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                <title>Vishnu Deo Sai - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Vishnu Deo Sai RSS Feed</description>
                
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                <title>मानसून सत्र से पहले साय सरकार की बड़ी बैठक आज, कई अहम फैसलों के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[शाम 4 बजे मंत्रालय में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक, खरीफ सीजन, मानसून की स्थिति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-government-meeting-today-before-monsoon-session-indications-of-many/article-58202"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार आज एक अहम कैबिनेट बैठक करने जा रही है। मंत्रालय स्थित महानदी भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को आगामी विधानसभा मानसून सत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में सरकार सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों, चालू वित्तीय वर्ष के अनुपूरक बजट और कई नीतिगत प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दे सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में नई ट्रांसफर नीति पर भी फैसला होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले यह मंत्रिपरिषद की अंतिम महत्वपूर्ण बैठक होगी। ऐसे में सरकार सत्र के दौरान पेश होने वाले सभी प्रमुख प्रस्तावों और विधायी कार्यों पर अंतिम चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि कई संशोधन विधेयकों को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए अनुपूरक बजट प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा होगी। विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार अतिरिक्त बजट आवंटन को मंजूरी दे सकती है। अनुपूरक बजट के जरिए विकास कार्यों, अधूरी परियोजनाओं और नई योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके बाद इसे मानसून सत्र में सदन के सामने रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक में प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। इस वर्ष अब तक राज्य में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है। सरकार इस स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय कर सकती है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कृषि विभाग बैठक में खाद, बीज और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर विस्तृत प्रस्तुति देगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों तक समय पर आवश्यक कृषि सामग्री पहुंचे और बुआई का काम प्रभावित न हो। यदि कम बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो वैकल्पिक फसल योजना, सिंचाई प्रबंधन और राहत उपायों पर भी निर्णय लिया जा सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और विभिन्न जिलों की वर्षा रिपोर्ट के आधार पर सरकार प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार कर सकती है। सिंचाई संसाधनों के बेहतर उपयोग, जल संरक्षण और सूखे की आशंका वाले इलाकों के लिए भी आवश्यक कदमों पर विचार होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि नई स्थानांतरण नीति को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। पिछली नीति की अवधि समाप्त होने के बाद कर्मचारी और विभाग दोनों नई व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कैबिनेट इस संबंध में अंतिम फैसला ले सकती है। यदि नीति को मंजूरी मिलती है तो जल्द ही प्रदेशभर में तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, लोक निर्माण और अन्य विभागों में लंबे समय से लंबित तबादलों का रास्ता साफ हो जाएगा। कई विभागों ने पहले ही स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं और सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में धान उपार्जन नीति से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। राज्य सरकार किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य, खरीद व्यवस्था और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट की समीक्षा कर सकती है। इसके अलावा कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद के सामने किसानों, श्रमिकों, उद्योगों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं। इनमें विभिन्न विभागों की नई योजनाएं, प्रशासनिक सुधार और नीतिगत बदलाव शामिल हो सकते हैं। कुछ विभागों ने अपने प्रस्ताव पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिए हैं, जिन पर अंतिम निर्णय आज की बैठक में लिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। विधानसभा मानसून सत्र में विपक्ष सरकार को महंगाई, किसानों की समस्याओं, बारिश की कमी, कानून व्यवस्था और विभिन्न विकास कार्यों को लेकर घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार चाहती है कि सत्र शुरू होने से पहले सभी विभाग पूरी तैयारी के साथ सदन में जाएं और आवश्यक प्रस्तावों को समय रहते मंजूरी मिल जाए। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की प्राथमिकताओं की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। विशेष रूप से किसानों, कर्मचारियों और विकास योजनाओं से जुड़े फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। यदि नई ट्रांसफर नीति, अनुपूरक बजट और प्रमुख विधेयकों को मंजूरी मिलती है तो इसका असर आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई देगा। सरकार की कोशिश होगी कि मानसून सत्र के दौरान विकास, कृषि, वित्त और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर प्रदेश के सामने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट रूप से रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>8 साल का इंतजार खत्म, छत्तीसगढ़ के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को मिलेगी सरकारी नौकरी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2018-19 और 2019-20 के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को दी मंजूरी, अधिसूचना के बाद नियुक्ति प्रक्रिया होगी शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/8-years-wait-is-over-156-outstanding-players-of-chhattisgarh/article-57540"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-sports-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे प्रदेश के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों का इंतजार अब समाप्त होने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में वर्ष 2018-19 और 2019-20 के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद जल्द ही चयनित खिलाड़ियों की सूची सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी और अधिसूचना जारी होते ही सरकारी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह निर्णय उन खिलाड़ियों के लिए राहत लेकर आया है, जो पिछले करीब आठ वर्षों