<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/illegal-construction/tag-16289" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Illegal Construction - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/16289/rss</link>
                <description>Illegal Construction RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वक्फ संपत्ति विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- ऐसे मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल ही करेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, ट्रिब्यूनल को दो महीने में फैसला करने का निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-big-decision-in-waqf-property-dispute-said/article-57132"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/waqf-property-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों की सुनवाई को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों के निपटारे के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल ही सक्षम और वैधानिक मंच है। अदालत ने कहा कि जब वक्फ अधिनियम के तहत विवादों के समाधान के लिए विशेष व्यवस्था उपलब्ध है, तब सीधे हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मामला पहले से ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है तो वहीं उसकी सुनवाई होगी और उसी मंच पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि लंबित मामले का कानून के अनुसार दो महीने के भीतर निपटारा किया जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता मोहम्मद अजमल खान ने कवर्धा स्थित जामा मस्जिद मुस्लिम ट्रस्ट की वक्फ संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि वक्फ संपत्ति के मुतवल्ली यानी प्रबंधक की ओर से नियमों के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है, जिससे वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने कथित अवैध निर्माण को रोकने के लिए पहले ही आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण को रोकने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण उन्हें न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता पहले ही वक्फ अधिनियम की धारा 83(2) के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल में आवेदन प्रस्तुत कर चुके थे। हालांकि उस समय ट्रिब्यूनल में आवश्यक कोरम उपलब्ध नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी थी। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी। मामले में राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड की ओर से अदालत में कहा गया कि वक्फ अधिनियम के तहत इस प्रकार के विवादों के निपटारे के लिए विशेष रूप से ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। अब ट्रिब्यूनल पूरी तरह कार्यशील है और संबंधित मामला पहले से वहीं लंबित है। इसलिए हाईकोर्ट को इस स्तर पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क था कि जब कानून ने किसी विशेष विवाद के लिए अलग मंच निर्धारित किया है तो उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड के तर्कों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि वक्फ अधिनियम में स्पष्ट रूप से ट्रिब्यूनल को ऐसे मामलों की सुनवाई और निर्णय का अधिकार दिया गया है। इसलिए हाईकोर्ट समानांतर रूप से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपना पक्ष वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष ही रखें। साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि यदि मामला अभी भी लंबित है तो कानून के अनुरूप उसकी सुनवाई कर दो महीने के भीतर निर्णय दिया जाए। अदालत ने माना कि न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और यदि ट्रिब्यूनल अब कार्यशील है तो मामले का शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस विवाद के गुण-दोष यानी मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्य, साक्ष्य और कानूनी प्रश्न ट्रिब्यूनल के समक्ष विचार के लिए खुले रहेंगे। ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड और कानून के आधार पर अपना निर्णय देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह फैसला भविष्य में वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों के लिए महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि जहां किसी विशेष कानून के तहत विवाद निपटाने के लिए वैधानिक मंच उपलब्ध हो, वहां सीधे हाईकोर्ट का रुख करने के बजाय पहले उसी मंच पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इससे न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ भी कम होगा और विशेष मामलों का निपटारा विशेषज्ञ मंचों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। वक्फ संपत्तियों को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में संपत्ति के प्रबंधन, उपयोग, निर्माण कार्य और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई तरह के कानूनी प्रश्न उठते हैं। वक्फ अधिनियम इन्हीं विवादों के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल की व्यवस्था करता है ताकि मामलों का त्वरित और विधिसम्मत निपटारा हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-big-decision-in-waqf-property-dispute-said/article-57132</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-courts-big-decision-in-waqf-property-dispute-said/article-57132</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/waqf-property-dispute.jpg"                         length="183165"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाठागांव और विंध्यनगर में निगम का बुलडोजर, अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर नगर निगम ने बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों और अवैध निर्माणों पर की सख्त कार्रवाई, आगे भी अभियान जारी रहने के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-bulldozer-takes-major-action-against-illegal-plotting-and-construction/article-54744"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-municipal-corporation.