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                <title>Legal Case - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Legal Case RSS Feed</description>
                
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                <title>चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा</title>
                                    <description><![CDATA[सात मामलों में दोषसिद्धि कायम, तीन महीने की सजा के साथ करोड़ों रुपये मुआवजा देने का आदेश; अदालत ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं करने पर जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/shock-to-actor-rajpal-yadav-in-check-bounce-case-delhi/article-58423"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rajpal-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सात अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए अभिनेता को कुल तीन महीने की ही जेल काटनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता को करोड़ों रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा दिए गए निर्णय और मुआवजे की गणना में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने माना कि पहले किए गए भुगतानों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि तय की गई है। कोर्ट ने राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त एक अन्य राशि और राज्य को 25 हजार रुपये देने का आदेश भी दिया गया। वहीं उनकी पत्नी राधा यादव को भी प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 5.51 लाख रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता को कई अवसर दिए गए थे ताकि वह विवाद का आपसी सहमति से समाधान कर सकें। राजपाल यादव की ओर से बार-बार अदालत को भरोसा दिलाया गया कि वह बकाया राशि का भुगतान कर देंगे और समझौते का पालन करेंगे। लेकिन अदालत के अनुसार उन्हें पर्याप्त समय और अवसर मिलने के बावजूद वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान अभिनेता ने पहले समझौते की इच्छा जताई, लेकिन बाद में अतिरिक्त भुगतान करने से इनकार कर दिया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने यह तक कहा कि यदि भुगतान संभव नहीं है तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं। इसी कारण अदालत ने माना कि अब इस मामले में राहत देने का कोई आधार नहीं बचता। यह पूरा मामला वर्ष 2010 में लिए गए एक बड़े ऋण से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण और निर्देशन के उद्देश्य से एक निजी कंपनी से लगभग पांच करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह राशि उनकी फिल्म "अता पता लापता" के निर्माण में लगाई गई थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिससे अभिनेता आर्थिक संकट में आ गए और समय पर ऋण नहीं चुका पाए। समय के साथ ब्याज, जुर्माना और भुगतान में देरी के कारण यह बकाया राशि बढ़कर लगभग नौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस बीच कर्ज चुकाने के लिए दिए गए कई चेक बैंक से बाउंस हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता कंपनी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया और अभिनेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने कई बार अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने कुछ किस्तों में भुगतान भी किया। अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभिनेता पहले ही लगभग 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं और इस राशि को अंतिम मुआवजे में समायोजित किया जाएगा। बावजूद इसके बड़ी रकम अभी भी बकाया है, जिसके कारण अदालत ने सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि पूर्व में दी गई राहत केवल इस भरोसे पर आधारित थी कि अभिनेता निर्धारित समय के भीतर समझौते की शर्तों का पालन करेंगे। लेकिन बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद भुगतान पूरा नहीं किया गया। अदालत ने तकनीकी या टाइपिंग संबंधी त्रुटियों के कारण भुगतान में देरी के तर्क को भी स्वीकार नहीं किया और कहा कि ये दलीलें विश्वसनीय नहीं हैं। इस मामले में पहले भी राजपाल यादव को अदालत के निर्देश पर आत्मसमर्पण करना पड़ा था और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था। बाद में उन्होंने अदालत में 25 लाख रुपये का चेक प्रस्तुत कर शेष राशि का भुगतान करने का आश्वासन देते हुए राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पहले आत्मसमर्पण आवश्यक है और उसके बाद ही किसी राहत पर विचार किया जा सकता है। अभिनेता ने सुनवाई के दौरान अपनी आर्थिक कठिनाइयों का भी जिक्र किया था। उन्होंने अदालत से कहा कि उनके पास भुगतान के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है और वह आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल आर्थिक कठिनाई के आधार पर कानूनी दायित्वों से बचा नहीं जा सकता।