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                <title>Shiva Temple - दैनिक जागरण</title>
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                <title>गुरुवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान हुआ भव्य पूजन, पंचामृत और भस्म अर्पण से सजा भगवान का स्वरूप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3386bb71ac9/article-56257"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p>गुरुवार तड़के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान एक बार फिर दिव्य और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंज उठी। भस्म आरती के इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया गया। मंदिर परिसर में उस समय श्रद्धा और आस्था का माहौल ऐसा था कि हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन में लीन दिखाई दिया। पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। हरिओम जल से किए गए इस अभिषेक के दौरान वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न की गई। बताया जा रहा है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर दिन भस्म आरती के समय इसी विधि का पालन किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद प्रथम घंटाल के साथ ‘हरि ओम’ जल अर्पित किया गया और पूरे गर्भगृह में कपूर आरती की गूंज फैल गई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस क्षण को अपने मोबाइल और आंखों में कैद करने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन व्यवस्था के चलते गर्भगृह के अंदर केवल सीमित लोग ही प्रवेश कर पाए। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन, रजत चंद्र और गुलाब के पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद रजत मुकुट और त्रिपुंड से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। यह पूरा दृश्य अत्यंत मनमोहक था और ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्वयं कैलाश से भगवान भक्तों को दर्शन देने उतरे हों। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। यह वही क्षण होता है जिसका इंतजार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सबसे अधिक करते हैं। भस्म अर्पण के समय पूरा वातावरण शांत हो जाता है और केवल मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनाई देती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से इस भस्म को अर्पित करने की परंपरा निभाई गई, जिसे सदियों पुरानी धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और उन्हें राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। इस दौरान भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और गुलाब के विशेष हार से भगवान को सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई दे रहा था। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु इस पूरे दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखों में आस्था के आंसू भी नजर आए। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिली और हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही मान्यता इस आरती को विशेष बनाती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महामृत्युंजय मंदिर में उमड़ी आस्था की भीड़, पुरुषोत्तम मास में शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[पुरुषोत्तम मास के अवसर पर रीवा के ऐतिहासिक किला स्थित शिव मंदिर में सुबह से दर्शनार्थियों का तांता, विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a1fd72212c11/article-54840"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/purushottam-maas.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के ऐतिहासिक महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बुधवार तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया था और सूर्योदय होते-होते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक पहुंच गईं। हर-हर महादेव और महामृत्युंजय मंत्र के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना की प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि रीवा शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महामृत्युंजय मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। मंदिर में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अलग-अलग समूहों में बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ मंदिर पहुंचे और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में शामिल हुए। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है ताकि व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य पुजारी वनस्पति प्रसाद ने बताया कि पुरुषोत्तम मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे माह विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु अमित शुक्ला ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से पुरुषोत्तम मास के दौरान महामृत्युंजय मंदिर में जलाभिषेक करने आते हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में मंदिर का वातावरण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिव्य और ऊर्जावान महसूस होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धालु संगीता तिवारी ने बताया कि वे विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र के जाप में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंची हैं। उनके अनुसार मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था ही उन्हें हर वर्ष यहां खींच लाती है और इस बार भी वे पूरे परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंची हैं। मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय भजन मंडलियां शिव भक्ति से जुड़े भजन प्रस्तुत कर रही हैं, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और अन्य वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दे रहे हैं। कई श्रद्धालु घंटों तक मंदिर परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन का आनंद लेते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और छाया की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक लगातार कतारों को व्यवस्थित रखने में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सेवा कार्यों में भाग लिया है। कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे गर्म मौसम में लोगों को राहत मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस पूरे महीने मंदिरों में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। रीवा का महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर यहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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