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद बढ़ने पर युवती ने प्रोफेसर का कॉलर पकड़ लिया और उसे थप्पड़ मार दिए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में युवती काफी नाराज दिखाई देती है। वह प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहती है कि उसकी शादी होने वाली है और वह उसकी जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश कर रहा है। वीडियो में प्रोफेसर की पत्नी भी दिखाई देती हैं, जो विवाद शांत कराने और माफी मांगने की कोशिश करती नजर आती हैं। मौके पर मौजूद कुछ अन्य युवतियां भी दिखाई देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती ने आरोप लगाया कि वह अकेली पीड़ित नहीं है। उसके अनुसार प्रोफेसर ने पहले भी कई अन्य लड़कियों को परेशान किया है। उसने अपील की कि यदि कोई और युवती भी ऐसी प्रताड़ना का शिकार हुई है तो वह सामने आए और न्याय की लड़ाई में उसका साथ दे। युवती का कहना है कि यदि उसे उचित न्याय नहीं मिला तो वह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद युवती ने लैलूंगा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। इसके चलते पुलिस ने आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती द्वारा शिकायत दी गई थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया। समझौते के बाद शिकायतकर्ता ने आगे कार्रवाई नहीं चाही, इसलिए मामला वहीं समाप्त कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं शासकीय महाविद्यालय कुंजारा के प्राचार्य एमएल पटेल ने कहा कि यह घटना कॉलेज परिसर की नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों का निजी मामला है। उन्होंने बताया कि कॉलेज प्रशासन को पहले इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली थी। यदि संस्थान को आधिकारिक शिकायत मिलती तो नियमानुसार उच्च अधिकारियों को जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई की जाती।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग युवती के साहस की सराहना कर रहे हैं, जबकि कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि आरोप इतने गंभीर थे तो कानूनी कार्रवाई तक मामला क्यों नहीं पहुंचा। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।  किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अश्लील संदेश या मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस तरह की हरकतें करता है तो पीड़ित को कानूनी सहायता लेने और संबंधित अधिकारियों को समय रहते सूचना देने की जरूरत होती है। वहीं आरोपित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विभाजन के विस्थापित शरणार्थी नहीं, संघर्ष के योद्धा थे: मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[आरएसएस प्रमुख ने कहा कि 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों ने मातृभूमि और अपने धर्म के सम्मान के लिए सबकुछ छोड़कर संघर्ष का रास्ता चुना था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mohan-bhagwat-was-not-a-displaced-refugee-of-partition-but/article-57659"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-bhagwat.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 1947 के भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को शरणार्थी कहना उचित नहीं है, क्योंकि उन्होंने मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति आस्था के कारण सब कुछ छोड़कर भारत आने का निर्णय लिया था। भागवत ने ऐसे लोगों को "संघर्ष के योद्धा" बताते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास और भारतीय संस्कृति को नहीं छोड़ा। उनके इस बयान के बाद विभाजन और उससे जुड़े इतिहास पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। मोहन भागवत बुधवार को नागपुर में सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभाजन की त्रासदी का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने पाकिस्तान में अपनी पीढ़ियों से बसाए घर, जमीन, कारोबार और संपत्ति छोड़कर भारत आने का फैसला किया, उन्होंने यह कदम पूरी समझ और विश्वास के साथ उठाया था। उनका उद्देश्य केवल सुरक्षित जीवन नहीं था, बल्कि ऐसे देश में रहना था जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म और परंपराओं का पालन कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत ने कहा कि विभाजन के समय लाखों परिवारों ने भारी कष्ट झेले। उन्हें अपना सब कुछ छोड़ना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने भारत को ही अपनी अंतिम मंजिल बनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को शरणार्थी कहना उनके संघर्ष और बलिदान के साथ न्याय नहीं करता। उनके अनुसार वे वास्तव में संघर्ष के योद्धा थे, जिन्होंने मातृभूमि के प्रति प्रेम और अपने धार्मिक विश्वास की रक्षा के लिए कठिन रास्ता चुना। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि विभाजन केवल जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन पर गहरा असर डालने वाली ऐतिहासिक घटना थी। उस समय अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, वर्षों की मेहनत से बनाई संपत्ति पीछे छोड़नी पड़ी और नई जगह पर जीवन की शुरुआत करनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नए सिरे से अपने जीवन का निर्माण किया। भागवत ने कहा कि यही संघर्ष उन्हें विशेष बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि उस समय इन लोगों ने जो लड़ाई हारी, वह पूरी तरह उनकी अपनी गलती नहीं थी। परिस्थितियां ऐसी थीं कि उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। लेकिन उन्होंने विपरीत हालात में भी साहस नहीं खोया और भारत आकर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। अपने भाषण में मोहन भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं होना चाहिए। अगर शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित रह जाएगी तो समाज का समग्र विकास संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के भीतर संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करे, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रखें। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को अच्छा नागरिक बनाए, समाज के प्रति संवेदनशील बनाए और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करे। उनके अनुसार समाज का भविष्य केवल तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण से मजबूत होगा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि इतिहास से सीख लेना जरूरी है। विभाजन जैसी घटनाएं केवल किताबों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनसे समाज को यह समझ मिलती है कि एकता, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में उन लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाना चाहिए जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।</p>
<p style="text-align:justify;">भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विभाजन को लेकर समय-समय पर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार 1947 का विभाजन आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था। उस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस विभाजन ने करोड़ों परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। विभाजन के बाद भारत आने वाले लोगों ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नई परिस्थितियों में खुद को स्थापित किया और व्यापार, शिक्षा, उद्योग तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। कई शहरों के विकास में भी इन परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिंधु एजुकेशन सोसाइटी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी भागवत के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर चर्चा करना था, लेकिन विभाजन पर उनके विचार सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गए। आरएसएस प्रमुख ने अंत में कहा कि समाज को उन लोगों के संघर्ष को सम्मान देना चाहिए जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद देश और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था बनाए रखी। उन्होंने युवाओं से इतिहास को समझने, उससे प्रेरणा लेने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से संभव होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुरु पूर्णिमा 2026: 5 जुलाई, रविवार को मनाया जाएगा गुरु श्रद्धा और ज्ञान का महापर्व</title>
                                    <description><![CDATA[5 जुलाई 2026, रविवार को देशभर में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पूजन, दान, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/festival-festival/guru-purnima-2026-the-great-festival-of-guru-shraddha-and/article-57455"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guru-purnima-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसी गुरु परंपरा को सम्मान देने के लिए हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों, आश्रमों, मठों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना, सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लाखों श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचेंगे और ज्ञान, सेवा तथा संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। प्रसिद्ध श्लोक <em>"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"</em> गुरु की महिमा का वर्णन करता है। मान्यता है कि गुरु ही वह शक्ति हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के बिना जीवन अधूरा माना जाता है, क्योंकि सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति को सफलता, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की और अठारह पुराणों का संपादन किया। भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित स्वरूप देने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। इसलिए इस दिन उन्हें आदिगुरु के रूप में भी याद किया जाता है और श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनसे जीवन में आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में गुरु सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर के प्रमुख आश्रमों और आध्यात्मिक