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                <title>नक्सलवाद कमजोर पड़ते ही छत्तीसगढ़ में टाटा की एंट्री, पर्यटन सेक्टर में 500 करोड़ निवेश की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर और सरगुजा में लक्जरी रिसॉर्ट्स, होटल और इको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/tatas-entry-in-chhattisgarh-as-soon-as-naxalism-weakens-preparation/article-54465"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-tourism.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक नक्सलवाद की वजह से पिछड़े माने जाने वाले इलाकों में अब विकास और पर्यटन की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। राज्य सरकार अब बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों को देश के बड़े पर्यटन नक्शे पर लाने की तैयारी में है। इसी बीच टाटा समूह की होटल कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) ने राज्य में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश करने में रुचि दिखाई है। माना जा रहा है कि यह निवेश सीधे तौर पर होटल, रिसॉर्ट, इको टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपनी योजना साझा की।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी है। ऐसे में अब पर्यटन सेक्टर को मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, जंगलों, जलप्रपातों और आदिवासी संस्कृति से भरपूर राज्य है, लेकिन अब तक इसे उस स्तर की पहचान नहीं मिल पाई जिसकी यह हकदार है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में बस्तर, सरगुजा और धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड की एक हाई लेवल टीम जल्द ही बस्तर, सरगुजा, वन क्षेत्रों और राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों का दौरा करेगी। टीम यहां पर्यटकों की आवाजाही, सड़क संपर्क, स्थानीय सुविधाओं और जमीन की उपलब्धता का आकलन करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे लक्जरी होटल, रिसॉर्ट, मोटल और विला विकसित करने की योजना तैयार होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे न सिर्फ पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बस्तर और सरगुजा को लेकर सबसे ज्यादा फोकस इसलिए किया जा रहा है क्योंकि नई पर्यटन और औद्योगिक नीति में इन इलाकों के लिए कई तरह की छूट दी गई है। नियमों के मुताबिक रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में पांच सितारा होटल बनाने के लिए कम से कम 150 कमरों की जरूरत होती है, लेकिन बस्तर और सरगुजा के सुदूर इलाकों में सिर्फ 50 कमरों के तीन सितारा लक्जरी रिसॉर्ट्स बनाने की अनुमति दी जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे पर्यावरण पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ेगा और निवेशक भी आसानी से आगे आएंगे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नई नीति में टैक्स छूट और अतिरिक्त सब्सिडी का भी प्रावधान रखा गया है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश प्रक्रिया को पहले की तुलना में ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया है। 500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश करने वाली कंपनियों को बी-स्पोक पॉलिसी के तहत अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक सरकार टाटा समूह को छह अलग-अलग प्राइम लोकेशन पर जमीन का विकल्प भी दे रही है। इनमें मैनपाट, सिरपुर, अमृतधारा जलप्रपात, खुटाघाट, कोदार जलाशय और बलौदाबाजार क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">पर्यटन विभाग का मानना है कि बस्तर और सरगुजा में पहले से मौजूद सरकारी रिसॉर्ट्स को भी बड़े होटल समूहों के जरिए नए रूप में विकसित किया जा सकता है। इनमें चित्रकोट का दंडामी रिसॉर्ट, मैनपाट का कर्मा एथनिक रिसॉर्ट और कोंडागांव का धंकुल एथनिक रिसॉर्ट प्रमुख हैं। ये सभी जगहें प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय संस्कृति की वजह से पहले से पर्यटकों के बीच पहचान रखती हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण यहां बड़े स्तर पर पर्यटन नहीं बढ़ पाया। अब सरकार चाहती है कि निजी निवेश के जरिए इन जगहों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर वैली और सरगुजा के मैनपाट जैसे इलाकों को इको टूरिज्म के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। वहीं दंतेवाड़ा, रतनपुर और सूरजपुर जैसे धार्मिक स्थलों को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर होटल और कनेक्टिविटी बेहतर होती है तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">हालांकि इस पूरी योजना को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि पर्यटन विकास के नाम पर आदिवासी इलाकों की मूल संस्कृति और जमीन प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि सभी परियोजनाएं पर्यावरणीय नियमों को ध्यान में रखकर ही तैयार की जाएंगी और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाएगा।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">राज्य में पहले कई बार पर्यटन परियोजनाओं को निवेश नहीं मिल पाया था। कुछ रिसॉर्ट्स के टेंडर लगातार फ्लॉप होते रहे। लेकिन अब नियमों में ढील और सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद बड़े कॉर्पोरेट समूहों की रुचि बढ़ी है। माना जा रहा है कि अगर टाटा समूह की यह योजना जमीन पर उतरती है तो छत्तीसगढ़ के पर्यटन सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे इलाके, जो कभी नक्सल हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब पर्यटन और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:24:55 +0530</pubDate>
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