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                <title>Indian Sports - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत 7 साल बाद बना साउथ एशियन महिला फुटबॉल चैंपियन, बांग्लादेश को हराकर जीता रिकॉर्ड छठा खिताब</title>
                                    <description><![CDATA[फाइनल में 3-1 से दर्ज की शानदार जीत, पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही भारतीय टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/india-becomes-south-asian-womens-football-champion-after-7-years/article-55206"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-women-football-team.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय महिला फुटबॉल टीम ने सात साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर साउथ एशियन फुटबॉल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। शनिवार रात गोवा के मडगांव स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने मौजूदा चैंपियन बांग्लादेश को 3-1 से हराकर रिकॉर्ड छठी बार यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती। मैच खत्म होते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और भारतीय खिलाड़ियों के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों ने मैदान पर एक-दूसरे को गले लगाकर जीत का उत्सव मनाया, जबकि टीम प्रबंधन और सपोर्ट स्टाफ के चेहरे पर भी संतोष साफ दिखाई दे रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए कई मायनों में खास मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने लगातार सुधार दिखाया है और इस टूर्नामेंट में उसका प्रदर्शन शुरुआत से ही दमदार रहा। फाइनल मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। खास बात यह रही कि भारत पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहा और किसी भी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">फाइनल मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने सावधानी के साथ की। शुरुआती मिनटों में बांग्लादेश ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मैच के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। भारत लगातार आक्रमण कर रहा था और आखिरकार 42वें मिनट में उसे सफलता मिली। भारतीय खिलाड़ी प्यारी जाख्सा ने शानदार गोल दागते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद भारतीय खेमे में उत्साह बढ़ गया, लेकिन बांग्लादेश ने हार नहीं मानी।</p>
<p class="isSelectedEnd">पहले हाफ के इंजरी टाइम में बांग्लादेश की रितु पोर्ना चकमा ने बेहतरीन मौका भुनाते हुए गोल कर दिया और स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल के साथ पहला हाफ समाप्त हुआ। हाफ टाइम तक मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण दोनों टीमों पर दबाव बना हुआ था और दूसरे हाफ में मुकाबला और रोमांचक होने की उम्मीद बढ़ गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरे हाफ की शुरुआत भारत के लिए शानदार रही। खेल शुरू होने के कुछ ही समय बाद सनफिदा नोंगरुम ने एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल ने भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी और मैच का रुख भारतीय टीम की ओर मोड़ दिया। बढ़त मिलने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और बांग्लादेश को ज्यादा अवसर नहीं दिए। मिडफील्ड और डिफेंस दोनों विभागों ने शानदार तालमेल दिखाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बांग्लादेश की टीम बराबरी की कोशिश करती रही, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 82वें मिनट में बांग्लादेशी डिफेंस की एक गलती भारतीय टीम के लिए बड़ा मौका बन गई। लिंडा कोम सेर्तो ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए तीसरा गोल कर दिया। इस गोल के साथ भारत की जीत लगभग तय हो गई। अंतिम मिनटों में बांग्लादेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय टीम ने कोई मौका नहीं दिया और 3-1 की यादगार जीत दर्ज कर ली।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। टीम ने अपने सभी चार मुकाबले जीते और कुल 18 गोल किए। सबसे खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में भारत ने केवल एक गोल खाया। यह आंकड़ा टीम के मजबूत डिफेंस और गोलकीपिंग का प्रमाण माना जा रहा है। दूसरी ओर बांग्लादेश की लगातार तीसरी बार खिताब जीतने की उम्मीद भी इस हार के साथ समाप्त हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">फाइनल मुकाबले के बाद भारतीय खेमे में खुशी के साथ भावुक पल भी देखने को मिला। अनुभवी खिलाड़ी डांगमेई ग्रेस ने इसी मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने वर्ष 2013 में भारतीय टीम के लिए पदार्पण किया था और करीब एक दशक से अधिक समय तक देश का प्रतिनिधित्व किया। 95 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने वाली ग्रेस ने अपने करियर का अंत एक और साउथ एशियन चैंपियनशिप खिताब के साथ किया, जो उनके लिए यादगार विदाई साबित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कारों में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। अवेका सिंह चार गोल के साथ प्रतियोगिता की शीर्ष स्कोरर रहीं। वहीं सनफिदा नोंगरुम को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर चुना गया। भारतीय गोलकीपर पंथोई चानू एलांगबाम को बेस्ट गोलकीपर का पुरस्कार मिला। नेपाल की टीम को फेयर प्ले अवॉर्ड प्रदान किया गया। यह खिताबी जीत भारतीय महिला फुटबॉल के लिए एक बड़ा संदेश भी है। पिछले कुछ वर्षों में महिला फुटबॉल को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है और युवा खिलाड़ियों का रुझान भी इस खेल की ओर बढ़ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>लालू परिवार की सुरक्षा पर सियासी घमासान, तेजस्वी ने भी लौटाई सिक्योरिटी</title>
