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                <title>Economy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Economy RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकारी योजनाओं से आम आदमी को मिल रही नई उम्मीद, बदलाव की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/the-common-man-is-getting-new-hope-from-government-schemes/article-58448"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/government-schemes.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सरकारें किसी भी देश में केवल कानून बनाने या प्रशासन चलाने के लिए नहीं होतीं, बल्कि उनका सबसे बड़ा दायित्व आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाना भी होता है। इसी सोच के साथ समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाएं शुरू करती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीब, किसान, मजदूर, महिला, युवा, बुजुर्ग, छात्र और छोटे कारोबारियों जैसे हर वर्ग तक सुविधाएं पहुंचाना होता है। मेरा मानना है कि अगर सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए और पात्र लोगों तक बिना किसी बाधा के उनका लाभ पहुंचे, तो वे करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी योजनाएं सामने आई हैं, जिनका असर गांव से लेकर शहर तक देखने को मिला है। हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन यह भी सच है कि योजनाओं ने लाखों परिवारों के लिए नई उम्मीद जगाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह है कि सरकारी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहारा देने का काम करती हैं। जब किसी गरीब परिवार को इलाज के लिए आर्थिक मदद मिलती है, किसान को खेती के लिए सहायता मिलती है या किसी छात्र को छात्रवृत्ति मिलती है, तो उसका सीधा असर उसके जीवन पर पड़ता है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए सरकारी सहायता किसी संकट के समय सबसे बड़ा सहारा साबित होती है। यही कारण है कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का महत्व लगातार बढ़ा है। यदि कोई परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा हो और उसे समय पर सरकारी सहायता मिल जाए, तो वह मुश्किल दौर से आसानी से बाहर निकल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा मानना है कि सरकारी योजनाओं का दूसरा बड़ा फायदा यह है कि वे समाज में समान अवसर देने की दिशा में काम करती हैं। हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह कमजोर वर्ग को आगे बढ़ने का मौका दे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाएं लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करती हैं। जब किसी युवा को कौशल प्रशिक्षण मिलता है या किसी महिला को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता मिलती है, तो उसका लाभ केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का महत्व और भी अधिक दिखाई देता है। गांवों में सड़क, बिजली, पानी, आवास, शौचालय, सिंचाई और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं ने लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिश की है। पहले जिन सुविधाओं के लिए लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था, अब कई जगहों पर उनमें तेजी आई है। हालांकि हर क्षेत्र की स्थिति एक जैसी नहीं है, लेकिन जहां योजनाओं का सही क्रियान्वयन हुआ है, वहां बदलाव साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि विकास की चर्चा में सरकारी योजनाओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग ने भी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद की है। आज कई योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में पहुंच रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और समय-समय पर निगरानी जैसी व्यवस्थाओं ने प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग अब डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना सीख रहे हैं, जिससे सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच बेहतर हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि केवल योजना बनाना ही पर्याप्त नहीं है। मेरा मानना है कि किसी भी योजना की असली सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। कई बार जानकारी के अभाव, दस्तावेजों की कमी, तकनीकी दिक्कतों या प्रशासनिक देरी के कारण पात्र लोगों को समय पर लाभ नहीं मिल पाता। कुछ दूरदराज के इलाकों में आज भी लोग यह नहीं जानते कि वे किन योजनाओं के लिए पात्र हैं और आवेदन कैसे करें। इसलिए सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है कि वे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं और प्रक्रिया को सरल बनाएं। यह भी जरूरी है कि योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा हो। बदलती जरूरतों के अनुसार उनमें सुधार किया जाए और लोगों से मिलने वाले सुझावों को भी महत्व दिया जाए। यदि किसी योजना में कमी दिखाई देती है तो उसे स्वीकार कर बेहतर बनाया जाना चाहिए। इससे न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी बल्कि आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित निगरानी किसी भी सरकारी योजना की सफलता के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरी राय में सरकारी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे लोगों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी देती हैं। जब कोई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करता है, कोई किसान बेहतर उत्पादन करता है, कोई महिला अपना व्यवसाय शुरू करती है या किसी गरीब परिवार को पक्का घर मिलता है, तो यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं होती बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा में उठाया गया कदम होता है। इसलिए जरूरी है कि योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे। अंततः मेरा मानना है कि सरकारी योजनाएं आम आदमी के जीवन में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे कितनी ईमानदारी, पारदर्शिता और