से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और विभिन्न प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब सरकार की ओर से उन्हें सरकारी सेवा में अवसर देकर उनके योगदान का सम्मान किया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जाने हेतु निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए थे। सभी आवेदनों की नियमों और तय मानकों के अनुसार विस्तृत जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया, जिनके चयन पर उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी। बताया गया कि चयनित खिलाड़ी प्रदेश के 20 विभिन्न खेलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया है। अब सूची सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी, जिसके बाद नियुक्ति संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार के अनुसार इससे पहले भी 182 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित कर सरकारी सेवा का लाभ दिया जा चुका है। अब नए 156 खिलाड़ियों के चयन के बाद सरकारी नौकरी पाने वाले उत्कृष्ट खिलाड़ियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को उचित सम्मान और अवसर प्रदान किए जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि चयनित खिलाड़ियों की भूमिका केवल सरकारी नौकरी तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों के अनुभव और प्रतिभा का उपयोग खेल प्रशिक्षण, नई प्रतिभाओं को तैयार करने और उभरते खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए। इससे प्रदेश में मजबूत खेल संस्कृति विकसित होगी और युवा खिलाड़ियों को अनुभवी खिलाड़ियों से सीखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में खेलों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेल प्रतिभाओं की खोज के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अवसरों की कमी का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार करने, नई खेल अकादमियों की स्थापना करने और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उनका मानना है कि यदि खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं और नियमित प्रशिक्षण मिलेगा तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में खेलों का समग्र विकास करना भी है। इसके लिए खेल मैदानों, प्रशिक्षण केंद्रों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में खेल सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा मिलने से युवाओं का खेलों के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। इससे अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा कि खेलों में करियर बनाने वाले बच्चों के लिए भविष्य सुरक्षित हो सकता है। यह निर्णय खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार का यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा जो विभिन्न खेलों में मेहनत कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सपना देख रहे हैं। सरकारी नौकरी मिलने से खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे भविष्य में भी खेलों से जुड़े रहकर नई पीढ़ी को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दे सकेंगे। अब सभी की निगाहें सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने पर टिकी हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी और लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ियों और उनके परिवारों में इस फैसले को लेकर खुशी का माहौल है। खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह निर्णय प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और भविष्य में बेहतर खेल परिणाम हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:40:55 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक, उत्तराधिकार सहित सभी पर्सनल लॉ का होगा अध्ययन, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/preparations-intensified-to-implement-ucc-in-chhattisgarh-5-member-high/article-57042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-elephants-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। साय सरकार ने इस मुद्दे पर स्टडी, सुझाव और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से गुरुवार को आधिकारिक आदेश जारी किया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को समान आधार पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। उनके साथ समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन करे और UCC लागू करने की संभावनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। समिति का मुख्य कार्य विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने (दत्तक ग्रहण) और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा पर्सनल लॉ की समीक्षा करना होगा। वर्तमान में देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिनके आधार पर पारिवारिक और सामाजिक मामलों का निपटारा होता है। सरकार का मानना है कि इन कानूनों के बीच अंतर कई बार कानूनी और सामाजिक असमानताओं को जन्म देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने समिति को यह भी निर्देश दिया है कि वह केवल कानूनी अध्ययन तक सीमित न रहे, बल्कि विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव भी प्राप्त करे। इसके लिए जन संवाद और परामर्श प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि सभी वर्गों की राय को रिपोर्ट में शामिल किया जा सके। इसके अलावा समिति उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन करेगी जहां पहले से UCC लागू है या इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। समिति को यह भी जांच करनी होगी कि यदि छत्तीसगढ़ में UCC लागू किया जाता है तो इससे सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सरकार चाहती है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन हो ताकि भविष्य में किसी तरह की व्यावहारिक समस्या न आए। समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की विधायी प्रक्रिया तय की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए थे कि सरकार सभी वर्गों और समुदायों से विचार-विमर्श के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी। अब समिति के गठन के बाद यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे राज्य में बड़े विधायी बदलाव की दिशा में शुरुआती प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू होने की संभावना है, चाहे उनका धर्म, जाति या समुदाय कुछ भी हो। वर्तमान में विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। UCC लागू होने के बाद इन सभी मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय की परंपराओं को खत्म करना नहीं है, बल्कि कानूनी समानता सुनिश्चित करना है। विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और समानता को इस प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है। कई बार अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण कानूनी प्रक्रिया में असमानता देखने को मिलती है, जिसे दूर करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में वर्तमान स्थिति की बात करें तो उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने UCC को लागू किया है। इसके अलावा कुछ अन्य राज्यों में इस दिशा में विधायी या प्रारंभिक प्रक्रिया जारी है। गोवा में पहले से ही एक सिविल कोड लागू है, जो ऐतिहासिक रूप से पुर्तगाली शासन के समय से चला आ रहा है। हालांकि उसे पूर्ण आधुनिक UCC का मॉडल नहीं माना जाता, लेकिन वह एक समान नागरिक कानून व्यवस्था का उदाहरण जरूर है। छत्तीसगढ़ में गठित यह समिति आने वाले महीनों में विभिन्न स्तरों पर अध्ययन और परामर्श करेगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, जिसके बाद विधानसभा में इसे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:22 +0530</pubDate>
