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                <title>Emergency 1975 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ इमरजेंसी अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव, लोकतंत्र की चुनौतियों, मीडिया की भूमिका और नागरिक भागीदारी पर भी दिया गया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/emergency-chapter-included-for-the-first-time-in-ncerts-class/article-56870"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ncert.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल यानी इमरजेंसी से जुड़ा अलग सेक्शन शामिल किया है। नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। शिक्षा क्षेत्र में इस बदलाव को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत किए जा रहे व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में देश में इमरजेंसी लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने के बीच यह बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। NCERT के अधिकारियों के अनुसार, कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अब भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को अधिक व्यापक तरीके से समझाया जाएगा। नई किताब में इमरजेंसी को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के महत्व को समझने के संदर्भ में भी प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक के शुरुआती वर्षों में देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर लोगों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक के अनुसार जून 1975 में देश में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई थी। इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ा, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और विभिन्न राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। किताब में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर व्यापक बहस हुई। छात्रों को इस दौर के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों से परिचित कराने के लिए घटनाओं को सरल भाषा में समझाया गया है। नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों को संगठित कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जन आंदोलन का नेतृत्व किया। बिहार और गुजरात में हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए पुस्तक यह समझाने का प्रयास करती है कि लोकतंत्र में जनभागीदारी और शांतिपूर्ण विरोध की क्या भूमिका होती है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की राय और सहभागिता महत्वपूर्ण स्थान रखती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुस्तक में 1977 के आम चुनावों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इसमें बताया गया है कि इमरजेंसी समाप्त होने के बाद चुनाव कराए गए और मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए सरकार के पक्ष और विपक्ष में फैसला सुनाया। पुस्तक इस प्रक्रिया को लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता का उदाहरण बताती है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अधिकार अंततः जनता के हाथ में होता है। इमरजेंसी के अलावा नई किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद आधुनिक चुनौतियों को भी शामिल किया गया है। इनमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सामाजिक असमानता, क्षेत्रवाद, गरीबी, लैंगिक भेदभाव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं पर चर्चा की गई है। NCERT का मानना है कि छात्रों को केवल ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वर्तमान समय की चुनौतियों और नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में भी जागरूक करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पुस्तक में कई नए विषय जोड़े गए हैं। पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का विशेष सेक्शन भी पुस्तक का हिस्सा बनाया गया है। इस खंड का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से मजबूत होता है। इसमें मतदान, सामाजिक जिम्मेदारी, सार्वजनिक संवाद और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अध्याय छात्रों में लोकतांत्रिक चेतना विकसित करने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई पुस्तक में मीडिया की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए उसकी जिम्मेदारियों और महत्व को समझाया गया है। पुस्तक के अनुसार मीडिया न केवल सूचना पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि यह जनता की आवाज को सामने लाने और शासन व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। छात्रों को यह भी बताया गया है कि सूचना के स्रोतों का सही मूल्यांकन करना और फेक न्यूज की पहचान करना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भारतीय लोकतंत्र के विशाल स्वरूप को समझाने के लिए पुस्तक में चुनावी आंकड़ों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। इसमें 2024 के आम चुनावों के दौरान देश में 96 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों और चुनावी प्रक्रिया की व्यापकता को भी समझाया गया है। स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायतों और स्थानीय निकायों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। गुजरात और त्रिपुरा की पंचायतों के उदाहरणों के जरिए यह बताया गया है कि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र कैसे काम करता है और उसमें महिलाओं की भागीदारी किस तरह बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:16:34 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, मीसाबंदियों को हर माह 25 हजार रुपये सम्मान राशि</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन, चिकित्सा सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-decision-of-chhattisgarh-government-to-give-honorarium-of-rs/article-54732"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-misa-detainees.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ सरकार ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन करते हुए पात्र लोगों को मिलने वाली सम्मान राशि और सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत अब पात्र मीसाबंदियों को हर महीने 25 हजार रुपये तक की सम्मान राशि दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार के इस निर्णय को लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित अधिनियम का उद्देश्य उन लोगों को सम्मान और आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। आपातकाल के समय अनेक लोगों को मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई लोगों ने जेलों में लंबा समय बिताया था। ऐसे लोगों को लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार पहले से योजना चला रही थी, लेकिन अब इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई व्यवस्था के अनुसार योजना के दायरे से बाहर रह गए पात्र लोकतंत्र सेनानियों को भी लाभ लेने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र व्यक्तियों को अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सम्मान राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित व्यक्ति आपातकाल के दौरान निरुद्ध या कारावास में रहा था। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान भी किया है। यह समिति प्राप्त आवेदनों की जांच करेगी और पात्रता का निर्धारण करेगी। समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे। इसके अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी समिति का हिस्सा होंगे। जांच और सत्यापन के बाद पात्र लोगों को सम्मान राशि और अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">संशोधित अधिनियम के तहत विभिन्न श्रेणियों के मीसाबंदियों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। जिन लोगों को आपातकाल के दौरान एक महीने तक जेल या थाने में निरुद्ध रखा गया था, उन्हें प्रति माह 8 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। वहीं एक माह से अधिक और पांच माह तक जेल या थाने में निरुद्ध रहने वाले लोगों को हर महीने 15 हजार रुपये की राशि मिलेगी। लंबे समय तक कारावास झेलने वाले पात्र मीसाबंदियों को अधिक राशि दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के फैसले के अनुसार कुछ श्रेणियों में यह सम्मान राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह तक दी जाएगी। सरकार ने केवल आर्थिक सहायता तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। संशोधन के बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इससे उन्हें सरकारी अस्पतालों और निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। माना जा रहा है कि इस कदम से बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ जाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वर्षों से लोकतंत्र सेनानी संगठनों की ओर से सम्मान राशि बढ़ाने और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उचित सम्मान और सहायता मिलनी चाहिए। अब सरकार के इस फैसले के बाद इन मांगों को काफी हद तक पूरा माना जा रहा है। यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास भी है। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है और उस दौर में संघर्ष करने वाले लोगों की भूमिका को विभिन्न स्तरों पर याद किया जाता रहा है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम उन लोगों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>अधिसूचना जारी होने के बाद पात्र लोगों के बीच आवेदन प्रक्रिया को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर आवेदन प्राप्त किए जाएंगे और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान राशि और चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलना प्रारंभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे उन लोगों को सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलेंगे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:45 +0530</pubDate>
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