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                <title>Wildlife Tourism - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Wildlife Tourism RSS Feed</description>
                
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                <title>मुख्यमंत्री की कैबिनेट बैठक आज, तबादला अवधि बढ़ाने और स्वास्थ्य नीति पर बड़ा फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मिल सकती है मंजूरी, इंदौर मेट्रो, वन्यजीव पर्यटन और संविदा कर्मचारियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/chief-ministers-cabinet-meeting-today-big-decision-possible-on-extension/article-56076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-cabinet-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार की मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली इस बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रस्तावों के साथ-साथ तबादला अवधि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी फैसला लिया जा सकता है। राज्य के विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है क्योंकि कई ऐसे प्रस्ताव एजेंडे में शामिल हैं जिनका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है। कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए नई नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रस्ताव के तहत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों तथा डायग्नोस्टिक केंद्रों को प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। सरकार इन संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि प्रदेश के कई हिस्सों में निजी और सामाजिक संस्थाएं स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। ऐसे में यदि उन्हें आवश्यक संसाधन और सहयोग दिया जाता है तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव होगा। उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री राजेंद्र शुक्ल के विभाग द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को लेकर पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। अब अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा। प्रदेश सरकार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती तथा चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं पहले से संचालित हैं। ऐसे में नई स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति को सरकार की स्वास्थ्य सुधार रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कैबिनेट बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा तबादला अवधि को लेकर है। राज्य सरकार ने इस वर्ष एक जून से 15 जून तक स्थानांतरण की अवधि निर्धारित की थी। हालांकि कई विभागों में अब तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि कई मंत्रियों और विभागीय अधिकारियों ने तबादला अवधि बढ़ाने की मांग रखी है ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले कई बार सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे चुके हैं कि इस बार तबादला अवधि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बावजूद प्रशासनिक जरूरतों और विभागों की मांग को देखते हुए कैबिनेट में इस विषय पर चर्चा होने की संभावना बनी हुई है। यदि अवधि बढ़ाने का फैसला होता है तो हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों को इसका लाभ मिल सकता है। वहीं यदि सरकार अपने पुराने रुख पर कायम रहती है तो स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर ही समाप्त मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन परियोजनाओं में शामिल इंदौर मेट्रो को लेकर सरकार पहले ही कई चरणों में मंजूरी दे चुकी है। अब परियोजना की लागत में संशोधन के बाद इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की गति और तेज हो सकती है। वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के कारण वन्यजीव पर्यटन का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ है। सरकार इन योजनाओं को आगे बढ़ाकर पर्यटन और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन देना चाहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गांवों के पुनर्वास से जुड़े मामलों में मुआवजा स्वीकृति पर भी चर्चा होने की संभावना है। श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं को जारी रखने और स्थानीय निधि संपरीक्षा से संबंधित कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है। प्रशासनिक दृष्टि से यह फैसले महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इनका असर बड़ी संख्या में हितग्राहियों पर पड़ता है। कैबिनेट के एजेंडे में रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन से जुड़ा एक पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार इन केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली के माध्यम से किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा। इसके तहत विभाग की शासकीय संस्थाओं में मानदेय के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को विशेष प्रकरण मानते हुए संविदा कर्मचारी घोषित करने पर विचार किया जाएगा। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। मंगलवार की कैबिनेट बैठक कई महत्वपूर्ण निर्णयों के कारण बेहद अहम मानी जा रही है। स्वास्थ्य नीति, तबादला अवधि, इंदौर मेट्रो, पर्यटन, पुनर्वास और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर होने वाले फैसले आने वाले समय में प्रदेश की प्रशासनिक और विकास संबंधी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 13:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>नंदनवन जू और जंगल सफारी घूमना हुआ महंगा, टिकट दरों में बड़ा इजाफा</title>