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                <title>Rahul Gandhi Chhattisgarh Visit: राहुल के दौरे पर भाजपा-कांग्रेस में तीखी जंग</title>
                                    <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी के 4 घंटे के दौरे पर सियासी घमासान। भाजपा ने कसा तंज, तो कांग्रेस ने भाजपा विधायक को बताया मानसिक रूप से बीमार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/rahul-gandhi-visit-chhattisgarh-heated-battle-between-bjp-and-congress/article-56564"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi’s-chhattisgarh-visit-sparks-political-slugfest;-bjp-swipes-at-&#039;alula-gold&#039;-pitch,-congress-labels-mla-&#039;mentally-ill&#039;-(1).jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे से पहले राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। गांधी रायपुर जिले के अभनपुर में आयोजित 10 दिवसीय आवासीय पार्टी प्रशिक्षण शिविर में लगभग चार घंटे बिताने वाले हैं, जहां वे आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार करने के लिए जिला और शहर अध्यक्षों के साथ सीधे संवाद करेंगे।</p>
<p dir="ltr">आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, कांग्रेस नेता दोपहर 2:00 बजे रायपुर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और शाम 6:00 बजे दिल्ली के लिए वापस रवाना हो जाएंगे। हालांकि, उनके आगमन से कुछ घंटे पहले ही दोनों खेमों की ओर से की गई तीखी बयानबाजी के कारण राज्य का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है।</p>
<h3 dir="ltr">'क्या वे आलू से सोना निकालने की ट्रेनिंग देंगे?'</h3>
<p dir="ltr">राहुल गांधी के इस दौरे पर कड़ा प्रहार करते हुए रायपुर से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस प्रशिक्षण सत्र के असली मकसद पर सवाल उठाए हैं। मिश्रा ने कहा, "भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में उनका स्वागत है। लेकिन यह मत भूलिए कि ये वही भगवान राम हैं जिनके अस्तित्व पर कभी राहुल गांधी और उनकी पार्टी ने सवाल उठाए थे।"</p>
<p dir="ltr">भाजपा विधायक ने आगे सवाल किया कि गांधी आखिर कार्यकर्ताओं को किस बात की ट्रेनिंग देने आ रहे हैं। मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा, "वे यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्या सिखाने आ रहे हैं? क्या वे भ्रष्टाचार का कोई नया कोर्स कराने आए हैं, या फिर उन्हें आलू से सोना निकालने का अपना पुराना फॉर्मूला सिखाएंगे?"</p>
<p dir="ltr">भाजपा के इस हमले को और धार देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अंबिकापुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री साय ने कहा, "राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां उनकी पार्टी के हश्र को हर कोई अच्छी तरह जानता है।"</p>
<h3 dir="ltr">'मिश्रा मानसिक रूप से बीमार हैं, कांग्रेस कराएगी उनका इलाज'</h3>
<p dir="ltr">भाजपा के इस तीखे वार पर कांग्रेस ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया और भाजपा विधायक पर सीधा व्यक्तिगत हमला बोल दिया। पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने दावा किया कि पुरंदर मिश्रा अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है।</p>
<p dir="ltr">उपाध्याय ने कहा, "पुरंदर मिश्रा मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। अगर भाजपा उनके इलाज का खर्च नहीं उठा सकती, तो कांग्रेस आगे बढ़कर उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार है।"</p>
<p dir="ltr">मिश्रा को 'एक्सीडेंटल विधायक' करार देते हुए उपाध्याय ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता केवल अपना राजनीतिक कद बढ़ाने और क्षेत्रीय मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह की बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं।</p>
<h3 dir="ltr">बंद कमरे के भीतर: संगठन को दोबारा खड़ा करने की कवायद</h3>
<p dir="ltr">हाई-डेसिबल राजनीतिक बयानबाजी के बीच, अभनपुर के चांदी मोड़ के पास एक निजी परिसर में शुक्रवार से शुरू हुआ 10 दिवसीय 'संगठन सृजन' आवासीय शिविर कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक कदम माना जा रहा है। तैयारियों का जायजा लेने पहले ही रायपुर पहुंच चुके प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि एक "अत्यंत अहंकारी" भाजपा सरकार का मुकाबला करने के लिए कई राज्यों में जमीनी स्तर पर ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">"यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं है। नए नियुक्त जिला और शहर अध्यक्षों को फील्डवर्क सौंपा गया है, जिसमें गांवों में रात बिताना, मनरेगा के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और नशे की लत जैसी स्थानीय सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का अध्ययन करना शामिल है।" — कांग्रेस पार्टी सूत्र</p>
<p dir="ltr">शिविर की दिनचर्या सुबह योग और मार्शल आर्ट सत्रों के साथ शुरू होती है, जिसके बाद राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। इन सत्रों में डेटा प्रबंधन, बूथ स्तर का समन्वय, मीडिया हैंडलिंग और भाजपा के खिलाफ मजबूत नैरेटिव तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उम्मीद है कि राहुल गांधी आज दोपहर बंद कमरे में होने वाले इस सत्र के दौरान राज्य नेतृत्व को आगामी स्थानीय निकाय और संस्थागत चुनावों से निपटने का अंतिम चुनावी मंत्र देंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम हाउस हाई लेवल बैठक पर साय का बयान, अटकलों पर जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[रात 10 बजे से डेढ़ बजे तक चली बैठक, मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा पर सीएम साय ने दी सफाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a36398f862d5/article-56466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-sai-statement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सीएम हाउस रायपुर में हुई सीएम