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                <title>MLA - दैनिक जागरण</title>
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                <description>MLA RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा दावा, TVK विधायकों को करोड़ों की रिश्वत का ऑफर; सरकार गिराने की कथित साजिश की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[TVK विधायक ने ₹35 करोड़ की पेशकश और धमकी मिलने का आरोप लगाया, शिकायत के बाद तीन लोग गिरफ्तार; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामले की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-claim-in-tamil-nadu-politics-tvk-mlas-offered-bribe/article-57556"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tamil-nadu-politics-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के संस्थापक विजय की अगुवाई वाली सरकार को कथित रूप से अस्थिर करने की साजिश का दावा किया गया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके विधायकों को करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सरकार गिराने की कोशिश की गई। इस मामले में एक विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर TVK इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक नैरेटिव करार दिया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">विधायक ने लगाया 35 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK के ऊथंगुरै विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क कर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ आने वाले एक प्रस्ताव में विशेष तरीके से मतदान करने के लिए कहा गया। इसके बदले उन्हें 35 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IPDS) नामक संगठन का प्रतिनिधि बताया। विधायक का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और दोबारा संपर्क न करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;">15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना</h5>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक विधायक तक सीमित मामला नहीं था। कथित योजना के तहत TVK के 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार के बहुमत को प्रभावित करने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता तो राज्य की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती थी। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">शिकायत के बाद तीन लोगों की गिरफ्तारी</h5>
<p style="text-align:justify;">विधायक की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान चेन्नई स्थित एक कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े तीन लोगों—तिरुनावुक्करासु, नरेश और त्यागराजन—को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में इन लोगों के कुछ राजनीतिक संपर्कों की भी जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या नेता की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">TVK ने लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई विधायकों से संपर्क कर उन्हें दल बदलने या सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK का दावा है कि कई विधायकों को 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डीएमके ने आरोपों को बताया निराधार</h5>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। डीएमके का कहना है कि मामले की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए और बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK और डीएमके के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। चुनावी सभाओं और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच कई बार तीखी टिप्पणियां देखने को मिली हैं। हाल के महीनों में भी विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा है। मौजूदा मामला उसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच</h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में रिश्वत या सरकार गिराने की किसी संगठित साजिश के प्रमाण मिलते हैं तो यह राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मामला साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:46:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा, 15 से ज्यादा नेताओं पर गंभीर मामले लंबित</title>
                                    <description><![CDATA[मई 2026 की स्टेटस रिपोर्ट में पूर्व और वर्तमान सांसदों-विधायकों के खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामलों की जानकारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही नियमित सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-high-court-report-reveals-serious-cases-pending-against-more/article-57131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ी एक अहम जानकारी हाईकोर्ट की मई 2026 की स्टेटस रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 15 से अधिक पूर्व और वर्तमान सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई विशेष और फास्ट ट्रैक अदालतों में नियमित रूप से की जा रही है। रिपोर्ट में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, हत्या के प्रयास, बलवा, धोखाधड़ी, चिटफंड और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे विचाराधीन हैं। अदालतों की निगरानी में इन मामलों की सुनवाई जारी है और कई मामलों में आगामी तारीखें भी निर्धारित की जा चुकी हैं। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक कवासी लखमा, विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव समेत कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल हैं। इन मामलों की प्रकृति अलग-अलग है और अधिकांश मामलों में अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है। अदालतों ने किसी भी मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया है। इसलिए सभी मामलों में आरोप अभी विचाराधीन हैं और संबंधित पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ राजधानी रायपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में एक आपराधिक मामला लंबित है। रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-ए के तहत भी आरोप शामिल हैं। इस प्रकरण की सुनवाई जून 2026 में निर्धारित की गई थी। इसी तरह विधायक कवासी लखमा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय में मामला विचाराधीन है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में भी कवासी लखमा और विधायक देवेंद्र यादव के नाम शामिल बताए गए हैं, जिनकी सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है। बिलासपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। वहीं बलौदाबाजार की अदालत में विधायक देवेंद्र यादव और किशोर नवरंगे के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमे लंबित हैं। इन मामलों में अदालत द्वारा निर्धारित तिथियों पर नियमित सुनवाई की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट की रिपोर्ट में केवल कांग्रेस से जुड़े नेताओं का ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का भी उल्लेख किया गया है। राजनांदगांव की विशेष अदालत में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के खिलाफ जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण अधिनियम से जुड़े छह अलग-अलग मामले विचाराधीन हैं। इनमें से तीन मामलों में पहले हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी, जबकि शेष मामलों में अदालत ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं। गरियाबंद जिले में भाजपा के दो पूर्व विधायकों के खिलाफ रास्ता रोकने और बलवा से जुड़े मामलों की भी सुनवाई जारी है। राज्य के विभिन्न जिलों में भी कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। बलौदाबाजार में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और मारपीट से जुड़े मामले में पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के खिलाफ सुनवाई प्रस्तावित है। वहीं गरियाबंद की अदालत में डमरूधर पुजारी और गोवर्धन मांझी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज मामलों में भी न्यायिक कार्रवाई जारी है। अदालतों ने इन मामलों में अलग-अलग तिथियां निर्धारित की हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय में आरोपी बालेश्वर साहू, वेदप्रकाश साहू और गौतम राठौर के खिलाफ धोखाधड़ी और मारपीट से जुड़े मामले में अभियोजन साक्ष्य की प्रक्रिया चल रही है। वहीं कवर्धा में अशोक कुमार साहू और अन्य के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में भी अदालत द्वारा साक्ष्य दर्ज करने की कार्रवाई निर्धारित की गई थी। इन मामलों की सुनवाई न्यायालय के समक्ष विधिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न हाईकोर्टों ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया है, ताकि गंभीर मामलों का समय पर निर्णय हो सके। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और अदालतें निर्धारित समय पर सुनवाई कर रही हैं। यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें सत्ता और विपक्ष दोनों दलों से जुड़े नेताओं के मामलों का उल्लेख है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न अदालतों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई समानांतर रूप से जारी है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अदालतें आरोपों की पुष्टि या खंडन पर अंतिम निर्णय देंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी से निकाले गए विधायकों ने बहुमत समर्थन का दावा किया, आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं बागी नेता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते असंतोष और बागी सुरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रहा असंतोष आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक उनके विचारों से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। बागी गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है तो उन्हें ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि माना जाना चाहिए। साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नए दावे सामने आए हैं। बागी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व के सवाल पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार शाम को कोलकाता स्थित विधायक आवास में हुई एक बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। बैठक में निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई अन्य विधायक भी मौजूद बताए गए। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया गया। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। निष्कासन के बाद दोनों नेता लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को भी प्रतिक्रिया देने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सामने आ रहा है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे के अनुसार आगे बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व ने बागी नेताओं के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं और पार्टी संगठन पूरी तरह मजबूत है। उनका दावा है कि कुछ नेताओं के व्यक्तिगत असंतोष को पूरे संगठन की राय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर पहले की तरह एकजुट बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं तो संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। ऐसे मामलों में दलबदल कानून, निर्वाचन आयोग के नियम और पार्टी संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई गुट खुद को मूल पार्टी बताता है तो चुनाव आयोग को यह तय करना होता है कि संगठन, कार्यकारिणी और निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक समर्थन किसके साथ है। ऐसे मामलों में कई बार कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं और अंतिम निर्णय में लंबा समय लग सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने संगठन में मतभेदों की चर्चा को बढ़ावा दिया है। पार्टी की बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की उपस्थिति, कुछ नेताओं के इस्तीफे और सार्वजनिक मंचों पर उठे सवालों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक है या वास्तव में संगठन के भीतर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:53:05 +0530</pubDate>
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