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                <title>SportsNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>भारत-इंग्लैंड दूसरे टी-20 पर बारिश का साया, आर्चर की वापसी से मुकाबला होगा रोमांचक</title>
                                    <description><![CDATA[मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में आज शाम होगा दूसरा टी-20, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर अब भी सस्पेंस कायम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/india-england-second-t20-under-shadow-of-rain-archers-return-will/article-57823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-vs-england.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार शाम मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में खेला जाएगा। पहले मुकाबले की तरह इस मैच पर भी मौसम की नजर रहेगी, क्योंकि मौसम विभाग ने मुकाबले के दौरान करीब 55 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई है। सीरीज का पहला टी-20 भी बारिश की वजह से पूरा नहीं हो सका था और इंग्लैंड की पारी शुरू होने से पहले ही मैच रद्द करना पड़ा था। ऐसे में दोनों टीमें उम्मीद करेंगी कि इस बार मौसम साथ दे और मुकाबले का नतीजा निकल सके। भारत पहले मैच में मजबूत स्थिति में दिखाई दिया था। टीम ने शुरुआती दो विकेट सिर्फ छह रन पर गंवा दिए थे, लेकिन इसके बाद अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को 189 रन तक पहुंचाया। अभिषेक ने सिर्फ 24 गेंदों में 59 रन की तूफानी पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने 68 रन बनाकर पारी को संभाला। हालांकि बारिश ने भारत के अच्छे प्रदर्शन पर पानी फेर दिया और मुकाबला बेनतीजा समाप्त हुआ। अब भारतीय टीम उसी लय को दूसरे मैच में भी बरकरार रखना चाहेगी। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम अपने घरेलू मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर सीरीज में बढ़त लेने की कोशिश करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे टी-20 से पहले सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के संभावित डेब्यू को लेकर हो रही है। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद थी कि पहले मुकाबले में उन्हें मौका मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब दूसरे मैच से पहले भी उनकी प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। भारत के गेंदबाजी कोच मॉर्ने मॉर्कल ने संकेत दिए हैं कि टीम इस मुकाबले में बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा खिलाड़ियों पर टीम का भरोसा कायम है और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को समय देना जरूरी है। मॉर्कल ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन का भी समर्थन करते हुए कहा कि दोनों टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। ऐसे में वैभव को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। दूसरी तरफ इंग्लैंड ने अपनी प्लेइंग इलेवन की घोषणा कर दी है। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की टीम में वापसी हुई है, जबकि जोश टंग टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करेंगे। दोनों खिलाड़ियों को साकिब महमूद और ल्यूक वुड की जगह टीम में शामिल किया गया है। आर्चर की वापसी से इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। वहीं अनुभवी स्पिनर आदिल रशीद भी एक बड़े रिकॉर्ड के करीब हैं। यदि वह इस मुकाबले में दो विकेट हासिल कर लेते हैं तो टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक खेले गए टी-20 मुकाबलों के आंकड़े भी बेहद दिलचस्प रहे हैं। दोनों टीमों के बीच 31 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं, जिनमें भारत ने 18 और इंग्लैंड ने 12 मुकाबले जीते हैं, जबकि एक मैच बेनतीजा रहा। इंग्लैंड की धरती पर दोनों टीमों के बीच 10 मुकाबले हुए हैं, जिनमें इंग्लैंड ने पांच और भारत ने चार मैच जीते हैं, जबकि एक मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था। दोनों देशों के बीच अब तक नौ टी-20 सीरीज खेली गई हैं, जिनमें भारत पांच और इंग्लैंड तीन सीरीज जीत चुका है, जबकि एक सीरीज ड्रॉ रही। भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछली लगातार पांच टी-20 सीरीज अपने नाम की हैं, जिससे उसका आत्मविश्वास काफी ऊंचा है। इस साल भारत के लिए ईशान किशन सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने 16 मैचों में 545 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट लगभग 200 का रहा है। गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह 15 मैचों में 21 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज बने हुए हैं। वहीं इंग्लैंड की ओर से जैकब बेथेल शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने इस साल 12 मैचों में 305 रन बनाए हैं और एक शतक भी लगाया है। ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है, लेकिन यहां स्पिन गेंदबाजों को भी अच्छी मदद मिलती है। पिछले वर्ष इसी मैदान पर इंग्लैंड ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 304 रन का विशाल स्कोर बनाया था, जो फुल मेंबर देशों के बीच टी-20 क्रिकेट का पहला 300 से अधिक का स्कोर था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बेल्जियम ने 0-2 से पिछड़कर रचा इतिहास, सेनेगल को 3-2 से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[86वें मिनट तक दो गोल से पिछड़ी बेल्जियम की टीम ने लुकाकू और यूरी टिलेमंस के दम पर शानदार वापसी की, अतिरिक्त समय में मिले विवादित पेनल्टी गोल से सेनेगल को 3-2 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/belgium-creates-history-after-trailing-0-2-beats-senegal-3-2/article-57666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/belgium-vs-senegal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप में गुरुवार को ऐसा मुकाबला देखने को मिला, जिसने आखिरी मिनट तक रोमांच बनाए रखा। सिएटल स्टेडियम में खेले गए नॉकआउट मुकाबले में बेल्जियम ने 86वें मिनट तक 0-2 से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए सेनेगल को 3-2 से हरा दिया। मैच अतिरिक्त समय तक पहुंचा और आखिरी क्षणों में मिले विवादित पेनल्टी ने मुकाबले का रुख बदल दिया। यूरी टिलेमंस ने दबाव के बीच निर्णायक गोल दागकर बेल्जियम को अंतिम-16 में पहुंचा दिया। अब अगले दौर में उसका सामना मेजबान अमेरिका से होगा, जिसने अपने मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल का टिकट पक्का किया। मुकाबले की शुरुआत सेनेगल के नाम रही। टीम ने आक्रामक खेल दिखाते हुए बेल्जियम की रक्षा पंक्ति पर लगातार दबाव बनाया। इसका फायदा उसे 25वें मिनट में मिला, जब हबीब डियारा ने शानदार गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। शुरुआती बढ़त मिलने के बाद सेनेगल का आत्मविश्वास और बढ़ गया। उसने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और बेल्जियम को बराबरी का मौका नहीं दिया। पहले हाफ तक सेनेगल बढ़त बनाए रखने में सफल रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे हाफ की शुरुआत में भी सेनेगल ने अपनी लय कायम रखी। 