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                <title>NarendraModi - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत दौरे पर जापान की पीएम सानाए ताकाइची, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची आज व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/grand-welcome-at-rashtrapati-bhavan-for-japanese-pm-sanae-takaichi/article-57629"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sanae-takaichi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के तीन दिवसीय भारत दौरे की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हुई, जहां उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे और उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/_japan-pm.jpg" alt="_Japan PM" width="1366" height="900"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अपने दौरे के दूसरे दिन सानाए ताकाइची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता में निवेश, व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऑटोमोबाइल उद्योग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई नए समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है।= इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आर्थिक सहयोग को नई गति देना माना जा रहा है। भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश अब इसे अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं। इसी उद्देश्य से जापान के 150 से अधिक उद्योगपति भारत-जापान बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि नए निवेश, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कई नई निवेश परियोजनाओं का रास्ता साफ हो सकता है। इस यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावित व्यवस्था को लेकर हो रही है। दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रुपए और जापानी येन में सीधे भुगतान की व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार का भुगतान बिना अमेरिकी डॉलर के सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जा सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक तेज और आसान हो जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी और उन्हीं के माध्यम से रुपए और येन में लेनदेन कर पाएंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली या अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/japan-pm-india-visit.jpg" alt="JAPAN PM INDIA VISIT" width="1366" height="1002"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में पहले भी सहमति बन चुकी है। वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के साझा विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। उसी दौरान भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी थी। अब दोनों देश उस योजना को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर जापान भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेशकों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है और अगले दस वर्षों में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, हाई-टेक रक्षा उद्योग, डिजिटल तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में किया जाएगा। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें से बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है, जिसमें जापानी शिनकानसेन तकनीक और वित्तीय सहयोग का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्रों में भी जापानी कंपनियां भारत में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे विषय भी इस यात्रा के दौरान प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>योग दिवस की तैयारियों के बीच कोलकाता का रेड रोड सात दिन बंद, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले बढ़ी सुरक्षा और तैयारियां, सड़क बंद होने पर अदालत पहुंचा मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/kolkatas-red-road-closed-for-seven-days-amid-preparations-for/article-56418"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kolkata-red-road.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों के बीच रेड रोड को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। 21 जून को होने वाले राष्ट्रीय स्तर के योग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना के चलते प्रशासन ने सुरक्षा और आयोजन संबंधी तैयारियां कई दिन पहले ही शुरू कर दी थीं। इसी सिलसिले में 14 जून से कोलकाता के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल रेड रोड को आम यातायात के लिए बंद कर दिया गया। सड़क बंद होने के कारण शहर के हजारों लोगों को रोजाना लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे असुविधा की शिकायतें सामने आने लगीं। मामला तब और चर्चा में आया जब इस निर्णय को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी गई। याचिका ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि रेड रोड शहर की प्रमुख सड़कों में से एक है और इसे लगातार कई दिनों तक बंद रखने से वकीलों, सरकारी कर्मचारियों, व्यवसायियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि यदि कार्यक्रम के लिए तैयारियां जरूरी थीं तो पूरी सड़क बंद करने के बजाय उसका एक हिस्सा खुला रखा जा सकता था। इससे लोगों को वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त दबाव का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जब तक रेड रोड बंद रहे, तब तक नागरिकों की सुविधा के लिए पर्याप्त वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सड़क को अनावश्यक रूप से बंद नहीं रखा जाना चाहिए और सामान्य यातायात जल्द बहाल किया जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद मामले पर आगे सुनवाई होगी। राज्य सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि योग दिवस का आयोजन केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है और यह एक बड़े स्तर का कार्यक्रम है। प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था और मंच निर्माण जैसे कार्यों के लिए पहले से तैयारी जरूरी थी। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि शहर में कई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं और लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए यातायात विभाग लगातार निगरानी कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर रेड रोड बंद किए जाने का विरोध जताया है। उनका कहना है कि शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क को इतने लंबे समय तक बंद रखना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कोई संतुलित समाधान निकाला जाना चाहिए था। हालांकि सरकार की ओर से इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा गया कि आयोजन राष्ट्रीय महत्व का है और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। योग दिवस कार्यक्रम को लेकर एक और विवाद सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की भागीदारी को लेकर सामने आया है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर कार्यक्रम में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि अदालत में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकारी आदेश में कहीं भी कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य नहीं बताया गया है। राज्य सरकार ने भी अदालत को स्पष्ट किया कि कर्मचारियों से केवल कार्यक्रम में भाग लेने का अनुरोध किया गया है और किसी पर दबाव नहीं डाला जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर प्रशासन आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार रेड रोड पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम में लगभग 35 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस और प्रशासनिक विभाग आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है और कई स्तरों पर निगरानी की जा रही है। विशेष आकर्षण के तौर पर हुगली नदी में भी बड़े पैमाने पर योग प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। जानकारी के मुताबिक 500 से अधिक नावों पर एक साथ योग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसके जरिए नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जा सकती है। सुंदरबन बोट्स एसोसिएशन के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। बताया जा रहा है कि नदी में नावों की विशेष संरचना बनाकर योग मुद्राओं का सामूहिक प्रदर्शन भी किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:40:14 +0530</pubDate>
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                <title>म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग भारत दौरे पर, पीएम मोदी से होगी अहम मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय यात्रा में द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/myanmar-president-min-aung-hlaing-will-have-an-important-meeting/article-54553"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/myanmar-president-india-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग भारत की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंच रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत में रहेंगे। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है, इसलिए इसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान उनके साथ म्यांमार सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों के अलावा राष्ट्रपति ह्लाइंग बोधगया और मुंबई का भी दौरा करेंगे।</p>
<p>भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों की सीमा भी आपस में जुड़ी हुई है, इसलिए सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे हमेशा से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की यह यात्रा कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का अवसर मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की "नेबरहुड फर्स्ट", "एक्ट ईस्ट" और "महासागर" नीति में म्यांमार की अहम भूमिका है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह दौरा विशेष महत्व रखता है।</p>
<p>यात्रा के दौरान 1 जून को नई दिल्ली में राष्ट्रपति ह्लाइंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि बैठक में सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग, कनेक्टिविटी परियोजनाओं, आर्थिक संबंधों और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों पक्ष आपसी व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों पर भी विचार कर सकते हैं। भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की दिशा में कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें म्यांमार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p>राष्ट्रपति ह्लाइंग अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया से करेंगे। बौद्ध धर्म से जुड़े इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का म्यांमार सहित कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए विशेष महत्व है। माना जा रहा है कि बोधगया दौरे के दौरान वे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग ले सकते हैं। इसके बाद नई दिल्ली में आधिकारिक बैठकों का दौर चलेगा। यात्रा के अंतिम चरण में वे मुंबई जाएंगे, जहां व्यापारिक मंच और उद्योग जगत से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। मुंबई में भारतीय और म्यांमार के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच संभावित निवेश और व्यापारिक सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p>यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और म्यांमार के बीच सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें लगातार जारी हैं। अप्रैल 2026 में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह म्यांमार गए थे और वहां राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात कर भारत की ओर से शुभकामनाएं दी थीं और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई संदेश भी उसी अवसर पर राष्ट्रपति को सौंपा गया था।</p>
<p>वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों में भारत और म्यांमार के बीच बेहतर तालमेल दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है। सीमा से जुड़े मुद्दों, अवैध गतिविधियों की रोकथाम, व्यापारिक मार्गों के विकास और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में म्यांमार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय भी दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हुए हैं।</p>
<p> इस यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। हालांकि किसी बड़े समझौते की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों को नई गति देने की संभावना जरूर जताई जा रही है। भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चाओं और संभावित फैसलों का असर दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सहयोग ढांचे पर भी पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:56 +0530</pubDate>
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