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                <title>WomenEmpowerment - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ग्वालियर में 'शक्ति दीदी' अभियान का विस्तार, पांच और महिलाएं बनेंगी फ्यूल डिलीवरी वर्कर</title>
                                    <description><![CDATA[जिला प्रशासन की पहल से 'शक्ति दीदी' की संख्या बढ़कर 123 होगी, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48ba035f322/article-57863"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shakti-didi-campaign.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्वालियर में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन का "शक्ति दीदी" अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में शनिवार, 5 जुलाई को पांच और महिलाओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। नई नियुक्तियों के बाद जिले में "शक्ति दीदी" के रूप में काम करने वाली महिलाओं की संख्या 118 से बढ़कर 123 हो जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में आत्मविश्वास के साथ अपनी पहचान भी बना सकें। इस अभियान के तहत महिलाओं को शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलीवरी वर्कर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। शुरुआत में इस पहल को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं, लेकिन अब यह अभियान महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर सामने आ रहा है। प्रशासन का मानना है कि रोजगार के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर रुचिका चौहान के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। प्रशासन की योजना है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाए ताकि उन्हें स्थायी आय का साधन मिल सके। शनिवार को होने वाले कार्यक्रम में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर महिलाओं को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान दोपहर 12 बजे कम्पू स्थित जैन मोटर्स पेट्रोल पंप पहुंचेंगी, जहां हेमलता, ललिता और प्रियंका को फ्यूल डिलीवरी वर्कर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। वहीं वीरपुर स्थित गंगा फिलिंग स्टेशन पर अपर जिला दंडाधिकारी सी.बी. प्रसाद आरती बघेल को "शक्ति दीदी" के रूप में कार्यभार सौंपेंगे। इसके अलावा सिंहपुर रोड, मुरार स्थित मां पेट्रोलियम पर संयुक्त कलेक्टर जुही गर्ग मनीषा को इस अभियान से जोड़ेंगी। प्रशासन के अनुसार सभी महिलाओं को संबंधित पेट्रोल पंपों पर आवश्यक प्रशिक्षण और कार्य से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">"शक्ति दीदी" अभियान की शुरुआत महिलाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। आमतौर पर पेट्रोल पंपों पर पुरुष कर्मचारियों की संख्या अधिक देखने को मिलती थी, लेकिन अब इस अभियान के माध्यम से महिलाएं भी इस क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि इन महिलाओं ने अपने कार्य के दौरान अनुशासन, ईमानदारी और ग्राहक सेवा के मामले में सकारात्मक उदाहरण पेश किए हैं। यही कारण है कि अभियान को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। जिन महिलाओं को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। नियमित रोजगार मिलने से उनके परिवारों की आय बढ़ी है और वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला प्रशासन का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना सबसे जरूरी कदम है। इसी सोच के साथ "शक्ति दीदी" अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और समाज में उनकी भूमिका पहले से अधिक मजबूत हुई है। कई महिलाएं अब अपने परिवार की मुख्य कमाने वाली सदस्य बन चुकी हैं। इसके साथ ही समाज में भी महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है और लोग उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर देने की आवश्यकता को समझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण और सम्मानजनक रोजगार मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। पेट्रोल पंप जैसे कार्यस्थलों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसी बदलाव का संकेत है। जिला प्रशासन भविष्य में भी इस अभियान का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को इसका लाभ मिल सके। प्रशासन का कहना है कि रोजगार के साथ-साथ महिलाओं को प्रशिक्षण, कार्यस्थल पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। आने वाले समय में यदि अभियान इसी तरह आगे बढ़ता है तो यह अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्वालियर में "शक्ति दीदी" अभियान अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक बनता जा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद इस अभियान से जुड़ी महिलाओं की संख्या 123 हो जाएगी, जो यह दिखाती है कि जिला प्रशासन महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:28 +0530</pubDate>
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                <title>NFHS-6 रिपोर्ट: घरेलू हिंसा घटी, महिलाओं में मोटापा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[देश में साफ पानी और इंटरनेट पहुंच में सुधार, लेकिन बच्चों के पोषण और स्तनपान को लेकर चिंता बरकरार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nfhs-6-report-domestic-violence-decreased-obesity-increased-among-women/article-54574"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/nfhs-6-report.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी कर दी गई। देश के 715 जिलों और करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल करने वाले इस बड़े सर्वे ने भारत की सामाजिक, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी तस्वीर को सामने रखा है। रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े हैं जो राहत देने वाले हैं, वहीं कुछ संकेत चिंता बढ़ाने वाले भी हैं। घरेलू हिंसा, बाल विवाह और कुपोषण के मामलों में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन महिलाओं में तेजी से बढ़ता मोटापा और शिशुओं में स्तनपान की घटती दर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनकर उभरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार देश में घरेलू हिंसा की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। पिछले सर्वे में जहां 29.2 प्रतिशत महिलाओं ने घरेलू हिंसा का सामना करने की बात कही थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 22.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसी तरह बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। पहले यह दर 23.3 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 20.1 प्रतिशत रह गई है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। कामकाजी महिलाओं की संख्या 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 30.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से इन क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि रिपोर्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा संकेत भी सामने आया है। देश में महिलाओं में मोटापे की दर पिछले सर्वे की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम और केरल में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों में बदलाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। दूसरी ओर मेघालय और झारखंड जैसे राज्यों में मोटापे की दर अपेक्षाकृत कम पाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अब 98.3 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंच चुकी है, जबकि 96.5 प्रतिशत परिवारों को साफ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आधारभूत ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर किए गए प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाओं के बीच इंटरनेट उपयोग में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां सीमित संख्या में महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। डिजिटल पहुंच में आई यह वृद्धि शिक्षा, रोजगार और सूचना तक पहुंच के नए अवसर खोल सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है। देश में अब 18.8 प्रतिशत महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक है। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की संपत्ति पर हिस्सेदारी बढ़ी है। इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ परिवार नियोजन को लेकर कुछ चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं। आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या घट गई है। पिछले सर्वे में जहां 56.4 प्रतिशत महिलाएं आधुनिक परिवार नियोजन साधनों का उपयोग कर रही थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 52.7 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस गिरावट के कारणों को समझने और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। अच्छी खबर यह है कि कुपोषित बच्चों में नाटेपन की समस्या में कमी आई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 29.3 प्रतिशत पर आ गया है। यह सुधार बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और पोषण योजनाओं के असर को दर्शाता है। लेकिन दूसरी ओर छह महीने से दो वर्ष तक की आयु के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को ही संतुलित और पर्याप्त आहार मिल पा रहा है। इसका मतलब है कि करीब 85 प्रतिशत बच्चे अभी भी जरूरी पोषण से वंचित हैं। यह स्थिति आने वाले वर्षों में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पहले 63.7 प्रतिशत था, जो अब घटकर 55.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के शुरुआती विकास के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है और इस क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बाल विवाह के मामले में केरल सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां केवल 2.9 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल और बिहार में बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा है। वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे सुरक्षित राज्य के रूप में सामने आया है, जबकि बिहार में महिलाओं को सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:59:53 +0530</pubDate>
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