51वें मिनट में इस्माइला सार ने मौसा नियाखाते की लंबी पास को शानदार तरीके से नियंत्रित करते हुए गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। यह मौजूदा वर्ल्ड कप में सार का चौथा गोल था। उस समय ऐसा लग रहा था कि सेनेगल आसानी से मुकाबला जीतकर अगले दौर में पहुंच जाएगा। बेल्जियम की टीम लगातार मौके बना रही थी, लेकिन अंतिम क्षणों तक उसे सफलता नहीं मिल रही थी। मैच का असली रोमांच आखिरी कुछ मिनटों में देखने को मिला। दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतरे स्टार स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू ने 86वें मिनट में गोल कर बेल्जियम की उम्मीदें जगा दीं। इस गोल के बाद टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने लगातार आक्रमण जारी रखा। महज तीन मिनट बाद कप्तान यूरी टिलेमंस ने शानदार गोल दागकर स्कोर 2-2 कर दिया। कुछ ही मिनटों में दो गोल कर बेल्जियम ने लगभग हारा हुआ मुकाबला बराबरी पर ला दिया और मैच अतिरिक्त समय में पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक्स्ट्रा टाइम में दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया। मुकाबला पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, लेकिन अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में विवाद खड़ा हो गया। बेल्जियम के कप्तान यूरी टिलेमंस गेंद लेकर सेनेगल के पेनल्टी बॉक्स में पहुंचे, जहां लैमिन कमारा के साथ उनकी टक्कर हुई। रेफरी ने पहले खेल जारी रखा, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की मदद से घटना की समीक्षा की गई। वीडियो देखने के बाद रेफरी ने बेल्जियम को पेनल्टी दे दी।रेफरी के इस फैसले का सेनेगल के खिलाड़ियों ने जमकर विरोध किया। डिफेंडर पाथे सिस पेनल्टी स्पॉट पर लेट गए और कई खिलाड़ियों ने रेफरी से बहस की। सेनेगल के कोच पापे थियाव ने भी बाद में कहा कि उनकी टीम को यह फैसला सही नहीं लगा। उनका कहना था कि खिलाड़ियों ने विरोध जरूर किया, लेकिन अंतिम फैसला बदल नहीं सका और उसी के कारण उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">विवादों के बीच यूरी टिलेमंस ने पेनल्टी लेने की जिम्मेदारी संभाली। भारी दबाव के बावजूद उन्होंने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर बेल्जियम को 3-2 की यादगार जीत दिला दी। एजेंसी रिपोर्टों के मुताबिक यह फुटबॉल वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे देर से हुए निर्णायक गोलों में से एक माना जा रहा है। टिलेमंस को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 'सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। दूसरी ओर, सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में मेजबान अमेरिका ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 2-0 से हराकर अंतिम-16 में जगह बना ली। अमेरिका की ओर से फोलारिन बालोगुन ने पहले हाफ के 45वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। हालांकि दूसरे हाफ में 64वें मिनट में उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया, जिससे अमेरिका को शेष मैच 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसके बावजूद टीम ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा और 82वें मिनट में मालिक टिलमैन ने दूसरा गोल कर जीत सुनिश्चित कर दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:22:23 +0530</pubDate>
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                <title>कनाडा ने रचा इतिहास, पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[इंजरी टाइम में एलिस्टेयर जॉनस्टन के निर्णायक गोल से साउथ अफ्रीका को 1-0 से हराया, अब नीदरलैंड या मोरक्को से होगा अगला मुकाबला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/canada-created-history-reached-the-quarter-finals-of-the-football-world/article-57323"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/canada-football.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कनाडा ने फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में अपने इतिहास का सबसे यादगार प्रदर्शन करते हुए पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज कर ली। सोमवार को लॉस एंजिल्स स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में कनाडा ने साउथ अफ्रीका को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। पूरे 90 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन इंजरी टाइम में आए एक गोल ने मैच का पूरा रुख बदल दिया और कनाडा के खाते में ऐतिहासिक जीत दर्ज हो गई। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने संतुलित खेल दिखाया। कनाडा ने शुरुआती मिनटों में आक्रामक रवैया अपनाने की कोशिश की, लेकिन साउथ अफ्रीका की मजबूत रक्षापंक्ति ने उसके हर हमले को विफल कर दिया। दूसरी ओर साउथ अफ्रीका ने भी जवाबी आक्रमण किए, लेकिन कनाडा के डिफेंडरों ने कोई बड़ा मौका नहीं बनने दिया। पहले हाफ में दोनों टीमों के पास गोल करने के कुछ अवसर जरूर आए, लेकिन अंतिम फिनिशिंग की कमी के कारण स्कोर 0-0 ही रहा।दूसरे हाफ में मुकाबला और अधिक रोमांचक हो गया। कनाडा ने लगातार दबाव बनाना शुरू किया और गेंद पर अपना नियंत्रण बढ़ाया। हालांकि साउथ अफ्रीका के गोलकीपर रॉनवेन विलियम्स ने कई शानदार बचाव करते हुए टीम को मैच में बनाए रखा। उन्होंने कनाडा के खिलाड़ियों के कम से कम पांच खतरनाक प्रयासों को गोल में बदलने से रोक दिया। उनकी बेहतरीन गोलकीपिंग की वजह से अंतिम मिनटों तक मुकाबला बराबरी पर बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">मैच का सबसे अहम पल इंजरी टाइम में आया। निर्धारित 90 मिनट पूरे होने के बाद अतिरिक्त समय के दूसरे मिनट में एलिस्टेयर जॉनस्टन ने डी के बाहर से शानदार शॉट लगाया। गेंद सीधी गोलपोस्ट के कोने में जा लगी और गोलकीपर उसे रोकने में असफल रहे। इस गोल के साथ पूरे स्टेडियम में मौजूद कनाडाई समर्थक खुशी से झूम उठे। अंतिम सीटी बजते ही कनाडा के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने मैदान पर जीत का जश्न मनाया। शानदार प्रदर्शन के लिए एलिस्टेयर जॉनस्टन को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस जीत के साथ कनाडा ने पहली बार फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में कोई मुकाबला जीतने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। टीम अब क्वार्टर फाइनल में पहुंचेगी, जहां उसका सामना नीदरलैंड और मोरक्को के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। यह उपलब्धि कनाडाई फुटबॉल के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले टीम कभी विश्व कप के इस चरण तक नहीं पहुंच सकी थी। मैच के बाद कनाडा के मुख्य कोच जेसी मार्श बेहद भावुक दिखाई दिए। उन्होंने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल है। उन्होंने खिलाड़ियों को "नेशनल हीरो" बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। कोच ने कहा कि कनाडा में फुटबॉल लगातार आगे बढ़ रहा है और यह जीत उस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है। कनाडा की जीत में स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस की वापसी भी अहम रही। चोट के कारण कुछ समय से बाहर चल रहे डेविस ने 75वें मिनट में मैदान पर वापसी की। उनके आने से टीम के खेल में नई ऊर्जा देखने को मिली। उन्होंने मैदान पर उतरते ही कई तेज मूव बनाए और प्रॉमिस डेविड के लिए एक बेहतरीन मौका भी तैयार किया। हालांकि उस अवसर को गोल में नहीं बदला जा सका, लेकिन डेविस की मौजूदगी ने कनाडा के आक्रमण को और मजबूत बना दिया। आखिरकार टीम को जीत दिलाने वाला निर्णायक गोल इंजरी टाइम में आया।