हाउस हाई लेवल बैठक एक बार फिर सियासी हलकों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वरिष्ठ मंत्रियों और संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ लंबी बैठक की, जो रात करीब 10 बजे शुरू होकर 1:40 बजे तक चली। इस बैठक के बाद जहां राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया, वहीं मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यह कोई आपात बैठक नहीं थी और न ही इसे किसी तात्कालिक संकट के तौर पर देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार लगातार अपने कामकाज की समीक्षा कर रही है और यह बैठक भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा थी। उन्होंने बताया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गई है। “12 साल विश्वास के, विकास के और 12 साल बेमिसाल” जैसे अभियानों के तहत सभी मंत्रियों और विधायकों को जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनकी प्रगति पर चर्चा हुई है। इसी क्रम में विभागीय कामकाज का फीडबैक भी लिया गया। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक को लेकर जो भी अटकलें लगाई जा रही हैं, उनका कोई ठोस आधार नहीं है और यह पूरी तरह सामान्य समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा था।</p>
<p style="text-align:justify;">रात करीब साढ़े पांच घंटे चली इस सीएम हाउस हाई लेवल बैठक में उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और संगठन के कई बड़े नेता मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सरकार के अब तक के ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा की गई और आने वाले समय की रणनीति पर भी चर्चा हुई। विभागों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और जमीनी स्तर पर कामकाज की स्थिति पर मंत्रियों से सीधा फीडबैक लिया गया। इस दौरान कई अहम योजनाओं की गति और क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठे और सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। इधर बैठक के समय और देर रात तक चलने को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हो गई थीं। कई स्तरों पर यह चर्चा रही कि सरकार अपने मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है, हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है। बैठक में मौजूद नेताओं ने भी इसे नियमित समीक्षा बैठक बताया, लेकिन अंदरखाने चर्चाएं अभी भी शांत नहीं हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम साय ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र के कुछ विधायकों का एक दल छत्तीसगढ़ दौरे पर आया था और उन्होंने सीएम हाउस में मुलाकात की। यह दल यहां धान खरीदी की प्रक्रिया और राज्य की कृषि व्यवस्था को समझने के लिए आया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों का इस तरह अध्ययन के लिए आना सकारात्मक संकेत है और इससे छत्तीसगढ़ की नीतियों की पहचान बढ़ती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की दिशा में काम चल रहा है और इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन इसे इस मानसून सत्र में लाना संभव नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह एक लंबी प्रक्रिया है और सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा। रायपुर स्थित सीएम हाउस में हुई यह देर रात की बैठक भले ही सरकार की नियमित समीक्षा प्रक्रिया बताई जा रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने लगातार निकाले जा रहे हैं। खासकर जिस तरह से वरिष्ठ मंत्रियों और संगठन के नेताओं की मौजूदगी रही और देर रात तक मंथन चला, उसने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साय कैबिनेट की अहम बैठक आज, ट्रांसफर नीति और CM हेल्पलाइन पर फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[नवा रायपुर में हुई बैठक में तबादलों से रोक हटाने, किसानों से जुड़े प्रस्तावों और CM हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत पर चर्चा, कई बड़े फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/important-meeting-of-sai-cabinet-today-decision-on-transfer-policy/article-55392"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sai-cabinet-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक पर पूरे प्रदेश की नजर बनी रही। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित इस बैठक को सरकार की प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा तबादलों पर लगी रोक और नई ट्रांसफर नीति को लेकर रही। लंबे समय से अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही तबादलों का रास्ता खोल सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नई स्थानांतरण नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले शुरू हो सकते हैं।</p>
<p>प्रदेश में पिछले कुछ समय से तबादलों पर लगी रोक के कारण कई विभागों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे। कई कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से अपनी पसंद या जरूरत के अनुसार स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कैबिनेट का यह फैसला प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है। अधिकारियों के अनुसार नई नीति में पारदर्शिता और जरूरत आधारित स्थानांतरण को प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। बैठक शुरू होने से पहले मंत्रालय परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा रही और विभिन्न विभागों के कर्मचारी फैसले का इंतजार करते नजर आए।</p>
<p>बैठक के एजेंडे में खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को भी अहम स्थान दिया गया। आगामी खरीफ विपणन वर्ष को देखते हुए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके अलावा कस्टम मिलिंग नीति और किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए सरकार खेती से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दे रही है। सूत्रों के मुताबिक किसानों के हित में कुछ नए प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिनकी घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है।</p>
<p>इस बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत रही। सुशासन तिहार के समापन के बाद सरकार ने लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए इस नई व्यवस्था को लागू करने का फैसला किया है। अब आम नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर अपनी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। इसके साथ ही वेब पोर्टल, मोबाइल एप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा।</p>
<p>सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिकायतें और सुझाव प्राप्त हुए थे। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैठक में इन फीडबैक पर भी चर्चा हुई है। सरकार विभिन्न जिलों से मिले सुझावों का अध्ययन कर प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक लोगों ने सड़क, बिजली, पानी, राजस्व और अन्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। ऐसे में सरकार इन समस्याओं के समाधान को लेकर भी रणनीति तैयार कर सकती है।</p>
