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                <title>EducationNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>नर्मदापुरम में नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक निलंबित, बच्चों से अभद्र व्यवहार के आरोप पर केस दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[इटारसी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय का मामला, शिक्षक पर छात्र-छात्राओं से दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप; मेडिकल रिपोर्ट में नशे की पुष्टि के बाद विभागीय कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/teacher-reached-school-drunk-in-narmadapuram-case-registered-against-him/article-57832"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmadapuram.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इटारसी के आदिवासी विकासखंड केसला के एक गांव स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक गोपाल गिरी गोस्वामी पर स्कूल में शराब के नशे में पहुंचने, बच्चों के साथ मारपीट करने और छात्राओं से कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण बड़ी संख्या में स्कूल पहुंच गए और शिक्षक के व्यवहार के वीडियो बनाकर अधिकारियों तक पहुंचाए। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ बाल संरक्षण कानून के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जनजातीय कार्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार घटना गुरुवार की बताई जा रही है, जब शिक्षक कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे और बच्चों के सामने अनुचित व्यवहार कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने एक छात्र से अपने जूते साफ करने के लिए कहा और उसे अनुचित तरीके से व्यवहार करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। वहीं एक छात्रा को अनुचित संबोधन से बुलाने और अन्य छात्राओं के साथ भी आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले के सामने आने के बाद पूरे गांव में नाराजगी फैल गई और अभिभावकों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीणों का आरोप है कि यह पहली बार नहीं था जब शिक्षक पर इस तरह के आरोप लगे हों। उनका कहना है कि वह लंबे समय से शराब के नशे में स्कूल आते थे और बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार करते थे, लेकिन इस बार घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला अधिकारियों तक पहुंच गया। आरोप यह भी है कि शिक्षक ने बीड़ी लाने से इनकार करने पर एक छात्र के साथ मारपीट की। घटना के बाद स्कूल पहुंचे ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और शिक्षा विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी आशा मौर्य, बीआरसी रत्ना सोनिया और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग के निर्देश पर केसला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार बच्चों की काउंसलिंग भी कराई जा रही है ताकि घटना के बाद उनके मन में पैदा हुआ डर और मानसिक तनाव कम किया जा सके। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच संवेदनशीलता के साथ की जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। घटना से जुड़े वीडियो भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं। शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी ताकि आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">केसला थाना प्रभारी राहुल रैकवार ने बताया कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ भारतीय कानून की संबंधित धाराओं और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान मेडिकल परीक्षण भी कराया गया, जिसमें शिक्षक के नशे में होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग विवेक नागवंशी ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय का वातावरण सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीईओ आशा मौर्य ने बताया कि पालकों, बच्चों और स्कूल से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। सभी तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल कर कलेक्टर को भेजा जाएगा। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्कूलों में शिक्षकों की नियमित निगरानी, समय-समय पर निरीक्षण और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>UPTET 2026 के लिए कड़ी सुरक्षा, तीन दिन में 19.94 लाख उम्मीदवार देंगे परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[60 जिलों के 955 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिन तक होगी परीक्षा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण प्रतिबंधित और 200 मीटर के दायरे में साइबर कैफे व फोटो कॉपी की दुकानें भी रहेंगी बंद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tight-security-for-uptet-2026-1994-lakh-candidates-will-appear/article-57645"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/uptet-2026-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 गुरुवार से पूरे प्रदेश में शुरू हो गई। राज्य के 60 जिलों में बनाए गए 955 परीक्षा केंद्रों पर तीन दिनों तक यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अनुसार इस बार करीब 19.94 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है, वहीं केंद्रों के आसपास भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। सुबह से ही कई परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। निर्धारित समय से काफी पहले उम्मीदवार अपने प्रवेश पत्र और पहचान पत्र के साथ केंद्रों पर पहुंचने लगे। सुरक्षा जांच के बाद ही उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी अभ्यर्थियों की पहचान का मिलान करने के बाद ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा रही है। कई केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की गई है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया था। इसके अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर के अभ्यर्थियों की परीक्षा 2 जुलाई को दोनों पालियों में और 3 जुलाई की पहली पाली में आयोजित की जा रही है। वहीं प्राथमिक स्तर के अभ्यर्थी 3 जुलाई की दूसरी पाली और 4 जुलाई की पहली पाली में परीक्षा देंगे। अलग-अलग पालियों में लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त रखी गई है। परीक्षा केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्र के 200 मीटर के दायरे में साइबर कैफे, फोटो कॉपी की दुकानें और पीसीओ अस्थायी रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे नकल या पेपर लीक जैसी किसी भी आशंका को काफी हद तक रोका जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और उड़नदस्ते लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा संचालन से जुड़े सभी अधिकारियों को समय पर केंद्रों का निरीक्षण करने और व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। UPTET उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा मानी जाती है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा 1 से 5 और उच्च प्राथमिक स्तर पर कक्षा 6 से 8 तक शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद ही उम्मीदवार भविष्य में शिक्षक भर्ती की विभिन्न प्रक्रियाओं में आवेदन करने के पात्र होते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला। कई उम्मीदवार सुबह जल्दी ही अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए ताकि अंतिम समय की किसी परेशानी से बचा जा सके। परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों की भी अच्छी-खासी भीड़ नजर आई। कई जगह प्रशासन ने पेयजल, यातायात और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था भी की थी, जिससे अभ्यर्थियों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। आयोग ने अभ्यर्थियों को पहले ही सलाह दी थी कि वे परीक्षा शुरू होने से काफी पहले केंद्र पर पहुंचें और अपने साथ केवल अनुमत दस्तावेज ही लेकर आएं। प्रवेश पत्र, वैध फोटो पहचान पत्र और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित भी किया जा सकता है। इसी वजह से अधिकांश उम्मीदवारों ने निर्धारित निर्देशों का पालन करते हुए समय पर परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। प्रदेश सरकार और शिक्षा सेवा चयन आयोग का कहना है कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराना उनकी प्राथमिकता है। पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सामने आए मामलों के बाद इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि तीन दिनों तक चलने वाली यह परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगी और सभी अभ्यर्थियों को निष्पक्ष माहौल में परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:53:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दुर्ग यूनिवर्सिटी में 11 साल बाद शुरू होगी यूटीडी, जुलाई से पीजी पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[फिजिक्स, केमिस्ट्री समेत पांच विषयों में होगी शुरुआत, नई बिल्डिंग का लोकार्पण अब भी बाकी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/utd-will-start-pg-studies-in-durg-university-after-11/article-57216"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/durg-university.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अब केवल परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने वाली संस्था नहीं रहेगा। करीब 11 साल बाद विश्वविद्यालय में पहली बार यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) की शुरुआत होने जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय परिसर में सीधे स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर की पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी जैसे पांच विषयों को मंजूरी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रवेश प्रक्रिया के बाद विद्यार्थियों के लिए नियमित अध्ययन और शोध का नया अध्याय शुरू होगा। लंबे समय से इस पहल का इंतजार किया जा रहा था, जिसे अब आखिरकार अमलीजामा पहनाया जा रहा है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की स्थापना अप्रैल 2015 में हुई थी। स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य संबद्ध कॉलेजों की परीक्षाएं आयोजित करना, परिणाम जारी करना और प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित रहा। विश्वविद्यालय परिसर में सीधे पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां यूटीडी शुरू नहीं हो सका था। अब पहली बार विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में ही उच्च शिक्षा और शोध का अवसर मिलेगा। कुलपति प्रो. संजय तिवारी के अनुसार विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। इसी दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिन पांच विषयों का प्रस्ताव भेजा था, उन्हें स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी शामिल हैं। इन सभी विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे दुर्ग और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होने से छात्रों को समय और खर्च दोनों की बचत होगी। विश्वविद्यालय ने केवल पारंपरिक विषयों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। कुलपति प्रो. तिवारी ने बताया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) से आठ नए प्रोफेशनल कोर्स को भी मंजूरी मिल चुकी है। इनमें एमबीए, एमसीए और फिनटेक जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के विजन डॉक्यूमेंट को ध्यान में रखते हुए सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ब्लॉकचेन मैनेजमेंट और ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे रोजगार आधारित कोर्स शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है। इन कोर्सों का उद्देश्य छात्रों को बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य में विशेष शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाने की योजना बना रहा है। रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) से स्पेशल बीएड प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में स्पेशल बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेशल एजुकेशन स्थापित करना चाहता है। राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया जाएगा। यूटीडी शुरू करने की योजना नई नहीं है। करीब आठ वर्ष पहले इसके लिए प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 64 पदों को स्वीकृति मिल चुकी थी। हालांकि विभिन्न प्रशासनिक कारणों से नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और यूटीडी शुरू नहीं हो पाया। अब जब विश्वविद्यालय में नियमित पढ़ाई शुरू होने जा रही है तो इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की उम्मीद भी बढ़ गई है। इससे न केवल विश्वविद्यालय में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होगी, बल्कि शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अब तक उसका औपचारिक लोकार्पण नहीं हो पाया है। इसी कारण शुरुआती दौर में पढ़ाई और प्रायोगिक कक्षाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। कुलपति ने बताया कि इस संबंध में शासकीय वीवाईटी साइंस कॉलेज के साथ एमओयू किया गया है। जिन विषयों के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होगी, वहां विद्यार्थियों को सहयोगी कॉलेजों की लैब सुविधाओं का उपयोग कराया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर में भी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए कुछ प्रायोगिक कार्य कराए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन का कहना है कि रूसा योजना के तहत सहयोगी कॉलेजों में प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं को पहले ही मजबूत किया जा चुका है। इसका लाभ सीधे विद्यार्थियों को मिलेगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि यूटीडी की शुरुआत से केवल नियमित पढ़ाई ही नहीं, बल्कि शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। प्री-पीएचडी परीक्षा पहले ही शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में रिसर्च को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बनाया जाएगा। साथ ही मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित करने की भी योजना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 15:39:26 +0530</pubDate>
