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                <title>GDP - दैनिक जागरण</title>
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                <title>साउथ कोरिया ने भारतीय शेयर बाजार को पछाड़ा, AI बूम से बढ़ा मूल्यांकन</title>
                                    <description><![CDATA[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी और चिप सेक्टर की मजबूती से कोरिया का मार्केट कैप भारत से आगे, निवेश प्रवाह में बड़ा बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/south-korea-beats-indian-stock-market-valuation-increases-due-to/article-54769"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक शेयर बाजारों में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इसकी मुख्य वजह वहां की चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियों में आई तेज उछाल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के चलते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। इस तेजी ने कोरियाई बाजार की कुल वैल्यू को नई ऊंचाई दे दी है, जबकि भारतीय बाजार इस रेस में थोड़ा पीछे खिसक गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल करीब 86 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 475 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस बदलाव ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान एक बार फिर एशियाई बाजारों की तरफ खींचा है और यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन वजहों से यह रैंकिंग बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया की इस तेज छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और चिप इंडस्ट्री का मजबूत प्रदर्शन है। AI तकनीक के विस्तार के साथ-साथ डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग के लिए चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिला है जो मेमोरी चिप और एडवांस सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ग्लोबल लीडर हैं। यही वजह है कि कोरियाई इंडेक्स में लगातार मजबूती देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं भारतीय बाजार में इस दौरान कई दबाव देखने को मिले। सबसे पहले रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी का असर बाजार की डॉलर वैल्यू पर पड़ा। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। कई हफ्तों तक भारी निकासी के कारण बाजार की कुल वैल्यूएशन पर असर दिखा। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भारत में अभी तक ऐसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल AI इकोसिस्टम या चिप मैन्युफैक्चरिंग से गहराई से जुड़ी हों।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि मार्केट कैप के मामले में साउथ कोरिया से पीछे होने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके मुकाबले साउथ कोरिया की GDP लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो भारत की तुलना में आधे से भी कम है। इससे साफ है कि आर्थिक उत्पादन के मामले में भारत अभी भी काफी आगे है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मार्केट कैप और GDP दोनों अलग-अलग संकेतक होते हैं। मार्केट कैप का सीधा संबंध शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्यांकन से होता है, जबकि GDP किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। कई बार ऐसा होता है कि किसी देश का स्टॉक मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता है लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, या इसके विपरीत भी हो सकता है। इसी वजह से दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जाती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया में हाल के महीनों में टेक सेक्टर, खासकर AI और चिप इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। ग्लोबल टेक कंपनियों के साथ सप्लाई चेन जुड़ाव और एआई आधारित प्रोडक्ट्स की मांग ने वहां के बाजार को मजबूती दी है। दूसरी तरफ भारत में बैंकिंग, एनर्जी और आईटी सेक्टर का दबदबा ज्यादा है, लेकिन AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अभी शुरुआती विकास चरण देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में भारत में भी AI और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:57:47 +0530</pubDate>
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