                                    <description><![CDATA[Z+ हटने के बाद बिहार में बढ़ा राजनीतिक तनाव, रोहिणी का सरकार पर हमला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-turmoil-over-security-of-lalu-family-tejashwi-also-returned/article-55131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/lalu-yadav-security.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p>बिहार की राजनीति एक बार फिर लालू प्रसाद यादव परिवार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा में आ गई है। राज्य सरकार द्वारा लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा में बदलाव किए जाने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। इसी क्रम में अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी Y+ सुरक्षा सरकार को वापस लौटा दी है, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है। यह पूरा मामला अब सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p> तेजस्वी यादव इस समय दिल्ली में हैं, लेकिन उन्होंने 1 पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का निर्देश दिया। इससे पहले उनके माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने भी अपने आवासों से सुरक्षा कर्मियों को हटाने का फैसला लिया था। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा Z+ सुरक्षा हटाए जाने के बाद यह कदम सामने आया है। हालांकि सरकार का कहना है कि सुरक्षा पूरी तरह हटाई नहीं गई है, बल्कि उसे नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।</p>
<p>सरकारी आदेश के मुताबिक, राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस अधिनियम 2010 के तहत सुरक्षा दी जा रही है, जिसमें हाउस गार्ड, महिला और पुरुष अंगरक्षक, बुलेटप्रूफ वाहन और एस्कॉर्ट वाहन शामिल हैं। वहीं लालू प्रसाद यादव को भी संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के तहत हाउस गार्ड और अंगरक्षक प्रदान किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह बदलाव सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन के आधार पर किया गया है, न कि किसी राजनीतिक कारण से।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवर में कटौती के बाद दिखावे की सुरक्षा रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। रोहिणी ने आरोप लगाया कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से लिया गया है और इसे परिवार को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लालू-राबड़ी परिवार की असली सुरक्षा बिहार की जनता है।</p>
<p>रोहिणी आचार्य के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान होता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनके इस बयान को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है और इसे अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सुरक्षा में किसी तरह की कटौती नहीं की गई है, बल्कि यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण राज्य और जिला स्तरीय समितियों द्वारा किया जाता है, और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू और राबड़ी देवी को सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं मिलती रहेंगी।</p>
<p>इस बीच लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी द्वारा अपने आवासों से सुरक्षाकर्मियों को हटाने का कदम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने सरकारी आदेश के बाद अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को तुरंत वापस भेज दिया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी परिसर के बाहर खड़े नजर आए।</p>
<p>यह पूरा मामला अब केवल सुरक्षा व्यवस्था का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष इसे सरकार की नीयत पर सवाल उठाने का मौका बता रहा है, जबकि सरकार इसे नियमों के अनुसार लिया गया निर्णय बता रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और बिहार की राजनीति में नया टकराव पैदा कर सकता है। स्थिति यह है कि लालू परिवार और सरकार के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खींचतान जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। </p>
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:43:19 +0530</pubDate>
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                <title>प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, नॉर्वे चेस 2026 खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने</title>