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="9k="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ साउथ अफ्रीका की टीम ने पूरे मुकाबले में शानदार संघर्ष किया। टीम ने अनुशासित रक्षात्मक खेल दिखाया और कनाडा को लंबे समय तक गोल करने से रोके रखा। गोलकीपर रॉनवेन विलियम्स का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा, जिन्होंने कई मुश्किल शॉट रोककर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। लेकिन अंतिम क्षणों में आए गोल ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया और टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। इस मुकाबले के दौरान एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना। साउथ अफ्रीका के मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस 74 साल और 79 दिन की उम्र में फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में टीम को कोचिंग देने वाले सबसे उम्रदराज कोच बन गए। उन्होंने उरुग्वे के पूर्व कोच ऑस्कर तबारेज का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। हालांकि उनकी टीम जीत हासिल नहीं कर सकी, लेकिन यह उपलब्धि विश्व कप इतिहास में दर्ज हो गई। अब कनाडा की नजर अगले मुकाबले पर होगी। टीम जिस आत्मविश्वास और संयम के साथ खेल रही है, उसे देखते हुए उसके समर्थकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। क्वार्टर फाइनल में भी यदि टीम इसी लय को बरकरार रखती है तो वह विश्व कप में एक और बड़ा उलटफेर कर सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:58:22 +0530</pubDate>
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                <title>टेस्ट क्रिकेट में टूटा छठे विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड, जंगू-चेज ने जोड़े 401 रन</title>
                                    <description><![CDATA[वेस्टइंडीज ने 626/9 पर पारी घोषित की, श्रीलंका दूसरी पारी में 15/1; चौथे दिन मेजबान टीम मजबूत स्थिति में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/6a40fcb45465a/article-57232"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/west-indies-vs-sri-lanka-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एंटीगुआ में खेले जा रहे वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबले के तीसरे दिन इतिहास रच दिया गया। वेस्टइंडीज के बल्लेबाज आमिर जंगू और कप्तान रोस्टन चेज ने टेस्ट क्रिकेट में छठे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। दोनों खिलाड़ियों ने 603 गेंदों का सामना करते हुए 401 रन की शानदार साझेदारी की और करीब एक दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस ऐतिहासिक साझेदारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी 626 रन पर नौ विकेट के नुकसान पर घोषित कर दी। इसके बाद दिन का खेल समाप्त होने से पहले श्रीलंका को दूसरी पारी में पहला झटका भी दे दिया। तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका का स्कोर एक विकेट पर 15 रन था और टीम अभी भी बड़ी बढ़त से काफी पीछे चल रही है। आमिर जंगू और रोस्टन चेज की इस साझेदारी ने इंग्लैंड के बेन स्टोक्स और जॉनी बेयरस्टो द्वारा बनाया गया छठे विकेट का 399 रन का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। यह रिकॉर्ड करीब दस वर्षों से कायम था। जंगू और चेज ने न केवल विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया, बल्कि वेस्टइंडीज के लिए किसी भी विकेट पर दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड भी बना दिया। इससे पहले ब्रायन लारा और रेडली जैकब ने 282 रन की साझेदारी की थी, जिसे इस जोड़ी ने आसानी से पीछे छोड़ दिया। दोनों बल्लेबाजों ने पूरे दिन श्रीलंकाई गेंदबाजों को कोई खास मौका नहीं दिया और धैर्य के साथ लंबी बल्लेबाजी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने 271 रन से आगे खेलना शुरू किया था। आमिर जंगू 78 रन और कप्तान रोस्टन चेज 42 रन बनाकर नाबाद लौटे थे। दोनों ने शुरुआत से ही संयमित बल्लेबाजी जारी रखी और धीरे-धीरे श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। लंच के बाद दोनों बल्लेबाज पूरी तरह लय में नजर आए और रन गति भी तेज कर दी। जंगू ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 233 रन की यादगार पारी खेली, जबकि कप्तान रोस्टन चेज 194 रन बनाकर आउट हुए। चेज अपने पहले टेस्ट दोहरे शतक से केवल छह रन दूर रह गए, लेकिन इसके बावजूद उनकी पारी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।आमिर जंगू के लिए यह पारी कई मायनों में खास रही। वह चोटिल शाई होप की जगह टीम में शामिल किए गए थे और उन्होंने मिले मौके का पूरा फायदा उठाया। दोहरा शतक पूरा करने के बाद मैदान में मौजूद दर्शकों के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ियों ने भी तालियों से उनका स्वागत किया। जंगू ने अपनी पारी के दौरान धैर्य, तकनीक और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट का भी सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर पार कर लिया। दूसरी ओर रोस्टन चेज ने कप्तानी पारी खेलते हुए टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया और लंबे समय तक क्रीज पर टिककर श्रीलंका के गेंदबाजों को थका दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रीलंका के लिए इस दिन सबसे सफल गेंदबाज मिलन रथनायके रहे। उन्होंने ही जंगू को आउट कर इस रिकॉर्ड साझेदारी का अंत किया। रथनायके ने 124 रन देकर पांच विकेट हासिल किए और अपनी टीम के लिए सबसे प्रभावी गेंदबाज साबित हुए। हालांकि दूसरी ओर बाएं हाथ के स्पिनर सोनल दिनूषा काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने दो विकेट जरूर लिए, लेकिन इसके लिए उन्हें 234 रन खर्च करने पड़े। श्रीलंका के अन्य गेंदबाज भी वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके और लंबे समय तक विकेट के लिए संघर्ष करते रहे। वेस्टइंडीज ने जब 626 रन पर अपनी पहली पारी घोषित की तो टीम पूरी तरह मजबूत स्थिति में थी। इसके बाद श्रीलंका की दूसरी पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज पाथुम निसांका दूसरे ओवर की पहली गेंद पर केवल तीन रन बनाकर जयडेन सील्स का शिकार बन गए। शुरुआती विकेट गिरने के बाद श्रीलंका ने संभलकर बल्लेबाजी की। दिन का खेल समाप्त होने तक निशान मदुष्का दो रन और कसुन रजिता चार रन बनाकर नाबाद लौटे। हालांकि टीम अभी भी भारी दबाव में है और चौथे दिन बल्लेबाजों के सामने बड़ी चुनौती रहने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीलंका 308 पर ऑलआउट, वेस्टइंडीज के गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[धनंजय डी सिल्वा का शतक, जस्टिन ग्रेव्स की 3 विकेट की घातक गेंदबाजी, पहले टेस्ट में रोमांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/great-performance-by-west-indies-bowlers-as-sri-lanka-all/article-57060"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sri-lanka-vs-west-indies.