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                <title>लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में कार्रवाई तेज, 67 कोचिंग सेंटरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्ग में 62 और बिलासपुर में 5 संस्थानों में मिली सुरक्षा खामियां, एक कोचिंग सेंटर सील; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट पर विशेष फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/action-intensified-in-chhattisgarh-after-lucknow-fire-notice-to-67/article-56912"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-coaching-centers.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुई भीषण आग की घटना के बाद देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बिलासपुर जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर सामने आए हैं, जहां बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने इसे गंभीर मानते हुए कई संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि एक संस्थान को सील भी कर दिया गया है। दुर्ग जिले में बुधवार रात पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने अचानक निरीक्षण अभियान चलाया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान में शहर और आसपास के प्रमुख कोचिंग सेंटरों की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं फायर एक्सटिंग्विशर की वैधता समाप्त हो चुकी थी तो कहीं उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका उपयोग योग्य तरीके से रखरखाव नहीं किया गया था। सबसे बड़ी चिंता इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था को लेकर सामने आई। जांच में पाया गया कि अधिकांश कोचिंग संस्थानों में वैकल्पिक निकासी मार्ग नहीं थे। कई भवनों में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार था। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में ऐसी व्यवस्था छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यही कारण है कि फायर सेफ्टी विभाग ने 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करते हुए कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुर्ग जिले में बड़ी संख्या में निजी कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। अनुमान के अनुसार यहां 150 से 200 के बीच प्रमुख कोचिंग सेंटर और ट्यूटोरियल संस्थान चल रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक संस्थान भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में स्थित हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई कोचिंग सेंटरों में छात्रों की संख्या के मुकाबले जगह काफी कम थी। कुछ भवनों में इतनी संकरी सीढ़ियां थीं कि एक समय में केवल एक व्यक्ति ही ऊपर या नीचे जा सकता था। ऐसी स्थिति में किसी दुर्घटना के दौरान छात्रों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण टीम ने छात्रों और संस्थान संचालकों से भी बातचीत की। अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली और यह समझने का प्रयास किया कि संस्थानों में आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्या व्यवस्था है। कई जगह संचालक जांच शुरू होते ही फायर सेफ्टी उपकरणों की व्यवस्था करते दिखाई दिए। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक रूप से उपलब्ध होना भी जरूरी है। दूसरी ओर बिलासपुर में भी नगर निगम, पुलिस और दमकल विभाग की संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। शहर के छह प्रमुख संस्थानों की जांच के दौरान पांच में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। इनमें फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, भवन अनुमति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी खामियां शामिल थीं। अधिकारियों ने सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब देने और कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में निरीक्षण के दौरान एक कोचिंग सेंटर में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। जांच में पाया गया कि भवन में प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा छात्रों की संख्या के अनुपात में भवन की क्षमता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। फायर सेफ्टी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों का पालन नहीं होने के कारण प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस और भवन संबंधी स्वीकृतियां पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं। कुछ जगहों पर सुरक्षा उपकरणों की संख्या कम थी, जबकि कुछ संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिक रूप से दिखाई गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छात्र सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन कई जगह सुरक्षा मानकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बड़ी संख्या में छात्र रोजाना इन संस्थानों में पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आग, भूकंप या अन्य आपात स्थिति से निपटने की तैयारी बेहद आवश्यक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट से ऐसी संभावित घटनाओं को रोका जा सकता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्था को सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:41:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहली कक्षा के बच्चों के लिए 3 महीने का रेडीनेस प्रोग्राम, खेल-खेल में होगी पढ़ाई की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[नई शिक्षा नीति के तहत एससीईआरटी ने तैयार किया विशेष मॉड्यूल, भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर रहेगा जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/3-month-readiness-program-for-first-class-children-studies-will/article-56911"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/school-readiness-program.