                                    <description><![CDATA[नई रेट पॉलिसी लागू, बच्चों से लेकर विदेशी पर्यटकों तक सभी पर बढ़े शुल्क का असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/visiting-nandanvan-zoo-and-jungle-safari-becomes-expensive-big-increase/article-54613"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/nandanvan-zoo.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नवा रायपुर स्थित नंदनवन जू और जंगल सफारी घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों को अब पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जंगल सफारी और नंदनवन जू की टिकट दरों में संशोधन करते हुए नई रेट पॉलिसी लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश टिकट, सफारी राइड और अन्य सुविधाओं के शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कई श्रेणियों में टिकट दरें लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं, जबकि कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी दोगुनी से भी अधिक है। नए शुल्क लागू होने के बाद परिवार के साथ घूमने आने वाले पर्यटकों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दरों के अनुसार अब 6 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए जू एंट्री टिकट 25 रुपए के बजाय 50 रुपए देना होगा। यानी बच्चों के टिकट शुल्क में सीधे 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं 12 वर्ष से अधिक उम्र के पर्यटकों के लिए जू एंट्री टिकट 50 रुपए से बढ़ाकर 100 रुपए कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब एक सामान्य परिवार को पहले की तुलना में प्रवेश के लिए लगभग दोगुना खर्च करना पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी पर्यटकों के लिए भी शुल्क में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां विदेशी नागरिकों के लिए प्रवेश टिकट 200 रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि विदेशी पर्यटकों के लिए शुल्क में हुई यह वृद्धि काफी बड़ी है और इसका असर आने वाले समय में पर्यटक संख्या पर भी पड़ सकता है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि बढ़ी हुई राशि का उपयोग सुविधाओं के विकास और रखरखाव पर किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई नीति में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को कुछ राहत जरूर दी गई है। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों को पहले की तरह नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा जारी रहेगी। इसके लिए उन्हें अपना वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह छूट सप्ताहांत, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों के दौरान लागू नहीं होगी। ऐसे दिनों में उन्हें भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जंगल सफारी और जू के रखरखाव, पशु संरक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए टिकट दरों में संशोधन का फैसला लिया गया है। विभाग का दावा है कि नई आय से सफारी क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी, पर्यटकों के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और वन्यजीवों की देखभाल को और मजबूत बनाया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जंगल सफारी के शुल्क में कमी की गई थी। उस समय नंदनवन जू का प्रवेश भी सफारी पैकेज में शामिल रहता था। बाद में दोनों को अलग-अलग कर दिया गया, जिससे पर्यटकों को अलग टिकट लेना पड़ने लगा। अब नए संशोधन के बाद कुल खर्च और बढ़ गया है। इससे खासकर उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो बच्चों के साथ सप्ताहांत में यहां घूमने आते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नंदनवन जंगल सफारी छत्तीसगढ़ की प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव स्थलों में से एक मानी जाती है। यह नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित है और राजधानी रायपुर से अच्छी सड़क कनेक्टिविटी के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 35 किलोमीटर और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से करीब 15 किलोमीटर है। लगभग 800 एकड़ क्षेत्र में फैली यह सफारी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए जानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सफारी परिसर में 130 एकड़ का खांडवा जलाशय भी मौजूद है, जहां हर वर्ष विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव प्राप्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जंगल सफारी में चार अलग-अलग सफारी जोन विकसित किए गए हैं। इनमें शाकाहारी सफारी, भालू सफारी, टाइगर सफारी और शेर सफारी शामिल हैं। प्रत्येक जोन को वन्यजीवों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया गया है। जानवरों के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से यहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और लगभग 55 हजार पौधे लगाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गर्मी के मौसम में वन्यजीवों की सुरक्षा और आराम के लिए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं। कई बाड़ों में कूलर और पानी के फव्वारे लगाए गए हैं ताकि जानवरों को अत्यधिक तापमान से राहत मिल सके। भालुओं समेत अन्य वन्यजीवों के लिए विशेष आहार की व्यवस्था भी की जा रही है। उन्हें तरबूज और अन्य मौसमी फल दिए जा रहे हैं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। नई टिकट दरों को लेकर पर्यटकों की मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोगों का मानना है कि बेहतर सुविधाओं के लिए शुल्क बढ़ाना जरूरी है, जबकि कई पर्यटक इसे आम परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:05:07 +0530</pubDate>
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