<p>बैठक में कर्मचारियों, उद्योगों और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुछ नई पहल पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि बैठक समाप्त होने तक सभी फैसलों की आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई थी, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे काफी अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि आज लिए जाने वाले फैसले आने वाले महीनों में प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं की दिशा तय कर सकते हैं।</p>
<p>सरकार एक ओर जहां प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता देने के संकेत दे रही है। यही वजह है कि साय कैबिनेट की इस बैठक को केवल नियमित सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के मंच के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक निर्णयों पर टिकी हुई है, जिनका असर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, किसानों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 12:56:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 9 जून से शुरू होगी CM हेल्पलाइन 1076, एक कॉल पर दर्ज होगी शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे शुभारंभ, कॉल, व्हाट्सएप, मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cm-helpline-1076-will-start-in-chhattisgarh-from-june-9/article-54827"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ की जनता के लिए प्रशासनिक सेवाओं और शिकायत निवारण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार 9 जून से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के जरिए आम नागरिक अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे और उनके समाधान की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस हेल्पलाइन सेवा का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करेगी तथा शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण में मदद करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य शासन के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार शिकायतों के निपटारे में देरी होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई हेल्पलाइन व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। हेल्पलाइन के संचालन को लेकर मंत्रालय स्थित महानदी भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों को शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने की। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल एक शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना सभी विभागों की जिम्मेदारी होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा विकसित नई शिकायत प्रबंधन प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो वह स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगी। यह प्रक्रिया एल-1 से एल-4 स्तर तक लागू होगी। इससे शिकायतों की लगातार निगरानी संभव होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों के लंबित रहने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता शिकायतकर्ता का फीडबैक है। शिकायत के निराकरण के बाद संबंधित व्यक्ति से प्रतिक्रिया ली जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो मामले की पुनः समीक्षा की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत बंद करना नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू होने के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को आसानी होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार माध्यम का चयन कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नागरिक अपनी शिकायत की स्थिति को भी ट्रैक कर सकेंगे। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों में जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायतों के डेटा का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां सबसे अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं। यदि इस हेल्पलाइन का प्रभावी संचालन किया गया तो यह शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई राज्यों में इसी तरह की हेल्पलाइन सेवाओं ने नागरिकों को त्वरित राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी मॉडल को अपनाकर प्रशासनिक सेवाओं को और अधिक जनहितैषी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। अक्सर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब वे एक फोन कॉल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसके समाधान की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के शुभारंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगी। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के जरिए सुशासन की अवधारणा को और मजबूत करेगी। 9 जून से शुरू होने वाली यह सेवा आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:47:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नक्सलवाद कमजोर पड़ते ही छत्तीसगढ़ में टाटा की एंट्री, पर्यटन सेक्टर में 500 करोड़ निवेश की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[बस्तर और सरगुजा में लक्जरी रिसॉर्ट्स, होटल और इको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/tatas-entry-in-chhattisgarh-as-soon-as-naxalism-weakens-preparation/article-54465"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/chhattisgarh-tourism.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक नक्सलवाद की वजह से पिछड़े माने जाने वाले इलाकों में अब विकास और पर्यटन की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। राज्य सरकार अब बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों को देश के बड़े पर्यटन नक्शे पर लाने की तैयारी में है। इसी बीच टाटा समूह की होटल कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल) ने राज्य में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश करने में रुचि दिखाई है। माना जा रहा है कि यह निवेश सीधे तौर पर होटल, रिसॉर्ट, इको टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कंपनी के प्रतिनिधियों ने अपनी योजना साझा की।