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए इस शैक्षणिक सत्र से एक नई पहल शुरू की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार कक्षा-1 के विद्यार्थियों के लिए तीन महीने का विशेष रेडीनेस प्रोग्राम लागू करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों को स्कूल के वातावरण से परिचित कराना, उनमें सीखने के प्रति रुचि विकसित करना और पढ़ाई की मजबूत नींव तैयार करना है। कार्यक्रम के तहत बच्चों को सीधे किताबों और पाठ्यक्रम के दबाव में लाने के बजाय खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार हर वर्ष बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पहली बार स्कूल पहुंचते हैं, जिन्हें घर के माहौल से निकलकर विद्यालय की दिनचर्या में ढलने में समय लगता है। नए शिक्षक, नए साथी, कक्षा का वातावरण और नियमित पढ़ाई कई बच्चों के लिए शुरुआती दिनों में चुनौती बन जाती है। इसका असर उनकी सीखने की क्षमता पर भी पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रावधानों के अनुरूप यह रेडीनेस प्रोग्राम तैयार किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने इसके लिए विशेष मॉड्यूल विकसित किया है। मॉड्यूल को इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे बिना किसी तनाव के सीखने की प्रक्रिया से जुड़ सकें। कार्यक्रम की अवधि तीन महीने निर्धारित की गई है। इस दौरान बच्चों को भाषा, संख्याओं और बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा। इसके साथ ही उनमें सामाजिक व्यवहार, आत्मविश्वास और समूह में काम करने की क्षमता भी विकसित की जाएगी। रेडीनेस प्रोग्राम की सबसे खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक पढ़ाई के बजाय खेल आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी। शिक्षक बच्चों को कविता, कहानी, गीत, चित्र पहचान, रंग भरने, बिंदु मिलाने, चित्रों का मिलान करने, कागज चिपकाने और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करेंगे। बच्चों को पशु-पक्षियों की आवाज पहचानने, वस्तुओं को समझने और आसपास की दुनिया को जानने से जुड़ी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इससे बच्चे सहज रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल होंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक कक्षाओं में सीखने का तरीका जितना रोचक होगा, बच्चों की शिक्षा के प्रति रुचि उतनी ही अधिक बढ़ेगी। कई शोध और अध्ययनों में यह सामने आया है कि यदि बच्चे शुरुआती वर्षों में भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित नहीं कर पाते हैं, तो आगे की कक्षाओं में उन्हें लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पढ़ने, लिखने और गणना करने की मूलभूत क्षमता कमजोर होने पर उनका सीखने का स्तर प्रभावित होता है। यही कारण है कि अब शिक्षा विभाग पहले ही चरण में मजबूत आधार तैयार करने पर जोर दे रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य माना गया है। सरकार का मानना है कि यदि कक्षा पहली से ही बच्चों को सही दिशा और उचित वातावरण मिल जाए, तो उनकी सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। रेडीनेस प्रोग्राम इसी सोच का हिस्सा है, जिसमें बच्चों को स्कूल से जोड़ने और सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। कक्षा पहली में पढ़ाने वाले शिक्षकों को खेल आधारित शिक्षण पद्धति, बाल मनोविज्ञान और गतिविधि आधारित सीखने के तरीकों की जानकारी दी गई है। प्रशिक्षण के दौरान यह समझाया गया कि छोटे बच्चों के साथ संवाद कैसे किया जाए और उन्हें बिना दबाव के सीखने के लिए कैसे प्रेरित किया जाए। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित शिक्षक इस कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष के अंत तक बच्चों में शत-प्रतिशत बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए केवल पहली कक्षा ही नहीं बल्कि आगे की कक्षाओं में भी सीखने के स्तर की नियमित निगरानी की जाएगी। विशेष रूप से कक्षा तीन तक पहुंचने वाले विद्यार्थियों की क्षमता का आकलन किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पढ़ने, लिखने और गणना करने में कितने सक्षम हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी इस कार्यक्रम को समान रूप से लागू करने की तैयारी की गई है। विभाग का मानना है कि शुरुआती शिक्षा में सुधार होने से आगे की पूरी शैक्षणिक यात्रा मजबूत होगी। इससे स्कूल छोड़ने की दर में कमी आएगी और विद्यार्थियों का सीखने का स्तर बेहतर होगा। अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यदि यह कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू होता है तो आने वाले वर्षों में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। बच्चों के लिए सीखने को आनंददायक बनाना और उन्हें शुरुआती स्तर पर मजबूत आधार देना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। यही वजह है कि रेडीनेस प्रोग्राम को नई शिक्षा नीति के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:41:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>28 जून को होगी हाईकोर्ट डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती परीक्षा, रायपुर में 9,856 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की ओर से आयोजित परीक्षा के लिए रायपुर में 35 केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा संचालन के लिए नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-data-entry-operator-recruitment-exam-will-be-held/article-56716"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर भर्ती के लिए प्रथम चरण की परीक्षा 28 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (सीजी व्यापम) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होंगे। रायपुर जिले में परीक्षा के लिए कुल 35 केंद्र निर्धारित किए गए हैं, जहां लगभग 9,856 परीक्षार्थी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। जिला प्रशासन और परीक्षा एजेंसियों ने परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हाईकोर्ट डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती परीक्षा (HDEO-26) सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। इसी दिन प्री एग्रीकल्चर टेस्ट और प्री वेटरनरी पॉलिटेक्निक टेस्ट (PAT/PVPT-26) भी आयोजित किए जाएंगे। दोनों परीक्षाओं के कारण परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन के अनुसार, बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की उपस्थिति को देखते हुए यातायात, सुरक्षा और परीक्षा सामग्री के वितरण से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों की निगरानी और समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।</p>
