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                <title>Guna - दैनिक जागरण</title>
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                <title>गुना की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, पांच घंटे बाद पाया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[इंडस्ट्रियल एरिया स्थित प्लास्टिक पाइप यूनिट में देर रात भड़की आग, चार फायर ब्रिगेड की मदद से बुझी लपटें; 80 लाख रुपए तक नुकसान की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/massive-fire-in-gunas-pipe-factory-brought-under-control-after/article-56208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-factory-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुना के इंडस्ट्रियल एरिया में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक प्लास्टिक पाइप निर्माण फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री परिसर में रखा प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य सामग्री इसकी चपेट में आ गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दूर स्थित कॉलोनियों से भी धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। सूचना मिलने के बाद नगरपालिका की फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यह घटना शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक प्लास्टिक पाइप निर्माण इकाई में हुई। फैक्ट्री का संचालन हरीश रत्रा द्वारा किया जाता है। यहां कृषि और सिंचाई कार्यों में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पाइप तैयार किए जाते हैं। फैक्ट्री के एक हिस्से में उत्पादन कार्य होता है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के दाने, रॉ मटेरियल और तैयार उत्पादों का भंडारण किया जाता है। यही कारण रहा कि आग लगने के बाद स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फैक्ट्री संचालक के अनुसार मंगलवार शाम रोजाना की तरह उत्पादन कार्य पूरा होने के बाद करीब साढ़े आठ बजे फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। सभी कर्मचारी अपने घर लौट गए थे और परिसर पूरी तरह बंद था। उस समय किसी प्रकार की असामान्य स्थिति नहीं थी। रात करीब 11 बजे के आसपास इंडस्ट्रियल एरिया से सटी विंध्याचल कॉलोनी के लोगों ने फैक्ट्री की दिशा से धुआं उठता देखा। कुछ ही मिनटों में आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत नगरपालिका और प्रशासन को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही नगरपालिका का अमला सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में फायर ब्रिगेड की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। आग की भयावहता को देखते हुए एक के बाद एक चार दमकल वाहनों को राहत कार्य में लगाया गया। आग बुझाने का काम शुरू तो हो गया, लेकिन प्लास्टिक सामग्री की अधिकता के कारण आग बार-बार भड़क रही थी। इससे दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहत कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती फैक्ट्री की मजबूत पक्की दीवारें बनीं। आग फैक्ट्री के अंदर गहराई तक फैल चुकी थी और बाहर से पानी की बौछार सीधे प्रभावित हिस्सों तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसी स्थिति में फायर टीम को अलग रणनीति अपनानी पड़ी। सबसे पहले फैक्ट्री के गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, लेकिन इससे भी आग तक पूरी तरह पहुंचना आसान नहीं था। इसके बाद दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री की दीवारों में कई स्थानों पर छेद किए। इन छेदों के माध्यम से अंदर तक पानी पहुंचाया गया। लगातार पानी डालने और धुएं को नियंत्रित करने के प्रयासों के बाद आग की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। आग बुझाने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता पड़ रही थी, इसलिए टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई भी जारी रखी गई। पूरी रात राहत कार्य चलता रहा और दमकलकर्मी आग को नियंत्रित करने में जुटे रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद तड़के आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय फैक्ट्री में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आर्थिक नुकसान काफी बड़ा माना जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आगजनी की इस घटना में 70 से 80 लाख रुपए तक का नुकसान हुआ है। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कच्चा माल, तैयार पाइप और अन्य उपकरण जलकर राख हो गए। घटना के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष पति अरविंद गुप्ता सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने राहत कार्यों की निगरानी की और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता था तथा आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक भी आग फैलने का खतरा था। आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण कर तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आग लगने की वजह का पता लगाया जा सके। जिन इकाइयों में ज्वलनशील सामग्री बड़ी मात्रा में मौजूद रहती है, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था ऐसी घटनाओं के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती है। गुना की इस फैक्ट्री में लगी आग भले ही किसी बड़ी जनहानि का कारण नहीं बनी, लेकिन इससे हुए आर्थिक नुकसान ने फैक्ट्री प्रबंधन को बड़ा झटका दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गुना में दूषित पानी पीने से 18 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[टूटी पाइपलाइन से घरों में पहुंचा गंदा पानी, उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत; स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/18-children-admitted-to-hospital-after-drinking-contaminated-water-in/article-55283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guna-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के गुना शहर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर के बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में गंदा पानी सप्लाई होने के बाद करीब 18 बच्चे बीमार पड़ गए। सभी बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई स्थानों पर टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण पेयजल में गंदगी और दूषित तत्व मिल गए, जिससे यह स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी का रंग भी सामान्य नहीं था, लेकिन शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया। बाद में जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी तो मामला गंभीर हो गया। एक-एक कर कई बच्चों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। कुछ बच्चों में पीलिया के शुरुआती लक्षण भी दिखाई दिए, जिसके बाद परिजन घबरा गए और उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में भर्ती बच्चों की उम्र 5 से 11 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चों में डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत थी। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो रही थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। राहत की बात यह है कि समय पर उपचार मिलने से सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी भी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि दूषित पानी पीने से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। गर्मी और बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होने के कारण वे जल्दी प्रभावित होते हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार बच्चों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जल जीवन मिशन की टीम सक्रिय हो गई। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई। माना जा रहा है कि टूटी पाइपलाइन के जरिए नालियों और आसपास जमा गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया। प्रशासन ने मुख्य वाटर टैंक और संबंधित पाइपलाइन क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। साथ ही जिन स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, वहां मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत की जाती तो बच्चों की सेहत से खिलवाड़ नहीं होता। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, वहां लोग पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही उपयोग करें। इसके अलावा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उबालने से पानी में मौजूद अधिकांश हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉक्टरों ने अभिभावकों को भी सतर्क रहने को कहा है। यदि बच्चों में उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने ओआरएस घोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने की भी सलाह दी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। गुना में सामने आया यह मामला एक बार फिर शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पेयजल की गुणवत्ता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है और छोटी सी लापरवाही भी बड़े संकट का कारण बन सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:04:59 +0530</pubDate>
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                <title>दिग्विजय सिंह बोले- धर्म जोड़ता है, राजनीति नहीं; गुना महायज्ञ में जुटे लाखों श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[भैंसाना में श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति, आठ दिन में 30 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-said-religion-unites-not-politics-lakhs-of/article-54491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/_digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन समिति के मुताबिक आठ दिनों के दौरान करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने महायज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए। समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">भैंसाना गांव पिछले कई दिनों से धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। रामायण पाठ, भागवत कथा और यज्ञ में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही थीं। गुरुवार को पूर्णाहुति के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस दौरान आयोजन के मुख्य केंद्र रहे गुड्डा महाराज भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार पूरे 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। जैसे ही उन्होंने भोजन ग्रहण किया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे भावुक पल बताया। कई लोग मंच के सामने खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “हम लोगों ने हमेशा धर्म को आस्था का केंद्र माना है। हमने कभी धर्म को बेचा नहीं। धर्म को राजनीति में नहीं लाए।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सभी को आमंत्रित किया गया था, चाहे किसी भी दल या विचारधारा से जुड़े लोग हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति अक्सर समाज को बांट देती है। उनके इस बयान के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और लोगों को एक मंच पर लाते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राघौगढ़ किले के हनुमान मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का अस्तित्व हनुमान जी की कृपा से जुड़ा है। गुड्डा महाराज की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे आयोजन की तैयारी की गई, वह अपने आप में अनोखी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देखे, लेकिन आपके जैसा इंजीनियर नहीं देखा।” इस दौरान मंच पर मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बीच सूखी लकड़ियों से बना विशाल पंडाल सुरक्षित तरीके से चलाना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त और योजना के कारण पूरा कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ। उन्होंने मजाक में कुंभराज वाले महाराज से अपनी कुंडली बनाने की भी बात कही। बोले कि “मुझे कुंडली पर कभी ज्यादा विश्वास नहीं रहा, क्योंकि हजारों लोगों ने कुंडली बनाई लेकिन किसी ने नहीं बताया कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।”</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुड्डा महाराज ने भी मंच से दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आत्मीयता का है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आयोजन का संरक्षक बताया और कहा कि राजा के संरक्षण के बिना ऐसा बड़ा यज्ञ सफल नहीं हो सकता।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">विधायक जयवर्धन सिंह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में संस्कार और सकारात्मक सोच फैलाने का माध्यम भी बना। उन्होंने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों और सेवा समितियों ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था संभाली। गर्मी के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">महायज्ञ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी बड़ी चुनौती रही। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। गांव की छोटी सड़कों पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन इस इलाके में पहली बार देखने को मिला। आसपास के गांवों में भी कई दिनों तक इसी आयोजन की चर्चा होती रही।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक बनी रही। लोग यज्ञशाला और कथा स्थल के दर्शन करते रहे। पूरा भैंसाना गांव भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा नजर आया। आयोजन खत्म होने के बाद भी यहां का माहौल लोगों को लंबे समय तक याद रहने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:44 +0530</pubDate>
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