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी है। ऐसे में अब पर्यटन सेक्टर को मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सुंदरता, जंगलों, जलप्रपातों और आदिवासी संस्कृति से भरपूर राज्य है, लेकिन अब तक इसे उस स्तर की पहचान नहीं मिल पाई जिसकी यह हकदार है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में बस्तर, सरगुजा और धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड की एक हाई लेवल टीम जल्द ही बस्तर, सरगुजा, वन क्षेत्रों और राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों का दौरा करेगी। टीम यहां पर्यटकों की आवाजाही, सड़क संपर्क, स्थानीय सुविधाओं और जमीन की उपलब्धता का आकलन करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे लक्जरी होटल, रिसॉर्ट, मोटल और विला विकसित करने की योजना तैयार होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे न सिर्फ पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बस्तर और सरगुजा को लेकर सबसे ज्यादा फोकस इसलिए किया जा रहा है क्योंकि नई पर्यटन और औद्योगिक नीति में इन इलाकों के लिए कई तरह की छूट दी गई है। नियमों के मुताबिक रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे शहरों में पांच सितारा होटल बनाने के लिए कम से कम 150 कमरों की जरूरत होती है, लेकिन बस्तर और सरगुजा के सुदूर इलाकों में सिर्फ 50 कमरों के तीन सितारा लक्जरी रिसॉर्ट्स बनाने की अनुमति दी जा रही है। सरकार का तर्क है कि इससे पर्यावरण पर ज्यादा असर भी नहीं पड़ेगा और निवेशक भी आसानी से आगे आएंगे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">नई नीति में टैक्स छूट और अतिरिक्त सब्सिडी का भी प्रावधान रखा गया है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश प्रक्रिया को पहले की तुलना में ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया है। 500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश करने वाली कंपनियों को बी-स्पोक पॉलिसी के तहत अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक सरकार टाटा समूह को छह अलग-अलग प्राइम लोकेशन पर जमीन का विकल्प भी दे रही है। इनमें मैनपाट, सिरपुर, अमृतधारा जलप्रपात, खुटाघाट, कोदार जलाशय और बलौदाबाजार क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">पर्यटन विभाग का मानना है कि बस्तर और सरगुजा में पहले से मौजूद सरकारी रिसॉर्ट्स को भी बड़े होटल समूहों के जरिए नए रूप में विकसित किया जा सकता है। इनमें चित्रकोट का दंडामी रिसॉर्ट, मैनपाट का कर्मा एथनिक रिसॉर्ट और कोंडागांव का धंकुल एथनिक रिसॉर्ट प्रमुख हैं। ये सभी जगहें प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय संस्कृति की वजह से पहले से पर्यटकों के बीच पहचान रखती हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण यहां बड़े स्तर पर पर्यटन नहीं बढ़ पाया। अब सरकार चाहती है कि निजी निवेश के जरिए इन जगहों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर वैली और सरगुजा के मैनपाट जैसे इलाकों को इको टूरिज्म के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। वहीं दंतेवाड़ा, रतनपुर और सूरजपुर जैसे धार्मिक स्थलों को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर होटल और कनेक्टिविटी बेहतर होती है तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">हालांकि इस पूरी योजना को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि पर्यटन विकास के नाम पर आदिवासी इलाकों की मूल संस्कृति और जमीन प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि सभी परियोजनाएं पर्यावरणीय नियमों को ध्यान में रखकर ही तैयार की जाएंगी और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाएगा।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">राज्य में पहले कई बार पर्यटन परियोजनाओं को निवेश नहीं मिल पाया था। कुछ रिसॉर्ट्स के टेंडर लगातार फ्लॉप होते रहे। लेकिन अब नियमों में ढील और सुरक्षा स्थिति बेहतर होने के बाद बड़े कॉर्पोरेट समूहों की रुचि बढ़ी है। माना जा रहा है कि अगर टाटा समूह की यह योजना जमीन पर उतरती है तो छत्तीसगढ़ के पर्यटन सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खासकर बस्तर और सरगुजा जैसे इलाके, जो कभी नक्सल हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब पर्यटन और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:24:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जगदलपुर में अमित शाह की मुख्यमंत्रियों के साथ होगी बड़ी बैठक, 4 राज्यों के CM पहुंचे बस्तर</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक, अमित शाह के साथ यूपी, MP, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के CM शामिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/amit-shah-will-have-a-big-meeting-with-the-chief/article-53738"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/amit-shah-jagdalpur-bastar-central-zonal-council.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन काफी महत्वपूर्ण है। जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल बैठक हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें चार राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हैं। यह बैठक एक निजी होटल में हो रही है और इसकी अध्यक्षता खुद अमित शाह करेंगे। बस्तर जैसे क्षेत्र में इस स्तर की बैठक को लेकर सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिल रहे हैं। शहर के कई हिस्सों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में योगी आदित्यनाथ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोहन यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुष्कर सिंह धामी और विष्णु देव साई शामिल हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह जगदलपुर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि बाकी मुख्यमंत्री सोमवार रात को ही पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर भाजपा के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बैठक की तैयारियों को लेकर प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आम लोगों की आवाजाही पर भी कुछ क्षेत्रों में असर देखने को मिल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के लिए चर्चा में रहा है। ऐसे में यहां चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">; <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक हलकों में इसे एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ये दिखाने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब धीरे-धीरे संघर्ष वाले क्षेत्र की छवि से बाहर निकल रहा है और विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक गतिविधियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और निवेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन इलाकों में पहले बड़े नेताओं के दौरे सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां अब ऐसी बैठकें होना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में कानून व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच समन्वय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा विवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर रहने की संभावना है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कई बड़े नक्सली कमांडरों की गिरफ्तारी या मौत की खबरें आई हैं। केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अभी तेज किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने बस्तर में आदिवासी समाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और सुरक्षा के मुद्दों पर कई बातें की थीं। उन्होंने कहा था कि पिछले कई दशकों में बस्तर को जो नुकसान हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। गुंडाधुर की धरती का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस इलाके को अब नई पहचान देने की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने भी बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने कहा कि जब केंद्र सरकार खुद ईंधन बचाने और वर्क फ्रॉम होम की बात करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल भी की जा सकती थी। उनका कहना था कि चार राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री अलग-अलग विमानों से आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लाखों रुपए खर्च हुए। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेताओं का कहना है कि बस्तर में इस तरह की बैठक होना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे यहां विकास की नई तस्वीर सामने आएगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 11:05:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण पास न होने पर भड़के CM साय, बोले- विपक्ष ने तोड़ी 70 करोड़ महिलाओं की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोकसभा में इस विधेयक के पारित नहीं होने पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश की करीब 70 करोड़ महिलाओं की उम्मीदें टूट गई हैं और इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक भले अभी पारित नहीं हो पाया हो, लेकिन भाजपा का संकल्प कायम है और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cm-sai-furious-over-womens-reservation-not-being-passed-said/article-51649"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/nari-shakti-bill-cg-cm-vishnu-deo-sai.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोकसभा में इस विधेयक के पारित नहीं होने पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश की करीब 70 करोड़ महिलाओं की उम्मीदें टूट गई हैं और इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक भले अभी पारित नहीं हो पाया हो, लेकिन भाजपा का संकल्प कायम है और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का प्रयास जारी रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह विधेयक पेश किया था। उनका दावा है कि यह पहल देश की आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी में बराबरी का अवसर देने के लिए की गई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक कारणों से इस विधेयक का विरोध किया और इसे पारित नहीं होने दिया। साय के मुताबिक, यह रुख महिलाओं के हितों के खिलाफ है और जनता इसे समझ रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विपक्ष पर आरोप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण की बात करती रही है, लेकिन जब इसे कानून बनाने का अवसर आया तो पीछे हट गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस “फूट डालो और राज करो</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">”</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">की नीति पर चल रही है और परिसीमन तथा अन्य मुद्दों को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">साय ने यह भी कहा कि विपक्ष ने उत्तर-दक्षिण विभाजन और धर्म आधारित आरक्षण जैसे मुद्दों को उठाकर विधेयक को बाधित करने की कोशिश की। उनके अनुसार, यह राजनीतिक रणनीति महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करने वाली है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भाजपा का रुख</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करके कांग्रेस ने देश की महिलाओं का अपमान किया है। सिंह ने शाहबानो केस और ट्रिपल तलाक कानून जैसे पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के हितों के खिलाफ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी महिलाओं के अधिकारों की बात सामने आई, कांग्रेस ने ठोस कदम उठाने से परहेज किया। भाजपा का कहना है कि वह महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नारी शक्ति वंदन विधेयक को महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया था। यह लंबे समय से लंबित मुद्दा रहा है और अलग-अलग सरकारों के दौरान इस पर चर्चा होती रही है। हालांकि, राजनीतिक सहमति के अभाव में इसे कानून का रूप नहीं मिल सका।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रभाव और विश्लेषण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला आरक्षण का मुद्दा चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। देश की बड़ी महिला आबादी को देखते हुए यह विषय जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। सत्तापक्ष इसे अपने एजेंडे का अहम हिस्सा बना रहा है, जबकि विपक्ष प्रक्रिया और प्रावधानों को लेकर सवाल उठा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे क्या</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विधेयक पर गतिरोध के बीच केंद्र सरकार के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। भाजपा ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस कानून को पारित कराने के लिए प्रयास जारी रखेगी। वहीं, विपक्षी दल भी अपने रुख पर कायम हैं, जिससे आने वाले समय में संसद और सियासत दोनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:03:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर में किसान सम्मेलन: 24.28 लाख किसानों के खातों में 10,324 करोड़ जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे 263 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास; होली से पहले सहायता राशि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/kisan-sammelan-in-bilaspur-released-%E2%82%B910324-crore-in-the-accounts/article-47389"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/desh---2026-02-28t115920.594.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ में होली से पहले किसानों के लिए बड़ी वित्तीय राहत की घोषणा हुई है। राज्य सरकार शनिवार को बिलासपुर में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान 24.28 लाख किसानों के बैंक खातों में कुल 10,324.84 करोड़ रुपये की आदान सहायता राशि जारी करेगी। सम्मेलन बिल्हा ब्लॉक के ग्राम रहंगी स्थित खेल मैदान में आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय किसानों को संबोधित करेंगे और विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे।</p>
<p>सरकार के अनुसार, इस सहायता से खरीफ और रबी फसलों के लिए कृषि निवेश को मजबूती मिलेगी। बिलासपुर जिले के 1.25 लाख से अधिक किसानों को लगभग 494.38 करोड़ रुपये की राशि सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।</p>
