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                <title>लालू परिवार की सुरक्षा पर सियासी घमासान, तेजस्वी ने भी लौटाई सिक्योरिटी</title>
                                    <description><![CDATA[Z+ हटने के बाद बिहार में बढ़ा राजनीतिक तनाव, रोहिणी का सरकार पर हमला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-turmoil-over-security-of-lalu-family-tejashwi-also-returned/article-55131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/lalu-yadav-security.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p>बिहार की राजनीति एक बार फिर लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में आ गई है। राज्य सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा में बदलाव किए जाने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। इसी क्रम में अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ सुरक्षा सरकार को वापस लौटा दी है, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। यह पूरा मामला अब सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p> तेजस्वी यादव इस समय दिल्ली में हैं, लेकिन उन्होंने 1 पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का निर्देश दिया। इससे पहले उनके माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपने आवासों से सुरक्षा कर्मियों को हटाने का फैसला लिया था। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद यह कदम सामने आया है। हालांकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा पूरी तरह हटाई नहीं गई है, बल्कि उसे नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।</p>
<p>सरकारी आदेश के मुताबिक, राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम 2010 के तहत सुरक्षा दी जा रही है, जिसमें हाउस गार्ड, महिला और पुरुष अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन और एस्कॉर्ट वाहन शामिल हैं। वहीं लालू प्रसाद यादव को भी संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के तहत हाउस गार्ड और अंगरक्षक प्रदान किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह बदलाव सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है, न कि किसी राजनीतिक कारण से।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवर में कटौती के बाद दिखावे की सुरक्षा रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। रोहिणी ने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से लिया गया है और इसे परिवार को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लालू-राबड़ी परिवार की असली सुरक्षा बिहार की जनता है।</p>
<p>रोहिणी आचार्य के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है और इसे अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सुरक्षा में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, बल्कि यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण राज्य और जिला स्तरीय समितियों द्वारा किया जाता है, और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू और राबड़ी देवी को सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं मिलती रहेंगी।</p>
<p>इस बीच लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी द्वारा अपने आवासों से सुरक्षाकर्मियों को हटाने का कदम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने सरकारी आदेश के बाद अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को तुरंत वापस भेज दिया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी परिसर के बाहर खड़े नजर आए।</p>
<p>यह पूरा मामला अब केवल सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नीयत पर सवाल उठाने का मौका बता रहा है, जबकि सरकार इसे नियमों के अनुसार लिया गया निर्णय बता रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और बिहार की राजनीति में नया टकराव पैदा कर सकता है। स्थिति यह है कि लालू परिवार और सरकार के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खींचतान जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। </p>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, नॉर्वे चेस 2026 खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने</title>
                                    <description><![CDATA[20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने फाइनल राउंड में विन्सेंट कीमर को हराया, वर्ल्ड नंबर-1 कार्लसन को दो बार दी मात, कुल 18 अंकों से जीता खिताब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/praggnananda-creates-history-becomes-first-indian-to-win-norway-chess/article-55130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/praggnanandhaa-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। 