गति के साथ लागू की जाती हैं। यदि सरकार, प्रशासन और नागरिक मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करें, तो सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश के विकास और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का मजबूत आधार बनेंगी। यही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:02:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में कारोबार को नई उड़ान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिपरिषद ने विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा विधेयक के प्रारूप को दी स्वीकृति, निवेशकों को मिलेगी आसान प्रक्रिया, उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/new-udaan-for-business-in-chhattisgarh-ease-of-doing-business/article-58383"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-ease-of-doing-business-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश, उद्योग और कारोबार को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनियमन-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां कारोबार को आसान बनाने के लिए इस तरह का व्यापक और आधुनिक विधेयक लागू होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध बनाना है, जिससे निवेशकों को बेहतर कारोबारी माहौल मिल सके। सरकार का मानना है कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में उद्योग और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया आसान होगी, तो घरेलू और बाहरी निवेशक राज्य में निवेश करने के लिए अधिक उत्साहित होंगे। इसी सोच के साथ तैयार किए गए इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनसे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होगी और सरकारी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा। विधेयक का सबसे बड़ा उद्देश्य अनावश्यक नियमों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करना है। कई बार उद्योग स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेने में लंबा समय लग जाता है। इससे निवेशक परेशान होते हैं और कई परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पातीं। नए कानून के लागू होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि कारोबार शुरू करने में अनावश्यक बाधाएं न आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस विधेयक में डीम्ड परमिशन की व्यवस्था भी शामिल की है। इसका अर्थ यह है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो कुछ मामलों में अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने की समस्या कम होगी और उद्योगों को समय पर मंजूरी मिलने का रास्ता आसान होगा। विधेयक में स्व-प्रमाणीकरण (Self Certification) और तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third Party Verification) जैसे आधुनिक प्रावधान भी जोड़े गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य उद्योगों पर अनावश्यक निरीक्षण और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम करना है। इससे उद्योगों को नियमों का पालन करते हुए भी अधिक सुविधा मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।इसके अलावा, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली (Risk-Based Inspection) को भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत हर उद्योग का बार-बार निरीक्षण करने के बजाय केवल जोखिम के आधार पर जांच की जाएगी। इससे ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षण से राहत मिलेगी, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर प्रभावी निगरानी बनी रहेगी। सरकार ने विधेयक में दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने का भी प्रावधान किया है। कई मामलों में एक ही कार्य के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती थी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी जटिलताओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को मिला सहारा, निफ्टी 24,150 के पार पहुंचा; एशियाई बाजारों की तेजी और निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा उत्साह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/strong-surge-in-stock-market-sensex-rises-700-points-strong/article-58361"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tcs-q1-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत कर दिया। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंकों की बढ़त के साथ 77,500 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी लगभग 200 अंक चढ़कर 24,150 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का माहौल उत्साहपूर्ण रहा। खासतौर पर आईटी कंपनियों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया और अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी की आय भी सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये दर्ज की गई। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ कंपनी ने प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) की भी घोषणा की है। इस घोषणा ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया तथा शेयर में तेजी देखने को मिली। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी और एक वर्ष के दौरान भी इसमें उल्लेखनीय कमजोरी रही, लेकिन ताजा नतीजों के बाद निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी इसी तरह का प्रदर्शन बनाए रखती है तो आईटी सेक्टर में निवेशकों का विश्वास और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईटी के अलावा मेटल सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर धातुओं की मांग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों के कारण इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी रही। स्टील और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों ने सक्रिय रुचि दिखाई, जिससे बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली। घरेलू बाजार को विदेशी संकेतों का भी समर्थन मिला। एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को अच्छी बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई बाजारों में इस सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों का मनोबल मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजारों से भी अच्छे संकेत मिले। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी ने वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले कारोबारी सत्र में करीब 533 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संतुलन प्रदान किया। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत फिलहाल भारतीय बाजार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को आने वाले दिनों में महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर बनाए रखनी होगी क्योंकि इनका असर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगा। कॉरपोरेट आय के मौजूदा सीजन में यदि बड़ी कंपनियां उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश करती हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी भी बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LNG सप्लाई फिर हुई सामान्य, सरकार ने हटाए सभी आपातकालीन प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष थमने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट बहाल होने के बाद केंद्र का बड़ा फैसला, उद्योगों को मिलेगी राहत और गैस आपूर्ति होगी सुचारु]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/lng-supply-normal-again-government-removed-all-emergency-restrictions/article-57903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lng-supply-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद देश के औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि एलएनजी का सबसे अधिक उपयोग उद्योगों, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और कई अन्य औद्योगिक गतिविधियों में किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस एवं तेल के जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति स्थिर है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से भारत के लिए एलएनजी कार्गो फिर से नियमित रूप से पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के चलते फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत आने वाले एलएनजी कार्गो को रोक दिया था या उन्हें अन्य देशों की ओर मोड़ दिया था। इस संभावित ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ लागू किया था। इसका उद्देश्य सीमित उपलब्ध गैस का प्राथमिकता के आधार पर वितरण सुनिश्चित करना और आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बनाए रखना था।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी सप्लाई से जुड़े प्रतिबंध हटाना सरकार का तीसरा बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इससे पहले सरकार ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद दो अन्य आपातकालीन फैसले भी वापस ले चुकी है। पहले फैसले के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया था कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन अधिक करें ताकि घरेलू जरूरतें पूरी की जा सकें। अब इस निर्देश को समाप्त कर दिया गया है। दूसरे फैसले में बल्क उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री पर लगाई गई सीमा भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का कहना है कि अब ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और किसी प्रकार की अतिरिक्त पाबंदी की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। देश में कई उद्योग प्राकृतिक गैस पर आधारित उत्पादन प्रणाली का उपयोग करते हैं। गैस की कमी के दौरान कई कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ने, वैकल्पिक ईंधन अपनाने और उत्पादन घटाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब नियमित आपूर्ति बहाल होने से उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और कई उद्योगों का संचालन पहले की तरह सुचारु रूप से हो सकेगा। इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, स्टील, सिरेमिक, कांच, टेक्सटाइल और अन्य गैस आधारित उद्योगों को राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। इनमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशिया के देशों से आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। विशेष रूप से कतर से आने वाली एलएनजी का अधिकांश परिवहन स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक कदम उठाए थे। विभिन्न देशों से ईंधन आयात के विकल्प तलाशे गए, घरेलू भंडार का उपयोग किया गया और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया गया। एलएनजी आपूर्ति सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है। उद्योगों के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की तैयारी, अब ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे सोना</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार जल्द ला सकती है अपडेटेड योजना, ज्वेलर्स को बनाया जा सकता है कलेक्शन पार्टनर; घरों में रखा निष्क्रिय सोना अर्थव्यवस्था में लाने की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-new-gold-monetization-scheme-now-you-will-be/article-57820"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-monetization-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्र सरकार देश में निष्क्रिय पड़े सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले दो सप्ताह के भीतर सरकार इस योजना का नया और संशोधित स्वरूप पेश कर सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पहली बार देशभर के ज्वेलर्स और सर्राफा कारोबारियों को 'कलेक्शन पार्टनर' के रूप में शामिल किया जा सकता है। अभी तक आम लोग केवल अधिकृत बैंकों के माध्यम से ही इस योजना में अपना सोना जमा कर सकते थे। नए प्रस्ताव का उद्देश्य इस प्रक्रिया को आसान बनाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग ले सकें। माना जा रहा है कि यदि यह योजना लागू होती है तो लोगों को अपने आसपास के भरोसेमंद ज्वेलर्स के पास ही सोना जमा करने की सुविधा मिल जाएगी। इससे बैंक तक जाने की जरूरत कम होगी और योजना की पहुंच भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ सकती है। सरकार का मानना है कि देश के घरों में बड़ी मात्रा में ऐसा सोना रखा है जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। यदि उसका एक हिस्सा भी औपचारिक व्यवस्था में आ जाता है तो इससे आयात पर निर्भरता घटाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सराफा कारोबार से जुड़े संगठनों ने लंबे समय से सरकार से इस योजना के नियमों में बदलाव की मांग की थी। उनका तर्क था कि ज्वेलर्स को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए क्योंकि आम लोगों का उनसे सीधा संपर्क होता है और विश्वास भी अधिक होता है। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का कहना है कि यदि ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जाता है तो देशभर से बड़ी मात्रा में सोना जुटाना आसान हो जाएगा। संगठन का अनुमान है कि इस व्यवस्था के जरिए 1000 टन से अधिक सोना बाजार में लाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा भी इस योजना में जमा हो जाता है तो अर्थव्यवस्था में लगभग 90 अरब डॉलर, यानी करीब 8.57 लाख करोड़ रुपये के बराबर मूल्य का सोना औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल हो सकता है। इससे सोने के आयात की जरूरत कम होगी और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव भी घट सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का बेहतर उपयोग देश की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में आम लोगों के लिए कई सुविधाएं देने की भी तैयारी है। जानकारी के अनुसार, योजना में जमा किए गए सोने पर सालाना लगभग 2.25 से 2.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलने की व्यवस्था बरकरार रह सकती है। इससे घरों में वर्षों से बिना उपयोग के रखे सोने से आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही बैंक लॉकर का वार्षिक खर्च और घर में सोना रखने से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी कम हो सकती हैं। योजना की अवधि पूरी होने पर निवेशकों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे अपनी राशि नकद के रूप में लें या फिर उतनी कीमत का फिजिकल गोल्ड वापस प्राप्त करें। सरकार ऐसी व्यवस्था पर भी काम कर रही है जिससे पुराने सोने को जमा करने वाले लोगों को दस्तावेजों और कर संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। हालांकि अंतिम नियमों और पात्रता की जानकारी योजना की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि योजना का ढांचा सरल और पारदर्शी रखा जाता है तो यह आम परिवारों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है। इसके साथ ही ज्वेलर्स को शामिल करने से योजना का नेटवर्क तेजी से बढ़ेगा और छोटे शहरों तथा कस्बों तक इसकी पहुंच आसान होगी। सरकार का उद्देश्य केवल लोगों को निवेश का नया विकल्प देना नहीं, बल्कि देश में निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना भी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फैसला 2-3 महीने बाद, महंगे कच्चे तेल के असर से सरकार ने जताई इंतजार की बात</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान संकट के दौरान खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग जारी, सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/decision-on-petrol-and-diesel-prices-will-be-taken-after/article-57712"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे या नहीं, इस पर कोई फैसला अगले दो से तीन महीनों में ही संभव होगा। फिलहाल सरकार या सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में कटौती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। मंत्री के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका असर घरेलू बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देगा क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जिसे ईरान संकट के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जब ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात बने थे, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय देश की तेल कंपनियों ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊंचे दामों पर कच्चा तेल खरीदा था। अब वही स्टॉक रिफाइनरियों में प्रोसेस हो रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तत्काल राहत देना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दो-तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रित बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस बेचने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। 30 जून तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को कुल 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल मौजूदा अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले महीनों की भरपाई का असर भी इसमें शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से जून की तिमाही में केवल पेट्रोल पर लगभग 19,905 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। वहीं डीजल पर नुकसान का आंकड़ा और भी अधिक रहा। इसके अलावा घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। मंत्री ने कहा कि यदि पिछले वर्षों और पिछली तिमाहियों के एलपीजी नुकसान को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल अंडर-रिकवरी का आंकड़ा 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि विभिन्न वित्तीय समायोजनों के बाद मौजूदा कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपये बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इसी वर्ष मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में चरणबद्ध तरीके से 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से करीब 90 प्रतिशत पर इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों का संचालन