                                    <description><![CDATA[20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने फाइनल राउंड में विन्सेंट कीमर को हराया, वर्ल्ड नंबर-1 कार्लसन को दो बार दी मात, कुल 18 अंकों से जीता खिताब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/praggnananda-creates-history-becomes-first-indian-to-win-norway-chess/article-55130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/praggnanandhaa-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। 20 वर्षीय इस खिलाड़ी ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। शुरुआती दौर में उनका प्रदर्शन थोड़ा धीमा रहा, लेकिन अंतिम चरणों में शानदार वापसी करते हुए उन्होंने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी। कुल 18 अंकों के साथ प्रज्ञानानंदा ने यह खिताब अपने नाम किया और दुनिया भर के शतरंज प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में लगातार शीर्ष खिलाड़ियों को पछाड़ना आसान नहीं माना जाता, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने यह कर दिखाया। टूर्नामेंट के अंतिम दिन तक वह 15 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थे, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में क्लासिकल जीत हासिल कर उन्होंने 3 अतिरिक्त अंक जुटाए और कुल 18 अंकों के साथ बढ़त बना ली। इसी के साथ उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया। इस टूर्नामेंट में अमेरिका के वेस्ली सो और फ्रांस के अलीरजा फिरोजा जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी मजबूत दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन अंतिम दौर में समीकरण पूरी तरह बदल गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक पहलू यह रहा कि आखिरी राउंड तक खिताब की दौड़ बेहद करीबी थी। वेस्ली सो 15.5 अंकों के साथ शीर्ष पर थे, लेकिन उनका मुकाबला ड्रॉ रहा और बाद में आर्मागेडन टाईब्रेकर में उन्हें अतिरिक्त अंक मिले, जो प्रज्ञानानंदा से पीछे रह गए। इस टाईब्रेकर सिस्टम ने पूरे टूर्नामेंट को और अधिक रोमांचक बना दिया, जहां हर गेम का परिणाम सीधे खिताब पर असर डाल रहा था। इसी वजह से अंतिम परिणाम तक अनिश्चितता बनी रही और अंत में भारतीय खिलाड़ी ने बाजी मार ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत को और खास बनाता है उनका वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन के खिलाफ प्रदर्शन। प्रज्ञानानंदा ने इस टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार क्लासिकल मुकाबलों में हराया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। कार्लसन न केवल दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी हैं, बल्कि नॉर्वे चेस के सात बार के चैंपियन भी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें एक ही टूर्नामेंट में दो बार हराना शतरंज इतिहास में दुर्लभ उपलब्धियों में से एक है। इससे पहले यह उपलब्धि भारतीय दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने हासिल की थी, जब उन्होंने 2007 में लिनारेस टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो बार हराया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय शतरंज के इतिहास में यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले न तो विश्वनाथन आनंद और न ही मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीत सके थे। 2013 में शुरू हुए नॉर्वे चेस में पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने खिताब अपने नाम किया है। प्रज्ञानानंदा दूसरी बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे और इस बार उन्होंने अपनी रणनीति और धैर्य से सबको प्रभावित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला वर्ग में भी रोमांचक मुकाबला देखने को मिला, जहां कजाकिस्तान की बिबिसारा आसाउबायेवा ने 16.5 अंकों के साथ खिताब जीता। चीन की झू जिनर दूसरे स्थान पर रहीं जबकि यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक तीसरे स्थान पर रहीं। भारत की दिव्या देशमुख पांचवें और अनुभवी खिलाड़ी कोनेरु हम्पी छठे स्थान पर रहीं। महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद कड़े रहे और हर दौर में स्थिति बदलती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस टूर्नामेंट को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और रोमांचक शतरंज आयोजनों में गिना जाता है। इसमें क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज जैसे फॉर्मेट शामिल होते हैं, और यदि क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो परिणाम आर्मागेडन सिस्टम से तय किया जाता है। इस फॉर्मेट में हर खिलाड़ी को अलग-अलग समय नियंत्रण मिलता है और अंतिम नतीजा सुनिश्चित करने के लिए यह सडन-डेथ जैसा सिस्टम अपनाया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्लासिकल शतरंज में खिलाड़ियों को लंबा समय मिलता है और रणनीतिक खेल पर अधिक जोर होता है, जबकि रैपिड और ब्लिट्ज में तेजी से फैसले लेने की क्षमता महत्वपूर्ण हो जाती है। यही विविधता इस टूर्नामेंट को खास बनाती है। इस बार का संस्करण 25 मई से 5 जून 2026 तक नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया गया था और इसमें केवल सीमित खिलाड़ियों को ही भाग लेने का अवसर मिला। प्रज्ञानानंदा की इस जीत ने भारतीय शतरंज को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के शतरंज इतिहास में भी एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। युवा खिलाड़ी की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत को भी दर्शाती है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:43:10 +0530</pubDate>
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                <title>प्रज्ञानानंदा ने फिर किया कमाल, दुनिया के नंबर-1 कार्लसन को दूसरी बार हराया</title>