<p>सम्मेलन के दौरान 263 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 89 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी प्रस्तावित है। इनमें ग्रामीण सड़कों का निर्माण, पुलों का उन्नयन, स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार, छात्रावास भवन और सिंचाई सुविधाओं के विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इन परियोजनाओं से आधारभूत संरचना मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी।</p>
<p>कार्यक्रम से पहले जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी की हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल और जनप्रतिनिधियों ने सभास्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा, पेयजल, विद्युत, पार्किंग और पंजीयन व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सम्मेलन में आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जाएं।</p>
<p>राज्य सरकार का दावा है कि कृषि सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वित्तीय सहायता से किसानों की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।</p>
<p>इस कार्यक्रम में केंद्रीय और राज्य स्तर के कई जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन ने बड़ी संख्या में किसानों की उपस्थिति को देखते हुए ब्लॉक स्तर पर समन्वय तंत्र बनाया है। पंचायत स्तर पर भी सूचना अभियान चलाकर किसानों को सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया है।</p>
<p>---------------------------------</p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 12:00:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Chhattisgarh Budget: बेटियों के 18 साल पूरे होने पर मिलेंगे 1.5 लाख रुपये, गरीबों और युवाओं के लिए बड़ा ऐलान, जानें बजट में और क्या मिला</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा पेश किए गए इस बजट को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट ने मंजूरी दी। बजट में बस्तर को एजुकेशन हब बनाने, नर्सिंग कॉलेज खोलने और नालंदा लाइब्रेरी स्थापित करने की घोषणा की गई है। बस्तर और सरगुजा के लिए बस सेवा, उद्योग निवेश और सड़क कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-budget-daughters-will-get-rs-15-lakh-on-completion/article-47141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/chhattisgarh-budget.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का आम बजट पेश कर दिया गया है। राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में 1.72 लाख करोड़ रुपये का व्यापक बजट पेश किया। इससे पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में बजट प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की उम्मीदों को साकार करने वाला बजट बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शिक्षा और युवाओं के लिए नई पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बजट में बस्तर को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की गई है। उच्च शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देने पर जोर दिया गया है। साथ ही कांकेर</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोरबा और महासमुंद में नर्सिंग कॉलेज स्थापित करने का प्रावधान किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे स्वास्थ्य शिक्षा को भी मजबूती मिलेगी। पांच नई नालंदा लाइब्रेरी के निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान कर अध्ययन संस्कृति को बढ़ावा देने की योजना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बस्तर और सरगुजा के लिए खास पैकेज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए हैं। दोनों संभागों के लिए बस सेवा शुरू करने हेतु 10 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आजीविका को सशक्त बनाने के लिए कृषि</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एग्रो फॉरेस्ट प्रोसेसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राइस मिल और पोल्ट्री फार्म जैसे उद्योगों में 100 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता तैयार किया गया है। डॉक्टरों की भर्ती और सड़क नेटवर्क के विस्तार के जरिए इन इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना बनाई गई है। रेलवे लाइन के विकास पर भी बल दिया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। आयुष्मान योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के इलाज के लिए भी 1500 करोड़ रुपये की रखे<span>  </span>गए हैं। मितानिन कल्याण निधि के लिए 350 करोड़ रुपये रखे गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग मिलेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महिला और सामाजिक कल्याण योजनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना में 8200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। निशुल्क बिजली योजना के लिए 354 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है। प्रदेश में 250 महतारी सदन बनाए जाएंगे। रानी दुर्गावती योजना के तहत बेटियों के 18 साल पूरे करने पर 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बेटियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षा मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंचाई परियोजनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री सड़क योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके अंतर्गत 36 सड़कों का विकास किया जाएगा। इंद्रावती क्षेत्र में मटनार और देउरगांव में बैराज निर्माण के लिए 24 करोड़ रुपये की लागत और 68 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। रायपुर में खाद परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कृषि क्षेत्र को तकनीकी सहयोग मिलेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पर्यटन और शहरी विकास</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैनपाट और जशपुर के कोतेबेरा क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि शहरों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुरक्षा और विश्वास का संदेश</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1500 बस्तर फाइटर्स के पद निकाले जाएंगे। यह कदम क्षेत्र में शांति और विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समग्र रूप से यह बजट ग्रामीण विकास</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सशक्तिकरण और आधारभूत ढांचे के विस्तार को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। सरकार ने विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।</span></span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi">-----------------------------------------</span></span></p>
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                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:58:38 +0530</pubDate>
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