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                <title>म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग भारत दौरे पर, पीएम मोदी से होगी अहम मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय यात्रा में द्विपक्षीय संबंध, व्यापार, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/myanmar-president-min-aung-hlaing-will-have-an-important-meeting/article-54553"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/myanmar-president-india-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग भारत की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंच रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत में रहेंगे। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है, इसलिए इसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान उनके साथ म्यांमार सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों के अलावा राष्ट्रपति ह्लाइंग बोधगया और मुंबई का भी दौरा करेंगे।</p>
<p>भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों की सीमा भी आपस में जुड़ी हुई है, इसलिए सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे हमेशा से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की यह यात्रा कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का अवसर मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की "नेबरहुड फर्स्ट", "एक्ट ईस्ट" और "महासागर" नीति में म्यांमार की अहम भूमिका है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए यह दौरा विशेष महत्व रखता है।</p>
<p>यात्रा के दौरान 1 जून को नई दिल्ली में राष्ट्रपति ह्लाइंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि बैठक में सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग, कनेक्टिविटी परियोजनाओं, आर्थिक संबंधों और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों पक्ष आपसी व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों पर भी विचार कर सकते हैं। भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की दिशा में कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें म्यांमार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p>राष्ट्रपति ह्लाइंग अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया से करेंगे। बौद्ध धर्म से जुड़े इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का म्यांमार सहित कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए विशेष महत्व है। माना जा रहा है कि बोधगया दौरे के दौरान वे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग ले सकते हैं। इसके बाद नई दिल्ली में आधिकारिक बैठकों का दौर चलेगा। यात्रा के अंतिम चरण में वे मुंबई जाएंगे, जहां व्यापारिक मंच और उद्योग जगत से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। मुंबई में भारतीय और म्यांमार के कारोबारी प्रतिनिधियों के बीच संभावित निवेश और व्यापारिक सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p>यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और म्यांमार के बीच सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें लगातार जारी हैं। अप्रैल 2026 में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह म्यांमार गए थे और वहां राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। उस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात कर भारत की ओर से शुभकामनाएं दी थीं और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई संदेश भी उसी अवसर पर राष्ट्रपति को सौंपा गया था।</p>
<p>वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थितियों में भारत और म्यांमार के बीच बेहतर तालमेल दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकता है। सीमा से जुड़े मुद्दों, अवैध गतिविधियों की रोकथाम, व्यापारिक मार्गों के विकास और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने में म्यांमार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषय भी दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हुए हैं।</p>
<p> इस यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। हालांकि किसी बड़े समझौते की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों को नई गति देने की संभावना जरूर जताई जा रही है। भारत और म्यांमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को देखते हुए यह दौरा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चाओं और संभावित फैसलों का असर दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सहयोग ढांचे पर भी पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:56 +0530</pubDate>
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