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                <title>इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा, किराए बढ़ाने के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[महंगे फ्यूल, रुपये की कमजोरी और परिचालन चुनौतियों से बढ़ा दबाव, यात्रियों पर पड़ सकता है अतिरिक्त बोझ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/indigos-loss-of-%E2%82%B9-2536-crore-in-the-fourth-quarter/article-54572"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/indigo-q4-loss-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इंडिगो एयरलाइन की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं और इस बार आंकड़ों ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन को जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में 2,536 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 3,068 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया था। एक साल के भीतर मुनाफे से घाटे में पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि एविएशन सेक्टर इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। हालांकि कंपनी का कुल कारोबार बढ़ा है, लेकिन बढ़ती लागत और बाहरी आर्थिक परिस्थितियों ने मुनाफे की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। इंडिगो ने साफ संकेत दिए हैं कि बढ़ती फ्यूल लागत का असर अब यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है और आने वाले समय में हवाई किरायों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के मुताबिक घाटे की सबसे बड़ी वजह एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ती कीमतें रहीं। इसके अलावा भारतीय रुपए में आई कमजोरी ने भी कंपनी के खर्च को बढ़ाया। एयरलाइन उद्योग में विमान लीज, मेंटेनेंस और कई अन्य भुगतान डॉलर में किए जाते हैं, ऐसे में रुपए की गिरावट सीधे लागत बढ़ाती है। इस तिमाही में कंपनी पर लगभग 250 करोड़ रुपए का एकमुश्त शुल्क भी आया, जिससे वित्तीय परिणाम और प्रभावित हुए। इन चुनौतियों के बावजूद इंडिगो का परिचालन राजस्व बढ़कर 22,438 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 22,152 करोड़ रुपए था। यानी यात्रियों की मांग बनी रही, लेकिन बढ़ती लागत ने कमाई का बड़ा हिस्सा खा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का असर पूरी दुनिया के एविएशन सेक्टर पर दिखाई दे रहा है। इंडिगो ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई अस्थिरता के कारण जेट फ्यूल महंगा हुआ है। ऐसे हालात में एयरलाइन अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर किरायों को समायोजित करने की तैयारी कर रही है। कंपनी का मानना है कि यदि लागत लगातार बढ़ती रही तो उसका कुछ हिस्सा टिकट कीमतों में शामिल करना जरूरी होगा। इसका असर आने वाले महीनों में यात्रियों को महसूस हो सकता है, खासकर व्यस्त यात्रा सीजन के दौरान।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच इंडिगो अब फ्यूल हेजिंग की रणनीति पर भी विचार कर रही है। यह एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसके जरिए एयरलाइंस भविष्य की ईंधन कीमतों को पहले से तय करके अचानक बढ़ने वाले खर्च से खुद को बचाने की कोशिश करती हैं। दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस लंबे समय से इस मॉडल का इस्तेमाल कर रही हैं। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ईंधन लागत सबसे बड़ा अनिश्चित कारक बनी हुई है और जोखिम कम करने के लिए विभिन्न विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है। यदि यह रणनीति लागू होती है तो भविष्य में कीमतों में अचानक उछाल का असर कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी ने वित्तीय मोर्चे पर एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इंडिगो के बोर्ड ने लगभग 450 मिलियन डॉलर के प्रीपेमेंट को मंजूरी दी है। यह राशि उसकी सहायक कंपनी इंटरग्लोब एविएशन फाइनेंशियल सर्विसेज को दी जाएगी। इस फंड का उपयोग विमान, इंजन और अन्य एविएशन उपकरण खरीदने में किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे कंपनी धीरे-धीरे अपने खुद के एविएशन एसेट्स बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगी और लंबे समय में लीज पर निर्भरता कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा कि बीता वित्त वर्ष बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन इसके बावजूद कारोबार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। उनके अनुसार कंपनी की क्षमता में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल आय में छह प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और एकमुश्त खर्चों को अलग कर दिया जाए तो कंपनी ने लगभग 7,500 करोड़ रुपए का लाभ कमाया है। प्रबंधन का दावा है कि इंडिगो की बैलेंस शीट मजबूत है और कंपनी के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिचालन आंकड़ों में कुछ कमजोरी भी दिखाई दी है। तिमाही के दौरान यात्रियों की संख्या 1.1 प्रतिशत घटकर 31.6 मिलियन रह गई। प्रति किलोमीटर कमाई यानी यील्ड में भी 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह 5.20 रुपए पर आ गई। वहीं पैसेंजर लोड फैक्टर 85.8 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की तुलना में कम है। इसका मतलब है कि उड़ानों में सीटों की भराव क्षमता थोड़ी घटी है। फिर भी एविएशन उद्योग के मानकों के अनुसार यह आंकड़ा अभी भी मजबूत माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">शेयर बाजार में भी नतीजों से पहले दबाव देखने को मिला। इंटरग्लोब एविएशन का शेयर कारोबार के अंत में गिरावट के साथ बंद हुआ। पिछले छह महीनों में शेयर में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई है। हालांकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण अब भी 1.71 लाख करोड़ रुपए के आसपास बना हुआ है, जो इसकी मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:57:02 +0530</pubDate>
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