20 वर्षीय इस खिलाड़ी ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन थोड़ा धीमा रहा, लेकिन अंतिम चरणों में शानदार वापसी करते हुए उन्होंने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी। कुल 18 अंकों के साथ प्रज्ञानानंदा ने यह खिताब अपने नाम किया और दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में लगातार शीर्ष खिलाड़ियों को पछाड़ना आसान नहीं माना जाता, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने यह कर दिखाया। टूर्नामेंट के अंतिम दिन तक वह 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थे, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में क्लासिकल जीत हासिल कर उन्होंने 3 अतिरिक्त अंक जुटाए और कुल 18 अंकों के साथ बढ़त बना ली। इसी के साथ उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया। इस टूर्नामेंट में अमेरिका के वेस्ली सो और फ्रांस के अलीरजा फिरोजा जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन अंतिम दौर में समीकरण पूरी तरह बदल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक पहलू यह रहा कि आखिरी राउंड तक खिताब की दौड़ बेहद करीबी थी। वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर थे, लेकिन उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और बाद में आर्मागेडन टाईब्रेकर में उन्हें अतिरिक्त अंक मिले, जो प्रज्ञानानंदा से पीछे रह गए। इस टाईब्रेकर सिस्टम ने पूरे टूर्नामेंट को और अधिक रोमांचक बना दिया, जहां हर गेम का परिणाम सीधे खिताब पर असर डाल रहा था। इसी वजह से अंतिम परिणाम तक अनिश्चितता बनी रही और अंत में भारतीय खिलाड़ी ने बाजी मार ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत को और खास बनाता है उनका वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ प्रदर्शन। प्रज्ञानानंदा ने इस टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। कार्लसन न केवल दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी हैं, बल्कि नॉर्वे चेस के सात बार के चैंपियन भी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें एक ही टूर्नामेंट में दो बार हराना शतरंज इतिहास में दुर्लभ उपलब्धियों में से एक है। इससे पहले यह उपलब्धि भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने हासिल की थी, जब उन्होंने 2007 में लिनारेस टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो बार हराया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय शतरंज के इतिहास में यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले न तो विश्वनाथन आनंद और न ही मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीत सके थे। 2013 में शुरू हुए नॉर्वे चेस में पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने खिताब अपने नाम किया है। प्रज्ञानानंदा दूसरी बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे और इस बार उन्होंने अपनी रणनीति और धैर्य से सबको प्रभावित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला वर्ग में भी रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, जहां कजाकिस्तान की बिबिसारा आसाउबायेवा ने 16.5 अंकों के साथ खिताब जीता। चीन की झू जिनर दूसरे स्थान पर रहीं जबकि यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक तीसरे स्थान पर रहीं। भारत की दिव्या देशमुख पांचवें और अनुभवी खिलाड़ी कोनेरु हम्पी छठे स्थान पर रहीं। महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद कड़े रहे और हर दौर में स्थिति बदलती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस टूर्नामेंट को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक शतरंज आयोजनों में गिना जाता है। इसमें क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज जैसे फॉर्मेट शामिल होते हैं, और यदि क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो परिणाम आर्मागेडन सिस्टम से तय किया जाता है। इस फॉर्मेट में हर खिलाड़ी को अलग-अलग समय नियंत्रण मिलता है और अंतिम नतीजा सुनिश्चित करने के लिए यह सडन-डेथ जैसा सिस्टम अपनाया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्लासिकल शतरंज में खिलाड़ियों को लंबा समय मिलता है और रणनीतिक खेल पर अधिक जोर होता है, जबकि रैपिड और ब्लिट्ज में तेजी से फैसले लेने की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है। यही विविधता इस टूर्नामेंट को खास बनाती है। इस बार का संस्करण 25 मई से 5 जून 2026 तक नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया गया था और इसमें केवल सीमित खिलाड़ियों को ही भाग लेने का अवसर मिला। प्रज्ञानानंदा की इस जीत ने भारतीय शतरंज को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के शतरंज इतिहास में भी एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। युवा खिलाड़ी की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को भी दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:43:10 +0530</pubDate>
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                <title>नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा का कमाल, कार्लसन को हराकर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय ग्रैंडमास्टर ने दुनिया के नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में दी मात, गुकेश लगातार दूसरे दौर में हारे जबकि दिव्या देशमुख ने महिला वर्ग में शानदार जीत दर्ज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/praggnanandhas-feat-creates-history-by-defeating-carlsen-in-norway-chess/article-54417"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/norway-chess-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>नॉर्वे चेस 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। बुधवार को टूर्नामेंट में सबसे बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और सात बार के चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हरा दिया। इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने न केवल तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल किए, बल्कि टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी मजबूत स्थिति बना ली। दूसरी ओर मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को लगातार दूसरे दौर में हार का सामना करना पड़ा। महिला वर्ग में भारत की दिव्या देशमुख ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए बिबिसारा असाउबायेवा को हराकर दूसरा स्थान हासिल कर लिया।</p>