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर नगर निगम ने शहर में अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को निगम की अलग-अलग जोन की टीमों ने भाठागांव और विंध्यनगर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। इस दौरान जहां भाठागांव में अवैध रूप से विकसित की जा रही प्लाटिंग के लिए बनाई गई मुरूम सड़क को जेसीबी से काटकर रास्ता बंद कर दिया गया, वहीं विंध्यनगर इलाके में चार अवैध ब्लॉकों को तोड़ने की कार्रवाई की गई। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में लगातार बढ़ रही अवैध प्लाटिंग और बिना अनुमति निर्माण की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम जोन-6 की टीम को वार्ड क्रमांक 61 स्थित भाठागांव के पहलवान वाटिका इलाके में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अवैध प्लाटिंग किए जाने की सूचना मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि संबंधित जमीन पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं और लोगों को आकर्षित करने के लिए वहां मुरूम रोड का निर्माण भी कर दिया गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निवेश विभाग और जोन की टीम मौके पर पहुंची। निरीक्षण के दौरान शिकायत सही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों ने जेसीबी मशीन की सहायता से उस मुरूम रोड को काट दिया, जिसका उपयोग प्लाटिंग क्षेत्र तक पहुंचने के लिए किया जा रहा था। सड़क काटे जाने के बाद वहां का रास्ता बंद कर दिया गया, ताकि आगे किसी प्रकार का विकास कार्य या प्लॉट की बिक्री प्रक्रिया संचालित न हो सके। निगम अधिकारियों का मानना है कि प्रारंभिक स्तर पर ही इस तरह की कार्रवाई करने से अवैध कॉलोनियों के विस्तार पर रोक लगाई जा सकती है। कार्रवाई के दौरान कार्यपालन अभियंता दिनेश सिन्हा, सहायक अभियंता आशीष श्रीवास्तव, उप अभियंता सागर ठाकुर सहित निगम के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर नगर निगम जोन-1 की टीम ने भी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विंध्यनगर इलाके में चार अवैध ब्लॉकों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई यतियतनलाल वार्ड क्रमांक-4 में की गई। निगम अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि पर बिना स्वीकृति और बिना आवश्यक अनुमति के निर्माण कार्य किया गया था। पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर नियमों के अनुसार जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम ने अवैध हिस्सों को हटाने की कार्रवाई की।</p>
<p class="isSelectedEnd">जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा ने बताया कि संबंधित निर्माण उषा मिश्रा, देवचंद मिश्रा और रानी मिश्रा द्वारा कराया गया था। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बाद नगर निवेश विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध हिस्सों को तोड़ दिया। कार्रवाई के दौरान कार्यपालन अभियंता द्रोणी कुमार पैकरा, सहायक अभियंता शरद देशमुख और नगर निवेश विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम का कहना है कि पिछले कुछ समय से शहर के बाहरी और विकसित हो रहे क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग के मामले बढ़े हैं। कई लोग बिना लेआउट स्वीकृति, बिना विकास अनुमति और बिना आवश्यक दस्तावेजों के जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बेचने का प्रयास करते हैं। इससे न केवल खरीदारों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ता है बल्कि शहर के नियोजित विकास पर भी असर पड़ता है। ऐसे मामलों में अक्सर सड़क, नाली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखने को मिलता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अवैध कॉलोनियों के कारण नगर नियोजन व्यवस्था प्रभावित होती है और बाद में इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन को अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। यही वजह है कि नगर निगम लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि किसी भी प्लॉट या संपत्ति की खरीद से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच जरूर करें। निगम ने नागरिकों से यह भी अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में कहीं अवैध प्लाटिंग या निर्माण कार्य चल रहा हो तो इसकी सूचना प्रशासन को दें।  निगम की इस कार्रवाई को शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी विभिन्न क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया जाएगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति निर्माण और अवैध प्लाटिंग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा शहर के सुनियोजित विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-bulldozer-takes-major-action-against-illegal-plotting-and-construction/article-54744</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-bulldozer-takes-major-action-against-illegal-plotting-and-construction/article-54744</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:16:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/raipur-municipal-corporation.jpg"                         length="238799"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        