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">श्रीलंका क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में 308 रन बनाए, लेकिन यह स्कोर मजबूत स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो सका। मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी की शुरुआत कर दी थी, लेकिन किसी भी ओपनर को रन बनाने का मौका नहीं मिला और दिन का खेल बिना विकेट गंवाए समाप्त हुआ। टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनने वाले वेस्टइंडीज के कप्तान रोस्टन चेज़ का फैसला शुरुआती ओवरों में सही साबित हुआ, जब उनकी टीम के गेंदबाजों ने श्रीलंका की टॉप ऑर्डर को दबाव में ला दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>श्रीलंका की लड़खड़ाती शुरुआत</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने 50 रन से पहले ही अपने तीन अहम विकेट गंवा दिए। केमार रोच ने पारी की शुरुआत में ही पाथुम निसांका को मात्र 2 रन पर आउट कर दिया। इसके बाद अल्जारी जोसेफ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (0 रन) को लगातार गेंदों पर पवेलियन भेज दिया। इन शुरुआती झटकों के बाद श्रीलंका दबाव में आ गई और लग रहा था कि टीम बड़ा स्कोर नहीं बना पाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>चांदीमल और डी सिल्वा की अहम साझेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद दिनेश चांदीमल और धनंजय डी सिल्वा ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 94 गेंदों में 68 रन जोड़े और टीम को शुरुआती संकट से बाहर निकाला। चांदीमल ने 67 गेंदों में 54 रनों की तेज़ पारी खेली, जिसमें 8 शानदार चौके शामिल थे। हालांकि, वह शमार जोसेफ की गेंद पर बोल्ड होकर आउट हो गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>धनंजय डी सिल्वा का शानदार शतक</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी पारी धनंजय डी सिल्वा ने खेली। उन्होंने 168 गेंदों पर 120 रन बनाए और अपनी टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। उनकी पारी में 17 चौके शामिल रहे। डी सिल्वा ने लोअर ऑर्डर के साथ मिलकर दो महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। उन्होंने सोनल दिनुषा के साथ 99 रनों की साझेदारी की और फिर मिलन रथनायके के साथ भी अहम रन जोड़े। उनकी यह पारी श्रीलंका की लड़खड़ाती पारी को स्थिर करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>वेस्टइंडीज गेंदबाजों का दबदबा</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">वेस्टइंडीज की ओर से गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट झटके और श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। इसके अलावा केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ ने 2-2 विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को जल्दी समेटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जॉयडन सेल्स को भी एक सफलता मिली, जिन्होंने अंतिम विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को 308 पर समाप्त किया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>वेस्टइंडीज की शुरुआत सावधानीपूर्ण</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">दिन के अंत तक वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी शुरू कर दी थी। ओपनर जॉन कैंपबेल नाबाद रहे, जबकि ब्रैंडन किंग ने अभी तक बल्लेबाजी शुरू नहीं की थी। हालांकि, स्टंप्स के समय कोई विकेट नहीं गिरा, जिससे टीम ने सुरक्षित शुरुआत की।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>मैच की स्थिति</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">पहले दिन के खेल के बाद मुकाबला पूरी तरह संतुलित नजर आ रहा है। श्रीलंका ने सम्मानजनक स्कोर बनाया, लेकिन शुरुआती झटकों के कारण बड़ा स्कोर खड़ा करने से चूक गई। वहीं वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए मैच को रोमांचक मोड़ पर पहुंचा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:07:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मेसी के जन्मदिन पर अर्जेंटीना में 85 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा का अनावरण</title>
                                    <description><![CDATA[70 टन स्टील से 18 महीने में बनी दुनिया की सबसे बड़ी मेसी मूर्ति, वर्ल्ड कप रिकॉर्ड के बाद मिला ऐतिहासिक सम्मान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/85-feet-tall-giant-statue-unveiled-in-argentina-on-messis/article-56951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/lionel-messi-statue.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर और कप्तान लियोनेल मेसी के 39वें जन्मदिन पर उनके सम्मान में एक ऐतिहासिक और विशाल प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा अर्जेंटीना के पटागोनिया क्षेत्र के कट्राल शहर में बुधवार, 24 जून को पेश की गई। करीब 85 फीट ऊंची यह मूर्ति अब तक की दुनिया की सबसे बड़ी मेसी प्रतिमा मानी जा रही है, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे। इस विशाल प्रतिमा को बनाने में करीब 70 टन यानी 70,000 किलो स्टील का इस्तेमाल किया गया है। इसे तैयार करने में 18 महीने का लंबा समय लगा। स्थानीय प्रशासन और कला प्रेमियों के सहयोग से बने इस प्रोजेक्ट को मेसी के करियर और उनके योगदान के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब मेसी ने हाल ही में वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। प्रतिमा के अनावरण के समय पूरे कट्राल शहर में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। लोग दूर-दूर से इस ऐतिहासिक मूर्ति को देखने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने इसे अपने देश के लिए गर्व का क्षण बताया। कई प्रशंसक मेसी के पोस्टर और अर्जेंटीना की जर्सी पहनकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। माहौल में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव साफ दिखाई दे रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह प्रतिमा मेसी को कतर में हुए 2022 फीफा वर्ल्ड कप फाइनल के बाद के ऐतिहासिक क्षण में दर्शाती है। मूर्ति में मेसी घुटनों के बल बैठे हुए नजर आते हैं, ठीक उसी तरह जैसे उन्होंने फाइनल जीत के बाद जश्न मनाया था। उस मैच में अर्जेंटीना ने फ्रांस को हराकर विश्व कप का खिताब जीता था। इसी जीत ने मेसी के करियर को एक नई ऊंचाई दी थी और उन्हें फुटबॉल इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में शामिल कर दिया था। प्रतिमा में मेसी एक हाथ में अर्जेंटीना की जर्सी पकड़े हुए दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे हाथ की उंगली आसमान की ओर उठी हुई है। यह वही पोज है जो मेसी अक्सर गोल करने के बाद अपनी दिवंगत दादी को श्रद्धांजलि देने के लिए अपनाते हैं। इस भावनात्मक जुड़ाव ने प्रतिमा को और भी खास बना दिया है। मूर्तिकार का कहना है कि यह केवल एक खिलाड़ी की प्रतिमा नहीं, बल्कि एक भावना और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस विशाल परियोजना को 61 वर्षीय स्थानीय कलाकार एल्डो बेरोइसा ने तैयार किया है। वे पहले भी अर्जेंटीना में कई बड़ी कलाकृतियां बना चुके हैं, जिनमें डायनासोर और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मेसी न केवल एक खिलाड़ी हैं, बल्कि पूरी दुनिया में अर्जेंटीना की पहचान बन चुके हैं। उनके अनुसार यह परियोजना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण रही। मेसी की यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब उन्होंने हाल ही में वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी मिरोस्लाव क्लोजे का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मेसी के नाम अब वर्ल्ड कप में 18 गोल दर्ज हो चुके हैं। इसी उपलब्धि के दो दिन बाद उन्हें यह विशाल सम्मान मिला, जिससे उनके फैंस में और भी उत्साह देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कट्राल शहर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और फुटबॉल प्रशंसक मौजूद थे। सोशल मीडिया पर भी इस प्रतिमा की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे “फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा ट्रिब्यूट” बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मेसी ने न केवल खेल के मैदान में बल्कि पूरी दुनिया में अर्जेंटीना का नाम रोशन किया है। भारत में भी मेसी को लेकर एक दिलचस्प चर्चा जुड़ी रही है। पिछले साल उनके भारत दौरे के दौरान पश्चिम बंगाल में उनकी 70 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई थी। हालांकि बाद