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                <title>CrimeNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>आगरा में सनसनी: 45 दिन तक पति को लापता बताती रही पत्नी, बाथरूम के फर्श के नीचे मिला शव</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस सत्यापन के दौरान खुला हत्या का राज, पत्नी पर नींद की दवा देकर गला घोंटने और शव को घर के बाथरूम में दफनाने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sensation-in-agra-wife-kept-calling-husband-missing-for-45/article-57845"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/agra-murder-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। सिकंदरा क्षेत्र के दहतोरा इलाके में रहने वाले 44 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा पिछले करीब 45 दिनों से लापता बताए जा रहे थे। परिवार और पड़ोसियों को उनकी पत्नी रूबी शर्मा लगातार यही कहती रही कि वह घर छोड़कर कहीं चले गए हैं। इस बीच पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई और परिजनों ने कई जगह उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मामला तब अचानक पलट गया जब पुलिस एक पुराने मामले के सिलसिले में नियमित सत्यापन के लिए घर पहुंची। अधिकारियों को बातचीत के दौरान पत्नी का व्यवहार संदिग्ध लगा। पूछताछ आगे बढ़ी तो शक गहराया और आखिरकार जांच उस भयावह सच तक पहुंच गई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस ने घर के बाथरूम का फर्श तुड़वाया तो उसके नीचे से सुरेंद्र शर्मा का शव बरामद हुआ। इसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार सुरेंद्र शर्मा और रूबी शर्मा की शादी लगभग 16 वर्ष पहले हुई थी। दोनों अपनी दो बेटियों के साथ दहतोरा इलाके में रहते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन रूबी ने दोनों बेटियों को सुरेंद्र के बड़े भाई के घर भेज दिया था। इसके बाद उसने कथित रूप से सुरेंद्र को ऐसी खीर खिलाई जिसमें नींद की दवा मिलाई गई थी। पुलिस का आरोप है कि जब सुरेंद्र बेहोश हो गए तो उनका गला घोंटकर हत्या कर दी गई। अगले दिन घर के बाथरूम में गड्ढा खोदकर शव को उसमें दबा दिया गया और ऊपर से सीमेंट डालकर फर्श को दोबारा तैयार कर दिया गया, ताकि किसी को इस बात का संदेह न हो कि घर के भीतर ही शव दफन है। पुलिस का कहना है कि यह पूरी घटना पहली नजर में सुनियोजित प्रतीत होती है, हालांकि सभी तथ्यों की पुष्टि विस्तृत जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद करीब डेढ़ महीने तक रूबी शर्मा कथित तौर पर सभी रिश्तेदारों और पड़ोसियों से यही कहती रही कि उसका पति घर छोड़कर चला गया है। पुलिस के मुताबिक वह लोगों के सामने दुख भी जताती थी ताकि किसी को उस पर शक न हो। 26 मई को सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी की रिपोर्ट सिकंदरा थाने में दर्ज कराई गई थी। जांच आगे बढ़ रही थी, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था। इसी दौरान पुलिस एक अन्य मामले के संबंध में नियमित सत्यापन के लिए घर पहुंची। अधिकारियों ने देखा कि पूछताछ के दौरान रूबी काफी घबराई हुई थी और उसने तुरंत अपने देवर को भी घर बुला लिया। पुलिस को उसका व्यवहार असामान्य लगा। दूसरी ओर सुरेंद्र के बड़े भाई को पहले से ही अपने भाई की गुमशुदगी और रूबी के व्यवहार पर संदेह था। उन्होंने पुलिस के सामने अपनी आशंकाएं साझा कीं। इसके बाद पुलिस ने रूबी से लगातार पूछताछ की। अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसने कथित रूप से हत्या की बात स्वीकार कर ली और शव दफनाने की जगह भी बता दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बाथरूम का फर्श तुड़वाया और जमीन के नीचे से शव बाहर निकाला। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के कारण और समय की पुष्टि की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित हत्या के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी। पुलिस ने घर और घटनास्थल से कई साक्ष्य भी एकत्र किए हैं, जिनकी वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगरा के हरिपर्वत सर्किल की एसीपी अमीषा ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा की गुमशुदगी का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस लगातार जांच कर रही थी। जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर यह मामला हत्या में बदल गया। उन्होंने कहा कि आरोपी महिला से पूछताछ जारी है और सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। पड़ोसियों के अनुसार उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को वे लापता समझ रहे हैं, उसका शव उसी घर के बाथरूम के नीचे दफन हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:37:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया का दूसरा मोबाइल बरामद, कोडवर्ड चैट से खुल सकते हैं कई राज</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे कोर्ट ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, नार्को टेस्ट से दोनों ने किया इनकार; पुलिस डिजिटल सबूतों और कथित तीसरे शख्स की भूमिका की जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ketan-aggarwal-murder-case-sias-second-mobile-recovered-many-secrets/article-57841"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब पुणे की येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की पुलिस कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि किसी आरोपी की सहमति के बिना इस तरह का परीक्षण नहीं कराया जा सकता। इसी बीच जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने सिया गोयल के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मोबाइल में हत्या की साजिश से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिल सकते हैं। फोन को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज दिया गया है, जहां उसके डेटा की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार पहले जब्त किए गए मोबाइल से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है और अब दूसरे मोबाइल से भी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सिया और चेतन कथित तौर पर सामान्य भाषा में बातचीत करने के बजाय कोडवर्ड, निकनेम और इमोजी का इस्तेमाल करते थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों के बीच हुई चैट में कई ऐसे शब्द और संकेत मिले हैं, जिनका वास्तविक अर्थ फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इन्हें समझने के लिए साइबर और डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों ने अपनी कथित योजना को छिपाने के लिए सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल किया था। जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कोडवर्ड का क्या मतलब था और क्या इनका संबंध हत्या की कथित साजिश से है। पुलिस के मुताबिक यदि इन चैट का सही अर्थ सामने आता है तो मामले की जांच को नई दिशा मिल सकती है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच की जा रही है। दूसरी ओर अदालत में पेशी के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों से और पूछताछ की जरूरत बताई थी, लेकिन अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान एक और नया पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने महाराष्ट्र के बीड जिले से एक युवक को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह बालेवाड़ी की एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या उसे कथित हत्या की योजना की पहले से जानकारी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार दोनों आरोपियों ने उससे किसी स्तर पर योजना साझा की थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस युवक की आधिकारिक भूमिका स्पष्ट नहीं की है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि जांच में सहयोग मिलने पर उसे गवाह बनाया जा सकता है। पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों के अनुसार कथित साजिश की शुरुआत मई के अंतिम सप्ताह में हुई थी। पुलिस का दावा है कि 31 मई के आसपास सिया ने केतन की हत्या का विचार बनाया। जांच में यह भी सामने आया कि केतन को ट्रैकिंग और पहाड़ी क्षेत्रों में घूमने का शौक था, जिसका फायदा उठाकर उसे बार-बार लोहगढ़ किले चलने के लिए कहा गया। पुलिस के अनुसार 5 जून को सिया ने दोबारा वहां जाने की जिद की, लेकिन उस समय योजना सफल नहीं हो सकी। इसी बीच विदेश यात्रा से पहले कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट भी छिपा दिया गया ताकि यात्रा टल जाए। इसके बाद 14 जून को दोनों फिर लोहगढ़ पहुंचे। पुलिस का दावा है कि उस दिन भी केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह पेड़ का सहारा मिलने से बच गया। पूछने पर सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने सांप से बचाने के लिए धक्का दिया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी वजह से उस समय किसी को शक नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार 18 जून को तीसरी बार कथित योजना को अंजाम दिया गया। दावा है कि 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर के एक रिजॉर्ट में बुकिंग कर रखी थी, लेकिन उससे पहले प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर उसे फिर लोहगढ़ किले ले जाया गया। जांच में आरोप है कि इस बार चेतन चौधरी भी पीछे-पीछे वहां पहुंचा। पुलिस का दावा है कि जब केतन पहाड़ी की ओर देख रहा था, तभी दोनों ने पीछे से उसे धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस सभी डिजिटल सबूत, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, मोबाइल डेटा और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:53:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन पहले से रिहा हो चुकी सोनम की जमानत तत्काल रद्द करने से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/honeymoon-murder-case-supreme-court-refuses-to-stay-bail-of/article-57833"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sonam-raghuvanshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मेघालय सरकार ने इस मामले में मेघालय हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत सोनम को जमानत दी गई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले के कुछ पहलुओं पर सवाल जरूर उठाए, लेकिन यह भी माना कि सोनम पहले ही जेल से रिहा हो चुकी हैं और ट्रायल कोर्ट की ओर से तय की गई शर्तों का पालन करते हुए फिलहाल शिलांग में रह रही हैं। अदालत ने फिलहाल उनकी जमानत रद्द करने या उस पर रोक लगाने का कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया। यह मामला वर्ष 2025 में सामने आए चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा है। आरोप है कि मेघालय में हनीमून के दौरान राजा रघुवंशी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी, उनके कथित प्रेमी और अन्य आरोपियों को जांच के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस केस ने देशभर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार चर्चा में रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट और निचली अदालतों ने पहले ही सोनम के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनम की जमानत याचिका पहले तीन बार खारिज हो चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जांच के दौरान इस बात की आशंका जताई गई थी कि यदि उन्हें राहत दी जाती है तो वह फरार हो सकती हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को लेकर कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने सुनवाई के दौरान पूछा कि यदि पहले तथ्यों के आधार पर जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं, तो बाद में केवल तकनीकी आधार पर राहत देना किस हद तक उचित माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली नजर में हाई कोर्ट के आदेश के कुछ पहलुओं पर अदालत की आपत्तियां हैं। हालांकि पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी हैं और फिलहाल अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही हैं। ऐसे में तत्काल उनकी जमानत पर रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है और आगे विस्तृत सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू गिरफ्तारी के दौरान दर्ज की गई कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा रहा। रिकॉर्ड के अनुसार सोनम रघुवंशी को 27 अप्रैल को जमानत मिली थी और इस फैसले में गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में हुई एक गंभीर त्रुटि अहम कारण बनी। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दर्ज किया गया था, जो हत्या के अपराध से संबंधित है। लेकिन जब सोनम को गिरफ्तारी के आधार बताए गए तो दस्तावेजों में बीएनएस की धारा 403(1) का उल्लेख किया गया। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि बीएनएस में धारा 403(1) का कोई अस्तित्व ही नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि यही त्रुटि केवल एक दस्तावेज तक सीमित नहीं थी, बल्कि गिरफ्तारी मेमो, गिरफ्तारी चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो, अधिकारों की जानकारी से जुड़े रिकॉर्ड और केस डायरी सहित कई दस्तावेजों में दोहराई गई थी। हाई कोर्ट ने माना था कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के वास्तविक आधार की स्पष्ट जानकारी देना उसका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि यह केवल क्लर्क की साधारण गलती थी। हाई कोर्ट का मानना था कि कई दस्तावेजों में एक जैसी त्रुटि होना गंभीर प्रक्रिया संबंधी कमी को दर्शाता है। इसी आधार पर सोनम को जमानत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट इस आदेश की वैधता और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:56 +0530</pubDate>
