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                <title>SDRF - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ग्वालियर के तिघरा डैम में डूबे दो MBBS छात्र, एक का शव मिला, दूसरे की तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पिकनिक मनाने गए मेडिकल छात्रों के ग्रुप में मातम, प्रतिबंधित क्षेत्र में नहाने के दौरान हुआ हादसा; SDRF की टीम लगातार चला रही सर्च ऑपरेशन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/two-mbbs-students-drowned-in-tighra-dam-gwalior-body-of/article-55898"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-tigra-dam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्वालियर के तिघरा डैम में शनिवार शाम हुआ एक दर्दनाक हादसा पूरे मेडिकल कॉलेज और छात्र समुदाय को झकझोर गया। गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) के MBBS सेकेंड ईयर के दो छात्र डैम के गहरे पानी में डूब गए। देर रात तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक छात्र का शव बरामद कर लिया गया, जबकि दूसरे छात्र की तलाश रविवार को भी जारी रही। बताया जा रहा है कि दोनों छात्र अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने डैम पहुंचे थे, जहां अचानक यह हादसा हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना शनिवार शाम करीब 7 बजे तिघरा डैम के कच्ची पार इलाके में हुई। यह क्षेत्र सामान्य लोगों के लिए प्रतिबंधित माना जाता है और यहां आवाजाही की अनुमति नहीं है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गजराराजा मेडिकल कॉलेज के आठ छात्र-छात्राओं का एक समूह घूमने के लिए यहां पहुंचा था। समूह में चार छात्र और चार छात्राएं शामिल थीं। सभी लोग डैम के बोट क्लब क्षेत्र से करीब तीन किलोमीटर दूर कच्ची पार इलाके तक चले गए थे। इसी दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी आयुष श्रीवास्तव और सागर जिले के बीना निवासी गोपाल अग्रवाल पानी के किनारे पहुंचे और नहाने के लिए नीचे उतर गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों छात्र पानी में आगे बढ़ते हुए अचानक गहरे हिस्से में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि फिसलन और असंतुलन के कारण उनका पैर फिसल गया और वे देखते ही देखते गहराई में समा गए। उस समय उनके अन्य साथी ऊपर मौजूद थे और उन्हें हादसे की जानकारी तब हुई जब काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे। दोस्तों ने आसपास तलाश शुरू की तो किनारे पर दोनों छात्रों के कपड़े और जूते सलीके से रखे मिले। इसके बाद सभी को अनहोनी की आशंका हुई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही तिघरा थाना पुलिस, स्थानीय प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंची। रात होते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। डैम की गहराई, कीचड़ और पथरीले हिस्सों के कारण खोज अभियान में काफी मुश्किलें सामने आईं। इसके बावजूद स्थानीय गोताखोरों और SDRF जवानों ने हाई-पावर लाइट और बोट की मदद से रातभर सर्चिंग जारी रखी। कई घंटों की मशक्कत के बाद गोपाल अग्रवाल का शव बरामद कर लिया गया, लेकिन आयुष श्रीवास्तव का अब तक कोई पता नहीं चल सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रविवार सुबह एक बार फिर बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों के अनुसार डैम के जिस हिस्से में दोनों छात्र डूबे हैं, वहां पानी की गहराई 40 से 50 फीट तक बताई जा रही है। साथ ही नीचे चट्टानें और कीचड़ होने के कारण गोताखोरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि लापता छात्र का जल्द पता लगाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही दोनों छात्रों के परिजनों को भी जानकारी दे दी गई थी। रविवार सुबह गोपाल अग्रवाल के परिवार के सदस्य ग्वालियर पहुंच गए। वहीं आयुष श्रीवास्तव के परिजन बिहार से ग्वालियर के लिए रवाना हो चुके हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में भी इस हादसे की खबर फैलते ही शोक का माहौल बन गया। छात्र और शिक्षक दोनों ही इस घटना से स्तब्ध नजर आए। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे कॉलेज परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। कॉलेज प्रशासन लगातार प्रभावित परिवारों के संपर्क में बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मृतक छात्र गोपाल अग्रवाल के परिजनों ने बताया कि वह परिवार का सबसे छोटा सदस्य था और सभी का बेहद लाड़ला था। गोपाल ने वर्ष 2024 में पहली ही कोशिश में NEET परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हासिल किया था। परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। उसके बड़े भाई उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रहे थे और चाहते थे कि वह एक सफल डॉक्टर बने। लेकिन एक पल में सब कुछ बदल गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:30:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नंदिनी की खदान में डूबने से 13 वर्षीय बालक की मौत, हाथ में मिली कोल्ड ड्रिंक की बोतल</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग जिले के पथरिया खदान में हुआ दर्दनाक हादसा, एसडीआरएफ ने 50 फीट गहरे पानी से निकाला शव; सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/13-year-old-boy-dies-due-to-drowning-in-nandini/article-55733"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। नंदिनी थाना क्षेत्र के ग्राम पथरिया स्थित एक खदान में 13 वर्षीय बालक का शव गहरे पानी से बरामद किया गया। बालक गुरुवार शाम से लापता था और परिजन पूरी रात उसकी तलाश करते रहे। शुक्रवार सुबह राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम ने करीब 50 फीट गहरे पानी में खोज अभियान चलाकर उसका शव बाहर निकाला। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिवार सदमे में है। मृतक की पहचान आयुष मार्कंडेय के रूप में हुई है, जो ग्राम पथरिया का रहने वाला था। उसके पिता का नाम नंदकुमार मार्कंडेय बताया गया है। परिजनों के अनुसार आयुष गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे घर से बाहर निकला था। आम दिनों की तरह परिवार को लगा कि वह आसपास के बच्चों के साथ खेल रहा होगा, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटने पर चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने पहले आसपास तलाश की, रिश्तेदारों और परिचितों से जानकारी ली, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। रात बढ़ने के साथ परिजनों की चिंता और बढ़ गई। स्थानीय लोगों की मदद से गांव और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की गई। इसी दौरान कुछ लोगों ने आशंका जताई कि आयुष को आखिरी बार खदान क्षेत्र की ओर जाते देखा गया था। इसके बाद परिजनों ने नंदिनी पुलिस और एसडीआरएफ को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन खदान की गहराई और अंधेरा होने के कारण रात में रेस्क्यू अभियान शुरू नहीं किया जा सका। अधिकारियों के अनुसार खदान में पानी काफी गहरा था और रात के समय दृश्यता बेहद कम थी। ऐसे में बचाव दल ने जोखिम को देखते हुए सुबह अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एसडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। जिला सेनानी और जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर अभियान शुरू किया गया। टीम में शामिल डिप डाइविंग विशेषज्ञ राजकुमार यादव और चंद्रप्रताप जघेल ने पानी के भीतर उतरकर तलाश शुरू की। करीब डेढ़ घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद सुबह लगभग सात बजे आयुष का शव खदान के गहरे हिस्से से बरामद किया गया। शव मिलने के बाद उसे बाहर निकालकर पुलिस के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस उम्मीद के साथ परिवार पूरी रात बेटे की तलाश कर रहा था, वह सुबह एक दुखद खबर में बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उस कोल्ड ड्रिंक की बोतल को लेकर हो रही है, जो आयुष के हाथ में मिली। परिजनों ने बताया कि आयुष को खाली बोतलों और अन्य सामानों से खेलने का शौक था। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि वह किसी बोतल को उठाने या पकड़ने के प्रयास में खदान के किनारे पहुंच गया होगा। घटनास्थल पर फिसलन और कुछ निशान भी मिले हैं, जिससे आशंका है कि उसका पैर अचानक फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरा। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान के आसपास अक्सर बच्चे खेलते दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर गहरी खदानों के आसपास न तो मजबूत बैरिकेडिंग है और न ही पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होती तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से खदान क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि खुले और पानी से भरे खदान क्षेत्र बच्चों और राहगीरों के लिए हमेशा खतरा बने रहते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर इस संबंध में शिकायतें भी की गई हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब इस घटना के बाद लोगों ने फिर से सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पूरी पुष्टि हो सकेगी। हालांकि शुरुआती जांच में डूबने से मौत की बात सामने आ रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय आयुष अकेला था या उसके साथ कोई अन्य बच्चा भी मौजूद था। इस हादसे ने एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और स्थानीय जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं। खासकर गर्मी और छुट्टियों के दौरान बच्चे अक्सर ऐसे स्थानों की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:17 +0530</pubDate>
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                <title>6 दिन बाद सिलपरा डैम से मिला सेना के जवान का शव</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के सिलपरा डैम में नहाते समय डूबे जवान गौरव द्विवेदी का शव एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की संयुक्त कार्रवाई में बरामद, नहर का पानी रोककर चलाया गया विशेष अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/dead-body-of-army-soldier-found-from-silpara-dam-after/article-55420"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gaurav-dwivedi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले के सिलपरा डैम में छह दिन पहले लापता हुए सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को यह सफलता मिली। जवान के शव के मिलने के साथ ही परिवार और गांव के लोगों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय गौरव द्विवेदी पिछले सप्ताह अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे, जहां नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। घटना के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी, लेकिन डैम की गहराई और पानी की स्थिति के कारण शुरुआती दिनों में सफलता नहीं मिल सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी रीवा जिले के बघवार गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह छुट्टी पर घर आए हुए थे। बुधवार सुबह वह अपने भाई-बहनों और कुछ परिचितों के साथ सिलपरा डैम पहुंचे थे। मौसम सामान्य था और सभी लोग डैम के किनारे समय बिता रहे थे। इसी दौरान गौरव पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे हिस्से की ओर चले गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में ओझल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। उसी दिन से जवान की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में स्थानीय गोताखोरों और एसडीईआरएफ की टीम ने डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पिछले छह दिनों तक लगातार बोट, गोताखोरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही। बावजूद इसके जवान का कोई पता नहीं चल सका।