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                <title>UnitedStates - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-retaliatory-attack-on-american-bases-increases-tension-in-the/article-55550"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान की ओर से दावा किया गया कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल 21 हमले किए गए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि ईरान नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर टिक गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास उसके कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल थे। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और ताजा हमला उसी रणनीति का हिस्सा था। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत उस घटना के बाद और बढ़ गई जब होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर समुद्र में गिर गया था। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। ट्रम्प ने कहा था कि हेलिकॉप्टर को ईरान समर्थित ताकतों ने निशाना बनाया और अमेरिका इस कार्रवाई का जवाब जरूर देगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि ईरान ने हेलिकॉप्टर गिराने में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका ने हेलिकॉप्टर हादसे के कुछ समय बाद ही जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य संभावित खतरों को समाप्त करना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती चली गई। अब ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी राजनीति में भी ईरान मुद्दा प्रमुख बन गया है। हाल ही में आयोजित एक रिपब्लिकन रैली में ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर अमेरिका "पूरी जीत" की घोषणा कर सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि क्षेत्र में स्थिरता लौटने के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने हाल ही में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि हालिया सैन्य कार्रवाई केवल शुरुआत थी और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्रीय शक्तियां भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान अमेरिका और इजराइल के रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों में कुछ मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प ने इजराइली नेतृत्व को संघर्ष को और अधिक न बढ़ाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव नियंत्रण से बाहर हुआ तो इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।  बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए के फंड का प्रस्ताव, परमाणु समझौते पर नए दावे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की चर्चा तेज, ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम पर सहमति का दावा किया, तेहरान ने किया खंडन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/fund-proposal-of-rs-28-lakh-crore-to-iran-new/article-54559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-reconstruction-fund.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते में ईरान को 300 अरब डॉलर यानी करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस आर्थिक पैकेज के तहत अमेरिकी कंपनियों को भी ईरान में निवेश की अनुमति मिल सकती है। हालांकि समझौते को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आई जानकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिस पर पिछले कुछ समय से विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। एक ईरानी अधिकारी ने इसे रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताते हुए कहा कि यदि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो ईरान को आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। वर्षों से प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकरावों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह फंड बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार संभावित समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो अमेरिका कुछ आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि ट्रम्प के इन दावों को ईरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने स्पष्ट कहा कि परमाणु मुद्दे पर इस समय किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं, वे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। इसके अलावा ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के किसी मसौदे में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक बयानों और बंद कमरे में चल रही वार्ताओं के बीच अंतर होना असामान्य नहीं है। अक्सर ऐसे संवेदनशील समझौतों में अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग संदेश देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रम्प ने कहा कि संभावित समझौते के बाद इस क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जा सकती है और जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की किसी टोल व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका के प्रति अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि तेहरान केवल बयानों पर नहीं बल्कि वास्तविक कार्रवाई पर भरोसा करता है। उनके अनुसार जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में ठोस बदलाव नहीं दिखाता, तब तक ईरान भी किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है। यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे अविश्वास को दर्शाता है, जो वर्षों से विभिन्न विवादों के कारण बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 24 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई। ईरान का कहना है कि समुद्री यातायात को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालांकि पश्चिमी देशों की ओर से लगातार इस क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>क्षेत्रीय हालात को और जटिल बनाते हुए इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में नई चेतावनी जारी की है। इजराइली सेना का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ संभावित अभियान की तैयारी कर रही है और नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:01 +0530</pubDate>
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