में प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उस प्रतिमा को हटाने का आदेश दिया था। बताया गया कि तेज हवाओं के कारण उस ढांचे की स्थिरता को लेकर चिंता जताई गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में मेसी के सम्मान में एक विशाल म्यूरल भी तैयार किया गया है। यह म्यूरल करीब 20 फीट चौड़ा और 18 फीट ऊंचा है, जिसमें 1300 से अधिक प्रशंसकों ने अपने नाम भी दर्ज कराए हैं। इस कलाकृति को 18 दिनों में तैयार किया गया था और इसे मेसी के करियर की उपलब्धियों को समर्पित किया गया है। मेसी ने इस सम्मान के लिए एक वीडियो संदेश के जरिए फैंस का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सम्मान बेहद भावनात्मक है और वे अपने प्रशंसकों के प्यार के लिए आभारी हैं। मेसी का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:48:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साई सुदर्शन का शानदार शतक, इंडिया-ए मजबूत स्थिति में</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीलंका-ए के खिलाफ पहले अनऑफिशियल टेस्ट में 132 रन की पारी, इंडिया-ए 218/4 पर पहले दिन मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/sai-sudarshans-brilliant-century-puts-india-a-in-a-strong-position/article-56950"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sai-sudharsan-century.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गॉल में खेले जा रहे पहले अनऑफिशियल टेस्ट में इंडिया-ए के ओपनर साई सुदर्शन ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक जड़ दिया। श्रीलंका-ए के खिलाफ इस मुकाबले में साई ने एक बार फिर अपनी तकनीकी मजबूती और धैर्य का परिचय दिया और 175 गेंदों में 132 रन की अहम पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 चौके शामिल रहे और यह उनके फर्स्ट क्लास करियर का नौवां शतक रहा। मैच के पहले दिन इंडिया-ए ने शुरुआती झटकों के बावजूद मजबूत स्थिति बना ली है। टीम ने चार विकेट के नुकसान पर 218 रन बना लिए हैं। क्रीज पर इस समय कप्तान ध्रुव जुरेल और शेख रशीद मौजूद हैं और दोनों बल्लेबाज टीम की पारी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले दिन का दूसरा सेशन चल रहा था और भारतीय टीम का लक्ष्य बड़ा स्कोर खड़ा करना है ताकि श्रीलंका-ए पर दबाव बनाया जा सके। पारी की शुरुआत में इंडिया-ए को साई सुदर्शन और आयुष पांडे की जोड़ी ने संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 78 रन की साझेदारी की, जिसमें कुल 138 गेंदें खेली गईं। शुरुआत थोड़ी धीमी रही लेकिन जैसे-जैसे पिच पर समय बीता, साई ने अपनी लय पकड़ ली और स्ट्रोक्स खेलने शुरू किए। उन्होंने खासकर ऑफ साइड पर शानदार शॉट्स लगाए और गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद साई सुदर्शन ने ऋतुराज गायकवाड़ के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 90 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने इंडिया-ए की पारी को स्थिरता दी और टीम का स्कोर 150 रन के पार पहुंच गया। हालांकि गायकवाड़ 22 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन तब तक टीम एक मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी थी। देवदत्त पडिक्कल 12 रन और आयुष पांडे 25 रन बनाकर पवेलियन लौटे। साई सुदर्शन की यह पारी उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को और मजबूत करती है। इससे पहले तक उन्होंने 40 फर्स्ट क्लास मैचों में 2672 रन बनाए थे, जिसमें 8 शतक और 10 अर्धशतक शामिल हैं। उनका औसत 39.29 का रहा है और उनका सर्वोच्च स्कोर 213 रन रहा है। मौजूदा शतक के साथ उनका रिकॉर्ड और भी प्रभावशाली हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडिया-ए के कप्तान ध्रुव जुरेल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। टॉस के समय उन्होंने कहा था कि टीम का उद्देश्य पहले बल्लेबाजी कर बड़ा स्कोर खड़ा करना है ताकि विपक्षी टीम पर दबाव बनाया जा सके। उनका यह निर्णय अब तक सही साबित होता दिख रहा है क्योंकि टॉप ऑर्डर की साझेदारियों ने टीम को मजबूत आधार दिया है। श्रीलंका-ए की ओर से गेंदबाजों ने शुरुआत में कुछ सफलता जरूर हासिल की, लेकिन मध्यक्रम में साई सुदर्शन की पारी ने उनकी रणनीति को कमजोर कर दिया। गेंदबाजों को लगातार रन रोकने में मुश्किलें आईं और भारतीय बल्लेबाजों ने मौके का पूरा फायदा उठाया। पिच पर शुरुआती नमी के बाद बल्लेबाजी आसान होती गई, जिसका फायदा इंडिया-ए ने बखूबी उठाया। मैच के दौरान दर्शकों को कई आकर्षक शॉट्स देखने को मिले, खासकर साई सुदर्शन की कवर ड्राइव और स्ट्रेट ड्राइव ने सबका ध्यान खींचा। उनकी पारी में संतुलन और आक्रामकता दोनों का अच्छा मिश्रण देखने को मिला। यह प्रदर्शन उनके भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस समय इंडिया-ए का लक्ष्य है कि पहले दिन का खेल समाप्त होने तक अधिक से अधिक रन जोड़कर एक मजबूत स्कोर तैयार किया जाए। ध्रुव जुरेल और शेख रशीद की जोड़ी पर अब बड़ी जिम्मेदारी है कि वे पारी को आगे बढ़ाएं और टीम को 300 रन के पार ले जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:48:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद का धमाका, 119 गेंदों पर 168 रन ठोके</title>
                                    <description><![CDATA[लोकल टूर्नामेंट में 19 चौके और 6 छक्कों की मदद से मचाया तहलका, लगातार दूसरी बड़ी पारी से बढ़ी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/vaibhav-suryavanshis-younger-brother-ashirwads-blast-scored-168-runs-in/article-56812"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/aashirwad-suryavanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिहार क्रिकेट के उभरते नाम वैभव सूर्यवंशी के छोटे भाई आशीर्वाद सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींच लिया है। समस्तीपुर में खेले गए एक लोकल क्रिकेट टूर्नामेंट में 10 साल के आशीर्वाद ने 119 गेंदों पर 168 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी में 19 चौके और 6 छक्के शामिल रहे, जिसने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया। यह मुकाबला ऋषभ-11 और वैशाली-11 के बीच खेला गया था, जिसमें आशीर्वाद की पारी की बदौलत उनकी टीम ने शानदार जीत दर्ज की। आशीर्वाद ने अपनी इस पारी की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए भी साझा की, जिससे उनकी चर्चा और तेज हो गई। लगातार दूसरे बड़े प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि वह भी अपने बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी की तरह ही आक्रामक और प्रतिभाशाली बल्लेबाज के रूप में उभर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने बिरौली के खिलाफ एक मैच में 87 गेंदों पर 103 रन बनाए थे, जिसमें 20 चौके और एक छक्का शामिल था। लगातार दो शानदार पारियों के बाद क्रिकेट प्रेमियों में उनके भविष्य को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन दुर्लभ होता है। आशीर्वाद की बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ-साथ शॉट सिलेक्शन भी देखने लायक है। उनकी टाइमिंग और गेंद को समझकर खेलने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। खास बात यह है कि वह दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, जबकि उनके बड़े भाई वैभव बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं। हालांकि दोनों की बल्लेबाजी शैली में एक समानता जरूर है, वह है अटैकिंग अप्रोच। दोनों ही खिलाड़ी शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव बनाने में विश्वास रखते हैं। आशीर्वाद सूर्यवंशी अपने परिवार में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई वैभव सूर्यवंशी पहले ही भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं। वैभव इस समय भारतीय क्रिकेट का चर्चित नाम हैं और उन्हें हाल ही में अंतरराष्ट्रीय टी-20 सीरीज और अन्य महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों के लिए चुना गया है। 