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार डैम में पानी की गहराई और तेज बहाव रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। कई बार गोताखोरों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाने का फैसला किया। मंगलवार को नहर का पानी पूरी तरह रोक दिया गया ताकि डैम में जलस्तर कम किया जा सके। बताया गया कि पानी की गहराई करीब 40 फीट तक कम होने के बाद खोज अभियान को नई दिशा मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार सुबह करीब छह बजे एनडीआरएफ की आगरा स्थित स्पेशल टास्क फोर्स और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने एक बार फिर अभियान शुरू किया। इस दौरान डैम के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां जवान के होने की संभावना जताई जा रही थी। कई घंटे तक लगातार चली खोजबीन के बाद सुबह करीब नौ बजे जवान का शव पानी के भीतर से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद परिजन भावुक हो गए। कई दिनों से चल रही तलाश का अंत तो हुआ, लेकिन परिणाम बेहद दुखद रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने पूरे अभियान में शामिल रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने लगातार मेहनत की और आखिरकार जवान को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी की मौत की खबर से बघवार गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार युवा के रूप में याद कर रहे हैं। सेना में उनकी सेवा को लेकर ग्रामीणों में गर्व था और उनके भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के गांवों से भी लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह घटना एक बार फिर जलाशयों और डैम क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले और बाद में ऐसे स्थानों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को गहरे पानी में न जाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:13:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पटना में गंगा नदी में नाव हादसा, 15 लोगों से भरी नाव डूबी</title>
                                    <description><![CDATA[बाढ़ क्षेत्र में बड़ा हादसा, तीन लोगों की मौत; चार अब भी लापता, SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/boat-accident-in-river-ganga-in-patna-boat-filled-with/article-54431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/patna-boat-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक नाव हादसा हो गया। गंगा नदी में 15 लोगों से भरी नाव अचानक पलट गई, जिससे तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई, जबकि चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल बन गया। स्थानीय गोताखोरों और मल्लाहों की मदद से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि SDRF की टीम लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह हादसा बाढ़ थाना क्षेत्र के उमानाथ इलाके के पास गंगा नदी में हुआ। जानकारी के मुताबिक नाव पर सवार सभी लोग मासूमगंज बिंद टोली के रहने वाले थे और रोज की तरह समस्तीपुर जिले के सुल्तानपुर दियारा इलाके में खेती और सब्जी तोड़ने के काम से गए थे। सुबह लगभग 5:45 बजे नाव गंगा नदी पार कर रही थी, लेकिन लौटते समय तेज हवा और नदी की तेज धार के कारण नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान 30 वर्षीय नीलम कुमारी, 36 वर्षीय श्रवण महतो और उनके 15 वर्षीय बेटे काशी कुमार के रूप में हुई है। पिता और बेटे की एक साथ मौत से गांव में गहरा शोक छा गया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं चार अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे। इसके अलावा नाव पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। न लाइफ जैकेट थी और न ही कोई अन्य बचाव उपकरण मौजूद था। जैसे ही नाव नदी के बीचोंबीच पहुंची, तेज हवा चलने लगी और नाव डगमगाने लगी। कुछ ही सेकंड में नाव पानी में समा गई। नाव पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई लोग तेज धारा में बह गए। घटना के बाद आसपास मौजूद मल्लाहों और स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की मदद से सात लोगों की जान बचाई जा सकी। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">घायलों में राहुल कुमार, ममता देवी, कबूतरी कुमारी और एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की शामिल हैं। अन्य घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें बेहतर इलाज दिया जा रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस और SDRF की टीम ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। SDRF की मोटरबोट और गोताखोर नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि नदी की तेज धार और गहराई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आ रही है, लेकिन हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में नाव हादसे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नावों की क्षमता की जांच नहीं होती और अधिक संख्या में लोगों को बैठाकर नदी पार कराई जाती है। कई नावों में सुरक्षा उपकरण भी नहीं होते, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। गांव के लोगों ने बताया कि बाढ़ और दियारा क्षेत्र के लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। खेती, मजदूरी और सब्जी के काम के लिए उन्हें रोज नदी पार करनी पड़ती है। बारिश और बाढ़ के मौसम में खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है, लेकिन मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। मृतकों के घरों में चीख-पुकार मची हुई है। गांव की महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आए। कई लोग नदी किनारे बैठकर अपने परिजनों की सलामती की दुआ करते दिखाई दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नाव चालक से पूछताछ की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि नाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को क्यों बैठाया गया। साथ ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी की जाएगी। बिहार के दियारा और बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव परिवहन के लिए सख्त नियम लागू करने की जरूरत है। नियमित जांच, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता और क्षमता से अधिक यात्रियों पर रोक जैसी व्यवस्थाएं ऐसे हादसों को रोक सकती हैं।  SDRF और प्रशासन की टीम लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई है। ग्रामीण लगातार नदी किनारे खड़े होकर अपने परिजनों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर नदी परिवहन में लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:09:17 +0530</pubDate>
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