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                <title>Legal Reform - दैनिक जागरण</title>
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                <title>छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक, उत्तराधिकार सहित सभी पर्सनल लॉ का होगा अध्ययन, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/preparations-intensified-to-implement-ucc-in-chhattisgarh-5-member-high/article-57042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-elephants-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। साय सरकार ने इस मुद्दे पर स्टडी, सुझाव और ड्राफ्ट तैयार करने के लिए 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से गुरुवार को आधिकारिक आदेश जारी किया गया। सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को समान आधार पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। उनके साथ समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन करे और UCC लागू करने की संभावनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। समिति का मुख्य कार्य विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने (दत्तक ग्रहण) और अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा पर्सनल लॉ की समीक्षा करना होगा। वर्तमान में देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिनके आधार पर पारिवारिक और सामाजिक मामलों का निपटारा होता है। सरकार का मानना है कि इन कानूनों के बीच अंतर कई बार कानूनी और सामाजिक असमानताओं को जन्म देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने समिति को यह भी निर्देश दिया है कि वह केवल कानूनी अध्ययन तक सीमित न रहे, बल्कि विभिन्न समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव भी प्राप्त करे। इसके लिए जन संवाद और परामर्श प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि सभी वर्गों की राय को रिपोर्ट में शामिल किया जा सके। इसके अलावा समिति उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन करेगी जहां पहले से UCC लागू है या इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। समिति को यह भी जांच करनी होगी कि यदि छत्तीसगढ़ में UCC लागू किया जाता है तो इससे सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सरकार चाहती है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन हो ताकि भविष्य में किसी तरह की व्यावहारिक समस्या न आए। समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की विधायी प्रक्रिया तय की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही संकेत दिए थे कि सरकार सभी वर्गों और समुदायों से विचार-विमर्श के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी। अब समिति के गठन के बाद यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कदम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे राज्य में बड़े विधायी बदलाव की दिशा में शुरुआती प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू होने की संभावना है, चाहे उनका धर्म, जाति या समुदाय कुछ भी हो। वर्तमान में विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। UCC लागू होने के बाद इन सभी मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय की परंपराओं को खत्म करना नहीं है, बल्कि कानूनी समानता सुनिश्चित करना है। विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और समानता को इस प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है। कई बार अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण कानूनी प्रक्रिया में असमानता देखने को मिलती है, जिसे दूर करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में वर्तमान स्थिति की बात करें तो उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने UCC को लागू किया है। इसके अलावा कुछ अन्य राज्यों में इस दिशा में विधायी या प्रारंभिक प्रक्रिया जारी है। गोवा में पहले से ही एक सिविल कोड लागू है, जो ऐतिहासिक रूप से पुर्तगाली शासन के समय से चला आ रहा है। हालांकि उसे पूर्ण आधुनिक UCC का मॉडल नहीं माना जाता, लेकिन वह एक समान नागरिक कानून व्यवस्था का उदाहरण जरूर है। छत्तीसगढ़ में गठित यह समिति आने वाले महीनों में विभिन्न स्तरों पर अध्ययन और परामर्श करेगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, जिसके बाद विधानसभा में इसे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:22 +0530</pubDate>
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                <title>मध्य प्रदेश में जल्द लागू होगी UCC, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनता से मांगे सुझाव</title>
                                    <description><![CDATA[समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार ने तेज की प्रक्रिया, विभिन्न धर्मों और समाजों से राय जुटा रही समिति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1fccc85ab1f/article-54835"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-ucc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी चल रही है और इसके लिए गठित समिति विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा आम नागरिकों से सुझाव प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने और अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया है। सरकार का मानना है कि जनता की भागीदारी से तैयार होने वाला प्रारूप अधिक प्रभावी और व्यापक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समय के साथ समाज में कई बदलाव आए हैं और अब विभिन्न सामाजिक तथा पारिवारिक मामलों में एक समान व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान अवसर प्रदान करना है। सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रही है और जल्द ही महत्वपूर्ण कदम देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर सकारात्मक वातावरण है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में समिति लगातार लोगों से संवाद कर रही है और उनके विचारों को सुन रही है। सरकार चाहती है कि हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो, ताकि तैयार होने वाला प्रारूप समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की राय सबसे महत्वपूर्ण होती है और इसी भावना के साथ सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार द्वारा गठित समिति का नेतृत्व न्यायिक और विधिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को सौंपा गया है। समिति विभिन्न जिलों में जाकर सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों, महिलाओं के समूहों, युवा प्रतिनिधियों और अन्य वर्गों से चर्चा कर रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना है कि प्रदेश के नागरिक समान नागरिक संहिता को किस रूप में देखते हैं और वे इसमें क्या अपेक्षाएं रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। उनका मानना है कि जब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था होगी तो प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी बनेंगी। साथ ही नागरिकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट जानकारी भी मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार ने यूसीसी से जुड़े सुझाव प्राप्त करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से नागरिक अपने विचार और सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और प्रदेश के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय अवश्य दें। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी के साथ एक संतुलित और व्यवहारिक व्यवस्था तैयार की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार इसी दिशा में काम कर रही है। विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर समिति एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद सरकार आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेगी। इस पहल को प्रशासनिक सुधार और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन और जनहित से जुड़े अनेक कार्य किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार भी नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सुधारात्मक कदम उठा रही है। समान नागरिक संहिता को भी इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि प्रदेश विकास और सामाजिक समरसता के नए मानक स्थापित करे।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य में यूसीसी को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच बड़ी संख्या में लोग अपने सुझाव देने में रुचि दिखा रहे हैं। विभिन्न सामाजिक मंचों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी इस विषय पर संवाद हो रहा है। सरकार का मानना है कि इस तरह की भागीदारी से नीति निर्माण की प्रक्रिया और अधिक मजबूत होती है। यही कारण है कि सुझाव लेने की प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश लंबे समय से प्रशासनिक नवाचारों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जाना जाता रहा है। ऐसे में समान नागरिक संहिता को लेकर शुरू की गई यह पहल भी व्यापक ध्यान आकर्षित कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी नागरिकों को समान अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि जनता के सहयोग और सुझावों के आधार पर तैयार होने वाला ढांचा प्रदेश के विकास और सामाजिक एकता को नई दिशा देगा। समिति विभिन्न जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है और सुझावों का संग्रह जारी है। आने वाले समय में इस प्रक्रिया के और तेज होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि जनता की भागीदारी के साथ तैयार होने वाली यह पहल मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। प्रदेश के नागरिक भी उत्सुकता के साथ इस प्रक्रिया को देख रहे हैं और अपने विचार साझा कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:33:29 +0530</pubDate>
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