राजपाल यादव के समर्थन में फिल्म उद्योग के कुछ कलाकार भी सामने आए। अभिनेता सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि राजपाल यादव बेहद प्रतिभाशाली कलाकार हैं और कठिन समय में फिल्म उद्योग को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपनी फिल्म में काम देकर अग्रिम राशि दी जाएगी, जिसे भविष्य के काम के बदले समायोजित किया जाएगा। सोनू सूद ने इसे दान नहीं बल्कि सम्मान और गरिमा बनाए रखने का प्रयास बताया। अभिनेता गुरमीत चौधरी ने भी राजपाल यादव के समर्थन में आवाज उठाई और फिल्म जगत से सहयोग की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>हाथी दांत मामले में फिर चर्चा में मोहनलाल, वन विभाग को 10 दांत और 13 मूर्तियों की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 साल पुराने मामले में एमनेस्टी योजना के तहत किया खुलासा, वन विभाग करेगा जांच; डीएनए परीक्षण की भी संभावना जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a4cb43280040/article-58093"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohanlal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर हाथी दांत रखने से जुड़े पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। केरल वन विभाग के समक्ष अभिनेता ने सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियों की जानकारी दी है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर वह मामला सुर्खियों में आ गया है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले अभिनेता ने केवल चार हाथी दांत होने की जानकारी दी थी, लेकिन अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ कई कलाकृतियों की भी घोषणा की है। विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इन वस्तुओं का डीएनए परीक्षण भी कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता ने जिन वस्तुओं की घोषणा की है, उनमें भगवान कृष्ण, भगवान राम और तिरुपति बालाजी सहित कई धार्मिक प्रतिमाएं शामिल हैं। इन सभी हाथी दांतों और मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम बताया जा रहा है। मोहनलाल का कहना है कि ये वस्तुएं उन्हें विरासत में मिली थीं या फिर उपहार के रूप में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने इन्हें किसी अवैध व्यापार या शिकार के जरिए हासिल नहीं किया। हालांकि वन विभाग अब इस दावे की भी जांच करेगा कि इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति क्या है और क्या इनके पास रखने की प्रक्रिया उस समय लागू नियमों के अनुरूप थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार वर्ष 2011 में सामने आया था। उस समय आयकर विभाग की टीम कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। अधिकारियों का उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना था, लेकिन तलाशी के दौरान घर में हाथी दांत और उनसे बनी कई कलाकृतियां मिलीं। इसके बाद मामला वन विभाग तक पहुंचा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार की अनुमति के बिना हाथी दांत रखना या उसका स्वामित्व रखना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर वन विभाग ने इन वस्तुओं को जब्त किया और पेरुम्बावूर की अदालत में मामला दर्ज कराया। तभी से यह प्रकरण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद मोहनलाल ने अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन हाथी दांतों की बात हो रही है, वे एक ऐसे पालतू हाथी के थे जिसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी। अभिनेता का दावा था कि उन्होंने उन्हें केवल स्मृति के रूप में अपने पास रखा था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना कानून के दायरे में प्रतिबंधित है। बाद में वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दी और वर्ष 2016 में स्वामित्व प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। उस समय इस फैसले पर भी कई वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सवाल उठाए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। मोहनलाल ने निचली अदालत के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम राहत मिली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मामले को वापस लेने का भी अनुरोध किया, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। बाद में सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिनेता को जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। इसके बाद मामला फिर वन विभाग की जांच के दायरे में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत मोहनलाल द्वारा अतिरिक्त हाथी दांत और मूर्तियों की घोषणा किए जाने के बाद विभाग एक बार फिर सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि आवश्यकता पड़ी तो हाथी दांतों और उनसे बनी मूर्तियों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ये वस्तुएं किस हाथी से संबंधित हैं और इनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी दांत से संबंधित मामलों में कानून काफी सख्त है, क्योंकि अवैध शिकार और हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाने के लिए देश में लंबे समय से विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति, स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। दूसरी ओर अभिनेता