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                <title>MohanYadav - दैनिक जागरण</title>
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                <title>MP में जल्द बनेगा पुलिस भर्ती बोर्ड, एक ही छत के नीचे होंगी सभी वर्दीधारी विभागों की भर्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[जुलाई में कैबिनेट के सामने आएगा प्रस्ताव, पुलिस, जेल, फायर, फॉरेस्ट और ट्रांसपोर्ट विभाग की भर्ती प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी और तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/police-recruitment-board-will-soon-be-formed-in-mp-recruitment/article-57319"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-police-recruitment-board-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार जल्द ही पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन करने की तैयारी में है। गृह विभाग ने इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और अब प्रस्ताव को जुलाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाती है तो प्रदेश में पहली बार पुलिस समेत सभी वर्दीधारी विभागों की भर्ती एक ही बोर्ड के माध्यम से की जाएगी। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक नए पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन केवल पुलिस विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दायरे में जेल विभाग, फायर सर्विसेज, परिवहन विभाग, फॉरेस्ट गार्ड, आबकारी और अन्य वर्दीधारी सेवाओं की भर्तियां भी शामिल की जाएंगी। इससे अलग-अलग विभागों में भर्ती के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं की जरूरत नहीं पड़ेगी और सभी चयन प्रक्रियाएं एक ही मंच से संचालित होंगी। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अभ्यर्थियों को भी काफी सुविधा मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> गृह विभाग ने नए भर्ती बोर्ड के संचालन के लिए करीब 200 पदों का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि वित्त विभाग ने फिलहाल 95 पदों को ही मंजूरी दी है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती चरण में सीमित संसाधनों के साथ बोर्ड की शुरुआत की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पदों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। बोर्ड के गठन से संबंधित तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। प्रदेश सरकार का कहना है कि नया भर्ती बोर्ड कर्मचारी चयन मंडल (ESB) के समानांतर काम करेगा। वर्तमान में पुलिस समेत कई विभागों की भर्ती परीक्षाएं कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से आयोजित होती हैं, जिसके कारण परीक्षाओं और परिणामों में कई बार देरी देखने को मिलती है। अलग भर्ती बोर्ड बनने के बाद ESB पर परीक्षाओं का दबाव कम होगा और वह अन्य विभागों की भर्ती पर अधिक ध्यान दे सकेगा। इससे भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन का सबसे बड़ा फायदा युवाओं को मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया में देरी कम होगी, परिणाम समय पर जारी किए जा सकेंगे और नियुक्ति प्रक्रिया भी पहले की तुलना में तेज होगी। इसके अलावा विभिन्न विभागों के बीच भर्ती संबंधी समन्वय बेहतर होगा और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्य में तेजी आएगी। लंबे समय से अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी और अलग-अलग एजेंसियों की वजह से होने वाली परेशानियों की शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। प्रस्तावित बोर्ड भर्ती प्रक्रिया के हर चरण की निगरानी करेगा। इसमें आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा आयोजन, शारीरिक दक्षता परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और अंतिम चयन सूची जारी करने जैसे सभी कार्य एक ही व्यवस्था के तहत किए जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है। साथ ही भर्ती से जुड़े विवाद और प्रशासनिक जटिलताएं भी कम हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार इस मॉडल को दूसरे राज्यों के अनुभव के आधार पर लागू करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में पुलिस भर्ती बोर्ड पहले से कार्यरत हैं और वहां भर्ती प्रक्रिया अलग एजेंसी के माध्यम से संचालित की जाती है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इसी तरह का मॉडल अपनाने से मध्य प्रदेश में भी भर्ती व्यवस्था अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाई जा सकेगी। वर्दीधारी विभागों में नियमित और समयबद्ध भर्ती होना बेहद जरूरी है। पुलिस, जेल, फायर सर्विस और फॉरेस्ट जैसे विभाग सीधे कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े होते हैं। यदि इन विभागों में लंबे समय तक रिक्त पद बने रहते हैं तो इसका असर सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। ऐसे में अलग भर्ती बोर्ड बनने से रिक्त पदों को समय पर भरने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का यह भी मानना है कि नई व्यवस्था से पुलिस विभाग को भर्ती प्रक्रिया के लिए अलग से अतिरिक्त संसाधन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक समर्पित बोर्ड पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगा, जिससे विभाग अपने मूल प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगा। इससे कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह पूरी योजना कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर है। यदि जुलाई में प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद नियमावली, स्टाफ की नियुक्ति और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में वर्दीधारी विभागों की सभी प्रमुख भर्तियां इसी नए बोर्ड के माध्यम से कराई जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 16:56:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>आपातकाल दिवस पर भोपाल में बड़ा आयोजन, दो हजार मीसाबंदी परिवार होंगे सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/big-event-to-be-organized-in-bhopal-on-emergency-day/article-56896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/emergency-day-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश में लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी भोपाल में शुक्रवार को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। शहर के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में होने वाले इस आयोजन में प्रदेशभर से आए करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहेंगे, जो आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के भोपाल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक सहित कई वरिष्ठ सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहेंगी। मंच से उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। बताया जा रहा है कि समारोह में आपातकाल के दौर से जुड़े अनुभवों और उस समय की परिस्थितियों पर भी चर्चा होगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मीसाबंदी परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आपातकाल दिवस को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन विवादित अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद करीब 21 महीनों तक देश में विशेष परिस्थितियां बनी रहीं। इस दौरान कई संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा गया। विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी संख्या में लोगों को बिना नियमित न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में भी उस समय अनेक राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से कई लोगों को मीसा यानी मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत निरुद्ध किया गया था। ऐसे लोगों को बाद में मीसाबंदी के नाम से जाना गया। आपातकाल समाप्त होने के बाद इन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा गया। यही कारण है कि हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र की मजबूती पर चर्चा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार भोपाल में होने वाला कार्यक्रम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में मीसाबंदी परिवारों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है। आयोजकों का कहना है कि केवल उन लोगों का सम्मान करना उद्देश्य नहीं है जिन्होंने जेल यात्रा की थी, बल्कि उनके परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी याद करना जरूरी है। कई परिवारों ने उस समय सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया था। ऐसे में यह कार्यक्रम लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए सामूहिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने संबोधन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान के मूल्यों पर भी विचार रख सकते हैं। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी और दस्तावेजों का प्रदर्शन भी किया जा सकता है। इसके अलावा कई लोकतंत्र सेनानी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नई पीढ़ी को उस दौर के बारे में जानकारी मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर आपातकाल को लोकतंत्र पर लगाए गए प्रतिबंध के रूप में याद करने की परंपरा को और अधिक प्रमुखता मिली है। सरकार का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है। रवीन्द्र भवन में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजधानी में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शुक्रवार को सुबह से ही विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों की मौजूदगी से कार्यक्रम स्थल पर विशेष माहौल रहने की उम्मीद है। आपातकाल दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन न केवल इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को याद करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के महत्व को भी एक बार फिर रेखांकित करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 13:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधायक निधि से सार्वजनिक स्थलों पर लगेंगे CCTV कैमरे, 15 अगस्त को विकास रिपोर्ट पेश करेंगे प्रभारी मंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला विकास समितियों की भूमिका मजबूत करने के निर्देश दिए। स्वतंत्रता दिवस पर जिलों में विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं का सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cctv-cameras-will-be-installed-in-public-places-from-mla/article-56708"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cabinet-mp.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा, विकास योजनाओं की पारदर्शिता और जिला स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि विधायक क्षेत्र विकास निधि के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही आगामी 15 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करेंगे। सरकार इसे विकास कार्यों की पारदर्शिता और जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला विकास समितियों को केवल समीक्षा मंच तक सीमित न रखते हुए उन्हें विकास गतिविधियों और निवेश प्रोत्साहन में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास रणनीति तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली विकास रिपोर्ट प्रस्तुति से आम नागरिकों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि उनके जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान कौन-कौन से कार्य हुए और सरकारी योजनाओं का लाभ किस स्तर तक पहुंचा। इससे प्रशासनिक कार्यों की सार्वजनिक समीक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<h2>जिला विकास समितियों पर फोकस</h2>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में जिला विकास समितियों के राज्यस्तरीय सम्मेलन के आयोजन पर भी सहमति बनी। यह सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया जाएगा, जहां विभिन्न जिलों के विकास से जुड़े मुद्दों, चुनौतियों और उपलब्धियों की समीक्षा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने समितियों को निजी निवेश आकर्षित करने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार जिलों के आर्थिक विकास को नई गति देने के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वित प्रयासों पर जोर दे रही है।</p>
<h2>डेटा और सेवाओं का एकीकरण</h2>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने विभागवार, संभागवार और जिलावार सांख्यिकीय आंकड़ों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इससे योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान उन्होंने विश्राम घाटों पर ही मृत्यु पंजीयन सुविधा विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल हो सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न जिलों के लिए उनकी भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग विकास सूचकांक तैयार किए जाने चाहिए, ताकि विकास की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन हो सके।</p>
<p>सरकारी अपडेट और मध्य प्रदेश से जुड़ी आज की ताज़ा ख़बरों के बीच यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सार्वजनिक स्थलों पर CCTV कैमरे लगाने, विकास कार्यों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग और जिला विकास समितियों को सशक्त बनाने जैसे कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल साबित हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:25:10 +0530</pubDate>
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                <title>उज्जैन में आज 207 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देंगे सीएम मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[झारड़ा में 188.42 करोड़ के सामाकोटा बैराज का लोकार्पण, 18 गांवों के 11 हजार से ज्यादा किसान परिवारों को मिलेगा सिंचाई का लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a32456f9e388/article-56171"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को उज्जैन जिले के झारड़ा क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही सामाकोटा बैराज परियोजना का लोकार्पण करेंगे। करीब 188.42 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस बैराज को मालवा अंचल की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार छोटी कालीसिंध नदी पर निर्मित यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र के किसानों की जरूरत रही है। बैराज के शुरू होने के बाद आसपास के गांवों में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को फसल उत्पादन में भी लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>सामाकोटा बैराज की जल संग्रहण क्षमता 