केंद्रों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर पूजा की तैयारी करते हैं। भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का पूजन किया जाता है। फूल, फल, दीपक, धूप और प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक सामग्री का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा पर किया गया दान और सेवा विशेष पुण्य प्रदान करता है। बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने इसी दिन सारनाथ में अपने प्रथम पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है। इसलिए बौद्ध अनुयायी इस दिन ध्यान, प्रार्थना और धर्म उपदेश के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जैन धर्म में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आचार्यों और साधु-संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक समय में गुरु पूर्णिमा का स्वरूप कुछ बदला जरूर है, लेकिन इसकी भावना आज भी वैसी ही बनी हुई है। आज लोग अपने गुरु, शिक्षक और मार्गदर्शक को सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और डिजिटल माध्यमों से भी शुभकामनाएं भेजते हैं। कई धार्मिक संस्थाएं ऑनलाइन प्रवचन और लाइव सत्संग का आयोजन करती हैं, जिनमें देश-विदेश से श्रद्धालु जुड़ते हैं। इससे यह पर्व नई पीढ़ी तक भी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सीखने का अवसर भी है। यह पर्व हमें विनम्रता, अनुशासन, सेवा और ज्ञान का महत्व समझाता है। गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा मानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा के दिन कई लोग नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं। आध्यात्मिक साधना, योग, ध्यान और धार्मिक अध्ययन प्रारंभ करने के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। कई आश्रमों में नए शिष्यों को दीक्षा दी जाती है और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत कराई जाती है। इस दिन किए गए संकल्पों को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर पीले वस्त्र पहनना, भगवान विष्णु की पूजा करना, केले के पेड़ की पूजा करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही अपने गुरु या शिक्षकों का सम्मान करना और उनका आशीर्वाद लेना भी इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 जुलाई 2026, रविवार को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा एक बार फिर पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का संदेश लेकर आएगी। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन भी उतना ही आवश्यक है। गुरु का सम्मान, उनके प्रति कृतज्ञता और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ही इस पर्व की वास्तविक भावना है। भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही गुरु-शिष्य परंपरा आज भी समाज को संस्कार, नैतिकता और ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है और गुरु पूर्णिमा इसी अमूल्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र हर महीने कैसे बचाएं पैसे? अपनाएं ये आसान तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी बचत की आदतें छात्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती हैं। सही बजट, समझदारी से खर्च और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके हर महीने अच्छी रकम बचाई जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/how-to-save-money-every-month-for-college-and-university/article-57243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/student-money-saving.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पढ़ाई शुरू होते ही अधिकांश छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मासिक खर्च को संभालने की होती है। कई छात्रों को परिवार से तय पॉकेट मनी मिलती है, जबकि कुछ छात्र पार्ट-टाइम नौकरी या फ्रीलांस काम करके अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में महीने के आखिर तक पैसे बचाना आसान नहीं होता। अक्सर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में जरूरत से ज्यादा खर्च हो जाता है और बाद में जरूरी चीजों के लिए भी पैसों की कमी महसूस होने लगती है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर छात्र शुरुआत से ही पैसे बचाने की आदत विकसित कर लें तो आगे चलकर उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत हो सकती है। सबसे पहला कदम मासिक बजट बनाना है। छात्र को सबसे पहले यह लिखना चाहिए कि हर महीने कितनी रकम मिलती है और किन-किन चीजों पर खर्च होती है। जैसे हॉस्टल या किराया, खाना, यात्रा, मोबाइल रिचार्ज, इंटरनेट, पढ़ाई का सामान और मनोरंजन। जब पूरा खर्च कागज या मोबाइल ऐप में दर्ज होता है तो यह समझना आसान हो जाता है कि कहां अनावश्यक खर्च हो रहा है। बजट बनाने से महीने के बीच में आर्थिक परेशानी की संभावना भी कम हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पॉकेट मनी या आय का कम से कम 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा शुरुआत में ही अलग रख देना चाहिए। इसे पहले खर्च करने के बजाय बचत के रूप में रखना बेहतर माना जाता है। कई छात्र महीने के अंत में बचा हुआ पैसा