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                <title>Opposition - दैनिक जागरण</title>
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                <title>टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा संदेश, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा- अगर हिम्मत है तो खुलकर दूसरी पार्टी में शामिल हों, पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन को मजबूत बनाए रखने का किया दावा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-big-message-amid-rebellion-in-tmc-if/article-57902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी संगठनात्मक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उन्हें रोकना है तो उसे उन्हें खत्म करना पड़ेगा, क्योंकि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन के साथ जनता के बीच लगातार सक्रिय रहेंगी। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे उनके नेतृत्व से सहमत नहीं हैं तो खुलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लें। उनके इस बयान को टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न और उसकी पहचान किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत से बनी है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता संगठन को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा जनता के बीच पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संगठन के साथ विश्वासघात उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के टिकट और चुनाव चिह्न पर जनता का समर्थन हासिल किया, वही आज संगठन से अलग राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ चुना था, उस विश्वास का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ममता ने कहा कि राजनीति में विचारों का अंतर हो सकता है, लेकिन किसी भी संगठन के प्रति निष्ठा और जिम्मेदारी का भी महत्व होता है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी भी परिस्थिति में निराश न हों और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करते रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं के अलग गुट बनाने की खबरों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी के कई विधायक और सांसद संगठन से अलग होकर नए राजनीतिक विकल्पों की ओर बढ़ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का यह बयान सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संदेश मुख्य रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच टीएमसी की पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई। हालांकि पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पार्टी से अलग हुए नेताओं ने अपने स्तर पर नया गुट तैयार किया है और संगठनात्मक दावों को लेकर भी सक्रियता दिखाई है। चुनाव आयोग के समक्ष भी विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की कवायद जारी है। राजनीतिक मामलों के जानकारों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिया जाता है। इसलिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक मान्यता से जुड़े सभी विषय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि किसी भवन या कार्यालय पर अधिकार जताने से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके कार्यकर्ता और आम लोग होते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भविष्य में भी संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे और जनता के बीच सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष उनकी राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रहा है और आगे भी वह पूरी मजबूती के साथ जनता के बीच काम करती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, बागी विधायकों के दावों से सियासत गरमाई</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी से निकाले गए विधायकों ने बहुमत समर्थन का दावा किया, आज विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं बागी नेता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/internal-strife-increased-in-tmc-politics-heated-up-due-to/article-54758"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ते असंतोष और बागी सुरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक रिजू दत्ता ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या टीएमसी के भीतर चल रहा असंतोष आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिजू दत्ता का कहना है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक उनके विचारों से सहमत हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। बागी गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि उनके पास दो-तिहाई बहुमत का समर्थन है तो उन्हें ही पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि माना जाना चाहिए। साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी नए दावे सामने आए हैं। बागी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व के सवाल पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार शाम को कोलकाता स्थित विधायक आवास में हुई एक बैठक ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। बैठक में निष्कासित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई अन्य विधायक भी मौजूद बताए गए। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों की सटीक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इस बैठक ने पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया गया। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने इस मामले पर आपत्ति जताई थी और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। निष्कासन के बाद दोनों नेता लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं और संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को भी प्रतिक्रिया देने का अवसर दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष मौजूद था, जो अब सामने आ रहा है। कुछ कांग्रेस नेताओं ने यहां तक कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वे इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे के अनुसार आगे बढ़ेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टीएमसी नेतृत्व ने बागी नेताओं के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिकांश विधायक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ खड़े हैं और पार्टी संगठन पूरी तरह मजबूत है। उनका दावा है कि कुछ नेताओं के व्यक्तिगत असंतोष को पूरे संगठन की राय नहीं माना जा सकता। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और जनाधार के बल पर पहले की तरह एकजुट बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई विधायक अलग होकर नया गुट बनाते हैं तो संवैधानिक और कानूनी स्तर पर कई प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। ऐसे मामलों में दलबदल कानून, निर्वाचन आयोग के नियम और पार्टी संगठन की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि कोई गुट खुद को मूल पार्टी बताता है तो चुनाव आयोग को यह तय करना होता है कि संगठन, कार्यकारिणी और निर्वाचित प्रतिनिधियों का वास्तविक समर्थन किसके साथ है। ऐसे मामलों में कई बार कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं और अंतिम निर्णय में लंबा समय लग सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में टीएमसी के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने संगठन में मतभेदों की चर्चा को बढ़ावा दिया है। पार्टी की बैठकों में अपेक्षा से कम विधायकों की उपस्थिति, कुछ नेताओं के इस्तीफे और सार्वजनिक मंचों पर उठे सवालों ने नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह असंतोष सीमित स्तर तक है या वास्तव में संगठन के भीतर बड़ा बदलाव आकार ले रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:53:05 +0530</pubDate>
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