17.57 मिलियन घन मीटर है। इस परियोजना के जरिए पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणाली विकसित की गई है, जिससे करीब 7236 हेक्टेयर कृषि भूमि को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि झारड़ा, नलखेड़ा, पनोडिया, नीमखेड़ा, घट्टियाजस्सा, मेलाखेड़ी, खोरियापदमा, खेरला, लसूड़ियानहाटा, नागपुरा, छज्जुखेड़ी, देलाखेड़ी, डूंगरखेड़ी, खेड़ामद्दा, कसोन, महिदपुरिया, सोमचिड़ी सहित कुल 18 गांवों के 11 हजार से अधिक किसान परिवारों को इस योजना का सीधा फायदा मिलेगा। क्षेत्र में लंबे समय से बारिश पर निर्भर खेती की समस्या रही है और कई बार कम वर्षा के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। ऐसे में बैराज से मिलने वाली सिंचाई सुविधा को खेती की स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में केवल बैराज का लोकार्पण ही नहीं होगा, बल्कि विभिन्न विभागों से जुड़े कई विकास कार्य भी जनता को समर्पित किए जाएंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार करीब 19 करोड़ रुपए से अधिक लागत के अन्य निर्माण कार्यों का उद्घाटन भी इसी अवसर पर किया जाएगा। इनमें उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 4.35 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित महाविद्यालय भवन प्रमुख है। इसके अलावा लोक शिक्षण विभाग के तहत सेमलिया, महिदपुर रोड और कुंडीखेड़ा में बनाए गए कन्या विद्यालय भवनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में इन भवनों को स्थानीय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>विकास कार्यों की सूची में ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाएं भी शामिल हैं। मोचीखेड़ा में तैयार किए गए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र को भी जनता को समर्पित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में वोल्टेज संबंधी समस्याओं में कमी आने की संभावना है। वहीं झारड़ा क्षेत्र में निर्मित 13 नए उप स्वास्थ्य केंद्र भवनों का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से इन भवनों का निर्माण किया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो सकेंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सुबह से ही बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, किसानों और स्थानीय नागरिकों के कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। क्षेत्र के किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि सामाकोटा बैराज परियोजना को उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों में शामिल माना जाता रहा है। कई किसान संगठनों ने भी इस परियोजना के शुरू होने को कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली से जुड़े नए बुनियादी ढांचे का लाभ भी ग्रामीण आबादी को सीधे तौर पर मिलेगा। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस दौरे के दौरान लगभग 207 करोड़ रुपए के विकास कार्य उज्जैन जिले की जनता को समर्पित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 13:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>कुपोषण पर सख्त हुए सीएम मोहन यादव, चार विभाग मिलकर बनाएंगे एक्शन प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[बीमारू श्रेणी से बाहर निकला मध्यप्रदेश, लेकिन कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती; पोषण आहार विवाद सुलझाने के भी निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/cm-mohan-yadav-becomes-strict-on-malnutrition-four-departments-will/article-54706"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-malnutrition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश भले ही बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकल चुका हो, लेकिन कुपोषण आज भी राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल एक विभाग के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर समन्वित कार्ययोजना तैयार करनी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्य बीमारू श्रेणी से बाहर आ चुके हैं, लेकिन कुपोषण अब भी एक बड़ा दाग बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के अन्य मानकों पर राज्य ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन जब तक बच्चों और महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में कुपोषण से जुड़े ताजा आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएच) 2026 के अनुसार प्रदेश में पांच वर्ष से कम उम्र के 39.7 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। वहीं 23.8 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि ठिगनेपन यानी स्टंटिंग के मामलों में कुछ सुधार देखने को मिला है और यह आंकड़ा 35.7 प्रतिशत से घटकर 31.4 प्रतिशत पर पहुंचा है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि छह से 23 माह तक की उम्र के केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त और संतुलित पोषण मिल पा रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि शुरुआती उम्र में बच्चों को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं, जिसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ कई शहरी इलाकों में भी पोषण संबंधी जागरूकता की कमी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों की नियमित निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में कुपोषण की दर अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं और परिणाम आधारित कार्ययोजना तैयार की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में लंबे समय से चल रहे पोषण आहार वितरण से जुड़े विवाद का मुद्दा भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने इस मामले का जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह तय किया जाए कि पोषण आहार का कार्य स्वयं सहायता समूहों को दिया जाएगा या निजी कंपनियों को। इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया जाए ताकि निर्णय लेकर टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोषण आहार व्यवस्था को लेकर प्रदेश में लंबे समय से विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का माध्यम मानकर उन्हें प्राथमिकता देने की मांग की जाती रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ पक्ष बड़े स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में सरकार का फैसला आने वाले समय में इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुपोषण केवल भोजन की उपलब्धता का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, स्वच्छता, शिक्षा और जागरूकता जैसे कई कारण जुड़े होते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने चार विभागों को एक साथ काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि यदि विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनता है तो कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। प्रदेश सरकार अब कुपोषण के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर काम करने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा, पोषण योजनाओं की निगरानी और बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का फोकस उन कमजोर कड़ियों की पहचान पर है, जिनकी वजह से वर्षों से चल रही योजनाओं के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:07 +0530</pubDate>
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