जमा करने की सोचते हैं, लेकिन अक्सर तब तक कुछ भी नहीं बचता। इसलिए पहले बचत और बाद में खर्च करने की आदत अधिक प्रभावी मानी जाती है। बाहर का खाना छात्रों के सबसे बड़े खर्चों में शामिल होता है। रोजाना कैफे, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन फूड डिलीवरी से ऑर्डर करने पर महीने का बजट तेजी से बढ़ जाता है। अगर सप्ताह में कुछ दिन घर या हॉस्टल का खाना खाया जाए और बाहर खाने की संख्या सीमित रखी जाए तो अच्छी-खासी बचत हो सकती है। साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऑनलाइन शॉपिंग भी छात्रों के खर्च बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। कई बार डिस्काउंट और ऑफर के नाम पर ऐसी चीजें खरीद ली जाती हैं जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती। खरीदारी करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि वस्तु जरूरत की है या केवल इच्छा के कारण खरीदी जा रही है। 24 घंटे का नियम अपनाना भी फायदेमंद हो सकता है। यदि किसी सामान की जरूरत अगले दिन भी महसूस हो, तभी उसे खरीदें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कॉलेज जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या दोस्तों के साथ साझा यात्रा का विकल्प चुनने से भी हर महीने खर्च कम किया जा सकता है। यदि कॉलेज पास में है तो पैदल चलना न केवल पैसे बचाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। छोटी दूरी के लिए बार-बार कैब बुक करना बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। छात्रों को स्टूडेंट डिस्काउंट का पूरा लाभ उठाना चाहिए। कई कंपनियां, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, किताबों की दुकानें, सॉफ्टवेयर सेवाएं और यात्रा सेवाएं छात्रों को विशेष छूट देती हैं। पहचान पत्र दिखाकर या स्टूडेंट ऑफर का उपयोग करके हर महीने अच्छी बचत की जा सकती है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिक्षा से जुड़े कोर्स भी छात्रों को कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाते हैं। पढ़ाई के दौरान अतिरिक्त आय का स्रोत बनाना भी बचत में मदद कर सकता है। आज कई छात्र फ्रीलांस लेखन, ग्राफिक डिजाइन, ऑनलाइन ट्यूशन, कंटेंट क्रिएशन, वीडियो एडिटिंग या पार्ट-टाइम जॉब के जरिए अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। इस आय का कुछ हिस्सा बचत में जमा करने से भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा बन सकती है। हालांकि पढ़ाई और काम के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोबाइल रिचार्ज, ओटीटी सब्सक्रिप्शन और अन्य डिजिटल सेवाओं पर भी नजर रखना चाहिए। कई बार छात्र ऐसी सदस्यताओं का भुगतान करते रहते हैं जिनका वे नियमित उपयोग नहीं करते। जरूरत न होने पर इन्हें बंद करने से भी मासिक खर्च कम किया जा सकता है। परिवार या दोस्तों के साथ वैध फैमिली प्लान का उपयोग करने से भी लागत घटाई जा सकती है। आपातकालीन फंड बनाना भी छात्रों के लिए जरूरी माना जाता है। हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम अलग रखने से अचानक आने वाले खर्च, जैसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या, यात्रा या पढ़ाई से जुड़े जरूरी खर्च आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। इससे किसी से उधार लेने की जरूरत भी कम पड़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बचत केवल पैसे जमा करने का नाम नहीं है, बल्कि समझदारी से खर्च करने की आदत भी है। यदि छात्र शुरुआत से ही आय और खर्च का सही संतुलन बनाना सीख लें तो आगे चलकर नौकरी या व्यवसाय शुरू करने के बाद भी यह आदत उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी राशि में बदल सकती है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र बिना अपनी पढ़ाई या सामान्य जीवनशैली पर असर डाले भी हर महीने अच्छी बचत कर सकते हैं। इसके लिए केवल खर्चों पर नजर रखना, जरूरत और इच्छा में अंतर समझना, बजट बनाना और नियमित बचत की आदत विकसित करना जरूरी है। आर्थिक अनुशासन भविष्य की वित्तीय मजबूती की पहली सीढ़ी माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 00:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>35 साल तक पैदल पहुंचीं 545 गांव, समाज सेवा के लिए मिली पद्मश्री</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर की डॉ. बुधरी ताती ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए समर्पित किया जीवन, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/reached-545-villages-on-foot-for-35-years-received-padmashree/article-56924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/budhri-tati.