                                    <description><![CDATA[नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने सात दिनों के भीतर दूसरी बार मैग्नस कार्लसन को मात देकर इतिहास रच दिया, विश्वनाथन आनंद के बाद ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय बने।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/6a1ff2ff5dd58/article-54871"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/praggnanandhaa.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय शतरंज जगत के युवा सितारे आर. प्रज्ञानानंदा ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नॉर्वे चेस 2026 के आठवें राउंड में उन्होंने विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी और पांच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। यह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कार्लसन के खिलाफ उनकी दूसरी जीत है, जिसने शतरंज जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। सिर्फ 20 वर्ष की उम्र में प्रज्ञानानंदा ने जिस आत्मविश्वास और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया है, वह भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश करता है। खास बात यह है कि उन्होंने सात दिनों के भीतर दूसरी बार कार्लसन को हराया है। इससे पहले 28 मई को उन्होंने सफेद मोहरों से खेलते हुए नॉर्वे के दिग्गज खिलाड़ी को मात दी थी। अब काले मोहरों से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी क्षमता का और भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैग्नस कार्लसन को लगातार दो बार हराना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। कार्लसन पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व शतरंज पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं और उन्हें आधुनिक युग के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। ऐसे खिलाड़ी को एक ही टूर्नामेंट में दो बार हराना बेहद दुर्लभ उपलब्धि है। प्रज्ञानानंदा इस उपलब्धि को हासिल करने वाले भारत के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारतीय शतरंज के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने वर्ष 2007 में लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार पराजित किया था। लगभग दो दशक बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने यह कारनामा दोहराया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंदा का प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपने खेल में आक्रामकता और धैर्य का शानदार संतुलन दिखाया है। कार्लसन के खिलाफ मुकाबले में भी उन्होंने शुरुआत से ही स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा। मैच के दौरान कई जटिल परिस्थितियां सामने आईं, लेकिन भारतीय ग्रैंडमास्टर ने अपने अनुभव और तैयारी के दम पर बढ़त हासिल कर ली। प्रज्ञानानंदा की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती है। बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते समय अक्सर युवा खिलाड़ी दबाव में आ जाते हैं, लेकिन प्रज्ञानानंदा ने बार-बार साबित किया है कि वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के बाद टूर्नामेंट की अंक तालिका में भी रोमांच बढ़ गया है। प्रज्ञानानंदा अब 12 अंकों के साथ शीर्ष खिलाड़ियों की दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। हालांकि टूर्नामेंट का नेतृत्व अभी अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो कर रहे हैं, जिनके 14 अंक हैं। आठवें दौर में एक और महत्वपूर्ण मुकाबले में फ्रांस के अलीरजा फिरोजा ने मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराकर बड़ा उलटफेर किया। फिरोजा ने समय के दबाव में शानदार एंडगेम खेलते हुए जीत दर्ज की। इस जीत के बाद उनके 13 अंक हो गए और वे खिताब की दौड़ में बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर वेस्ली सो और विंसेंट केमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद खेले गए अर्मागेडन मुकाबले में वेस्ली सो ने जीत हासिल कर अतिरिक्त अंक अर्जित किए। यही कारण है कि वे अभी भी अंक तालिका में सबसे आगे हैं। नॉर्वे चेस टूर्नामेंट की खास पहचान उसका अनूठा अर्मागेडन फॉर्मेट है। यदि क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ हो जाता है तो विजेता तय करने के लिए अर्मागेडन गेम खेला जाता है। इस फॉर्मेट में सफेद मोहरों वाले खिलाड़ी को अधिक समय मिलता है, लेकिन जीतना अनिवार्य होता है। यदि मुकाबला ड्रॉ होता है तो काले मोहरों वाला खिलाड़ी विजेता घोषित किया जाता है। इस प्रणाली से हर दौर में स्पष्ट परिणाम निकलता है और दर्शकों का रोमांच बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में रहा। हालांकि युवा भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अनुभवी कोनेरू हम्पी ने अर्मागेडन मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। महिला वर्ग में कजाकिस्तान की बिबिसारा असाउबायेवा फिलहाल शीर्ष स्थान पर बनी हुई हैं। प्रज्ञानानंदा की उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि भारतीय शतरंज के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक भी है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई युवा ग्रैंडमास्टर्स तैयार किए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। डी गुकेश के विश्व चैंपियन बनने के बाद अब प्रज्ञानानंदा की सफलता ने भारत को शतरंज की नई महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है आने वाले वर्षों में प्रज्ञानानंदा विश्व चैंपियनशिप के प्रमुख दावेदार बन सकते हैं। उनकी तकनीकी समझ, रणनीतिक सोच और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नॉर्वे चेस 2026 में मैग्नस कार्लसन पर दर्ज यह दूसरी जीत प्रज्ञानानंदा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाएगी। इस