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                <title>Drainage Project - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Drainage Project RSS Feed</description>
                
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                <title>46 करोड़ की सड़क फिर खोदी गई: ड्रेनेज लाइन बिछाने के लिए 100 मीटर हिस्सा दोबारा उखाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[एमआर-11 निर्माण की धीमी रफ्तार से पहले ही परेशान थे रहवासी, अब तैयार सड़क दोबारा खोदने से बढ़ी नाराजगी और यातायात संकट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/road-worth-rs-46-crores-dug-again-100-meter-portion/article-55277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mr-11-road.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">इंदौर में करोड़ों रुपए की लागत से बन रही एमआर-11 सड़क एक बार फिर चर्चा में है। करीब 46 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार की जा रही इस महत्वपूर्ण सड़क का एक हिस्सा दोबारा खोद दिया गया है। निपानिया चौराहे से होली क्रॉस स्कूल के बीच लगभग 100 मीटर क्षेत्र में ड्रेनेज पाइप लाइन डालने के लिए सड़क को फिर से उखाड़ा जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण का काम पहले ही काफी धीमी गति से चल रहा था और अब तैयार हिस्से को दोबारा खोदने से परेशानी कई गुना बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से वे अधूरी सड़क और निर्माण कार्य की वजह से लगातार परेशान हैं। सुबह और शाम के समय यहां भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है। सड़क के कई हिस्सों में गहरे गड्ढे हैं और बारिश या पानी जमा होने की स्थिति में वाहन चालकों को और अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। सड़क पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने के कारण रात के समय यहां से गुजरना जोखिम भरा माना जा रहा है। रहवासियों के अनुसार सड़क के कई हिस्सों में अचानक ढलान और ऊबड़-खाबड़ सतह है। अंधेरे में वाहन चालक अक्सर संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क को फिर से खोदना योजना और समन्वय की कमी को दर्शाता है। उनका सवाल है कि यदि ड्रेनेज लाइन डालनी थी तो सड़क निर्माण से पहले यह काम क्यों नहीं किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सड़क के मात्र आधा किलोमीटर हिस्से को पार करने में लोगों को 8 से 10 मिनट तक का समय लग रहा है। सड़क संकरी होने के कारण यहां ट्रक, बस और कंटेनर जैसे भारी वाहन भी जाम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। दो स्थानों पर लगातार बॉटलनेक की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण सुबह कार्यालय जाने वाले लोगों और शाम को लौटने वाले यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यह सड़क इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई जा रही है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। विभागीय स्तर पर यह देखा जाएगा कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां थीं जिनकी वजह से निर्मित सड़क को दोबारा खोदने की जरूरत पड़ी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपए की परियोजनाओं में बेहतर योजना और समन्वय की अपेक्षा की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सड़क निर्माण को लेकर एक और बड़ा सवाल इसके अलाइनमेंट को लेकर भी उठ रहा है। निपानिया से बायपास तक बनने वाली सड़क कई जगहों पर घुमावदार बनाई जा रही है। रहवासियों का कहना है कि वर्षों पहले जब आवासीय और व्यावसायिक नक्शों को मंजूरी दी गई थी, तब लोगों ने उसी आधार पर निर्माण किया। अब सड़क निर्माण शुरू होने के बाद पर्याप्त जगह नहीं बची, जिसके कारण डिजाइन और निर्माण दोनों प्रभावित हुए हैं। इसका असर सड़क की गुणवत्ता और भविष्य की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले डामर सड़क को तोड़कर आरसीसी सड़क बनाने की तैयारी की गई। इसके लिए नींव तैयार की गई थी। बाद में उस नींव को भी हटाकर सीधे आरसीसी सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या परियोजना के दौरान तकनीकी स्तर पर उचित योजना बनाई गई थी या नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंदौर में यह पहला मामला नहीं है जब निर्माण के बाद दोबारा खुदाई करनी पड़ी हो। इससे पहले भी शहर के कई प्रमुख स्थानों पर ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। भंवरकुआं चौराहे पर चौड़ीकरण और रोटरी निर्माण के बाद दोबारा बदलाव किए गए थे। इसी तरह प्रवासी भारतीय सम्मेलन और जी-20 कार्यक्रम के दौरान संवारे गए रीगल से पलासिया मार्ग को बाद में भूमिगत बिजली लाइन और अन्य कार्यों के लिए फिर खोदा गया था। सुपर कॉरिडोर पर भी मेट्रो परियोजना के दौरान पहले से मौजूद ड्रेनेज और नर्मदा पाइप लाइनें बाधा बनीं, जिसके कारण दोबारा खुदाई करनी पड़ी थी। एमआर-11 की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि शहर में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही सभी आवश्यक सुविधाओं और सेवाओं की योजना बना ली जाए तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद सड़कें दोबारा खोदने की नौबत नहीं आएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 14:05:15 +0530</pubDate>
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                <title>इंदौर नगर निगम के 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा, 43 संपत्तियां अटैच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd3c560e30/article-54838"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम से जुड़े चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम का यह मामला सुर्खियों में आ गया है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम में ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला कई वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर था। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत से ऐसी योजनाओं के भुगतान स्वीकृत कराए जो या तो पूरी तरह कागजों पर थीं या जिनका वास्तविक कार्य बेहद सीमित था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण परियोजना बताकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। ईडी को जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ी रकम निकाली गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे घोटाले की परतें और खुल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में गिरफ्तार पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख किरदार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन ईडी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से घोटाले से अर्जित धन के उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी कड़ी में एजेंसी ने अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया है। इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईडी अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। बैंक खातों, निवेश, जमीन खरीद और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से निकाली गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ। इंदौर नगर निगम से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए और लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का पता नहीं चल सका, उसने सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि संबंधित विभागों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का पहलू भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद नगर निगम से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस कथित घोटाले का दायरा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित था या फिर अन्य कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुईं। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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