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से निकलकर देशभर में अपनी पहचान बनाने वाली समाज सेविका डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में 35 वर्षों तक लगातार समाज सेवा करने वाली बुधरी ताती का यह सफर संघर्ष, समर्पण और सेवा की मिसाल माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय आदिवासी समाज के उत्थान, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित किया। यही कारण है कि आज बस्तर के सैकड़ों गांवों में लोग उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं और प्यार से 'बुआ' तथा 'बड़ी दीदी' कहकर बुलाते हैं। राष्ट्रपति भवन में जब डॉ. बुधरी ताती ने पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया तो उनकी सादगी और पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आधुनिक परिधानों की जगह उन्होंने अपनी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाला पारंपरिक पहनावा चुना। यह केवल एक वेशभूषा नहीं थी, बल्कि अपनी जड़ों, पहचान और आदिवासी संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश भी था। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉ. बुधरी ताती ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। यह क्षण उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. बुधरी ताती की समाज सेवा की यात्रा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। करीब 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने तय कर लिया था कि उनका जीवन समाज के लिए समर्पित होगा। वर्ष 1984-85 के दौरान गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से प्रेरित होकर उन्होंने सेवा का मार्ग चुना। इसके बाद उन्होंने नागपुर स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे रायपुर होते हुए वापस बस्तर लौटीं और समाज सेवा की शुरुआत की। उस दौर में आदिवासी इलाकों में महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी आसान नहीं था। सामाजिक बंदिशें, अशिक्षा और अंधविश्वास गहराई तक फैले हुए थे। ऐसे माहौल में एक युवा महिला का गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना किसी चुनौती से कम नहीं था। बीते 35 वर्षों में डॉ. बुधरी ताती ने 545 से अधिक गांवों तक पैदल पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझा और समाधान की दिशा में काम किया। कई ऐसे गांव भी थे जहां सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। कठिन रास्तों, जंगलों और पहाड़ी इलाकों को पार करते हुए उन्होंने लोगों तक पहुंच बनाई। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। सिलाई, कढ़ाई, हस्तशिल्प और छोटे स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से 500 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में योगदान दिया। उनका मानना रहा कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, तभी परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने दूरस्थ गांवों में जाकर लोगों को स्वच्छता, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूक किया। कई गांवों में उन्होंने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए परिवारों को प्रेरित किया। शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाए गए। इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी अपने मिशन का हिस्सा बनाया। गांवों में पौधरोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। समाज में व्याप्त नशाखोरी के खिलाफ भी डॉ. बुधरी ताती ने लंबे समय तक अभियान चलाया। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को शराब और अन्य नशे के दुष्प्रभावों के बारे में समझाया। उनके प्रयासों का असर कई इलाकों में देखने को मिला, जहां लोगों ने नशे की आदत छोड़कर नया जीवन शुरू किया। समाज सुधार के इस कार्य में उन्हें कई बार विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनकी संघर्षगाथा केवल सामाजिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रही। डॉ. बुधरी ताती ने बताया कि एक बार अबूझमाड़ क्षेत्र के एक गांव में काम के दौरान उनकी जान पर बन आई थी। ग्रामीणों के विरोध के बीच उन्हें धारदार हथियारों के साथ दौड़ाया गया। हालात बेहद गंभीर थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनका कहना है कि यदि वे उस समय डरकर पीछे हट जातीं तो शायद कई गांव आज भी विकास और जागरूकता से दूर होते। यही साहस और दृढ़ता उन्हें अन्य समाज सेवकों से अलग पहचान दिलाती है। समाज सेवा को उन्होंने केवल एक कार्य नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य माना। इसी कारण उन्होंने विवाह नहीं करने का निर्णय लिया और अपना पूरा जीवन समाज के नाम कर दिया। आज भी वे बेसहारा बुजुर्गों, गरीब परिवारों और अनाथ बच्चों के लिए काम कर रही हैं। दंतेवाड़ा के हिरानार में उन्होंने एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जहां जरूरतमंद बुजुर्गों को आश्रय और सम्मान मिल रहा है। साथ ही वे आदिवासी बच्चों की शिक्षा और भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। पद्मश्री सम्मान उनके जीवन का 23वां सम्मान है। इससे पहले उन्हें 22 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी शामिल हैं। हालांकि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान लोगों का विश्वास और प्यार है। बस्तर के गांवों में आज भी लोग उन्हें अपने परिवार की तरह मानते हैं। पद्मश्री सम्मान ने न केवल उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि समर्पण, सेवा और समाज के प्रति सच्ची निष्ठा किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:48 +0530</pubDate>
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