<p>नॉर्वे चेस के इस मुकाबले पर दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों की नजर थी, क्योंकि कार्लसन अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे थे। शुरुआत से ही मुकाबला बेहद संतुलित नजर आया। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआती चालों में काफी सतर्कता दिखाई, लेकिन मध्य खेल में प्रज्ञानानंदा ने बेहतरीन रणनीति के जरिए कार्लसन पर दबाव बनाना शुरू किया। समय कम होने के दौरान मैच और ज्यादा रोमांचक हो गया। आखिरकार भारतीय खिलाड़ी ने शानदार धैर्य दिखाते हुए कार्लसन को मात दे दी।</p>
<p>यह पहली बार नहीं है जब प्रज्ञानानंदा ने कार्लसन को क्लासिकल फॉर्मेट में हराया हो। इससे पहले भी वह नॉर्वे चेस 2024 में कार्लसन को पराजित कर चुके हैं। लगातार दूसरी बार दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी को हराना भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर के आत्मविश्वास और तेजी से बढ़ते स्तर को दिखाता है। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि मुकाबला बेहद करीबी था और टाइम स्क्रैम्बल में नतीजा किसी भी दिशा में जा सकता था। उन्होंने माना कि कार्लसन जैसे खिलाड़ी के खिलाफ हर चाल पर दबाव महसूस होता है, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा।</p>
<p>इस जीत के बाद प्रज्ञानानंदा 4.5 अंक के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं मैग्नस कार्लसन इस हार के बाद छह खिलाड़ियों की तालिका में सबसे नीचे चले गए हैं। कार्लसन के लिए यह टूर्नामेंट अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। लगातार खराब नतीजों ने उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि अभी टूर्नामेंट में कई मुकाबले बाकी हैं।</p>
<p>दूसरी तरफ भारतीय विश्व चैंपियन डी गुकेश की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनका मुकाबला लगभग पांच घंटे तक चला। क्लासिकल गेम ड्रॉ रहा, लेकिन आर्मगेडन टाईब्रेकर में फिरोजा ने बाजी मार ली। इस हार के बाद गुकेश की टूर्नामेंट में लगातार दूसरी हार दर्ज हुई। युवा भारतीय खिलाड़ी इस समय 3.5 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं।</p>
<p>फिरोजा इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चोटिल होने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। मुकाबले के बाद वह व्हीलचेयर और मून बूट में दिखाई दिए, लेकिन इसका असर उनके खेल पर नहीं पड़ा। लगातार जीत के दम पर उन्होंने 7.5 अंक के साथ टूर्नामेंट में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है। गुकेश के लिए आने वाला दौर और भी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि अगले मुकाबले में उनका सामना मैग्नस कार्लसन से होगा। शतरंज प्रशंसकों की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है।</p>
<p>महिला वर्ग में भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने टूर्नामेंट लीडर बिबिसारा असाउबायेवा को आर्मगेडन में हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह दिव्या की लगातार तीसरी टाईब्रेकर जीत रही। इस जीत के बाद वह 4.5 अंक लेकर दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिव्या का आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल कर रही है। वहीं भारत की अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को अन्ना मुजिचुक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। हम्पी फिलहाल दो अंक के साथ तालिका में आखिरी स्थान पर हैं। हालांकि टूर्नामेंट अभी बाकी है और उनके पास वापसी का मौका रहेगा।</p>
<p>नॉर्वे चेस टूर्नामेंट का यह सीजन भारतीय खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रज्ञानानंदा, गुकेश और दिव्या जैसे युवा खिलाड़ी लगातार दुनिया के बड़े नामों को चुनौती दे रहे हैं। खास तौर पर प्रज्ञानानंदा की जीत ने भारतीय शतरंज जगत में नई ऊर्जा भर दी है। कम उम्र में जिस तरह उन्होंने कार्लसन जैसे दिग्गज को दो बार हराया है, उससे उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है।</p>
<p>टूर्नामेंट में आर्मगेडन फॉर्मेट भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। शतरंज में आर्मगेडन एक सडन-डेथ टाईब्रेकर होता है, जिसमें ड्रॉ की कोई संभावना नहीं रहती। क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ होने पर परिणाम निकालने के लिए यह फॉर्मेट अपनाया जाता है। इस प्रारूप में खिलाड़ियों पर समय का अतिरिक्त दबाव रहता है और छोटी गलती भी हार का कारण बन सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित किया है कि विश्व शतरंज में भारत की नई पीढ़ी तेजी से अपनी जगह बना रही है। आने वाले मुकाबलों में भी सभी की नजर प्रज्ञानानंदा और गुकेश पर बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:25:57 +0530</pubDate>
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