के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एमनेस्टी योजना के तहत स्वयं जानकारी देकर कानून का पालन करने की कोशिश की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:48:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सोशल मीडिया दोस्ती से फंसी युवती, पांच साल का शोषण मामला</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के जामिया नगर में दर्ज FIR में युवती ने यौन शोषण, धमकी और जबरन निकाह के गंभीर आरोप लगाए, पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/five-years-old-exploitation-case-of-girl-trapped-due-to/article-57569"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/meerut-faheem-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">राजधानी दिल्ली के जामिया नगर थाना क्षेत्र में एक युवती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। 23 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे एक लंबे शोषण, धमकी और बंधक जैसी स्थिति में बदल गई। पीड़िता का कहना है कि उसे प्रेम के जाल में फंसाकर कई वर्षों तक मानसिक और शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पीड़िता की पहचान बदलकर सामने आई शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2021 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक युवक से उसकी बातचीत शुरू हुई थी।<img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/delhi-news.jpg" alt="Delhi News" width="1366" height="1037"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><br />शुरुआत में यह बातचीत सामान्य दोस्ती तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता गहराता गया। पीड़िता का आरोप है कि युवक ने पहले खुद को अलग पहचान के साथ पेश किया और बाद में उस पर मिलने और रिश्ते में बने रहने का दबाव बनाया। शिकायत के अनुसार मुलाकातों के दौरान कथित तौर पर उसे नशीला पदार्थ दिए जाने और उसके साथ शोषण की घटनाओं का दावा किया गया है। इसके बाद आरोपी द्वारा वीडियो बनाकर धमकाने और ब्लैकमेल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि धमकी और डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही और आरोपी के संपर्क में बनी रही। आरोप है कि इस दौरान उसे बार-बार अलग-अलग स्थानों पर बुलाया जाता था और विरोध करने पर वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में उसे एक अन्य स्थान पर ले जाकर जबरन रोके रखा गया और वहां उसकी पहचान और निजी स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया। इस पूरे मामले में पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसके परिवार को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी दी गई, जिससे वह लंबे समय तक लापता स्थिति में रही।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/meerut-faheem-(1).jpg" alt="MEERUT FAHEEM (1)" width="731" height="800"></img></p>
<p>मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि पीड़िता को कई बार अलग-अलग लोगों के संपर्क में लाया गया, जिससे उसका मानसिक और शारीरिक शोषण हुआ। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि बयान, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल डेटा के आधार पर पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/jamia-nagar-case.jpg" alt="Jamia Nagar Case" width="1366" height="1037"></img></p>
<p>जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पीड़िता की शिकायत में गंभीर आरोप हैं, जिनमें यौन शोषण, धमकी, जबरन रोककर रखना और पहचान बदलने जैसे पहलू शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलते ही संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया और कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसमें कोई संगठित तरीके से की गई आपराधिक गतिविधि शामिल थी या नहीं। पीड़िता के अनुसार यह पूरा मामला धीरे-धीरे एक जाल में बदल गया, जिसमें वह खुद को फंसा हुआ महसूस करने लगी थी। उसका दावा है कि मानसिक दबाव और धमकियों के कारण उसने कई वर्षों तक किसी से खुलकर बात नहीं की। बाद में हालात बिगड़ने पर उसने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसे सुरक्षा और काउंसलिंग सहायता भी उपलब्ध कराई है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/exploitation-case.jpg" alt="Exploitation Case" width="1366" height="978"></img></p>
<p>अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ी जा रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसमें किसी तरह का आर्थिक या संगठित नेटवर्क भी शामिल था।इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में भी चर्चा का माहौल है। स्थानीय स्तर पर लोग इस घटना को सोशल मीडिया के दुरुपयोग और ऑनलाइन रिश्तों में सावधानी बरतने की जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत में सतर्कता बरती जाए और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत शिकायत की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 00:37:37 +0530</pubDate>