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                <title>नर्मदापुरम में नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक निलंबित, बच्चों से अभद्र व्यवहार के आरोप पर केस दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[इटारसी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय का मामला, शिक्षक पर छात्र-छात्राओं से दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप; मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि के बाद विभागीय कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/teacher-reached-school-drunk-in-narmadapuram-case-registered-against-him/article-57832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmadapuram.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इटारसी के आदिवासी विकासखंड केसला के एक गांव स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक गोपाल गिरी गोस्वामी पर स्कूल में शराब के नशे में पहुंचने, बच्चों के साथ मारपीट करने और छात्राओं से कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए और शिक्षक के व्यवहार के वीडियो बनाकर अधिकारियों तक पहुंचाए। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ बाल संरक्षण कानून के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जनजातीय कार्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार घटना गुरुवार की बताई जा रही है, जब शिक्षक कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और बच्चों के सामने अनुचित व्यवहार कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने एक छात्र से अपने जूते साफ करने के लिए कहा और उसे अनुचित तरीके से व्यवहार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। वहीं एक छात्रा को अनुचित संबोधन से बुलाने और अन्य छात्राओं के साथ भी आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले के सामने आने के बाद पूरे गांव में नाराजगी फैल गई और अभिभावकों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीणों का आरोप है कि यह पहली बार नहीं था जब शिक्षक पर इस तरह के आरोप लगे हों। उनका कहना है कि वह लंबे समय से शराब के नशे में स्कूल आते थे और बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार करते थे, लेकिन इस बार घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंच गया। आरोप यह भी है कि शिक्षक ने बीड़ी लाने से इनकार करने पर एक छात्र के साथ मारपीट की। घटना के बाद स्कूल पहुंचे ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी आशा मौर्य, बीआरसी रत्ना सोनिया और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग के निर्देश पर केसला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार बच्चों की काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि घटना के बाद उनके मन में पैदा हुआ डर और मानसिक तनाव कम किया जा सके। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच संवेदनशीलता के साथ की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। घटना से जुड़े वीडियो भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी ताकि आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">केसला थाना प्रभारी राहुल रैकवार ने बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय कानून की संबंधित धाराओं और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान मेडिकल परीक्षण भी कराया गया, जिसमें शिक्षक के नशे में होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग विवेक नागवंशी ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय का वातावरण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीईओ आशा मौर्य ने बताया कि पालकों, बच्चों और स्कूल से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सभी तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल कर कलेक्टर को भेजा जाएगा। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित निगरानी, समय-समय पर निरीक्षण और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया का दूसरा मोबाइल मिला, कोडवर्ड चैट की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, पुलिस अब बरामद मोबाइल और कथित सांकेतिक चैट के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a48978572de9/article-57819"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी ताकि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ाई जा सके, लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। पेशी के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी की सहमति के बिना ऐसे परीक्षण नहीं कराए जा सकते। इसके बाद फिलहाल इन जांच प्रक्रियाओं पर रोक लग गई है। पुलिस का कहना है कि अब डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी बीच सिया के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। इस मोबाइल को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है, जहां उसके डेटा की जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस डिवाइस से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन आपस में कथित तौर पर कोडवर्ड और सांकेतिक भाषा में बातचीत करते थे। चैट में निकनेम, इमोजी और ऐसे संकेतों का इस्तेमाल किया गया है, जिनका वास्तविक अर्थ समझने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन चैट के जरिए दोनों कथित रूप से अपनी योजनाओं पर चर्चा करते थे। हालांकि इन संदेशों की अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। इसी बीच मामले में तीसरे व्यक्ति की संभावित भूमिका की भी जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बीड जिले से एक युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि वह पुणे के बालेवाड़ी स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उसे कथित योजना की पहले से जानकारी थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि उसे गवाह बनाया जाए या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस जांच के अनुसार केतन अग्रवाल और सिया गोयल की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। दोनों की सगाई पहले हो चुकी थी और परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था। जांच में यह दावा किया गया है कि मई के आखिर में कथित हत्या की योजना बनाई गई और अगले कुछ दिनों में घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। पुलिस का आरोप है कि 14 जून को लोहगढ़ किले पर पहली बार कथित तौर पर केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद 18 जून को सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को दोबारा लोहगढ़ फोर्ट चलने के लिए राजी किया। पुलिस का आरोप है कि उसी दिन चेतन चौधरी भी वहां मौजूद था और दोनों ने मिलकर केतन को पहाड़ी से धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और फोरेंसिक रिपोर्ट के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं बचाव पक्ष ने अभी तक आरोपों पर विस्तार से सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मामले की अगली सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत तय तारीख पर होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>रायगढ़ में नाबालिग को राजस्थान में बेचने की साजिश का खुलासा, चार साल से फरार आरोपी जशपुर से गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[17 वर्षीय लड़की को शादी के बहाने 20 हजार रुपये में बेचने की थी योजना, ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/conspiracy-to-sell-minor-to-rajasthan-exposed-in-raigarh-accused/article-57674"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-crime.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चार साल पुराने मानव तस्करी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र से वर्ष 2022 में लापता हुई 17 वर्षीय नाबालिग लड़की को राजस्थान ले जाकर बेचने की कथित साजिश में शामिल एक फरार आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले चार वर्षों से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। पुलिस ने उसे जशपुर जिले के उसके गांव से दबिश देकर पकड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में पहले ही तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था, जबकि चौथा आरोपी लगातार फरार था।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2022 को हुई थी, जब नाबालिग लड़की के पिता ने धरमजयगढ़ थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी 17 वर्षीय बेटी 23 जून की शाम घर से बिना किसी को बताए चली गई थी। परिवार ने अपने स्तर पर उसकी काफी तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मध्यप्रदेश के अनुपपुर रेलवे स्टेशन से मिली। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक ट्रेन में सफर कर रही नाबालिग लड़की को दो संदिग्ध व्यक्तियों के साथ बरामद किया। सूचना मिलने पर धरमजयगढ़ पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और लड़की को सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर वापस रायगढ़ लाई। इसके बाद उससे और संदिग्धों से पूछताछ की गई, जिसमें पूरे मामले का खुलासा हुआ।</p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मिलकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाने की योजना बनाई थी। प्रारंभिक जांच के अनुसार, वहां उसकी शादी कराने का झांसा देकर उसे 20 हजार रुपये में बेचने की कथित साजिश रची गई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मानव तस्करी सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। जांच में हीरालाल चौहान, देवलाल तिग्गा, रामपाल यादव और रामा चौहान के नाम सामने आए।</p>
<p>पुलिस ने वर्ष 2022 में कार्रवाई करते हुए हीरालाल चौहान, देवलाल तिग्गा और रामपाल यादव को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। हालांकि मामले का चौथा आरोपी रामा चौहान गिरफ्तारी से बच निकला था। पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी, लेकिन वह अपना ठिकाना बदलता रहा और चार वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने में सफल रहा।</p>
<p>रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे <strong>ऑपरेशन क्लीन हंट</strong> के तहत फरार आरोपियों की धरपकड़ अभियान के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रामा चौहान जशपुर जिले के अपने गांव जोराडोल आया हुआ है। सूचना मिलते ही धरमजयगढ़ थाना प्रभारी राजेश जांगड़े के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से गांव में दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने मामले से जुड़े कई तथ्यों की जानकारी दी। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना पहले से जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जा रही हैं।</p>
<p>रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल किसी भी आरोपी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत लंबे समय से फरार अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की जा रही है। अभियान का उद्देश्य ऐसे मामलों में लंबित कार्रवाई को पूरा करना और फरार आरोपियों को न्यायालय के सामने पेश करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा।</p>
<p>मानव तस्करी से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नाबालिग बच्चों और युवतियों को नौकरी, शादी या बेहतर भविष्य का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाने के कई मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में परिवारों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी जाती है।</p>
<p>पुलिस का यह भी कहना है कि रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि इस तरह के मामलों को समय रहते रोका जा सके। इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के बीच हुए समन्वय से नाबालिग को सुरक्षित बरामद किया जा सका, जिसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p>चार साल बाद फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि मानव तस्करी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार निगरानी और अभियान चलाने की बात कह रही हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में पानी के जार में छिपाकर बेच रहा था नशीली कोरेक्स, ऑपरेशन प्रहार 2.0 में पुलिस ने दबोचा</title>
