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                <title>Assembly - दैनिक जागरण</title>
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                <title>टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा- अगर हिम्मत है तो खुलकर दूसरी पार्टी में शामिल हों, पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन को मजबूत बनाए रखने का किया दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-big-message-amid-rebellion-in-tmc-if/article-57902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उन्हें रोकना है तो उसे उन्हें खत्म करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन के साथ जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके नेतृत्व से सहमत नहीं हैं तो खुलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। उनके इस बयान को टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और उसकी पहचान किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत से बनी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता संगठन को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जनता के बीच पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संगठन के साथ विश्वासघात उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के टिकट और चुनाव चिह्न पर जनता का समर्थन हासिल किया, वही आज संगठन से अलग राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ चुना था, उस विश्वास का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ममता ने कहा कि राजनीति में विचारों का अंतर हो सकता है, लेकिन किसी भी संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी का भी महत्व होता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं के अलग गुट बनाने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के कई विधायक और सांसद संगठन से अलग होकर नए राजनीतिक विकल्पों की ओर बढ़ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का यह बयान सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश मुख्य रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई। हालांकि पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए नेताओं ने अपने स्तर पर नया गुट तैयार किया है और संगठनात्मक दावों को लेकर भी सक्रियता दिखाई है। चुनाव आयोग के समक्ष भी विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की कवायद जारी है। राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है। इसलिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक मान्यता से जुड़े सभी विषय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भवन या कार्यालय पर अधिकार जताने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता और आम लोग होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भविष्य में भी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है और आगे भी वह पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच काम करती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय, नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई; राज्यभर में खाद्य जांच व्यवस्था भी होगी मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-maharashtra-government-ban-on-sale-of-sting/article-57786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित खानपान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्थित दुकानों पर <strong>'स्टिंग' (Sting) एनर्जी ड्रिंक</strong> की बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार बच्चों में कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के बढ़ते सेवन को लेकर गंभीर है और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री नरहरि जिरवाल ने विधानसभा में बताया कि यदि किसी स्कूल परिसर या उसके आसपास के 500 मीटर के दायरे में छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों अथवा कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री होती पाई जाती है, तो संबंधित दुकानदारों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे उत्पादों से दूर रखना है, जिनका अधिक सेवन उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला विधानसभा में उस समय उठा जब विधायक विक्रम पचपुते ने 'स्टिंग' एनर्जी ड्रिंक के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक राहुल कुल और वरुण सरदेसाई ने भी इस विषय पर पूरक प्रश्न पूछे। जवाब देते हुए मंत्री जिरवाल ने कहा कि सरकार ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्राचार्यों और जिला परिषदों को भी इस अभियान में भागीदारी निभाने की अपील की है। यदि किसी स्कूल के आसपास प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों की बिक्री होती दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी तत्काल खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को देने को कहा गया है। ऐसी शिकायतों पर जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक का बढ़ता उपयोग चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और अधिक शर्करा वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन बच्चों में नींद की समस्या, बेचैनी, हृदय गति बढ़ने, एकाग्रता में कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी कारण सरकार ने एहतियात के तौर पर स्कूलों के आसपास इनकी बिक्री सीमित करने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में मंत्री जिरवाल ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मुंबई, नागपुर और संभाजीनगर में खाद्य एवं दवा परीक्षण की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा रायगढ़, नासिक, यवतमाल और पुणे में नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत राज्य में 22 अतिरिक्त प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना है। इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य और पेय पदार्थों के नमूनों की जांच अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से हो सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की जांच से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2025 से मई 2026 के बीच स्टिंग एनर्जी ड्रिंक के कुल 27 खाद्य नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए। इनमें से 10 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। इसके अलावा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न ब्रांडों के एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 115 नमूनों की जांच की गई। इनमें 63 नमूने मानक गुणवत्ता के पाए गए, जबकि एक नमूना सब-स्टैंडर्ड और छह नमूने मिसब्रांडेड घोषित किए गए। शेष नमूनों की जांच अभी जारी है।  खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित जांच और सख्त निगरानी आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे उत्पाद, जिनका उपयोग बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर करते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार कर रही है, ताकि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर हो सके और आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस फैसले को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के आसपास जंक फूड, तंबाकू उत्पादों और अब कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर नियंत्रण की पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूल परिसर और उसके आसपास का वातावरण सुरक्षित होना आवश्यक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:40 +0530</pubDate>
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                <title>दतिया विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे</title>
                                    <description><![CDATA[6 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट पर सियासी मुकाबला तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/datia-assembly-by-election-will-be-held-on-30th-july-results/article-57714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-by-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए बताया कि उपचुनाव के लिए अधिसूचना 6 जुलाई को जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे, जबकि 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 16 जुलाई तय की गई है। सभी तैयारियां पूरी होने के बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनावी प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट के माध्यम से मतदान कराया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत तय है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी उम्मीदवार बनाएगी, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी उचित समय पर उम्मीदवार की घोषणा करेगी और चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद आई। विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट रिक्त घोषित कर निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना भेजी थी। दरअसल राजेंद्र भारती को एक पुराने आपराधिक मामले में दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप की गई। यह मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में सामने आए कथित फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले से जुड़ा है। आरोप था कि बैंक के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर कर एक एफडी की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पंद्रह वर्ष कर दी गई थी। इसके आधार पर वर्ष 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी बताए गए थे। मामले की जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">करीब 28 वर्ष पुराने इस मामले में 1 अप्रैल 2026 को विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए अगले दिन 2 अप्रैल को तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत भी दी गई। हालांकि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू हो गई।  वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई थी। इससे पहले जनप्रतिनिधियों को अपील दाखिल करने तक राहत मिल जाती थी, लेकिन अब यदि किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करना पर्याप्त नहीं माना जाता। सदस्यता तभी बहाल हो सकती है जब उच्च न्यायालय दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगाए। निर्वाचन आयोग ने प्रशासन को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की तैयारी और चुनावी नियमों के पालन को लेकर भी आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी से निकाले गए विधायकों ने बहुमत समर्थन का दावा किया, आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं बागी नेता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते असंतोष और बागी सुरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रहा असंतोष आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक उनके विचारों से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। बागी गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है तो उन्हें ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि माना जाना चाहिए। साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नए दावे सामने आए हैं। बागी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व के सवाल पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार शाम को कोलकाता स्थित विधायक आवास में हुई एक बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। बैठक में निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई अन्य विधायक भी मौजूद बताए गए। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया गया। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। निष्कासन के बाद दोनों नेता लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को भी प्रतिक्रिया देने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सामने आ रहा है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे के अनुसार आगे बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व ने बागी नेताओं के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं और पार्टी संगठन पूरी तरह मजबूत है। उनका दावा है कि कुछ नेताओं के व्यक्तिगत असंतोष को पूरे संगठन की राय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर पहले की तरह एकजुट बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं तो संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। ऐसे मामलों में दलबदल कानून, निर्वाचन आयोग के नियम और पार्टी संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई गुट खुद को मूल पार्टी बताता है तो चुनाव आयोग को यह तय करना होता है कि संगठन, कार्यकारिणी और निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक समर्थन किसके साथ है। ऐसे मामलों में कई बार कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं और अंतिम निर्णय में लंबा समय लग सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने संगठन में मतभेदों की चर्चा को बढ़ावा दिया है। पार्टी की बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की उपस्थिति, कुछ नेताओं के इस्तीफे और सार्वजनिक मंचों पर उठे सवालों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक है या वास्तव में संगठन के भीतर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:53:05 +0530</pubDate>
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