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                <title>Public Grievance - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Public Grievance RSS Feed</description>
                
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                <title>CM हेल्पलाइन में फर्जी शिकायतों का खेल, कुंवारे व्यक्ति की 20 साल की बेटी बताकर दर्ज कराया मामला</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के मऊगंज में 233 शिकायतों की जांच में बड़ा खुलासा, डायल-112 कर्मियों और पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने से उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-case-was-lodged-against-the-cm-helpline-by-pretending/article-56291"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश सरकार की सीएम हेल्पलाइन-181 आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। लेकिन रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने इस पूरी प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के रिकॉर्ड की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत बढ़ाने और रैंकिंग सुधारने के लिए फर्जी शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान भी दिखाया गया। जांच में सामने आया कि कुल 233 शिकायतें केवल 21 मोबाइल नंबरों से दर्ज की गई थीं। रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर कई शिकायतों में समान पैटर्न दिखाई दिया। कुछ मोबाइल नंबरों से कुछ ही मिनटों के अंतराल में लगातार कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, जबकि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं के नाम और शिकायतों की प्रकृति भी संदेह पैदा करने वाली मिली। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिकायतें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खाती थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नाम के व्यक्ति से जुड़ा सामने आया। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर उनके नाम से दर्ज शिकायत में दावा किया गया था कि उनकी 20 वर्षीय बेटी अंशिका चौरसिया स्कूल जाने के बाद लापता हो गई है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। लेकिन जब संबंधित व्यक्ति तक पहुंचकर जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उनकी अभी तक शादी ही नहीं हुई है। ऐसे में 20 वर्षीय बेटी होने का सवाल ही नहीं उठता। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इसी तरह अन्य कई शिकायतों में भी विसंगतियां सामने आईं। कुछ शिकायतों में पत्नी के लापता होने, बच्चों के गुम होने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने, चोरी, मारपीट और पुलिस कार्रवाई नहीं होने जैसे आरोप दर्ज किए गए थे। लेकिन जांच के दौरान कई शिकायतकर्ताओं के बारे में जो जानकारी सामने आई, वह शिकायतों के विवरण से मेल नहीं खाती थी। इससे यह संदेह और गहरा गया कि शिकायतें वास्तविक नागरिकों द्वारा नहीं बल्कि किसी संगठित तरीके से दर्ज की गई हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दस्तावेजों की पड़ताल में डायल-112 चालक प्रवेश चतुर्वेदी, डायल-112 कर्मचारी कृष्णा कुशवाहा और हवलदार विवेक यादव के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि मामले के सामने आने के बाद संबंधित पक्षों ने सीधे तौर पर किसी भी अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और उपलब्ध दस्तावेज कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शिकायतों के पैटर्न और दर्ज किए गए विवरणों की गहन जांच की आवश्यकता है। सीएम हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था की सफलता उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। यदि शिकायतें फर्जी तरीके से दर्ज की जाती हैं या उनके समाधान के आंकड़े कृत्रिम रूप से बढ़ाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर वास्तविक शिकायतकर्ताओं पर पड़ता है। ऐसे मामलों में न केवल व्यवस्था की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया कि कई शिकायतों में घटना का विवरण सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शिकायत दर्ज कराने के लिए आमतौर पर घटना की पूरी जानकारी, शिकायतकर्ता की पहचान और अन्य जरूरी विवरण देना होता है, लेकिन कई मामलों में यह जानकारी अधूरी या संदिग्ध पाई गई। कुछ शिकायतों में समान भाषा और एक जैसी शैली का इस्तेमाल भी देखने को मिला, जिससे संगठित तरीके से शिकायतें दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। मऊगंज से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल कुछ फर्जी शिकायतों का मामला है या फिर शिकायत निवारण प्रणाली के भीतर किसी बड़े खेल का हिस्सा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल में 15 साल से प्लॉट का इंतजार, 300 परिवार परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[रोहित हाउसिंग सोसायटी में जमीन आवंटन और रजिस्ट्री न मिलने से सदस्य भटक रहे, लाखों रुपये जमा करने के बावजूद नहीं मिला न्याय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/in-bhopal-300-families-are-worried-waiting-for-a-plot/article-56165"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-housing-society-issue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले लगभग 15 वर्षों से अपने प्लॉट और जमीन की रजिस्ट्री के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला अब प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर जनसुनवाई तक पहुंच चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इस उम्मीद में जमा कर दी कि उन्हें एक दिन अपना घर मिलेगा, लेकिन आज भी वे खाली हाथ हैं। सदस्यों के अनुसार सोसायटी ने शुरुआत में सदस्यता शुल्क और बाद में विकास शुल्क के नाम पर लाखों रुपये जमा कराए थे। रकम जमा करने के बाद उन्हें भरोसा दिया गया था कि विकास कार्य पूरे होने पर सभी को प्लॉट और रजिस्ट्री दी जाएगी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी न तो प्लॉट का आवंटन हुआ और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई। कई सदस्य अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित मंजू पाठक ने बताया कि सोसायटी ने बाद में कई जमीनें नए लोगों को बेच दीं, जबकि पुराने सदस्यों को उनका हक नहीं मिला। उनका कहना है कि यह साफ तौर पर नियमों की अनदेखी है और पुराने सदस्यों के साथ अन्याय किया गया है। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठाया गया, जहां पीड़ितों ने कलेक्टर को आवेदन देकर पूरी जमीन की जांच और सत्यापन की मांग की। पीड़ित सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2012 में कलेक्ट्रेट स्तर पर हुई बैठक के बाद सदस्यों से अतिरिक्त राशि जमा कराई गई थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि सभी विकास कार्य पूरे होने के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। लेकिन समय बीतने के साथ स्थिति और खराब होती गई। बाद में मामला सहकारिता विभाग के अधीन चला गया और 2016 में प्रशासक भी नियुक्त किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।</p>
<p style="text-align:justify;">सदस्यों का आरोप है कि विकास शुल्क के नाम पर उनसे लगभग 3.45 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक वसूले गए। कई लोगों ने पहले भी राशि जमा की थी और बाद में अतिरिक्त भुगतान भी किया, लेकिन आज तक जमीन नहीं मिली। कुछ सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपनी पूरी बचत इस योजना में लगा दी, लेकिन अब वे सिर्फ आश्वासन के भरोसे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह भी है कि जिन प्लॉटों का पहले पुराने सदस्यों को आवंटन किया गया था, उनमें से कुछ बाद में दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पुराने सदस्य अपने अधिकार से वंचित हो गए। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और वरिष्ठता के नियमों का पालन नहीं किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दस्तावेजों के अनुसार सदस्य 2010 से लगातार इस मामले को लेकर जनसुनवाई, कलेक्टर कार्यालय, सहकारिता विभाग और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करा रहे हैं। कई बार सुनवाई हुई, लेकिन हर बार मामला आगे बढ़ने के बजाय अटका रह गया। कुछ लोग दर्जनों बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई सदस्य अब बुजुर्ग हो चुके हैं और रोज-रोज दफ्तरों के चक्कर लगाने में असमर्थ हैं। कुछ सदस्यों की इस इंतजार में मौत भी हो चुकी है, लेकिन उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि जीवनभर की कमाई और भरोसे का सवाल है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह भी सामने आया है कि भोपाल में हाउसिंग सोसायटी से जुड़े करीब 900 से अधिक लोग विभिन्न समस्याओं से प्रभावित हैं। इनमें से कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। सहकारिता विभाग से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में भी अटकी हुई हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ितों की मांग है कि पूरी जमीन की स्थिति, पहले हुए आवंटन और जमा की गई राशि की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर गलती कहां हुई और जिम्मेदारी किसकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हेल्पलाइन नंबर पर खुद कॉल सुनने बैठे सीएम साय, शिकायत मिलते ही दिए कार्रवाई के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शुरुआत, लोगों की समस्याएं सुनकर अधिकारियों को त्वरित समाधान के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a293492ab844/article-55524"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली की शुरुआत की गई। इस दौरान एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद हेल्पलाइन सेंटर पहुंचे और औपचारिक निरीक्षण के बीच अचानक हेडफोन लगाकर कॉल रिसीव करने लगे। हेल्पलाइन नंबर पर आई एक शिकायत को उन्होंने सीधे सुना और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री का यह कदम पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर में स्थापित हेल्पलाइन सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने शिकायतों के पंजीयन, निगरानी और उनके निराकरण की प्रक्रिया को करीब से देखा। अधिकारियों से जानकारी लेने के दौरान मुख्यमंत्री ने यह समझने की कोशिश की कि शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की पूरी प्रक्रिया किस तरह काम करती है। इसी बीच उन्होंने खुद एक ऑपरेटर की सीट पर बैठकर कॉल लेने की इच्छा जताई और हेडफोन पहनकर सीधे नागरिकों से संवाद किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा रिसीव की गई पहली कॉल रायपुर निवासी पूना राम ठाकरे की थी। कॉलर ने आय प्रमाण पत्र से जुड़ी अपनी समस्या मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान पहले उनका नाम और निवास स्थान पूछा, फिर पूरी शिकायत को ध्यान से सुना। शिकायत सुनने के बाद उन्होंने कॉलर को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या दर्ज कर ली गई है और संबंधित विभाग को जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम बनकर न रह जाए, बल्कि लोगों को वास्तविक समाधान भी मिलना चाहिए। उन्होंने शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई नागरिक अपनी समस्या लेकर हेल्पलाइन तक पहुंचता है तो उसे यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जाएगी और उस पर कार्रवाई भी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के विभिन्न विभागों को एक साझा मंच पर जोड़ने वाली व्यवस्था है। इस प्रणाली में 1200 से अधिक शिकायत श्रेणियां शामिल की गई हैं। वहीं लगभग 8000 अधिकारियों को चार अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर जोड़ा गया है ताकि शिकायतों का निपटारा प्रभावी