प्रदर्शन ने यह संदेश भी दिया है कि भारतीय युवा खिलाड़ी अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व शतरंज के सबसे बड़े मंचों पर जीत हासिल करने की क्षमता रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:03:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट से विनेश फोगाट को राहत, एशियन गेम्स ट्रायल में लेंगी हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[WFI की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, दिल्ली में ट्रायल देंगी विनेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-court-gives-strict-instructions-to-the-high-court-to/article-54494"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/vinesh-phogat-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी WFI की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में विनेश की भागीदारी रोकने की मांग की गई थी। इसके बाद अब विनेश 30 और 31 मई को दिल्ली में होने वाले ट्रायल में हिस्सा ले सकेंगी। इन ट्रायल्स के जरिए सितंबर में जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खेल जगत में इस मामले को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने WFI की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी विनेश फोगाट को राहत दे चुका था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जाए। इसके लिए ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) तथा भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी भी सुनिश्चित करने को कहा गया था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दरअसल पूरा विवाद विनेश फोगाट की कुश्ती में वापसी को लेकर शुरू हुआ था। पेरिस ओलिंपिक 2024 में डिसक्वालीफाई होने के बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था। उस समय देशभर में उनके समर्थन में माहौल बना था। विनेश ने 50 किलो वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था, लेकिन फाइनल से पहले वजन जांच में उनका वजन निर्धारित सीमा से 100 ग्राम ज्यादा पाया गया। इसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस घटना के बाद उन्होंने भावुक पोस्ट करते हुए संन्यास की घोषणा की थी।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">हालांकि बाद में दिसंबर 2025 में उन्होंने अपने फैसले को वापस ले लिया। विनेश ने कहा था कि वह 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में देश के लिए फिर से मेडल जीतना चाहती हैं। इसके बाद उन्होंने दोबारा ट्रेनिंग शुरू की और प्रतियोगिताओं में वापसी की तैयारी में जुट गईं। लेकिन इसी दौरान WFI ने उन्हें घरेलू प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">रेसलिंग फेडरेशन का कहना था कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ी को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत छह महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है। WFI ने आरोप लगाया कि विनेश ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की और नियमों का उल्लंघन किया। फेडरेशन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। साथ ही यह भी कहा गया कि उनके व्यवहार से भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इसी फैसले के खिलाफ विनेश फोगाट ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने WFI की चयन नीति और नोटिस को चुनौती दी थी। पहले सिंगल बेंच से उन्हें राहत नहीं मिली, लेकिन बाद में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद WFI सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी फेडरेशन की याचिका खारिज कर दी है।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">विनेश फोगाट पिछले कुछ वर्षों में सिर्फ अपने खेल की वजह से ही नहीं, बल्कि कई विवादों और आंदोलनों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। जनवरी 2023 में उन्होंने साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था। उस दौरान तत्कालीन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। विनेश ने सार्वजनिक रूप से रोते हुए कहा था कि महिला खिलाड़ियों के साथ गलत व्यवहार होता है और खिलाड़ियों की आवाज नहीं सुनी जाती।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि वह खुद भी उन महिला खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कुश्ती संघ में खिलाड़ियों के चयन और रेफरी नियुक्ति तक में पक्षपात होता है। उनके इन आरोपों के बाद देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि बृजभूषण शरण सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि यदि आरोप साबित हो जाएं तो वह फांसी पर लटकने को तैयार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सुमित अंतिल ने फिर रचा इतिहास, अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में 74.82 मीटर दूर भाला फेंककर पैरा जैवलिन स्टार ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड, दो बार पैरालंपिक गोल्ड जीत चुके सुमित ने फिर बढ़ाया भारत का गौरव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/sumit-antil-again-created-history-and-broke-his-own-world/article-54419"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sumit-antil.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय पैरा एथलेटिक्स के स्टार खिलाड़ी सुमित अंतिल ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत और प्रतिभा का एहसास कराया है। बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित 8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुमित ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो F64 स्पर्धा में 74.82 मीटर दूर भाला फेंककर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। यह उपलब्धि उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में हासिल की और इसके साथ ही भारतीय पैरा खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया।</p>