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                <title>सरगुजा में शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण का मामला, FIR दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[लिव-इन रिलेशन में रही युवती ने लगाए गंभीर आरोप, शादी से इनकार के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/fir-registered-in-surguja-for-physical-exploitation-on-the-pretext/article-56927"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/surguja-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर में शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने का मामला सामने आया है। एक युवती ने आरोप लगाया है कि युवक ने शादी का वादा कर उसके साथ लंबे समय तक लिव-इन रिलेशन में रहकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार पीड़िता 25 वर्षीय युवती है, जो वर्ष 2022 से अंबिकापुर के नावापारा क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसकी पहचान एक युवक से हुई, जो सूरजपुर जिले के भटगांव क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे संबंध गहरे होते चले गए। शिकायत में बताया गया है कि युवक ने युवती को शादी का भरोसा दिया, जिसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि 26 जनवरी 2025 को युवक ने उसे घूमने के लिए बुलाया था। उस दौरान दोनों एक साथ समय बिताने के बाद किराए के मकान में पहुंचे, जहां शादी का वादा दोहराते हुए शारीरिक संबंध बनाए गए। इसके बाद युवती ने भरोसे के आधार पर युवक के साथ रहने का फैसला किया और फरवरी 2025 में अपना सामान लेकर उसके साथ रहने चली गई। इसके बाद दोनों करीब डेढ़ साल तक लिव-इन रिलेशन में रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस दौरान युवती ने आरोप लगाया है कि उसने कई बार शादी की बात की, लेकिन हर बार युवक टालता रहा। बाद में जब दबाव बढ़ा तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। पीड़िता के अनुसार आरोपी ने यह कहते हुए शादी से मना किया कि दोनों अलग-अलग धर्म और जाति से हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर युवक ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गांधीनगर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने क्षेत्र में सामाजिक और कानूनी बहस को भी जन्म दिया है। लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से बने संबंधों में विवाद की स्थिति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी और सामाजिक जटिलता से बचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की गहन जांच की जा रही है और पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। साथ ही मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। मामले में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं, पीड़िता फिलहाल पुलिस की सुरक्षा में है और उसे आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक इंतजार करें। यह मामला फिलहाल जांच के शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इसमें और भी तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। सरगुजा जिले में सामने आया यह मामला एक बार फिर रिश्तों में विश्वास, सामाजिक जटिलताओं और कानूनी अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुष्पा-2 भगदड़ मामले में अल्लू अर्जुन की सुनवाई स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[संध्या थिएटर हादसे में चार्जशीट दाखिल, अभिनेता को आरोपी नंबर 11 बनाया गया, अदालत ने वर्चुअल पेशी पर आगे की सुनवाई टाली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/allu-arjuns-hearing-postponed-in-pushpa-2-stampede-case/article-56688"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pushpa-2-stampede-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हैदराबाद के संध्या थिएटर में हुई ‘पुष्पा-2’ प्रीमियर भगदड़ मामले में अभिनेता अल्लू अर्जुन को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। नामपल्ली कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अभिनेता को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था, लेकिन वे वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। उनकी लीगल टीम ने बताया कि वह फिलहाल मुंबई में फिल्म शूटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अनुमति दी गई। यह पूरा मामला 4 दिसंबर 2024 का है, जब हैदराबाद के संध्या थिएटर में फिल्म ‘पुष्पा-2’ के एक विशेष प्रीमियर शो के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। शो के दौरान हालात अचानक बेकाबू हो गए और थिएटर परिसर में भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक घटना में रेवती नाम की एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे देश में फिल्मी इवेंट्स में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की जांच रिपोर्ट और चार्जशीट के अनुसार इस मामले में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें थिएटर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी और इवेंट मैनेजमेंट टीम के सदस्य शामिल हैं। रिपोर्ट में अल्लू अर्जुन को आरोपी नंबर 11 (A11) के रूप में नामजद किया गया है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे यह हादसा हुआ। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना वाले दिन अल्लू अर्जुन थिएटर में मौजूद थे, जिससे उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ एंट्री गेट की ओर उमड़ पड़ी। इसी दौरान दबाव बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था टूट गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस का कहना है कि यह स्थिति अचानक नहीं बल्कि भीड़ प्रबंधन में कमी और व्यवस्था की विफलता के कारण बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मामले में आगे बढ़ते हुए 19 आरोपियों को समन जारी किया था और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि अल्लू अर्जुन की ओर से वर्चुअल पेशी की अनुमति मांगी गई, जिसे कोर्ट ने इस बार स्वीकार कर लिया लेकिन आगे की सुनवाई को स्थगित कर दिया गया। अब मामले की अगली सुनवाई पर सभी आरोपियों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस घटना के बाद पुलिस ने अभिनेता को 13 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी। इस दौरान वे करीब 18 घंटे तक हिरासत में रहे थे और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिहाई के बाद अल्लू अर्जुन ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी और उनका इस हादसे से कोई सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने कहा था कि वे पिछले कई वर्षों से इस थिएटर में जाते रहे हैं और पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि भीड़ में अचानक मची अफरा-तफरी किसी के नियंत्रण में नहीं थी और यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था। अभिनेता ने घायल बच्चे के इलाज में आर्थिक और मेडिकल सहायता देने की बात भी कही थी। इस मामले में अदालत की निगरानी में आगे की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस का कहना है कि सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसकी कितनी जिम्मेदारी बनती है। थिएटर प्रबंधन से लेकर इवेंट आयोजकों तक सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/allu-arjuns-hearing-postponed-in-pushpa-2-stampede-case/article-56688</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:57:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केवाईसी और धान पंजीयन के बहाने बुजुर्ग महिला की 90 लाख की संपत्ति हड़पने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[87 वर्षीय महिला ने भाजपा समर्थित पंच पर बैंक खाते, जमीन और वाहन अपने नाम कराने का आरोप लगाया, न्याय नहीं मिलने पर इच्छामृत्यु की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/allegation-of-grabbing-property-worth-rs-90-lakh-of-an/article-55984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/property-fraud-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलगहना चौकी इलाके में एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला द्वारा अपनी करीब 90 लाख रुपए की संपत्ति हड़पे जाने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। महिला ने स्थानीय भाजपा समर्थित पंच पर धोखाधड़ी कर बैंक खाते से लाखों रुपए निकालने, कृषि भूमि अपने नाम कराने और वाहनों का स्वामित्व बदलवाने का आरोप लगाया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा करते हुए महिला ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। साथ ही उन्होंने इच्छामृत्यु की अनुमति देने की भी मांग की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक बेलगहना निवासी बालकुंवर बसोर अपने पति और तीन बेटों को पहले ही खो चुकी हैं। वर्तमान में वह अपनी बेटी के साथ रहती हैं और बांस से बनी झौवा-टुकनी बेचकर किसी तरह जीवनयापन कर रही हैं। आरोप है कि केन्दा निवासी भाजपा समर्थित पंच फगुन प्रसाद प्रजापति उर्फ मोनू ने उनकी आर्थिक और सामाजिक मजबूरी का फायदा उठाया। शुरुआत में उसने बैंक संबंधी कामों में मदद करने और केवाईसी कराने का भरोसा दिलाया। इसी दौरान उसने महिला का विश्वास जीत लिया और धीरे-धीरे महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच बना ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़िता का आरोप है कि 14 दिसंबर 2021 को आरोपी ने धोखे से उनके भारतीय स्टेट बैंक खाते से करीब 23 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। महिला का कहना है कि उन्हें उस समय पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और आरोपी ने सहायता के नाम पर दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि इसी दौरान ग्राम पंचायत लूफा स्थित उनकी कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में भी हेरफेर की गई। बाद में पता चला कि उनकी बहुमूल्य जमीन आरोपी के नाम दर्ज हो चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला के अनुसार जुलाई और सितंबर 2022 में आरोपी उन्हें कोटा तहसील कार्यालय लेकर गया था। वहां उसने कहा कि धान बेचने के लिए पंजीयन और कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इस दौरान कई दस्तावेजों पर उनसे अंगूठे के निशान