ढंग से किया जा सके। व्यवस्था को इस तरह तैयार किया गया है कि ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक किसी भी शिकायत की लगातार निगरानी की जा सके। यदि किसी स्तर पर समाधान नहीं होता तो मामला स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन सेंटर में काम कर रहे कर्मचारियों और युवाओं से भी बातचीत की। उन्होंने उनके अनुभव और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि हेल्पलाइन संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे एक ओर जहां तकनीकी और प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आया है, वहीं दूसरी ओर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के जरिए सरकार नागरिकों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना चाहती है। कई बार लोगों की शिकायतें विभागों तक पहुंचने के बाद भी लंबे समय तक लंबित रहती थीं, लेकिन हेल्पलाइन के माध्यम से अब हर शिकायत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इससे शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुशासन का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता की समस्याओं का समाधान है। सरकार चाहती है कि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। नई हेल्पलाइन व्यवस्था इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि शिकायतों के निपटारे में संवेदनशीलता दिखाई जाए और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<p>मुख्यमंत्री द्वारा खुद फोन उठाकर शिकायत सुनने की घटना को लेकर दिनभर चर्चा होती रही। कई लोगों ने इसे जनता और सरकार के बीच सीधे संवाद की सकारात्मक पहल बताया। अब देखना होगा कि नई हेल्पलाइन व्यवस्था आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है और शिकायतों के त्वरित समाधान में कितनी प्रभावी साबित होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:29:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>छत्तीसगढ़ में 9 जून से शुरू होगी CM हेल्पलाइन 1076, एक कॉल पर दर्ज होगी शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे शुभारंभ, कॉल, व्हाट्सएप, मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cm-helpline-1076-will-start-in-chhattisgarh-from-june-9/article-54827"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ की जनता के लिए प्रशासनिक सेवाओं और शिकायत निवारण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार 9 जून से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के जरिए आम नागरिक अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे और उनके समाधान की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस हेल्पलाइन सेवा का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करेगी तथा शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण में मदद करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य शासन के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार शिकायतों के निपटारे में देरी होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई हेल्पलाइन व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। हेल्पलाइन के संचालन को लेकर मंत्रालय स्थित महानदी भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों को शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने की। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल एक शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना सभी विभागों की जिम्मेदारी होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा विकसित नई शिकायत प्रबंधन प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो वह स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगी। यह प्रक्रिया एल-1 से एल-4 स्तर तक लागू होगी। इससे शिकायतों की लगातार निगरानी संभव होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों के लंबित रहने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता शिकायतकर्ता का फीडबैक है। शिकायत के निराकरण के बाद संबंधित व्यक्ति से प्रतिक्रिया ली जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो मामले की पुनः समीक्षा की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत बंद करना नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू होने के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को आसानी होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार माध्यम का चयन कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नागरिक अपनी शिकायत की स्थिति को भी ट्रैक कर सकेंगे। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों में जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायतों के डेटा का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां सबसे अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं। यदि इस हेल्पलाइन का प्रभावी संचालन किया गया तो यह शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई राज्यों में इसी तरह की हेल्पलाइन सेवाओं ने नागरिकों को त्वरित राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी मॉडल को अपनाकर प्रशासनिक सेवाओं को और अधिक जनहितैषी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। अक्सर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब वे एक फोन कॉल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसके समाधान की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के शुभारंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगी। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के जरिए सुशासन की अवधारणा को और मजबूत करेगी। 9 जून से शुरू होने वाली यह सेवा आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:47:00 +0530</pubDate>
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