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                <title>Home Ministry - दैनिक जागरण</title>
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                <title>बस्तर में NIA की विशेष अदालत शुरू, नक्सल मामलों की सुनवाई होगी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जगदलपुर को मिला विशेष अधिकार क्षेत्र, लंबे समय से लंबित संवेदनशील मामलों के निपटारे की बढ़ी उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/nia-special-court-started-in-bastar-hearing-of-naxal-cases/article-55529"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bastar-nia-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">बस्तर संभाग में नक्सल मामलों की सुनवाई को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांग आखिरकार पूरी हो गई है। केंद्र सरकार ने जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत की स्थापना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद जगदलपुर स्थित नामित अपर सत्र न्यायालय को अब एनआईए के विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस फैसले को बस्तर के न्यायिक ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेगी, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। यहां हुए कई बड़े हमले और संवेदनशील घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं। ऐसे मामलों की जांच अक्सर एनआईए को सौंपी जाती रही है, लेकिन सुनवाई के लिए अलग-अलग अदालतों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और कई बार गवाहों, जांच अधिकारियों तथा पक्षकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन चुनौतियों में काफी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से परामर्श के बाद लिया गया है। विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों तक रहेगा। इनमें दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर और बस्तर जिले सहित अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि अदालत केवल एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई करेगी। इससे मामलों के संचालन में विशेषज्ञता भी बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बस्तर में कई ऐसे मामले हैं जो वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं। झीरम घाटी हमला, भाजपा नेता भीमा मंडावी की हत्या, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के कई नक्सली हमले जैसे मामलों को देश के सबसे संवेदनशील मामलों में गिना जाता है। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और इनके राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी प्रभाव भी काफी व्यापक रहे हैं। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। एनआईए भी समय-समय पर इस संबंध में अपनी जरूरत जाहिर कर चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय स्तर पर अदालत स्थापित होने से सबसे अधिक राहत गवाहों और जांच अधिकारियों को मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें सुनवाई के लिए दूर-दराज के शहरों की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। कई मामलों में गवाहों की अनुपस्थिति या समय पर पेशी नहीं हो पाने के कारण सुनवाई प्रभावित होती थी। नई अदालत के गठन से दस्तावेजों की उपलब्धता, केस डायरी की प्रस्तुति और अन्य न्यायिक प्रक्रियाएं भी पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएंगी। इससे मामलों के शीघ्र निपटारे की संभावना मजबूत हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न्यायिक संस्थाओं की मजबूत मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करती है। जब गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा होता है तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। बस्तर जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियां बनी रही हैं, वहां इस तरह की विशेष अदालत का गठन प्रशासनिक और न्यायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों के बीच भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इससे न केवल लंबित मामलों को गति मिलेगी बल्कि पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज होगी। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि विशेष अदालत के माध्यम से जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। जगदलपुर में स्थापित यह विशेष अदालत बस्तर के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में यह अदालत नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई में कितनी तेजी ला पाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत में विदेशियों के लिए इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव, रजिस्ट्रेशन और अपील प्रक्रिया हुई आसान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने जारी किए नए संशोधित नियम, विदेशी नागरिकों को पहले से रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन अपील की सुविधा मिलेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-change-in-immigration-rules-for-foreigners-in-india-registration/article-54764"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-immigration-rules-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों से जुड़े इमिग्रेशन नियमों में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की गई है, जिसके तहत विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन, अपील प्रक्रिया और नागरिकता से जुड़े कुछ प्रावधानों को संशोधित किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाना है। नए नियम लागू होने के बाद विदेशी नागरिकों को कई मामलों में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलेगी, वहीं प्रशासनिक निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे बड़ा बदलाव विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन को लेकर किया गया है। अब तक नियम यह था कि यदि कोई विदेशी नागरिक भारत में 180 दिन या उससे अधिक समय तक रह रहा है तो उसे 180 दिन पूरे होने के बाद 14 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होता था। कई बार समय-सीमा और प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती थी। नए नियमों के अनुसार अब विदेशी नागरिक 180 दिन पूरे होने की प्रतीक्षा किए बिना उससे पहले किसी भी समय अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इससे उन्हें अंतिम समय में होने वाली औपचारिकताओं और संभावित देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय निकल जाने के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जाएगी। यानी यदि कोई विदेशी नागरिक तय समय-सीमा का पालन नहीं करता है तो उसे अपने विलंब का उचित कारण बताना होगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी परिस्थितियों का मूल्यांकन कर निर्णय लेंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और विदेशी नागरिकों का रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नए नियमों में पहली बार ऑनलाइन अपील की व्यवस्था भी जोड़ी गई है। अब किसी प्रशासनिक आदेश या निर्णय से प्रभावित व्यक्ति को अपनी शिकायत या अपील दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वह सीधे ऑनलाइन माध्यम से ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन विदेशी नागरिकों और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो अलग-अलग राज्यों में रहते हैं और जिनके लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना हमेशा संभव नहीं होता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संशोधित नियमों के मुताबिक किसी आदेश के खिलाफ अपील आदेश प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी। इसके बाद आयुक्त संबंधित पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करने के बाद निर्णय लेंगे। नियमों में यह भी उल्लेख किया गया है कि अपीलों का निपटारा यथासंभव 60 दिनों के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा। इससे लंबित मामलों की संख्या कम होने और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बच्चों की नागरिकता और विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। यदि किसी बच्चे के माता-पिता में से एक भारतीय नागरिक है और वह बच्चे की भारतीय नागरिकता बनाए रखना चाहता है, तो ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सामान्य नियम लागू नहीं होंगे। इस प्रावधान को ऐसे परिवारों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है जिनके सदस्य अलग-अलग देशों की नागरिकता रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा यदि भारत में रह रहा कोई बच्चा किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है तो उसके माता-पिता या अभिभावकों को 30 दिनों के भीतर इसकी जानकारी संबंधित रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में मदद मिलेगी। कुछ विशेष परिस्थितियों में सूचना देने की समय-सीमा 24 घंटे भी निर्धारित की गई है, ताकि महत्वपूर्ण मामलों में प्रशासन को तत्काल जानकारी मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने यह संशोधन इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 30 के तहत किया है। यह वही व्यापक कानून है जिसे संसद ने मार्च 2025 में पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य देश में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निवास, रजिस्ट्रेशन और निगरानी से जुड़े विभिन्न पुराने कानूनों को एकीकृत करना था। इसके तहत पासपोर्ट एक्ट 1920, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट 1939, फॉरेनर्स एक्ट 1946 और इमिग्रेशन एक्ट 2000 जैसे कई पुराने कानूनी प्रावधानों को एक समग्र ढांचे में समाहित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 में अवैध प्रवास और विदेशी नागरिकों को गैरकानूनी तरीके से देश में लाने या बसाने के मामलों पर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी विदेशी नागरिक को अवैध तरीके से भारत में लाने, ठहराने या बसाने में मदद करता है तो उसे तीन वर्ष तक की जेल, दो लाख से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। साथ ही भारत में प्रवेश करने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक के लिए वैध पासपोर्ट और वीजा रखना अनिवार्य रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:58:26 +0530</pubDate>
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