15 साल की उम्र में ही टीम इंडिया में जगह बनाकर उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने सबसे कम उम्र में भारतीय टीम में चयन का रिकॉर्ड बनाकर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैभव ने कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पीछे छोड़े हैं। वह भारतीय टीम में चुने जाने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा उन्होंने घरेलू और आईपीएल स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। एक ही सीजन में 776 रन बनाकर उन्होंने ऑरेंज कैप अपने नाम की थी और साथ ही कई व्यक्तिगत पुरस्कार भी जीते थे। उनकी सबसे चर्चित उपलब्धि 36 गेंदों पर शतक रही, जिसने उन्हें देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। आशीर्वाद और वैभव दोनों ही भाई क्रिकेट के प्रति जुनून और आक्रामक खेल शैली के लिए जाने जाते हैं। परिवार में पिता संजीव सूर्यवंशी और मां आरती सूर्यवंशी ने दोनों बच्चों के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पिता खुद भी बच्चों की ट्रेनिंग और अभ्यास पर विशेष ध्यान देते हैं। परिवार का मानना है कि दोनों बच्चे आगे चलकर राज्य और देश के लिए बड़ा नाम कमा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आशीर्वाद की बल्लेबाजी में खास बात यह है कि वह गेंद को खुलकर खेलते हैं और बड़े शॉट लगाने से नहीं हिचकते। उनकी पावर हिटिंग क्षमता और आत्मविश्वास उनकी उम्र के हिसाब से काफी आगे मानी जा रही है। स्थानीय कोच और क्रिकेट विशेषज्ञ भी उनके प्रदर्शन से प्रभावित हैं और मानते हैं कि यदि सही मार्गदर्शन मिलता रहा तो वह भविष्य में बड़ा नाम बन सकते हैं। लगातार दो बड़ी पारियों के बाद अब आशीर्वाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके शॉट्स और स्कोर तेजी से वायरल हो रहे हैं। क्रिकेट प्रेमी उन्हें भविष्य का उभरता सितारा मानने लगे हैं। हालांकि अभी वह शुरुआती स्तर पर खेल रहे हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि बिहार से एक और प्रतिभाशाली क्रिकेटर तैयार हो रहा है। वैभव और आशीर्वाद की जोड़ी ने बिहार क्रिकेट को एक नई पहचान दी है। जहां एक ओर वैभव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रख चुके हैं, वहीं दूसरी ओर आशीर्वाद धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आशीर्वाद भी अपने बड़े भाई की तरह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच पाते हैं या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:08:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>क्रोएशिया ने पनामा को 1-0 से हराया, नॉकआउट उम्मीदें बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[बुदिमिर के निर्णायक गोल से क्रोएशिया की जीत, इंग्लैंड-घाना मुकाबला गोलरहित ड्रॉ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/croatia-beats-panama-1-0-knockout-hopes-remain-intact/article-56819"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fifa-world-cup-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-एल मुकाबले में बुधवार को क्रोएशिया ने पनामा को 1-0 से हराकर नॉकआउट दौर में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल एंटे बुदिमिर ने दूसरे हाफ में दागा, जिसके दम पर क्रोएशिया ने महत्वपूर्ण तीन अंक हासिल किए। वहीं इस हार के साथ पनामा की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। पूरे मुकाबले में क्रोएशिया ने धैर्य के साथ खेल दिखाया और आखिरी मौके पर मिली सफलता ने मैच का रुख बदल दिया। टोरंटो स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। पनामा ने शुरुआत से ही मजबूत डिफेंस अपनाया और क्रोएशिया के हमलों को रोकने में काफी हद तक सफलता भी हासिल की। पहले 45 मिनट में किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं मिला और मुकाबला बराबरी पर बना रहा। क्रोएशिया ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा, लेकिन अंतिम पास और फिनिशिंग की कमी के कारण स्कोरलाइन नहीं बदल सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद खेल में तेजी आई और 54वें मिनट में क्रोएशिया को सफलता मिली। एंटे बुदिमिर, जो कुछ ही मिनट पहले मैदान पर आए थे, ने जोसिप स्तानिशिच के सटीक क्रॉस को गोल में बदल दिया। उनका यह आसान सा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण गोल मुकाबले का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद पनामा ने बराबरी की कोशिशें तेज कर दीं, लेकिन क्रोएशिया की डिफेंस लाइन मजबूत बनी रही। गोल के बाद मैच में तनाव बढ़ गया और दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश की। क्रोएशिया के दिग्गज खिलाड़ी लुका मोड्रिच के लिए यह मैच खास रहा क्योंकि उन्होंने अपने करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। 40 साल के मोड्रिच ने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया और टीम के खेल को संतुलित बनाए रखा। उन्होंने 57वें मिनट में एक बेहतरीन पास देकर दूसरा गोल बनाने का मौका भी तैयार किया, लेकिन पनामा के गोलकीपर ऑरलैंडो मॉस्केरा ने शानदार बचाव कर टीम को और नुकसान से बचा लिया। मोड्रिच की मौजूदगी ने मध्य मैदान में क्रोएशिया को मजबूती दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पनामा ने भी मैच के दौरान वापसी की कोशिशें कीं, खासकर 67वें मिनट में जब टीम ने लगातार तीन हमले किए। लेकिन क्रोएशिया के गोलकीपर डोमिनिक लिवाकोविच ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी प्रयासों को विफल कर दिया। उनकी तेज रिफ्लेक्स और सही पोजिशनिंग ने पनामा को बराबरी का मौका नहीं दिया। आखिरी समय तक पनामा ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन क्रोएशिया ने बढ़त को बनाए रखा और मैच जीत लिया। इसी ग्रुप के एक अन्य मुकाबले में इंग्लैंड और घाना के बीच खेला गया मैच गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ। बूस्टन स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने पूरे मैच में 19 शॉट लगाए, लेकिन घाना की मजबूत डिफेंस और शानदार गोलकीपिंग ने उन्हें गोल करने से रोक दिया। घाना ने बेहद संयमित रणनीति अपनाई और इंग्लैंड के आक्रमणों को सफलतापूर्वक रोका। घाना के गोलकीपर असारे ने कई महत्वपूर्ण बचाव किए और टीम को एक महत्वपूर्ण अंक दिलाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंग्लैंड के पास मैच के अंतिम मिनटों में जीत दर्ज करने का सुनहरा मौका था। 86वें मिनट में निको ओ’राइली का हेडर क्रॉसबार से टकरा गया और रिबाउंड पर हैरी केन भी गोल नहीं कर सके। वहीं घाना ने भी 78वें मिनट में एक बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन अंतिम पास को इंग्लैंड की डिफेंस ने रोक दिया। मैच के दौरान घाना ने पेनल्टी की मांग की, लेकिन रेफरी ने उसे खारिज कर दिया। घाना के कोच कार्लोस क्वेइरोज ने मैच के बाद कहा कि उनकी रणनीति इंग्लैंड को शुरुआत से ही रोकने की थी और टीम इसमें सफल रही। उन्होंने खिलाड़ियों के डिफेंसिव प्रदर्शन की सराहना की। इस ड्रॉ के बाद इंग्लैंड और घाना दोनों के 4-4 अंक हो गए हैं और वे ग्रुप में शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं, जबकि क्रोएशिया के 3 अंक हैं। पनामा की टीम लगातार दूसरी बार बिना कोई अंक हासिल किए टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। अब ग्रुप-एल का अंतिम मुकाबला बेहद अहम हो गया है, जहां क्रोएशिया और घाना आमने-सामने होंगे। इस मैच का परिणाम तय करेगा कि कौन सी टीम नॉकआउट में जगह बनाएगी। पूरे ग्रुप में मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है और अंतिम चरण में हर टीम के लिए स्थिति निर्णायक बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:06:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 113 रन से हराया, चौथी जीत दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में पेरी-वोल की 100+ रन साझेदारी, पाकिस्तान 86 रन पर ढेर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/australia-beats-pakistan-by-113-runs-registers-fourth-win/article-56821"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/women-t20-world-cup.