<p>स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने जैसे ही भाला 74 मीटर के पार जाते देखा, तालियों और उत्साह से पूरा माहौल गूंज उठा। सुमित के चेहरे पर भी संतोष साफ दिखाई दे रहा था। लंबे समय से वह अपने रिकॉर्ड को और बेहतर करने की कोशिश कर रहे थे। आखिरकार बेंगलुरु में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने दुनिया के सामने फिर साबित कर दिया कि वह पैरा जैवलिन में लगातार नई ऊंचाइयां छू रहे हैं।</p>
<p>इससे पहले सुमित ने 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में 73.29 मीटर का थ्रो कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। अब उन्होंने अपने ही उस प्रदर्शन को 1.53 मीटर बेहतर कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। लगातार रिकॉर्ड तोड़ने की उनकी क्षमता उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक पैरा जैवलिन खिलाड़ियों में शामिल करती है।</p>
<p>रिकॉर्ड बनाने के बाद सुमित ने कहा कि वह लंबे समय से सोच रहे थे कि आखिर नया विश्व रिकॉर्ड क्यों नहीं बन पा रहा। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में उनका लक्ष्य सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। सुमित ने कहा, “मुझे खुशी है कि मैंने अपने पुराने रिकॉर्ड को बेहतर किया। उम्मीद है कि आने वाले पैरा एशियन गेम्स में मैं इससे भी शानदार प्रदर्शन कर सकूंगा।”</p>
<p>हरियाणा के सोनीपत से आने वाले सुमित अंतिल की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल मानी जाती है। उन्होंने अपने करियर में अब तक सात बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है। पहली बार उन्होंने जून 2019 में इटली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 60.45 मीटर का थ्रो कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने सिल्वर मेडल भी अपने नाम किया था।</p>
<p>इसके बाद नवंबर 2019 में दुबई में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 62.88 मीटर का थ्रो कर फिर नया रिकॉर्ड बनाया। मार्च 2021 में बेंगलुरु में हुई नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 66.90 मीटर दूर भाला फेंका और दुनिया को चौंका दिया।</p>
<p>हालांकि सुमित को सबसे ज्यादा पहचान टोक्यो पैरालंपिक 2021 में मिली। उस प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने एक ही मुकाबले में तीन बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया। पहले 66.95 मीटर, फिर 68.08 मीटर और आखिर में 68.55 मीटर का थ्रो कर उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनका यह प्रदर्शन भारतीय पैरा खेल इतिहास के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है।</p>
<p>इसके बाद भी उनका शानदार सफर नहीं रुका। जुलाई 2023 में पेरिस में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने पहली बार 70 मीटर का आंकड़ा पार किया और 70.83 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। उसी साल एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने 73.29 मीटर का थ्रो कर एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। अब बेंगलुरु में 74.82 मीटर का नया रिकॉर्ड उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।</p>
<p>सुमित अंतिल की सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और मजबूत मानसिकता का बड़ा योगदान माना जाता है। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि ओलिंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त उनके आदर्श हैं। इसके अलावा भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा से भी उन्हें काफी प्रेरणा मिली है। सुमित मानते हैं कि नीरज की उपलब्धियों ने देश में जैवलिन को नई पहचान दी और युवा खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ाया।</p>
<p>उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने भी उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा है। साल 2021 में उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार दिया गया, जबकि 2022 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सुमित भारत के सबसे बड़े पैरा स्पोर्ट्स आइकन बन सकते हैं।</p>
<p>पैरा जैवलिन स्पर्धा में F64 वर्ग के खिलाड़ी वे होते हैं जिनका पैर घुटने के नीचे से कटा होता है। ये खिलाड़ी कार्बन फाइबर से बने कृत्रिम पैर का उपयोग करते हैं। उसी की मदद से वे दौड़ते हैं और फिर पूरी ताकत से भाला फेंकते हैं। इस खेल में संतुलन, गति और तकनीक बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में 74.82 मीटर का थ्रो करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है।</p>
<p>भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए यह रिकॉर्ड बेहद खास माना जा रहा है। इससे आने वाले पैरा एशियन गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ेगा। सुमित अंतिल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई सीमा मायने नहीं रखती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:25:49 +0530</pubDate>
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