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                <title>Mobile Hacking - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mobile Hacking RSS Feed</description>
                
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                <title>ZIP फाइल खोलते ही फोन हो सकता है हैक, 'बॉस फ्रॉड' से बढ़ा साइबर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ या कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज और ZIP फाइलों के जरिए साइबर अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/phone-can-be-hacked-as-soon-as-zip-file-is/article-57430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/boss-zip-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब अपराधियों ने लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘बॉस ZIP फ्रॉड’ या ‘CEO इम्पर्सनेशन स्कैम’ कहा जा रहा है। इस साइबर ठगी में अपराधी किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं और कर्मचारियों को व्हाट्सएप, ई-मेल या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संदेश भेजते हैं। इन संदेशों के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे जरूरी दस्तावेज, सिक्योरिटी अपडेट या तत्काल कार्रवाई से जुड़ी फाइल बताकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही कर्मचारी इस फाइल को डाउनलोड या खोलता है, उसका मोबाइल या सिस्टम मैलवेयर की चपेट में आ सकता है। इसके बाद साइबर ठग डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। गृह मंत्रालय ने भी लोगों को इस तरह के साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले 30 महीनों के दौरान केवल छत्तीसगढ़ में ही साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले जहां फर्जी कॉल और ओटीपी फ्रॉड अधिक देखने को मिलते थे, वहीं अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक दबाव में लाकर उनसे गलत कदम उठवाए जा रहे हैं। अपराधी अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला बिना सोचे-समझे ZIP फाइल डाउनलोड कर ले। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन ZIP फाइलों के अंदर कई बार EXE, DLL या अन्य हानिकारक फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही ऐसी फाइल सक्रिय होती है, डिवाइस में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद अपराधी मोबाइल या कंप्यूटर की कई जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंकिंग ऐप, सेव किए गए पासवर्ड, मैसेज, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में अपराधी डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते हैं और उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस तरह की ठगी का एक और खतरनाक पहलू यह है कि साइबर अपराधी मोबाइल में सेव संपर्कों के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में असली अधिकारी या बॉस का नंबर हटाकर ठग अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद कर्मचारी को लगता है कि वह अपने वरिष्ठ अधिकारी से ही बात कर रहा है। फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय दस्तावेज भेजने या किसी खाते में रकम ट्रांसफर करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं। जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी रकम की ठगी कर लेते हैं।  किसी भी अनजान ZIP फाइल, EXE फाइल या DLL फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक कोई संदिग्ध संदेश आए और उसमें तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाए तो पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फोन कॉल, वीडियो कॉल या सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है। केवल व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के आधार पर कोई आर्थिक लेनदेन करना या फाइल डाउनलोड करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मोबाइल और कंप्यूटर में हमेशा अपडेटेड सुरक्षा प्रणाली का उपयोग किया जाए। व्हाट्सएप सहित अन्य जरूरी ऐप्स में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखना चाहिए। मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें। किसी भी अज्ञात लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें। यदि कंपनी में काम करते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़े आंतरिक दिशा-निर्देशों का पालन करना भी आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट होल्डर्स को गिरफ्तार किया था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस लगातार संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने और समय रहते पीड़ितों की रकम रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन बढ़ते मामलों के कारण चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। अगर कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे समय गंवाए बिना अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए ताकि लेनदेन रोका जा सके। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार साबित होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:41:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने तीन बार में निकाली रकम, पुलिस जांच में जुटी
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-the-name-of-google-update-rs-199-lakh-was/article-54454"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/durg-cyber-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने ‘गूगल अपडेट’ के नाम पर एक ठेकेदार का मोबाइल फोन हैक कर उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए पार कर दिए। मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगों ने एक फर्जी अपडेट मैसेज भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर बैंक खाते से तीन बार में रकम निकाल ली।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के अनुसार शंकर नगर दुर्ग निवासी महेंद्र कुमार देशलहरा ठेकेदारी का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 22 मई 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर गूगल अपडेट से जुड़ा एक मैसेज आया था। सामान्य सिस्टम अपडेट समझकर उन्होंने उस लिंक को खोल दिया। बताया जा रहा है कि लिंक ओपन करते ही मोबाइल की स्क्रीन कुछ देर के लिए फ्रीज हो गई। इसके बाद फोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। कई ऐप अपने आप बंद होने लगे और मोबाइल बार-बार हैंग हो रहा था।</p>
<p dir="ltr">महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद फोन में तकनीकी दिक्कत आ गई है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बैंक खाते से रकम कटने के मैसेज आने लगे। सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनके बंधन बैंक खाते से 94 हजार 999 रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके एक मिनट बाद ही 5 हजार 1 रुपए फिर खाते से निकल गए। लगातार दो ट्रांजेक्शन होने के बाद वे कुछ समझ पाते, उससे पहले अगले दिन 23 मई को शाम करीब 4 बजे फिर 99 हजार 500 रुपए खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 99 हजार 500 रुपए की ठगी हो गई।</p>
<p dir="ltr">पीड़ित का कहना है कि ठगी के दौरान उनका मोबाइल पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका था। फोन में कोई भी कमांड सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। बैंकिंग ऐप खुल नहीं रहा था और कई सिस्टम अपने आप एक्टिव और बंद हो रहे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि साइबर ठगों ने किसी रिमोट एक्सेस एप या मालवेयर के जरिए मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई।</p>
<p dir="ltr">लगातार रकम कटने के बाद महेंद्र कुमार ने सबसे पहले बैंक से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मोहन नगर थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल, साइबर कंप्लेन की कॉपी और मोबाइल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।</p>
<p dir="ltr">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे फोन कर ठगी करने के बजाय मोबाइल हैकिंग के जरिए वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फर्जी अपडेट लिंक, APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार अगर यूजर गलती से लिंक खोल देता है तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, OTP और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन जाती है।</p>
<p dir="ltr">कई लोग फोन में आने वाले अपडेट मैसेज को असली समझकर तुरंत क्लिक कर देते हैं। यही जल्दबाजी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, एप या अपडेट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासकर बैंकिंग से जुड़े काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर फोन अचानक हैंग होने लगे, अपने आप ऐप खुलने लगें या बैंकिंग गतिविधियां संदिग्ध दिखें तो तुरंत इंटरनेट बंद कर बैंक और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।</p>
<p dir="ltr">दुर्ग पुलिस अब ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की टीम बैंकिंग ट्रेल और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच जारी है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 11:41:00 +0530</pubDate>
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