                                    <description><![CDATA[अमहिया थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर पुलिया के पास ग्राहक का इंतजार कर रहे युवक को गिरफ्तार किया। पानी के जार में छिपाकर रखी अवैध नशीली कफ सिरप जब्त की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/in-rewa-the-drug-corex-was-selling-by-hiding-it/article-57636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rewa-news-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रीवा जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। अमहिया थाना पुलिस ने अवैध रूप से नशीली कफ सिरप (कोरेक्स) की बिक्री कर रहे एक युवक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाए हुए था। वह पानी के जार के अंदर नशीली कफ सिरप छिपाकर ग्राहकों तक पहुंचा रहा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया और उसके कब्जे से अवैध कफ सिरप बरामद कर ली। 1 जुलाई को की गई। अमहिया थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नरेंद्र नगर स्थित खमरिया हाउस के पास बनी पुलिया पर एक युवक संदिग्ध अवस्था में बैठा हुआ है। सूचना में यह भी बताया गया था कि युवक नीले रंग की जींस और स्काई ब्लू रंग की टी-शर्ट पहने हुए है। उसके पास एक पानी का जार रखा है, जिसमें अवैध नशीली कफ सिरप छिपाकर रखी गई है। वह वहां संभावित ग्राहकों का इंतजार कर रहा है और मौका मिलते ही नशीली दवा की बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। पुलिस जैसे ही बताए गए स्थान पर पहुंची, वहां मौजूद युवक ने पुलिस को देखते ही भागने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस टीम पहले से सतर्क थी और चारों तरफ घेराबंदी कर ली गई थी। कुछ ही दूरी पर युवक को पकड़ लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम मयंक मिश्रा उर्फ अमन गौतम (24) निवासी सुंदर नगर, बोदाबाग बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी की तलाशी लेने पर पुलिस को उसके पास रखा पानी का जार संदिग्ध लगा। जब जार की जांच की गई तो उसके अंदर अवैध रूप से रखी गई नशीली कफ सिरप की बोतलें बरामद हुईं। पुलिस ने मौके पर ही सभी बोतलों को जब्त कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस तरीके से नशीली कफ सिरप की बिक्री कर रहा था। पानी के जार में कफ सिरप छिपाने के कारण आम लोगों के साथ-साथ पुलिस को भी उस पर आसानी से शक नहीं होता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशीली कफ सिरप का दुरुपयोग युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग चिकित्सकीय उपयोग के बजाय इसका इस्तेमाल नशे के रूप में करते हैं। इसी कारण बिना वैध अनुमति या निर्धारित नियमों के विपरीत इसकी बिक्री कानूनन अपराध है। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को यह नशीली कफ सिरप कहां से मिलती थी और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि उसके अन्य साथियों और सप्लाई चेन की जानकारी जुटाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में नशे के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इसके आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल ने बताया कि जिले में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऑपरेशन प्रहार 2.0 के तहत पुलिस की विशेष टीमें लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया है, ताकि अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों तक आसानी से पहुंचा जा सके। उन्होंने कहा कि समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही है और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। रीवा पुलिस पिछले कुछ महीनों से नशे के कारोबार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में अवैध शराब, गांजा, नशीली गोलियां और कफ सिरप की तस्करी करने वालों के खिलाफ कई अभियान चलाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए अवैध कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लगातार कार्रवाई होने से अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा और समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। लोगों ने पुलिस से इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रखने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी प्रकार की नशीले पदार्थों की बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पुलिस का कहना है कि जनता के सहयोग से ही नशे के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:52:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुर्ग में आइसक्रीम पार्लर की आड़ में चल रहा सेक्स रैकेट, पुलिस की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[फर्जी ग्राहक बनाकर पहुंची पुलिस ने जलाराम लॉज में मारा छापा, तीन महिलाओं समेत संचालक और ग्राहकों को हिरासत में लिया, आपत्तिजनक सामग्री बरामद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/sex-racket-running-under-the-cover-of-ice-cream-parlor/article-57298"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में रविवार को पुलिस ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया। इंदिरा मार्केट स्थित जलाराम लॉज में आइसक्रीम पार्लर और मिठाई दुकान की आड़ में कथित तौर पर देह व्यापार संचालित किया जा रहा था। लंबे समय से इस गतिविधि की चर्चा स्थानीय लोगों के बीच थी, लेकिन पुलिस के पास ठोस जानकारी नहीं थी। जब विश्वसनीय सूचना मिली तो सिटी कोतवाली पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए लॉज में छापा मारा। इस कार्रवाई में संचालक, तीन महिलाओं और ग्राहकों सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया। मौके से नकदी, मोबाइल फोन, बड़ी संख्या में कंडोम के पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था ताकि किसी को भनक न लग सके। रविवार दोपहर करीब तीन बजे तीन अलग-अलग वाहनों में पुलिस टीम इंदिरा मार्केट पहुंची। सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले एक पुलिसकर्मी को फर्जी ग्राहक बनाकर लॉज के भीतर भेजा गया। बताया जा रहा है कि अंदर पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी ने वहां चल रही गतिविधियों की पुष्टि की और जैसे ही बाहर मौजूद टीम को संकेत मिला, सभी पुलिसकर्मी एक साथ लॉज में दाखिल हो गए। अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस को लॉज के अलग-अलग कमरों में तीन महिलाएं और दो पुरुष आपत्तिजनक स्थिति में मिले। मौके पर लॉज संचालक विजय गुजराती भी मौजूद था। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान करीब 20 हजार रुपये नकद, चार मोबाइल फोन, लगभग 80 कंडोम के पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया। इसके बाद सभी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सिटी कोतवाली थाना ले जाया गया, जहां उनसे देर शाम तक पूछताछ जारी रही। जांच में यह भी सामने आया कि जिस भवन में यह कार्रवाई हुई, उसके नीचे मिठाई और आइसक्रीम की दुकान संचालित होती थी, जबकि ऊपर बने लॉज का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। पुलिस को शुरुआती पूछताछ में यह जानकारी भी मिली कि यहां हर किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता था। केवल उन्हीं ग्राहकों को अंदर आने की अनुमति थी जिनके मोबाइल नंबर पहले से संचालकों के पास दर्ज थे। नए ग्राहकों को सीधे प्रवेश नहीं मिलता था। माना जा रहा है कि इसी वजह से लंबे समय तक यह गतिविधि बिना किसी संदेह के चलती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि इंदिरा मार्केट के मुख्य मार्ग पर स्थित इस परिसर को लेकर लंबे समय से तरह-तरह की चर्चाएं होती थीं। कई लोगों को संदेह था कि यहां सामान्य कारोबार के अलावा कुछ और भी चल रहा है। हालांकि किसी के पास ठोस सबूत नहीं थे। पुलिस को भी पहले स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई थी। जब विश्वसनीय सूचना मिली तो अधिकारियों ने बिना जल्दबाजी किए पूरे ऑपरेशन की रणनीति तैयार की। पहले फर्जी ग्राहक भेजने का फैसला भी इसी योजना का हिस्सा था ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की कानूनी या तकनीकी कमी न रह जाए। इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में की गई। पुलिस ने कार्रवाई के बाद लॉज और नीचे की दुकान का शटर बंद कर दिया और कई घंटे तक दस्तावेजों की जांच तथा पूछताछ की। आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए थे और कई लोगों ने कार्रवाई के वीडियो भी अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किए। बाजार में कुछ समय के लिए हलचल का माहौल बना रहा। पुलिस ने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने इस मामले में अनैतिक देह व्यापार से संबंधित कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में लॉज संचालक विजय गुजराती के अलावा ग्राहक नारायण देशमुख और तमाशा कुमार साहू शामिल हैं। तीन महिलाओं को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे। मोबाइल फोन और अन्य जब्त सामग्री की भी जांच की जाएगी ताकि संपर्कों और लेनदेन से जुड़ी जानकारी सामने आ सके। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिलती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायगढ़ में नाबालिग को भगाकर दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर ले गया</title>
                                    <description><![CDATA[विशाखापट्टनम और संबलपुर में ले जाकर बनाया शारीरिक संबंध, पुलिस ने अभियान चलाकर युवती को सकुशल बरामद किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-raigarh-the-accused-who-abducted-and-raped-a-minor/article-57215"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raigarh-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पहले किशोरी को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम और उसके बाद ओडिशा के संबलपुर लेकर गया था। लगातार बदलती लोकेशन और तकनीकी निगरानी के बीच पुलिस ने कई दिनों तक तलाश अभियान चलाया और आखिरकार नाबालिग को सुरक्षित बरामद कर लिया। मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। कोतरारोड़ थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 27 अप्रैल 2026 को अपनी 17 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 25 अप्रैल की रात परिवार के सभी सदस्य घर में सो रहे थे। देर रात करीब दो बजे जब परिजन उठे तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला और बेटी अपने कमरे में नहीं थी। परिवार ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर युवती की तलाश शुरू की। प्रारंभिक जांच में उसकी लोकेशन आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मिली। पुलिस टीम वहां रवाना होने की तैयारी कर रही थी, तभी जानकारी मिली कि दोनों ओडिशा के संबलपुर की ओर चले गए हैं। पुलिस ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और संबलपुर के लिए रवाना हुई। इसी बीच आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा, जिससे पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ गई। इसके बावजूद तकनीकी निगरानी जारी रखी गई और विभिन्न राज्यों की पुलिस से भी आवश्यक समन्वय किया गया। लगातार प्रयासों के बाद 26 जून 2026 को पुलिस को अहम सफलता मिली। कोड़ातराई क्षेत्र में दबिश देकर पुलिस ने नाबालिग किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से संदेही धीरज निराला उर्फ नानू (19) को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद दोनों को रायगढ़ लाकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार किशोरी ने पूछताछ में बताया कि आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था और इसी भरोसे पर वह उसके साथ चली गई। इसके बाद आरोपी उसे विशाखापट्टनम और फिर ओडिशा के संबलपुर लेकर गया, जहां उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 और 65(1) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 भी जोड़ दी। पूछताछ पूरी होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में मेडिकल रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच जारी रहेगी। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो आवश्यक कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में तकनीकी निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लगातार बदलती लोकेशन के बावजूद टीम ने मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर आरोपी तक पहुंच बनाई। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से युवती को सुरक्षित बरामद करने में सफलता मिली। रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि जिले में अभियान "संवेदना" के तहत गुम हुए बच्चों और किशोरियों की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाने, मानव तस्करी, यौन अपराध और अन्य गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दोषियों को कानून के दायरे में लाना है। इस मामले में भी लगातार प्रयास के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:40:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में 19 साल बताकर दर्ज कराई गुमशुदगी, दस्तावेजों में निकली नाबालिग</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा से बरामद किशोरी ने काउंसिलिंग में खोला बाल विवाह का राज, हाईकोर्ट ने 15 दिन में एफआईआर के दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/a-missing-person-lodged-in-gwalior-as-19-years-old/article-57198"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में एक गुमशुदगी का मामला उस समय नया मोड़ ले गया, जब पुलिस जिस युवती को बालिग मानकर तलाश रही थी, वह बरामद होने के बाद दस्तावेजों में नाबालिग निकली। मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि किशोरी का कम उम्र में ही गुपचुप तरीके से बाल विवाह करा दिया गया था। इस खुलासे के बाद मामला केवल गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाल विवाह और पॉक्सो एक्ट से जुड़ी गंभीर कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के सागरताल फेज-2 निवासी एक व्यक्ति ने 12 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 19 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी। सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने दो दिन पहले युवती को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा से बरामद कर लिया। वह बहोड़ापुर निवासी किशन खटीक के साथ मिली। पुलिस दोनों को ग्वालियर लेकर आई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। मामले में सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब युवती को न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान उसकी मार्कशीट और जन्म प्रमाण पत्र की जांच की गई। दस्तावेजों में उसकी उम्र 19 वर्ष नहीं बल्कि 17 वर्ष दर्ज मिली। इसके बाद पूरा मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण गंभीर हो गया। पुलिस ने तत्काल अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और किशोरी से काउंसिलिंग कराई गई ताकि पूरे घटनाक्रम की सही जानकारी सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">काउंसिलिंग के दौरान किशोरी ने जो जानकारी दी, उसने जांच को पूरी तरह नई दिशा दे दी। उसने बताया कि उसके पिता ने उसकी इच्छा के विरुद्ध कम उम्र में ही शादी करा दी थी। वह अपने कथित पति और ससुराल पक्ष के साथ नहीं रहना चाहती थी। इसी कारण उसने घर छोड़ने का फैसला किया और पड़ोस में रहने वाले किशन खटीक के साथ चली गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को भी बाल विवाह की पुष्टि से जुड़े तथ्य मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बाल विवाह किस परिस्थिति में कराया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की भी अहम भूमिका रही। युवती के पिता ने पहले पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। जब युवती बरामद हुई और उसकी वास्तविक उम्र के साथ बाल विवाह का मामला सामने आया तो न्यायालय ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए। अदालत ने बहोड़ापुर थाना पुलिस को आदेश दिया कि 15 दिन के भीतर बाल विवाह कराने वाले सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस ने जांच को और तेज कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस ने किशन खटीक के खिलाफ नाबालिग को अपने साथ ले जाने के मामले में अपहरण और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं अब जांच का फोकस किशोरी के माता-पिता, कथित पति, ससुराल पक्ष और उन सभी लोगों पर है जो बाल विवाह की प्रक्रिया में शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि नोएडा से बरामद किशोरी की उम्र दस्तावेजों के अनुसार 17 वर्ष है। जांच के दौरान बाल विवाह की पुष्टि हुई है और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सभी दस्तावेजों और बयानों की जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। कानूनी रूप से बाल विवाह प्रतिबंधित होने के बावजूद कई स्थानों पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। बाल विवाह से न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। ऐसे मामलों में परिवार के साथ-साथ विवाह कराने वाले लोगों की भी जिम्मेदारी तय होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 13:56:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुणे केतन मर्डर केस पर बॉलीवुड प्रतिक्रियाएं, बयान से मचा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[हिना खान ने हत्या पर उठाए सवाल, आंचल खुराना के बयान पर विवाद बढ़ा; पुलिस जांच में सिया और साथी पर आरोप तय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/75-magnitude-earthquake-declared-emergency-in-venezuela/article-56937"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pune-murder-case-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे में केतन अग्रवाल मर्डर केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मामले में मंगेतर सिया और उनके बॉयफ्रेंड चेतन पर हत्या का आरोप लगने के बाद अब यह केस सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इस पर फिल्मी जगत की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सोशल मीडिया पर दिए गए बयानों के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच बहस तेज हो गई है कि आखिर रिश्तों में इतना बड़ा कदम कैसे उठाया गया। अभिनेत्री हिना खान ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज के समय में सच बोलना और सच सुनना दोनों ही मुश्किल हो गया है, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी की जान लेना समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर रिश्ते में समस्या थी तो उसे खत्म किया जा सकता था, लेकिन हत्या जैसा कदम बेहद दर्दनाक और अस्वीकार्य है। उनके इस बयान को काफी लोगों ने समर्थन दिया, वहीं कुछ यूजर्स ने इसे सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर अभिनेत्री आंचल खुराना का बयान विवादों में आ गया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला केवल रिश्तों का नहीं बल्कि नैतिकता और इंसानियत का भी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने हत्या जैसा कदम उठाया है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उनके बयान के कुछ हिस्सों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां कई लोगों ने इसे अत्यधिक सख्त और विवादास्पद बताया है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में