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखते हुए पाकिस्तान को एकतरफा मुकाबले में 113 रन से हरा दिया। यह उसकी लगातार चौथी जीत है और इस जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल के बेहद करीब पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान की टीम टूर्नामेंट में लगातार हार के बाद टॉप-4 की दौड़ से लगभग बाहर हो चुकी है। हेडिंग्ले में खेले गए इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 199 रन बनाए और फिर पाकिस्तान को सिर्फ 86 रन पर ऑलआउट कर दिया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत हालांकि बेहद खराब रही। पहली ही गेंद पर बेथ मूनी बिना खाता खोले पवेलियन लौट गईं। लेकिन इसके बाद एलिस पेरी और जॉर्जिया वोल ने पारी को संभाल लिया। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 100 से ज्यादा रन की अहम साझेदारी हुई, जिसने ऑस्ट्रेलिया की पारी को स्थिरता दी और बड़े स्कोर की नींव रखी। पावरप्ले में ही ऑस्ट्रेलिया ने 1 विकेट पर 64 रन बना लिए थे, जो इस टूर्नामेंट में उसका सबसे मजबूत पावरप्ले स्कोर भी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">एलिस पेरी ने इस मैच में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। अपने करियर का 10वां टी-20 वर्ल्ड कप खेल रहीं पेरी ने इस टूर्नामेंट में पहली बार अर्धशतक लगाया। उन्होंने 48 गेंदों पर 71 रन की अहम पारी खेली और टीम को 199 रन तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। इससे पहले उनका टी-20 वर्ल्ड कप में सर्वोच्च स्कोर 42 रन था, जो उन्होंने 2016 में बनाया था। सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, गेंदबाजी में भी पेरी ने कमाल दिखाया और 9 रन देकर 2 विकेट झटके। इस ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर बेथ मूनी ने भी जज्बा दिखाया। पहली गेंद पर आउट होने के बावजूद उन्होंने विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाई। फील्डिंग के दौरान किम गार्थ की गेंद रोकने के प्रयास में उनकी उंगली चोटिल हो गई, जिसे मेडिकल टीम ने मैदान पर ही ठीक किया। इसके बाद भी उन्होंने खेल जारी रखा। बाद में एक कैच लेने के प्रयास में उसी उंगली पर फिर चोट लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने विकेटकीपिंग नहीं छोड़ी और कुल 5 खिलाड़ियों को आउट कराने में योगदान दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान की ओर से गेंदबाजी में नशरा संधू और रमीन शमीम ने कुछ समय के लिए ऑस्ट्रेलियाई रनगति पर रोक लगाने की कोशिश की। नशरा संधू ने एक ही ओवर में दो बड़े विकेट झटके, जबकि रमीन शमीम ने भी दो अहम विकेट हासिल किए। हालांकि तब तक ऑस्ट्रेलिया बड़ा स्कोर खड़ा कर चुका था और पाकिस्तान पर दबाव काफी बढ़ चुका था। 200 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। टीम ने पावरप्ले में 3 विकेट गंवाकर 50 रन बनाए, लेकिन इसके बाद लगातार विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। खराब रनिंग और गलत तालमेल के कारण पाकिस्तान की तीन बल्लेबाज रन आउट हो गईं, जिसने टीम की हालत और खराब कर दी। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और पाकिस्तानी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अंततः पाकिस्तान की पूरी टीम 13.4 ओवर में सिर्फ 86 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया ने यह मुकाबला 113 रन के बड़े अंतर से जीतकर टूर्नामेंट में अपनी मजबूत स्थिति और भी पुख्ता कर ली है। लगातार चौथी जीत के साथ टीम सेमीफाइनल में जगह बनाने के बेहद करीब पहुंच गई है, जबकि पाकिस्तान के लिए अब आगे की राह लगभग खत्म हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:05:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैभव सूर्यवंशी को मिली टीम इंडिया की नंबर-3 जर्सी, आयरलैंड-इंग्लैंड दौरे पर रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[वैभव सूर्यवंशी को पहली बार भारतीय सीनियर टीम में शामिल किया गया है। टीम इंडिया की नंबर-3 जर्सी मिलने के बाद युवा बल्लेबाज ने इसे अपने क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा क्षण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/vaibhav-suryavanshi-gets-team-indias-number-3-jersey-leaves-for/article-56700"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/vaibhav-suryawanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। महज 15 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया की नंबर-3 जर्सी सौंपी। इसके साथ ही वह आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम के साथ रवाना हो गए। युवा बल्लेबाज ने इस पल को अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा होने जैसा बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">वैभव सूर्यवंशी हाल के महीनों में लगातार अपने प्रदर्शन से सुर्खियों में रहे हैं। आईपीएल 2026 में शानदार बल्लेबाजी और जूनियर स्तर पर रिकॉर्डतोड़ पारियों के बाद उन्हें पहली बार भारतीय सीनियर टीम में जगह मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई ने उनकी नंबर-3 जर्सी होटल में भिजवाई, जहां भारतीय टीम के थ्रो-डाउन स्पेशलिस्ट रघु ने उन्हें यह जर्सी सौंपी। जर्सी प्राप्त करने के बाद सूर्यवंशी ने सम्मान स्वरूप उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">युवा खिलाड़ी ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस उपलब्धि को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उनके मुताबिक, जिस दिन उन्होंने पहली बार बल्ला हाथ में लेकर क्रिकेट मैदान पर कदम रखा था, उसी दिन से भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना देखा था और अब वह सपना साकार होने जा रहा है।</p>
<h2>रिकॉर्डों की चर्चा</h2>
<p class="isSelectedEnd">वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में ट्राई-नेशनल वनडे सीरीज के फाइनल में केवल 11 गेंदों पर अर्धशतक लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में नई पहचान दिलाई। चयनकर्ताओं ने भी उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए सीनियर टीम में मौका दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">आईपीएल 2026 में सूर्यवंशी ने 16 मैचों में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके साथ ही वह आईपीएल इतिहास में ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी बने। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।</p>
<h2>सचिन का रिकॉर्ड निशाने पर</h2>
