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                <title>Folk Art - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पद्म विभूषण तीजन बाई नहीं रहीं, पंडवानी की अमर आवाज हमेशा गूंजती रहेगी</title>
                                    <description><![CDATA[70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में ली अंतिम सांस, महाभारत की लोकगाथाओं को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोक कलाकार के निधन से कला जगत में शोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/padma-vibhushan-tijan-bai-is-no-more-pandwanis-immortal-voice/article-57904"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/teejan-bai-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली देश की महान लोक कलाकार, पद्म विभूषण तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। 70 वर्षीय तीजन बाई ने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रात करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं और उनका इलाज जारी था। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला, संस्कृति और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देशभर के कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी प्रिय लोक कलाकार को नम आंखों से विदाई दी। यहीं पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नाना से मिली महाभारत सुनाने की प्रेरणा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव लोककला और महाभारत की कथाओं की ओर था। उनके नाना उन्हें महाभारत की कहानियां सुनाया करते थे। इन्हीं कथाओं ने उनके मन में पंडवानी गायन के प्रति गहरी रुचि पैदा की। उन्होंने बचपन में ही इन कथाओं को याद करना शुरू कर दिया और बाद में अपनी विशिष्ट शैली में मंच पर प्रस्तुत करने लगीं।</p>
<p style="text-align:justify;">महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी का गायन किया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को केवल गांवों और मेलों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे केवल गाती नहीं थीं, बल्कि महाभारत के पात्रों को अपने अभिनय, भाव-भंगिमा और आवाज के उतार-चढ़ाव से जीवंत कर देती थीं। दर्शक स्वयं को महाभारत के घटनाक्रम का हिस्सा महसूस करने लगते थे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>संघर्षों से भरा रहा जीवन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आज भले ही तीजन बाई को विश्वस्तरीय कलाकार के रूप में जाना जाता हो, लेकिन उनकी यात्रा आसान नहीं रही। सामाजिक परंपराओं और रूढ़ियों के कारण शुरुआती दौर में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय महिलाओं का पंडवानी की 'कापालिक शैली' में मंच पर प्रस्तुति देना सामान्य नहीं माना जाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने तमाम विरोधों और सामाजिक चुनौतियों का डटकर सामना किया। अपनी प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों की महिला कलाकारों के लिए भी नए रास्ते खोले।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें समय-समय पर कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि सम्मान और अनेक सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया गया। उनके सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं थे, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का गौरव भी बने।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की लोककला को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।</p>
<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपने जीवन को लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया। पंडवानी के माध्यम से उन्होंने राज्य का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, मेहनत और प्रतिभा के बल पर कोई भी कलाकार वैश्विक पहचान हासिल कर सकता है। उन्होंने न केवल लोककला को जीवित रखा, बल्कि उसे आधुनिक मंचों तक भी पहुंचाया। आज देश-विदेश के अनेक युवा कलाकार उनकी शैली से प्रेरणा लेकर पंडवानी और लोककला के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी आवाज, अभिनय और महाभारत के पात्रों को जीवंत करने की कला हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगी। उनका योगदान भारतीय लोक संस्कृति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारतीय लोक परंपरा के एक युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक लोककला को समर्पित किए और पंडवानी को विश्व मंच पर स्थापित किया। उनके जाने से जो रिक्तता बनी है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। हालांकि उनकी प्रस्तुतियां, उनके गीत और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी। भारतीय लोक संगीत और पंडवानी की दुनिया में उनका नाम सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंडवानी गायिका तीजन बाई की तबीयत बिगड़ी, रायपुर एम्स में भर्ती, हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार MICU में भर्ती, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही इलाज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/pandwani-singer-teejan-bais-health-deteriorated-condition-critical-admitted-in/article-54403"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/teejan-bai.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित लोक कलाकार तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और फिलहाल उनका इलाज मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट यानी MICU में चल रहा है। तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर कला जगत, साहित्य जगत और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। देशभर से लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तीजन बाई को रायपुर एम्स के ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत MICU में शिफ्ट कर दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डी. के. सिंह ने बताया कि जनरल मेडिसिन विभाग के साथ पल्मोनरी मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ भी इलाज में शामिल हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल सूत्रों के अनुसार डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि डॉक्टरों ने अभी स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया है। एम्स परिसर में उनके परिजनों और करीबी लोगों की आवाजाही बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में लोक कला की एक बड़ी पहचान मानी जाती हैं। उन्होंने पंडवानी गायन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया और भारतीय लोक परंपरा को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाई। उनकी तबीयत खराब होने की खबर सामने आते ही सोशल media पर भी लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। कई कलाकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने चिंता व्यक्त की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन अटारी गांव में हुआ था। बताया जाता है कि जिस दिन उनका जन्म हुआ था उस दिन तीज पर्व था, इसलिए उनका नाम तीजन रखा गया। बेहद साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने लोक कला की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज देश ही नहीं दुनिया भी जानती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने पंडवानी शैली में महाभारत की कथाओं को अपने अनोखे अंदाज में प्रस्तुत कर लोक गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मंच पर उनका प्रस्तुतीकरण, आवाज का उतार-चढ़ाव और अभिनय शैली दर्शकों को बांधे रखती थी। यही वजह रही कि उन्होंने गांवों की चौपालों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी खास पहचान बनाई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साल 1980 के दशक में तीजन बाई ने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कई देशों की यात्राएं कीं। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैंड, तुर्किये और माल्टा सहित कई देशों में उन्होंने भारतीय लोक कला का प्रदर्शन किया। विदेशी मंचों पर पंडवानी को मिली सराहना ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उनके कार्यक्रमों को भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की मजबूत अभिव्यक्ति माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। इसके बाद संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साल 2019 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा भी उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीजन बाई ने केवल कला को आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि लोक कलाकारों की नई पीढ़ी को भी प्रेरित किया। उनके संघर्ष और उपलब्धियों को कई युवा कलाकार मिसाल के तौर पर देखते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर तक पहुंचने की उनकी यात्रा आज भी लोगों को प्रेरित करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में तीजन बाई को राज्य की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। उनकी आवाज और पंडवानी शैली ने प्रदेश की लोक परंपरा को नई ऊर्जा दी। राज्य के कई हिस्सों में लोग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना वाले संदेश साझा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने भी चिंता जताई है। कई लोगों ने कहा कि तीजन बाई केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति की जीवित विरासत हैं। ऐसे में उनका स्वस्थ रहना पूरे कला जगत के लिए जरूरी है। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है और जरूरत के अनुसार सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर और जानकारी सामने आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:34 +0530</pubDate>
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