भावनाओं की बजाय कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 18 जून को केतन अग्रवाल लोहगढ़ किले पर घूमने गए थे, जहां वे करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गए। शुरुआत में इसे एक हादसा माना गया था, लेकिन बाद में तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई। पुलिस का कहना है कि मामले में हत्या की साजिश की आशंका मजबूत हुई है। जांच में सामने आया है कि सिया और उनके बॉयफ्रेंड चेतन के बीच लंबे समय से संपर्क था और दोनों शादी को लेकर गंभीर संबंध में थे। पुलिस के अनुसार सिया की शादी परिवार द्वारा केतन से तय कर दी गई थी, जिससे वह असहज थीं। इसी पृष्ठभूमि में कथित रूप से हत्या की योजना बनाई गई। पुलिस का दावा है कि घटना के दिन सिया और चेतन दोनों मौके पर मौजूद थे और घटना से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी सबूत भी मिले हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा करने की बात कह रहे हैं। वहीं फिल्मी हस्तियों के बयानों ने इस केस को और अधिक चर्चा में ला दिया है, जिससे यह सिर्फ एक आपराधिक मामला न रहकर एक व्यापक सामाजिक बहस का विषय बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और सभी साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से परखा जा रहा है। मोबाइल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी। इस बीच केतन अग्रवाल के परिवार ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि शुरुआत में इसे हादसा बताया गया था, लेकिन बाद में सामने आए तथ्यों ने उन्हें झकझोर दिया। वे चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:52:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस अफसरों के नाम पर युवक से एक लाख की ठगी, बिलासपुर में मामला दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[थाने में हुए विवाद के बाद परिवार को डराकर मांगे गए पांच लाख रुपए, एक आरोपी गिरफ्तार, दो अन्य की भूमिका की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/case-registered-in-bilaspur-for-cheating-a-young-man-of/article-56913"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-fraud-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस अधिकारियों के नाम पर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि थाने में हुए एक विवाद के बाद युवक की घबराहट का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने उसके परिवार को डरा-धमकाकर पैसों की मांग की। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बड़ी रकम देनी पड़ेगी। परिवार डर गया और एक लाख रुपए आरोपियों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलने के बाद भी आरोपियों की मांग खत्म नहीं हुई और वे लगातार बाकी रकम के लिए दबाव बनाते रहे। मामले की शिकायत मिलने के बाद तारबाहर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल जारी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले के सरायपाली थाना क्षेत्र के ग्राम मोहदा निवासी रूपेश पटेल फोटोग्राफी का काम करता है। 19 जून को वह अपने निजी कार्य से बिलासपुर आया था। इसी दौरान उसकी परिचित महिलाओं भारती मिरे और नेहा पंत के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर सभी पक्ष तारबाहर थाने पहुंचे। बताया जा रहा है कि थाने का माहौल और संभावित कार्रवाई को लेकर रूपेश काफी घबरा गया था। इसी दौरान उसने अपने एक परिचित दोस्त सचिन मेहर को फोन कर पूरी स्थिति की जानकारी दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सचिन मेहर ने यह जानकारी अपने परिचित सुमित देवांगन को दी। आरोप है कि दोनों ने मिलकर रूपेश की मानसिक स्थिति और डर का फायदा उठाने की योजना बनाई। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने रूपेश के परिवार से संपर्क किया और कहा कि मामला गंभीर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को संतुष्ट करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत पड़ेगी। परिवार को यह विश्वास दिलाया गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो रूपेश के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। परिजनों के अनुसार आरोपियों ने शुरुआत में पांच लाख रुपए की मांग की थी। परिवार पहले से ही तनाव में था और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वास्तव में मामला कितना गंभीर है। इसी डर और दबाव के माहौल में परिवार ने आरोपियों की बातों पर भरोसा कर लिया। शिकायत में कहा गया है कि बाद में सुमित देवांगन द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में एक लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। परिवार को उम्मीद थी कि रकम देने के बाद मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोप है कि एक लाख रुपए मिलने के बाद भी आरोपी लगातार रूपेश और उसके परिवार पर बाकी चार लाख रुपए देने का दबाव बनाते रहे। चार दिनों तक फोन कॉल और मैसेज के जरिए उनसे संपर्क किया गया। पैसे नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया जाता रहा। इसी दौरान परिवार को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। जब उन्होंने मामले की गहराई से जानकारी जुटाने की कोशिश की तो कई बातें संदिग्ध नजर आईं। पीड़ित रूपेश पटेल ने बाद में सुमित देवांगन से सीधे पूछताछ की। आरोप है कि इस दौरान सुमित ने बताया कि 19 जून की शाम पांच से सात बजे के बीच प्राप्त एक लाख रुपए की राशि उसने चांपा निवासी महेंद्र देवांगन के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी थी। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। पीड़ित ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी और कार्रवाई की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत मिलने के बाद तारबाहर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने सचिन मेहर और सुमित देवांगन सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और अवैध वसूली से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर लोगों के डर और असमंजस का फायदा उठाया जाता है। किसी कानूनी या पुलिस मामले में फंसने की आशंका होने पर कई लोग बिना सत्यापन किए पैसों का लेनदेन कर बैठते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारियों के नाम पर पैसे मांगता है या किसी कार्रवाई को रोकने के बदले रकम देने का दबाव बनाता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:41:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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