<p class="isSelectedEnd">भारतीय टीम का आयरलैंड दौरा 26 जून से शुरू होगा, जबकि इसके बाद टीम इंग्लैंड में सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलेगी। यदि वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ बेलफास्ट में होने वाले मुकाबले में पदार्पण का मौका मिलता है, तो वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">फिलहाल यह रिकॉर्ड महान बल्लेबाज Sachin Tendulkar के नाम दर्ज है, जिन्होंने 16 वर्ष 205 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। सूर्यवंशी के पास इस उपलब्धि को पीछे छोड़ने का अवसर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारतीय टी-20 टीम की कमान Shreyas Iyer के हाथों में है, जबकि टीम में Tilak Varma, Sanju Samson, Ishan Kishan और Arshdeep Singh जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं।</p>
<p>क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब आयरलैंड दौरे पर टिकी है, जहां वैभव सूर्यवंशी के संभावित डेब्यू को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है, तो यह भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पदार्पणों में से एक हो सकता है। आज की ताज़ा ख़बरें, भारत समाचार अपडेट और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में यह कहानी फिलहाल सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली खबरों में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:08:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्राजील की दमदार वापसी, हैती को 3-0 से हराकर ग्रुप-सी में पहुंचा शीर्ष पर</title>
                                    <description><![CDATA[माथियस कुन्हा के दो गोल और विनीसियस जूनियर के शानदार प्रदर्शन से ब्राजील को पहली जीत, हैती नॉकआउट की दौड़ से बाहर होने वाली पहली टीम बनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/brazils-first-win-with-cunhas-double-goal-haiti-out-of/article-56498"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/matheus-cunha.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील ने फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में अपनी पहली जीत दर्ज करते हुए हैती को 3-0 से हरा दिया। ग्रुप-सी के इस मुकाबले में ब्राजील ने शुरुआत से ही अपना दबदबा कायम रखा और पहले हाफ में किए गए तीन गोलों की बदौलत आसानी से जीत हासिल कर ली। इस जीत के साथ ब्राजील चार अंकों के साथ ग्रुप-सी की अंकतालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। वहीं लगातार दूसरी हार झेलने वाली हैती टूर्नामेंट से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। मैच में मैनचेस्टर यूनाइटेड के फॉरवर्ड माथियस कुन्हा ने दो गोल दागकर अपनी टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाई, जबकि तीसरा गोल स्टार खिलाड़ी विनीसियस जूनियर ने किया। मैच की शुरुआत से ही ब्राजील ने आक्रामक रुख अपनाया। शुरुआती मिनटों में गेंद पर उसका नियंत्रण साफ दिखाई दे रहा था। हैती की टीम रक्षात्मक रणनीति के साथ मैदान में उतरी थी, लेकिन ब्राजील के तेज आक्रमणों के सामने उसका डिफेंस लगातार दबाव में नजर आया। ब्राजील के मिडफील्ड खिलाड़ियों ने शानदार तालमेल दिखाते हुए बार-बार मौके बनाए। विनीसियस जूनियर और कुन्हा की जोड़ी शुरुआत से ही हैती के डिफेंडरों के लिए परेशानी का कारण बनी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्राजील को पहला गोल 23वें मिनट में मिला। विनीसियस जूनियर ने बाएं फ्लैंक से शानदार मूव बनाते हुए गोल की ओर शॉट लगाया। गेंद पोस्ट से टकराकर वापस मैदान में आई, लेकिन वहां मौजूद माथियस कुन्हा ने तेजी दिखाते हुए रिबाउंड पर गोल कर दिया। इस गोल के साथ ब्राजील ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। यह कुन्हा का विश्व कप में पहला गोल था और उन्होंने इसे खास अंदाज में सेलिब्रेट किया। गोल के बाद ब्राजील के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पहले गोल के बाद हैती ने कुछ समय के लिए गेंद पर नियंत्रण बनाने की कोशिश की, लेकिन ब्राजील ने उन्हें ज्यादा मौके नहीं दिए। 36वें मिनट में ब्राजील ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। इस बार भी विनीसियस जूनियर ने शानदार भूमिका निभाई। उन्होंने मिडफील्ड से सटीक पास देकर कुन्हा को गोल करने का मौका दिया। कुन्हा ने बिना समय गंवाए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया और गेंद सीधे गोलपोस्ट के अंदर पहुंच गई। इस गोल के साथ स्कोर 2-0 हो गया और हैती की मुश्किलें काफी बढ़ गईं। हाफ टाइम से ठीक पहले ब्राजील ने तीसरा गोल भी कर दिया। मिडफील्डर लुकास पैकेटा के शानदार फ्लिक पास पर विनीसियस जूनियर गेंद लेकर तेजी से आगे बढ़े। उन्होंने दो डिफेंडरों को चकमा दिया और फिर हैती के गोलकीपर एलेक्जेंडर प्लेसिड के पैरों के बीच से गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यह गोल तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन उदाहरण था। पहले हाफ की समाप्ति तक ब्राजील 3-0 से आगे था और मैच लगभग उसके नियंत्रण में आ चुका था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में हैती ने वापसी की कोशिश जरूर की। टीम ने कुछ आक्रामक बदलाव भी किए और गेंद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन ब्राजील का डिफेंस पूरी तरह सतर्क था। डिफेंडरों ने हैती के हर हमले को विफल कर दिया। गोलकीपर ने भी कुछ अहम बचाव किए, जिससे हैती को स्कोर करने का कोई मौका नहीं मिला। दूसरी तरफ ब्राजील ने अपनी बढ़त को बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दिया और अनावश्यक जोखिम लेने से बचा। इसी कारण दूसरे हाफ में कोई गोल नहीं हो सका। इस जीत के साथ ब्राजील ने एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। टीम ने 24 साल बाद विश्व कप के ग्रुप चरण के किसी मुकाबले में तीन गोल दागे हैं। इससे पहले 2002 विश्व कप में ब्राजील ने चीन और कोस्टा रिका के खिलाफ तीन से अधिक गोल किए थे। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि 2002 वही वर्ष था जब ब्राजील ने अपना पांचवां विश्व कप खिताब जीता था। ब्राजील ने विश्व कप इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। टीम अब टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम बन गई है। हैती के खिलाफ तीन गोल करने के बाद उसके कुल गोलों की संख्या 241 हो गई। इस मामले में उसने जर्मनी को पीछे छोड़ दिया, जिसके नाम 239 गोल दर्ज थे। ब्राजील ने अब तक 116 विश्व कप मुकाबलों में यह उपलब्धि हासिल की है। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड ब्राजील की दशकों से चली आ रही आक्रामक फुटबॉल शैली और लगातार अच्छे प्रदर्शन का परिणाम है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी तरफ हैती के लिए यह मुकाबला निराशाजनक रहा। 1974 के बाद पहली बार विश्व कप में खेलने का मौका पाने वाली टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन शुरुआती दो मैचों में हार ने उसकी उम्मीदों को खत्म कर दिया। अब हैती का अंतिम मुकाबला मोरक्को के खिलाफ होगा, लेकिन नॉकआउट की दौड़ से बाहर होने के कारण वह केवल सम्मान बचाने के लिए खेलेगी। ग्रुप-सी की स्थिति पर नजर डालें तो ब्राजील और मोरक्को दोनों के चार-चार अंक हैं। हालांकि बेहतर गोल डिफरेंस के कारण ब्राजील शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। मोरक्को ने भी अपने दूसरे मुकाबले में स्कॉटलैंड को 1-0 से हराकर मजबूत दावेदारी पेश की है। ऐसे में ग्रुप-सी से नॉकआउट में जगह बनाने की लड़ाई और रोचक हो गई है। ब्राजील इस जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा और नॉकआउट में जगह लगभग पक्की करने की कोशिश करेगा। वहीं स्कॉटलैंड के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 16:38:15 +0530</pubDate>
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