लगवाए गए। बुजुर्ग महिला का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि यह प्रक्रिया धान पंजीयन से जुड़ी है, लेकिन बाद में जब उन्होंने धान बिक्री की जानकारी लेने की कोशिश की तो पूरा मामला सामने आया। सहकारी बैंक और राजस्व विभाग से जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि उनकी करीब 6.34 एकड़ कृषि भूमि आरोपी के नाम दर्ज हो चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने बीमा और दस्तावेज अपडेट कराने का बहाना बनाकर उनके दिवंगत बेटे के नाम दर्ज वाहनों को भी अपने नाम करा लिया। इनमें एक सेंट्रो कार, एक एक्टिवा और एक छोटा हाथी वाहन शामिल बताया गया है। महिला का कहना है कि उन्हें यह बताया गया था कि वाहनों के बीमा और रिकॉर्ड को अपडेट करना जरूरी है, इसलिए दस्तावेजों पर अंगूठा लगाने को कहा गया। बाद में परिवार के सदस्यों से जानकारी मिली कि वाहनों का स्वामित्व बदल चुका है। पीड़िता और उनके रिश्तेदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि न्याय पाने के लिए उन्होंने पुलिस चौकी बेलगहना, एसडीओपी कार्यालय कोटा और एसपी कार्यालय बिलासपुर के कई चक्कर लगाए, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि जांच के नाम पर उन्हें लगातार इंतजार कराया गया। महिला ने यहां तक आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की गई और उन्हें अदालत जाने की सलाह देकर पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुवार को बुजुर्ग महिला अपनी शिकायत लेकर आईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों को आवेदन सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसी दौरान उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग से जुड़ा आवेदन भी प्रशासन को दिया। महिला का कहना है कि जीवनभर की कमाई और संपत्ति गंवाने के बाद अब उनके पास न्याय की उम्मीद ही बची है। अधिकारियों ने मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद जांच के निर्देश दिए गए। इसके बाद आरोपी फगुन प्रसाद प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी, छलपूर्वक संपत्ति हड़पने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस अब बैंक लेन-देन, जमीन की रजिस्ट्री, राजस्व अभिलेख और वाहन ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/allegation-of-grabbing-property-worth-rs-90-lakh-of-an/article-55984</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खजराना मंदिर के पुजारियों को हटाने की मांग, बहू ने दहेज प्रताड़ना मामले में प्रशासन से की कार्रवाई की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची पीड़िता, जांच पूरी होने तक पुजारियों को पूजा कार्य और गर्भगृह से दूर रखने की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-removal-of-khajrana-temple-priests-daughter-in-law-appeals-administration/article-55430"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khajrana-temple.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की शिकायतकर्ता डॉ. इंद्रा भट्ट मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं और प्रशासन से मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा-पाठ और गर्भगृह से दूर रखा जाए। इस मांग के साथ मामला धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. इंद्रा भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका विवाह मई 2025 में खजराना मंदिर से जुड़े पुजारी पुनित भट्ट के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अपमानित किया गया, मारपीट की गई और कई बार धमकियां भी दी गईं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की शिकायत महिला थाना इंदौर में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि जब मामला न्यायालय और पुलिस जांच के स्तर पर पहुंच चुका है, तब तक संबंधित लोगों को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में डॉ. इंद्रा भट्ट ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि मंदिर एक विशेष अधिनियम के तहत संचालित होता है और यदि किसी पुजारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, तो जांच पूरी होने तक उसे धार्मिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बना रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत में केवल दहेज प्रताड़ना का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कहा कि मंदिर अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति के आचरण से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो, तो प्रशासक या जिला प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। उनका कहना है कि यह किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं है, बल्कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाने की मांग है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं अधिवक्ता डॉ. रुपाली राठौर ने भी कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बाद संबंधित धार्मिक पदाधिकारियों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया गया था। उनका कहना है कि इससे जांच प्रभावित नहीं होती और संस्थान की साख भी बनी रहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सामाजिक संगठनों और समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी। उनका कहना है कि वह इस मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगी ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:53:17 +0530</pubDate>
