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                <title>Narcotics - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Narcotics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sunil-rawat-meena.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर में 6.25 लाख का गांजा जब्त, बच्चे की आड़ लेकर तस्करी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सिविल लाइन पुलिस ने दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया। आरोप है कि पुलिस से बचने के लिए आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को रखा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/ganja-worth-rs-625-lakh-seized-in-bilaspur-accused-of/article-57214"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बिलासपुर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिविल लाइन पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12.405 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6.25 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी शक से बचने और आसानी से सफर करने के लिए अपने साथ पांच साल के एक बच्चे को भी लेकर चल रहे थे। कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं बच्चे को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि उसलापुर रेलवे स्टेशन स्थित लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के पास दो महिलाएं और एक पुरुष संदिग्ध हालत में एक आसमानी रंग का ट्रॉली बैग लेकर खड़े हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि उनके साथ एक छोटा बच्चा भी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद बताए गए हुलिए से मेल खाते तीनों संदिग्ध एक ट्रॉली बैग और बच्चे के साथ दिखाई दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने संदेह के आधार पर उन्हें रोककर पूछताछ की। शुरुआती जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर ट्रॉली बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग के अंदर खाकी रंग की प्लास्टिक टेप से लिपटे 11 पैकेट मिले। जब पैकेट खोले गए तो उनमें गांजा भरा हुआ था। मौके पर ही जब्त सामग्री का वजन किया गया, जिसमें कुल 12.405 किलोग्राम गांजा निकला। बरामद मादक पदार्थ की कीमत करीब 6.25 लाख रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी प्रकाश नायक उर्फ पप्पू (41), नेहा सिंह (34) और जांजगीर-चांपा जिले की अर्चना सिंह (27) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने अपने साथ पांच साल के बच्चे को इसलिए रखा था ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो। आमतौर पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों पर कम संदेह किया जाता है और इसी बात का फायदा उठाने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस को पहले से ही सूचना में बच्चे के साथ होने की जानकारी मिल गई थी, जिसके चलते टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई सफल रही। जब्ती की कार्रवाई के बाद पुलिस ने गांजा, ट्रॉली बैग और अन्य सामान को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। वहीं उनके साथ मिले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से तो नहीं है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस का मानना है कि सीमावर्ती राज्यों से गांजे की अवैध सप्लाई रोकने के लिए लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। बिलासपुर की यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल के पटेल सिटी में नशीली कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़</title>
                                    <description><![CDATA[STF की छापेमारी में छिपा अवैध नेटवर्क सामने आया, दो आरोपी फरार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/intoxicating-cough-syrup-factory-busted-in-patel-city-bhopal/article-54541"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhopal-drug-factory.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल के गांधी नगर थाना क्षेत्र स्थित पटेल सिटी कॉलोनी में उस वक्त सनसनी फैल गई जब राज्य एसटीएफ ने एक मकान पर छापेमारी कर नशीली कफ सिरप की अवैध फैक्ट्री का खुलासा किया। मकान नंबर 66, जो बाहर से एक सामान्य और बंद पड़ा दो मंजिला घर लगता था, अंदर से पूरी तरह एक अवैध उत्पादन और पैकेजिंग यूनिट में तब्दील था। मकान के बाहर लगी नेम प्लेट “साधना-जयदीप सिंह” लोगों को सामान्य लगती रही, लेकिन इसी दीवारों के पीछे लंबे समय से नशे का बड़ा कारोबार चल रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के मुताबिक घर पर हमेशा मुख्य गेट बंद रहता था और अंदर किसी भी तरह की हलचल दिखाई नहीं देती थी। सुबह से लेकर देर रात तक मकान शांत रहता था, जिससे किसी को कभी शक नहीं हुआ। आसपास के लोगों ने बताया कि यह घर काफी समय से खाली जैसा ही दिखता था, लेकिन एसटीएफ की कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था ताकि किसी को भी इसकी भनक न लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मकान मालिक जयदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने यह मकान आकाश भाटी नामक व्यक्ति को किराए पर दिया था और उन्हें अंदर चल रही गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या बिना पुलिस सत्यापन के मकान किराए पर देना केवल लापरवाही थी या फिर किसी तरह की मिलीभगत भी इसमें शामिल हो सकती है। जांच टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई कहां-कहां की जाती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">छापेमारी के दौरान जो दृश्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। मकान के अंदर सीढ़ियों के नीचे, गैलरी और कमरों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोरियां, कट्टे और पैकेजिंग सामग्री बिखरी हुई मिली। कई जगहों पर कफ सिरप की बोतलों के खाली रैपर और सीलिंग सामग्री भी पाई गई, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि यहां लंबे समय से री-पैकिंग का काम चल रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध गतिविधि में कुछ नाबालिगों को भी काम पर लगाया गया था, जो बेहद गंभीर मामला है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय सूत्रों के अनुसार मकान की छत को निगरानी पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जाता था। छत से बायपास रोड और कॉलोनी के अंदर आने-जाने वाले रास्तों पर आसानी से नजर रखी जा सकती थी। कई बार युवक छत पर खड़े होकर हर आने-जाने वाले व्यक्ति और गाड़ी पर नजर रखते थे। जैसे ही कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती, अंदर सूचना पहुंचा दी जाती थी। यह पूरा सिस्टम इस तरह तैयार किया गया था कि बाहर से कोई भी इस अवैध गतिविधि का अंदाजा नहीं लगा सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">एसटीएफ को जैसे ही पुख्ता जानकारी मिली, टीम ने देर रात छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही गिरोह के मास्टरमाइंड अर्जुन मालवीय और नितिन साहू छत के रास्ते पीछे खुले मैदान में कूदकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि पीछे का हिस्सा खेतों से जुड़ा होने के कारण यह उनका पहले से तैयार भागने का रास्ता था। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की, लेकिन दोनों आरोपी हाथ नहीं आए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। लोग हैरान हैं कि इतने शांत दिखने वाले मकान के अंदर इस तरह का बड़ा अवैध कारोबार चल रहा था और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट का असली संचालन कौन कर रहा था और इसकी सप्लाई चेन कहां तक फैली हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक मकान या दो लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 10:49:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल में डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप जब्त, STF की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[गांधीनगर इलाके में रातभर चली रेड, 700 से ज्यादा पेटियां और 10 लोग हिरासत में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/illegal-cough-syrup-worth-rs-15-crore-seized-in-bhopal/article-54467"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhopal-stf-raid.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">भोपाल के गांधीनगर इलाके में एसटीएफ ने गुरुवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए का अवैध कफ सिरप जब्त किया है। कार्रवाई डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी के एक मकान में की गई, जहां कथित तौर पर नशीले कफ सिरप का अवैध कारोबार चल रहा था। एसटीएफ की टीम ने यहां से 700 से ज्यादा पेटियां, बड़ी संख्या में बोतलें और पैकेजिंग मशीनें बरामद की हैं। मौके से 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। देर रात शुरू हुई यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह करीब 3 बजे तक चलती रही।</p>
<p dir="ltr">जानकारी के मुताबिक एसटीएफ को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि गांधीनगर क्षेत्र में अवैध तरीके से नशीले कफ सिरप की सप्लाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह सिरप “आफ कफ” नाम से तैयार किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ ने पूरी तैयारी के साथ मकान पर दबिश दी। जब टीम अंदर पहुंची तो अलग-अलग कमरों में बड़ी मात्रा में कफ सिरप के कॉर्टन रखे मिले। कई बोतलें पैकिंग के लिए तैयार थीं, जबकि कुछ मशीनें मौके पर चालू हालत में मिलीं।</p>
<p dir="ltr">एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में मामला संगठित नेटवर्क से जुड़ा लग रहा है। जिस तरीके से पैकेजिंग और स्टॉक रखा गया था, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि लंबे समय से यहां काम चल रहा था। मौके से बरामद मशीनों में पैकिंग और सीलिंग के उपकरण भी शामिल हैं। अधिकारियों ने कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें किस तरह के नशीले तत्व मिलाए गए थे।</p>
<p dir="ltr">कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में हलचल का माहौल रहा। देर रात अचानक कई गाड़ियों के पहुंचने से आसपास रहने वाले लोग भी बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि कॉलोनी के अंदर इस तरह की गतिविधि चल रही है। कुछ लोगों ने बताया कि मकान में अक्सर रात के समय आवाजाही रहती थी, लेकिन किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। एसटीएफ की टीम ने मकान के अंदर कई घंटों तक जांच की और दस्तावेज भी खंगाले।</p>
<p dir="ltr">सबसे खास बात यह रही कि इस कार्रवाई की भनक स्थानीय गांधीनगर पुलिस को भी पहले से नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ ने पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की। अधिकारियों को शक था कि सूचना लीक होने पर आरोपी मौके से फरार हो सकते हैं। इसी वजह से देर रात अचानक रेड की गई। कार्रवाई के दौरान एसटीएफ के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और पूरी निगरानी करते रहे।</p>
<p dir="ltr">जिस मकान में यह कार्रवाई हुई, वह किसी मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि मकान किराए पर दिया गया था या खुद मालिक इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। हिरासत में लिए गए लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि पूछताछ के आधार पर शहर के दूसरे इलाकों में भी कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p dir="ltr">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह अवैध कफ सिरप सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसकी सप्लाई दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों तक की जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि नशीले कफ सिरप का इस्तेमाल युवाओं के बीच नशे के तौर पर किया जा रहा था। इसी वजह से इस कारोबार पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी।</p>
<p dir="ltr">मध्यप्रदेश में पिछले कुछ समय से नशीले पदार्थों और अवैध दवाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां ड्रग्स, नशीली गोलियां और कफ सिरप की अवैध सप्लाई पर सख्ती दिखा रही हैं। भोपाल में हुई यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आगे की जांच में कई और खुलासे हो सकते हैं। एसटीएफ पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। मोबाइल फोन, दस्तावेज और बैंक लेनदेन की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अवैध कफ सिरप कहां तैयार हो रहा था और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जा रहा था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 13:06:51 +0530</pubDate>
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