है। ऐसे में इनके द्वारा लिया गया कोई भी फैसला सीधे तौर पर करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में किसी तरह की कटौती की घोषणा नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कमी की है। कंपनी ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपये से घटकर 114.79 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 102.57 रुपये से घटकर 99.57 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इससे यह संकेत मिला है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो अन्य कंपनियां भी भविष्य में इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर लौट आई हैं। इससे ऊर्जा बाजार में कुछ स्थिरता आई है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक के प्रभाव से बाहर नहीं निकली हैं। यही वजह है कि आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>चांदी ₹3,420 चढ़कर ₹2.29 लाख किलो पहुंची, सोना ₹1,371 उछलकर ₹1.43 लाख पर</title>
                                    <description><![CDATA[जून में बड़ी गिरावट के बाद सोने-चांदी में फिर तेजी, इस साल अब तक सोना करीब ₹10 हजार महंगा जबकि निवेशकों की नजर आगे की चाल पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/silver-rose-by-%E2%82%B9-3420-and-reached-%E2%82%B9-229-lakh/article-57713"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1,371 रुपये बढ़कर 1,43,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। वहीं चांदी भी मजबूत बढ़त के साथ 3,420 रुपये महंगी होकर 2,29,000 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई। पिछले महीने लगातार गिरावट के बाद आई इस तेजी ने सर्राफा बाजार में फिर से हलचल बढ़ा दी है। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि बाजार के जानकार अभी इसे स्थायी तेजी मानने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते महीने जून में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। 31 मई को 10 ग्राम सोने का भाव 1,56,463 रुपये था, जो जून के आखिर तक घटकर 1,43,380 रुपये पर आ गया। यानी एक महीने में सोना 13,083 रुपये सस्ता हुआ था। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो से घटकर 2,29,293 रुपये रह गई थी। इस दौरान चांदी में 34,057 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट देखने को मिली। लंबे समय बाद आई इस गिरावट से आभूषण खरीदने वालों को राहत मिली थी, लेकिन अब जुलाई की शुरुआत में फिर तेजी लौटने से बाजार का माहौल बदलता नजर आ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि अगर पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो सोना अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी महंगा बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर करीब 1.43 लाख रुपये हो चुका है। यानी इस साल अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में सालभर के दौरान ज्यादा बढ़त नहीं दिखी है। वर्ष के अंत में चांदी लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जबकि फिलहाल यह करीब 2.29 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस साल जनवरी में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड ऊंचाई भी छुई थी। 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। उसके बाद मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में बदलाव और निवेशकों की रणनीति बदलने से दोनों धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट आई। अब जुलाई की शुरुआत में आई तेजी को बाजार नई दिशा के संकेत के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने-चांदी की कीमतों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। इसी तरह औद्योगिक मांग बढ़ने पर चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">निवेश करने वाले लोगों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय के निवेश माने जाते हैं और इनमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। यदि कोई व्यक्ति निवेश या आभूषण खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे रोजाना के भाव पर नजर रखने के साथ बाजार की दिशा को भी समझना चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के मौसम में मांग बढ़ने से कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ज्वेलर्स भी ग्राहकों को सोना खरीदते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। सबसे पहले हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन के सोने के भाव की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से कर लेना भी जरूरी है क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। ग्राहकों को बिल जरूर लेना चाहिए और मेकिंग चार्ज व अन्य शुल्क की भी स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:08:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में ₹2,246 करोड़ के निवेश को मंजूरी, 20 हजार करोड़ निर्यात का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[फार्मा कंपनियों के बड़े निवेश से औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगी नई रफ्तार, करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/approval-of-investment-of-%E2%82%B9-2246-crore-in-pithampur-sez/article-57716"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pithampur-sez.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर को एक बार फिर बड़ी निवेश सौगात मिली है। पीथमपुर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के दूसरे चरण में कुल 2,246 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन निवेशों के जरिए प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPIDC) के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से करीब 1,900 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। निवेश प्रस्तावों को डेवलपमेंट कमिश्नर, एसईजेड की अध्यक्षता में आयोजित स्वीकृति समिति की वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बैठक में मंजूरी दी गई। सभी नई परियोजनाएं पीथमपुर एसईजेड फेज-2 में स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता और निर्यात गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु प्रजापति ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं का सबसे बड़ा हिस्सा फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़ा है। कई प्रमुख दवा कंपनियां अपने उत्पादन का विस्तार करने के साथ नई इकाइयों की स्थापना भी करेंगी। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक विनिर्माण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि फार्मा उद्योग में बढ़ता निवेश प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्वीकृत प्रस्तावों में प्रमुख दवा कंपनी अजंता फार्मा का विस्तार शामिल है। कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नई सुविधाओं का विकास करेगी। इसके अलावा फेलिक्स जेनेरिक्स और शंकर न्यूट्रिकॉन जैसी कंपनियां भी पीथमपुर एसईजेड में नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करेंगी। इन परियोजनाओं के शुरू होने से दवा निर्माण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण और सप्लाई चेन से जुड़े कई नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग का मानना है कि इन कंपनियों के आने से छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है। यहां पहले से ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा, केमिकल और विनिर्माण क्षेत्र की अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां संचालित हैं। बेहतर सड़क संपर्क, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना और निर्यात के लिए उपलब्ध सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। विशेष आर्थिक क्षेत्र होने के कारण यहां उद्योगों को कई प्रशासनिक और व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, जिससे निवेश आकर्षित करने में मदद मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एमपीआईडीसी का कहना है कि इन नई परियोजनाओं के शुरू होने के बाद पीथमपुर एसईजेड का निर्यात प्रदर्शन भी मजबूत होगा। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इन इकाइयों से लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निर्यात किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। निर्यात बढ़ने से प्रदेश की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर फार्मास्युटिकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि मध्य प्रदेश में आधुनिक दवा निर्माण इकाइयों का विस्तार होता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। नई इकाइयों के शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, तकनीकी विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके साथ ही परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास कर रही है। निवेशकों को सरल प्रक्रियाएं, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार नई परियोजनाएं स्वीकृत हो रही हैं। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश आने से प्रदेश में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में फ्लैट कारोबार, सेंसेक्स 77,100 पर स्थिर रुख</title>
                                    <description><![CDATA[मेटल और फार्मा सेक्टर की खरीदारी से बाजार को सपोर्ट, ऑटो-IT में दबाव जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/flat-trading-in-stock-market-sensex-stable-at-77100/article-57281"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">शेयर बाजार में आज 29 जून को कारोबार की शुरुआत बेहद सीमित दायरे में हुई और दिनभर बाजार लगभग सपाट रुख के साथ ही चलता रहा। सेंसेक्स करीब 77,100 के स्तर पर स्थिर दिखाई दिया, वहीं निफ्टी 24,100 के आसपास हल्की उठापटक के बीच कारोबार करता रहा। शुरुआती घंटों में ही यह साफ हो गया था कि बाजार में इस समय कोई मजबूत दिशा नहीं बन पा रही है और निवेशक भी बड़ी पोजीशन लेने से बचते नजर आ रहे हैं। सुबह के समय हल्की तेजी और हल्की गिरावट के बीच इंडेक्स लगातार ऊपर-नीचे होते रहे, लेकिन कुल मिलाकर पूरा ट्रेडिंग सेशन सीमित दायरे में ही सिमटा रहा।  बाजार में इस समय घरेलू संकेत तो स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर मिल रहे मिले-जुले संकेतों की वजह से निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। यही वजह रही कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स किसी बड़ी तेजी या गिरावट की ओर नहीं जा सके। बाजार में सेक्टोरल मूवमेंट जरूर देखने को मिला, जहां कुछ सेक्टरों में खरीदारी और कुछ में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। खासकर ऑटो, आईटी और मीडिया सेक्टर में पूरे दिन दबाव बना रहा, जिससे बाजार की तेजी सीमित हो गई। दूसरी तरफ मेटल और फार्मा सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिसने इंडेक्स को बड़े नुकसान से बचाए रखा। सुबह जैसे ही बाजार खुला, वैसे ही कुछ स्टॉक्स में हल्की गिरावट देखने को मिली। शुरुआती आधे घंटे में ही ऑटो सेक्टर में बिकवाली बढ़ गई और आईटी कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ गए। बताया जा रहा है कि ग्लोबल टेक्नोलॉजी मार्केट में सुस्ती और ऑटो सेक्टर में डिमांड को लेकर अनिश्चितता की वजह से निवेशकों ने इन सेक्टरों से दूरी बनाए रखी। वहीं दूसरी ओर फार्मा सेक्टर में लगातार खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे इस इंडेक्स को सपोर्ट मिला। मेटल सेक्टर में भी कुछ बड़े स्टॉक्स में मजबूत खरीदारी देखी गई, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में स्थिरता के संकेत मिल रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">दिन के मध्य तक बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया और ट्रेडिंग वॉल्यूम भी अपेक्षाकृत कम ही बना रहा। कई ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में “वेट एंड वॉच” का माहौल है, जहां निवेशक किसी बड़े आर्थिक या वैश्विक संकेत का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच सेंसेक्स बार-बार 77,000 के आसपास और निफ्टी 24,100 के आसपास घूमता रहा, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार एक सीमित रेंज में फंसा हुआ है। कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की-फुल्की गतिविधि देखने को मिली, लेकिन वह भी किसी बड़े ट्रेंड को जन्म नहीं दे सकी। एशियाई बाजारों में भी आज का कारोबार मिला-जुला रहा। साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई भी कमजोर रुख में रहा। इसके उलट हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स मजबूती के साथ ऊपर चढ़ा। इस अस्थिरता का असर भारतीय बाजार पर भी साफ देखने को मिला। ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय निवेशकों को सतर्क बनाए रखा और इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी नहीं बन सकी। गुरुवार के कारोबार की बात करें तो उस दिन भी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हल्की बढ़त दर्ज की गई थी, लेकिन वह तेजी भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दिन के अंत में सीमित बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे यह साफ हो गया था कि बाजार में फिलहाल कोई मजबूत ट्रेंड नहीं बन रहा है। इसी वजह से आज भी बाजार लगभग उसी रेंज में घूमता नजर आया और निवेशकों की रणनीति भी काफी हद तक सतर्क रही। आने वाले कुछ सत्रों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। अभी के लिए निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और सिर्फ चुनिंदा सेक्टरों में ही हल्की खरीदारी कर रहे हैं। मेटल और फार्मा सेक्टर में जिस तरह की मजबूती दिख रही है, वह आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है, जबकि आईटी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है अगर वैश्विक संकेत कमजोर रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>साउथ कोरिया ने भारतीय शेयर बाजार को पछाड़ा, AI बूम से बढ़ा मूल्यांकन</title>
                                    <description><![CDATA[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी और चिप सेक्टर की मजबूती से कोरिया का मार्केट कैप भारत से आगे, निवेश प्रवाह में बड़ा बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/south-korea-beats-indian-stock-market-valuation-increases-due-to/article-54769"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक शेयर बाजारों में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इसकी मुख्य वजह वहां की चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियों में आई तेज उछाल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के चलते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। इस तेजी ने कोरियाई बाजार की कुल वैल्यू को नई ऊंचाई दे दी है, जबकि भारतीय बाजार इस रेस में थोड़ा पीछे खिसक गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल करीब 86 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 475 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस बदलाव ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान एक बार फिर एशियाई बाजारों की तरफ खींचा है और यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन वजहों से यह रैंकिंग बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया की इस तेज छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और चिप इंडस्ट्री का मजबूत प्रदर्शन है। AI तकनीक के विस्तार के साथ-साथ डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग के लिए चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिला है जो मेमोरी चिप और एडवांस सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ग्लोबल लीडर हैं। यही वजह है कि कोरियाई इंडेक्स में लगातार मजबूती देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं भारतीय बाजार में इस दौरान कई दबाव देखने को मिले। सबसे पहले रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी का असर बाजार की डॉलर वैल्यू पर पड़ा। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। कई हफ्तों तक भारी निकासी के कारण बाजार की कुल वैल्यूएशन पर असर दिखा। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भारत में अभी तक ऐसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल AI इकोसिस्टम या चिप मैन्युफैक्चरिंग से गहराई से जुड़ी हों।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि मार्केट कैप के मामले में साउथ कोरिया से पीछे होने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके मुकाबले साउथ कोरिया की GDP लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो भारत की तुलना में आधे से भी कम है। इससे साफ है कि आर्थिक उत्पादन के मामले में भारत अभी भी काफी आगे है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मार्केट कैप और GDP दोनों अलग-अलग संकेतक होते हैं। मार्केट कैप का सीधा संबंध शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्यांकन से होता है, जबकि GDP किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। कई बार ऐसा होता है कि किसी देश का स्टॉक मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता है लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, या इसके विपरीत भी हो सकता है। इसी वजह से दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जाती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया में हाल के महीनों में टेक सेक्टर, खासकर AI और चिप इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। ग्लोबल टेक कंपनियों के साथ सप्लाई चेन जुड़ाव और एआई आधारित प्रोडक्ट्स की मांग ने वहां के बाजार को मजबूती दी है। दूसरी तरफ भारत में बैंकिंग, एनर्जी और आईटी सेक्टर का दबदबा ज्यादा है, लेकिन AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अभी शुरुआती विकास चरण देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में भारत में भी AI और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:57:47 +0530</pubDate>
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