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                <title>जबलपुर आरक्षक हत्याकांड: एक फोन कॉल से खुला पूरा राज</title>
                                    <description><![CDATA[हत्या, जांच और तीन अलग-अलग कहानियों के बीच उलझा सच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/jabalpur-constable-murder-case-whole-secret-revealed-by-one-phone/article-54789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जबलपुर में छठवीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक राजेश बेन की हत्या का मामला उस समय पूरे इलाके में सनसनी बन गया था, जब 2017 में उनका शव झाड़ियों में मिला। शुरुआत में यह एक अज्ञात हत्या का मामला लगा, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस जांच, सोशल मीडिया पहचान और एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग ने इस केस की दिशा ही बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की शुरुआती जांच में शव की हालत देखकर यह स्पष्ट हो गया था कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या है। शव की पहचान तब हुई जब सोशल मीडिया पर तस्वीरें फैलने के बाद एक आरक्षक ने कलाई पर बने टैटू देखकर पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा और जांच का केंद्र मृतक की पत्नी पर आकर टिक गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच का सबसे अहम मोड़ तब आया जब एक महिला आरक्षक ने पुलिस को एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भेजी। इस रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर मृतक की पत्नी अपने भाई से शव को ठिकाने लगाने में मदद मांगती हुई सुनाई दी। इसी रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले को नई दिशा दी और पुलिस को शक के घेरे को मजबूत आधार मिला। इसके बाद पुलिस ने पत्नी से पूछताछ की, जिसमें शुरुआती इनकार के बाद कई अहम खुलासे हुए। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले की तह तक जाने की कोशिश की। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि हत्या में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई लोगों की भूमिका हो सकती है। जांच में पत्नी के साथ उसकी चचेरी बहन और एक अन्य नाबालिग सहेली के शामिल होने की बात भी सामने आई। पुलिस ने दावा किया कि हत्या में इस्तेमाल कपड़ा और वाहन भी बरामद किए गए। जांच के अनुसार घटना के बाद शव को घर में कई घंटों तक छिपाकर रखा गया और फिर देर से उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और जटिल होता गया। एक ओर पुलिस की जांच में घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताया गया, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने पूरी कहानी को अलग नजरिए से पेश किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे आर्थिक विवाद और बाहरी संबंधों की भूमिका हो सकती है। उनका दावा था कि यह केवल घरेलू हिंसा का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी जटिलता यह रही कि एक ही हत्या के पीछे तीन अलग-अलग कहानियां सामने आईं। पहली कहानी पुलिस और आरोपी पक्ष की ओर से घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताती है। दूसरी कहानी परिजनों द्वारा आर्थिक और निजी संबंधों को कारण मानती है। तीसरी कहानी चर्चाओं के आधार पर व्यक्तिगत विवादों और आपसी तनाव को जिम्मेदार ठहराती है। इन अलग-अलग दावों ने जांच को और पेचीदा बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती साक्ष्यों और बयानों के बीच तालमेल बैठाने की थी। फोन रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी। लेकिन लगातार बदलते बयान और नए आरोपों ने केस को जटिल बना दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना था कि यह मामला केवल एक साधारण हत्या नहीं, बल्कि कई स्तरों पर जुड़ा हुआ विवाद है, जिसमें पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण दोनों शामिल हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए। क्या घरेलू विवाद इतने बड़े अपराध में बदल सकते हैं? क्या तकनीक जैसे फोन रिकॉर्डिंग आज अपराध सुलझाने में सबसे बड़ा सबूत बन चुकी है? और क्या हर कहानी के पीछे एक ही सच होता है? यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा केस बन गया जिसमें सच और दावों के बीच की रेखा धुंधली हो गई। जबलपुर आरक्षक हत्याकांड एक ऐसा मामला है जिसने यह दिखाया कि आधुनिक जांच तकनीक और मानवीय रिश्तों की जटिलता मिलकर कैसे एक अपराध की पूरी तस्वीर बदल सकती है। एक फोन कॉल ने जहां जांच की दिशा तय की, वहीं अलग-अलग कहानियों ने इस केस को रहस्यमय बनाए रखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:31:03 +0530</pubDate>
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