<h2>सुरक्षा व्यवस्था पर जोर</h2>
<p class="isSelectedEnd">परीक्षा से संबंधित गोपनीय सामग्री का वितरण 28 जून की सुबह 7 बजे से जिला कोषालय, कलेक्टर परिसर रायपुर से किया जाएगा। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार, प्रश्नपत्रों और अन्य गोपनीय दस्तावेजों के वितरण और परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर भी आवश्यक सुरक्षा बल और निगरानी व्यवस्था तैनात रहेगी ताकि परीक्षा निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सके।</p>
<h2>अधिकारियों की नियुक्ति</h2>
<p class="isSelectedEnd">जिला प्रशासन ने परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है। डिप्टी कलेक्टर उपेंद्र किण्डो को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर के रोजगार अधिकारी केदारनाथ पटेल को सहायक नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों अधिकारी परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं, केंद्रों के समन्वय और प्रशासनिक निगरानी का कार्य संभालेंगे। प्रशासन ने परीक्षा से पहले सभी केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा भी की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचें और प्रवेश पत्र के साथ आवश्यक पहचान दस्तावेज अवश्य रखें। साथ ही परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।</p>
<p>रायपुर में होने वाली यह भर्ती परीक्षा युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की नजर इस परीक्षा पर टिकी है। आज की ताज़ा ख़बरें, सरकारी अपडेट और रोजगार से जुड़ी पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी में यह भर्ती परीक्षा राज्य के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:51:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति के जबलपुर दौरे पर सुरक्षा का कड़ा घेरा, योग दिवस और री-नीट परीक्षा ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[3000 से अधिक जवान तैनात, योग दिवस कार्यक्रम और RDVV दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, शहर रहेगा हाईअलर्ट पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/tight-security-cover-during-presidents-visit-to-jabalpur-yoga-day/article-56493"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/president-murmu-jabalpur-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को अपने दो दिवसीय प्रवास पर जबलपुर पहुंचेंगी। उनके आगमन को लेकर शहर में सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राष्ट्रपति शाम 6.10 बजे भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से डुमना एयरपोर्ट पहुंचेंगी। एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल उनका स्वागत करेंगे। इस दौरान प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शनिवार रात जबलपुर पहुंचने वाले हैं, जिसके चलते शहर में वीवीआईपी गतिविधियां लगातार बनी रहेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए जबलपुर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रशासन ने करीब 3000 से अधिक पुलिस जवानों और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की है। डुमना एयरपोर्ट से लेकर सर्किट हाउस, गैरिसन ग्राउंड और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय तक पूरे रूट पर सुरक्षा का कड़ा घेरा बनाया गया है। पुलिस की विशेष टीमें लगातार गश्त कर रही हैं, जबकि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। आरपीएफ और जीआरपी की टीमें रेलवे परिसरों में जांच अभियान चला रही हैं। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्तों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रपति शनिवार रात सर्किट हाउस क्रमांक-1 में विश्राम करेंगी। इसके बाद रविवार सुबह उनका पहला कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में शामिल होने का रहेगा। सुबह 7.30 बजे गैरिसन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में वे मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी। यहां हजारों लोग सामूहिक योगाभ्यास करेंगे। कार्यक्रम को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं। मैदान में विशेष मंच, सुरक्षा बैरिकेडिंग और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का अनुमान है कि बड़ी संख्या में नागरिक, छात्र और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होंगे।योग दिवस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति स्वास्थ्य और योग के महत्व से जुड़ा संदेश भी देंगी। अधिकारियों के अनुसार यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी रहेगा। शहर में कई स्थानों पर योग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योग दिवस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पहुंचेंगी। यहां वे विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रवेश व्यवस्था को नियंत्रित किया गया है। दीक्षांत समारोह को लेकर कुछ दिनों से चर्चा भी चल रही है, क्योंकि कुछ शोधार्थियों और मेधावी विद्यार्थियों ने सम्मान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं तय प्रोटोकॉल के अनुसार की जा रही हैं। राष्ट्रपति के कार्यक्रमों के बीच प्रशासन के सामने एक और बड़ी जिम्मेदारी री-नीट परीक्षा को लेकर है। रविवार को जिले के 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक विद्यार्थी परीक्षा देंगे। ऐसे में शहर में एक साथ वीवीआईपी मूवमेंट और बड़ी परीक्षा का आयोजन प्रशासन के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि पहली बार परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए सरकारी बसों की व्यवस्था की गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों से छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए विशेष बसें चलाई जाएंगी। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है ताकि किसी भी छात्र को परिवहन या अन्य व्यवस्था से जुड़ी समस्या होने पर तुरंत सहायता मिल सके। परीक्षा केंद्रों पर बिजली, पेयजल और पंखों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। परीक्षार्थियों के साथ आने वाले अभिभावकों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। कई परीक्षा केंद्रों के बाहर अस्थायी शेड तैयार किए गए हैं जहां बैठने, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। गर्मी को देखते हुए कूलर और पंखों की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों और उनके परिजनों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए सभी विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के दौरे के कारण डुमना एयरपोर्ट, सर्किट हाउस, गैरिसन ग्राउंड, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय और पूरे वीवीआईपी रूट के आसपास 15 किलोमीटर के क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस दौरान ड्रोन, पैराग्लाइडर, हॉट एयर बैलून, पतंग और अन्य उड़ने वाली वस्तुओं के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। पुलिस और प्रशासन ने साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रपति के दौरे, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह और री-नीट परीक्षा को देखते हुए रविवार को जबलपुर पूरी तरह हाईअलर्ट मोड पर रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां, प्रशासन और विभिन्न विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न हो सकें। शहर में तैयारियों का माहौल है और लोगों की नजरें अब राष्ट्रपति के इस महत्वपूर्ण दौरे पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:46:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>NEET छात्रों के मुद्दे पर CJP का दबाव बढ़ा, पीएम को पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी ने आत्महत्या करने वाले NEET छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cjps-pressure-increases-on-neet-students-issue-letter-to-pm/article-56410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cockroach-janata-party-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन छात्रों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है जिन्होंने कथित रूप से परीक्षा और शैक्षणिक दबाव के कारण आत्महत्या की। पत्र में प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग रखी गई है। इसके साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई गई है। इस मुद्दे को लेकर संगठन ने 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और प्रदर्शन करने की घोषणा की है। अभिजीत दीपके द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि देश में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा माहौल बड़ी संख्या में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते दबाव, प्रतिस्पर्धा और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ाई हैं। पत्र में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही उन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं में निराशा और बढ़ सकती है। संगठन का दावा है कि वह देशभर के छात्रों और अभिभावकों की आवाज उठाने का काम कर रहा है। इसी कड़ी में 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह जून महीने में संगठन का दूसरा बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा। इससे पहले 6 जून को भी जंतर-मंतर पर कई घंटों तक प्रदर्शन किया गया था, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था। पिछले कुछ सप्ताह में CJP का नाम कई राज्यों में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहा है। संगठन के समर्थकों ने नई दिल्ली, पुणे, अमृतसर, जयपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों में प्रदर्शन किए। इन कार्यक्रमों में छात्रों की समस्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ से अधिक युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भी एक दिलचस्प घटनाक्रम के बाद हुई थी। मई 2026 में न्यायपालिका से जुड़ी एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थी। उसी के बाद अभिजीत दीपके ने इस नाम से एक डिजिटल अभियान शुरू किया। शुरुआत में यह केवल सोशल मीडिया तक सीमित था, लेकिन कुछ ही समय में यह ऑनलाइन अभियान बड़े स्तर पर चर्चित हो गया। इसके बाद संगठन ने विभिन्न मुद्दों पर ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क गतिविधियां शुरू कीं। सोशल मीडिया पर CJP की लोकप्रियता भी चर्चा का विषय रही है। संगठन का दावा है कि उसे लाखों लोगों का समर्थन मिला है और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और जमीनी स्तर पर जनसमर्थन अलग-अलग बातें होती हैं। फिर भी यह साफ है कि संगठन ने कम समय में अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और डिजिटल मीडिया से जुड़े क्षेत्र में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। बावजूद इसके वे भारतीय शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय बने हुए हैं। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने अपने अभियान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की है। इस बीच राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में CJP की मांगों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर चर्चा की जरूरत बता रहे हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:39:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>16 जून से खुलेंगे स्कूल, शाला प्रवेश उत्सव के साथ नए सत्र की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[तिलक लगाकर होगा विद्यार्थियों का स्वागत, फ्री किताबें-यूनिफॉर्म मिलेंगी; ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल लाने पर विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/schools-will-open-from-16th-june-new-session-will-start/article-55813"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद अब एक बार फिर स्कूलों में रौनक लौटने वाली है। राज्य में सभी सरकारी और निजी स्कूल 16 जून से खुल जाएंगे और इसी दिन से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत होगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूल खुलने की तारीख आगे बढ़ाए जाने की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अब साफ हो गया है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई शुरू होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने नए सत्र को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं और पहले ही दिन शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। इसके जरिए नए विद्यार्थियों का स्वागत करने के साथ-साथ अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इस बार शाला प्रवेश उत्सव को खास बनाने की तैयारी की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाएगा। स्कूल परिसरों को सजाया जाएगा और बच्चों को अपनापन महसूस कराने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। विभाग का मानना है कि स्कूल का पहला दिन बच्चों के लिए यादगार होना चाहिए ताकि उनमें पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़े। गांवों और शहरों में नए प्रवेश के लिए मुनादी कराई जाएगी, रैलियां निकाली जाएंगी और बैनर-पोस्टर के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों और अभिभावकों को भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य केवल प्रवेश बढ़ाना नहीं बल्कि शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करना भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्कूल खुलने से पहले सभी संस्थानों को साफ-सफाई और जरूरी मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं। कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल व्यवस्था और परिसर की स्थिति की समीक्षा की जा रही है ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो। विभाग ने यह भी कहा है कि स्कूलों में पहले दिन से पढ़ाई का माहौल सुनिश्चित किया जाए और शिक्षकों की उपस्थिति भी शत-प्रतिशत रहे। साथ ही आगामी तीन महीनों की शैक्षणिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सत्र की शुरुआत व्यवस्थित तरीके से हो सके। इस वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग का विशेष फोकस उन बच्चों पर रहेगा जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है। ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों को ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें वापस स्कूल लाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि शिक्षा से दूर हुए बच्चों को मुख्यधारा में लाना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और अभिभावकों का सहयोग लिया जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची प्राप्त कर पहली कक्षा में प्रवेश की तैयारी भी की जा रही है। वहीं पांचवीं कक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों का छठवीं कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नए सत्र में विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा। पात्र छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और साइकिल वितरित की जाएंगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। विभाग ने यह भी तय किया है कि बोर्ड परीक्षाओं और स्थानीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। इससे अन्य छात्रों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना भी जरूरी है। निजी स्कूलों के लिए भी राज्य सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए गैर अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों को कक्षा पहली से दसवीं तक की हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने जिला और ब्लॉक स्तर पर वितरण योजना तैयार की है। किताबों के वितरण के लिए राज्यभर में 12 डिपो बनाए गए हैं, जिनमें 6 स्थायी और 6 अस्थायी डिपो शामिल हैं। स्कूलों को तय तारीख के अनुसार अपने प्रतिनिधि भेजकर किताबें प्राप्त करनी होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">विभाग ने वितरण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। किसी तकनीकी कारण या भीड़ की स्थिति में स्कूलों को टोकन नंबर दिए जाएंगे और अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्थायी डिपो में रिजर्व डे भी रखा गया है ताकि किसी भी स्कूल को परेशानी का सामना न करना पड़े। किताबों का वितरण प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शुरू होगा। आवश्यकता पड़ने पर रविवार और सरकारी अवकाश के दिन भी वितरण जारी रखा जाएगा। स्कूल संचालकों को भीड़ से बचने के लिए डिपो प्रभारियों से संपर्क कर अलग समय निर्धारित करने की सुविधा दी गई है। पाठ्यपुस्तक निगम के अनुसार किताबों का वितरण डीपीआई द्वारा उपलब्ध कराई गई छात्र संख्या और ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में बदलाव हुआ है तो उसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:23:39 +0530</pubDate>
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                <title>पुणे से CJP का देशव्यापी आंदोलन शुरू, शिक्षा सुधार की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से शुरू हुआ अभियान, शिक्षा सुधारों को लेकर जारी किया गया घोषणापत्र; सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की संभावना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nationwide-movement-of-cjp-started-from-pune-demanding-education-reforms/article-55656"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cjp-protest-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और परिणामों में हो रही देरी के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी। इस अभियान का पहला बड़ा प्रदर्शन महाराष्ट्र के पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के समर्थक जुटे।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन की अगुवाई कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देशभर के छात्रों के सामने शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन ने अपना बहुप्रतीक्षित शिक्षा घोषणापत्र भी जारी किया। दिपके ने बताया कि इस घोषणापत्र में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। घोषणापत्र में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने, परीक्षा परिणाम समय पर घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने तथा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का सामना कर रहे हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम महीनों तक लंबित रहते हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे हालात में युवाओं का भरोसा व्यवस्था से कमजोर हो रहा है, जिसे बहाल करना बेहद जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन के दौरान संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। दिपके का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय की है। उन्होंने दावा किया कि जब तक छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पुणे में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। प्रशासन और पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने। हालांकि आयोजकों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी आंदोलन में शामिल होने की संभावना जताई गई। प्रदर्शन से एक दिन पहले अभिजीत दिपके और सोनम वांगचुक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दोनों ने लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। वीडियो में वांगचुक ने कहा था कि छात्रों और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वे जल्द ही प्रदर्शन स्थल पहुंचेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आती रही हैं। कई बार परीक्षा रद्द करनी पड़ती है, जिससे छात्रों की तैयारी, समय और आर्थिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुधार नहीं किए गए तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">CJP द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार यह आंदोलन केवल पुणे तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन आगामी दिनों में देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करेगा। आंदोलन का अगला चरण जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद यह अभियान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दिपके ने बताया कि देशव्यापी यात्रा का समापन 20 जून को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के साथ होगा। संगठन को उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हाल के वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों ने शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। ऐसे में परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दे छात्रों के लिए प्राथमिकता बन गए हैं। यही वजह है कि इस तरह के आंदोलनों को युवाओं का समर्थन मिल रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>14 साल के श्रेय पारिख बने स्पेलिंग बी चैंपियन, रचा नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[90 सेकेंड में 32 शब्दों की सही स्पेलिंग लिखकर जीता खिताब, लगातार पांचवीं बार भारतीय मूल के छात्र ने हासिल की जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/14-year-old-shrey-parikh-becomes-spelling-bee-champion-creates/article-54615"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/shrey-parikh.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका की प्रतिष्ठित और सबसे कठिन मानी जाने वाली शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में शामिल स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी 2026 का खिताब 14 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी छात्र श्रेय पारिख ने अपने नाम कर लिया है। कैलिफोर्निया के रहने वाले श्रेय ने फाइनल मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया और प्रतियोगिता के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। उन्होंने स्पेल-ऑफ राउंड में महज 90 सेकेंड के भीतर 32 शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर यह उपलब्धि हासिल की। फाइनल में उनका मुकाबला न्यू जर्सी के 12 वर्षीय भारतीय मूल के छात्र ईशान गुप्ता से था, जिन्होंने भी शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम दौर में श्रेय उनसे आगे निकल गए।</p>
<p>श्रेय पारिख कैलिफोर्निया के रैंचो कुकामोंगा शहर के निवासी हैं और आठवीं कक्षा के छात्र हैं। स्पेलिंग बी प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार आठवीं कक्षा के बाद प्रतिभागी इसमें हिस्सा नहीं ले सकते, इसलिए यह उनका अंतिम अवसर था। अपने आखिरी प्रयास में उन्होंने न केवल खिताब जीता बल्कि ऐसा प्रदर्शन किया जिसने प्रतियोगिता के दर्शकों और निर्णायकों को भी प्रभावित किया। जीत के बाद उन्हें 50 हजार डॉलर की पुरस्कार राशि और प्रतिष्ठित स्क्रिप्स कप प्रदान किया गया।</p>
<p>इस वर्ष प्रतियोगिता बेहद रोमांचक रही। शुरुआती राउंड से ही कई प्रतिभागियों ने कठिन शब्दों की सटीक स्पेलिंग बताकर अपनी तैयारी का परिचय दिया। नौवें राउंड तक पहुंचने के बाद भी कोई स्पष्ट विजेता सामने नहीं आया था। श्रेय और ईशान दोनों लगातार चुनौतीपूर्ण शब्दों का सही उत्तर देते रहे। श्रेय ने ‘फिलेपिट्टा’ और ईशान ने ‘एर्टेबोले’ जैसे कठिन शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर मुकाबले को बराबरी पर बनाए रखा। इसके बाद निर्णायकों को विजेता तय करने के लिए स्पेल-ऑफ राउंड का सहारा लेना पड़ा।</p>
<p>स्पेल-ऑफ प्रतियोगिता का वह दौर होता है जिसमें प्रतिभागियों को सीमित समय के भीतर अधिक से अधिक शब्दों की सही स्पेलिंग बतानी होती है। यह नियम वर्ष 2021 में लागू किया गया था ताकि लंबे समय तक बराबरी की स्थिति रहने पर एक स्पष्ट विजेता चुना जा सके। इस राउंड में श्रेय ने 35 में से 32 शब्द सही लिखे और प्रतियोगिता के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। दूसरी ओर ईशान गुप्ता ने 25 शब्दों की सही स्पेलिंग बताई। दोनों छात्रों के प्रदर्शन की व्यापक सराहना की गई, लेकिन रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के कारण खिताब श्रेय के नाम रहा।</p>
<p>स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी प्रतियोगिता अमेरिका में लगभग एक सदी से आयोजित की जा रही है। इसकी शुरुआत वर्ष 1925 में वॉशिंगटन डीसी में हुई थी। उस समय केवल नौ बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया था और पहले विजेता फ्रैंक न्यूहॉसर बने थे। वर्षों के दौरान यह प्रतियोगिता अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में शामिल हो गई। इसमें भाग लेने वाले छात्र न केवल अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ दिखाते हैं, बल्कि उनकी याददाश्त, एकाग्रता और कठिन शब्दों को समझने की क्षमता भी परखी जाती है।</p>
<p>पिछले कुछ दशकों में इस प्रतियोगिता में भारतीय मूल के छात्रों का दबदबा लगातार बढ़ा है। श्रेय पारिख की जीत के साथ यह लगातार पांचवां अवसर बन गया है जब किसी भारतीय मूल के छात्र ने यह खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले 2022 में हरिनी लोगन, 2023 में देव शाह, 2024 में ब्रुहत सोमा और 2025 में फैजान जकी विजेता बने थे। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 37 वर्षों में 31 बार भारतीय मूल के प्रतिभागियों ने यह प्रतियोगिता जीती है, जो उनकी मजबूत तैयारी और शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।</p>
<p>भारतीय मूल के छात्रों की इस सफलता की शुरुआत 1985 में हुई थी, जब बालू नटराजन स्पेलिंग बी जीतने वाले पहले भारतवंशी बने थे। उनकी जीत ने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया और धीरे-धीरे भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इस प्रतियोगिता में मजबूत पहचान बना ली। 1988 में रागेश्री रामचंद्रन और फिर 1999 में नुपूर लाला की जीत ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया। इसके बाद कई भारतीय मूल के छात्रों ने लगातार सफलता हासिल की और प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। भारतीय मूल के छात्रों की सफलता के पीछे परिवारों का सहयोग, शिक्षा पर जोर और भाषा सीखने की मजबूत संस्कृति बड़ी भूमिका निभाती है। कई छात्र बचपन से ही शब्दावली, पढ़ने की आदत और प्रतियोगी तैयारी पर विशेष ध्यान देते हैं। यही कारण है कि स्पेलिंग बी जैसे मंचों पर वे लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>श्रेय पारिख की जीत केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि यह भारतीय मूल के छात्रों की लगातार बढ़ती शैक्षणिक सफलता का भी प्रतीक है। उनकी यह उपलब्धि दुनिया भर के छात्रों के लिए प्रेरणा बन सकती है। प्रतियोगिता के बाद श्रेय ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक तैयारी की थी और आखिरी साल में खिताब जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उनकी सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:04:54 +0530</pubDate>
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