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                <title>Financial Fraud - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Financial Fraud RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बीमा रिफंड के नाम पर 1.60 करोड़ की साइबर ठगी, दिल्ली से तीन आरोपी गिरफ्तार; नाइजीरियन नेटवर्क से जुड़े तार</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी बताकर पीड़ित से कई किश्तों में रकम वसूली, बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहा था अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क; दुर्ग पुलिस ने मोबाइल, पासबुक और चेकबुक समेत अहम साक्ष्य किए जब्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cyber-fraud-of-rs-160-crore-in-the-name-of/article-57787"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maharashtra-government-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल एक नाइजीरियन साइबर नेटवर्क कर रहा था, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेन-देन किए गए।</p>
<p>दुर्ग रेंज साइबर थाना में दर्ज इस मामले की जांच कई दिनों से चल रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने खुद को बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का रिफंड मंजूर हो गया है और राशि प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसी बहाने पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कई बार रकम जमा कराई गई।</p>
<p>पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई राशि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस कर दी जाएगी और बीमा क्लेम भी जारी हो जाएगा। लेकिन हर बार नई वजह बताकर अतिरिक्त रकम मांगी जाती रही। इस तरह आरोपी लगातार पीड़ित को झांसे में रखते हुए उससे कुल करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपए की ठगी करने में सफल रहे।</p>
<p>जब लंबे समय तक न तो रिफंड मिला और न ही कोई भुगतान हुआ, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने दुर्ग रेंज साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया।</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले एक बैंक खाताधारक की पहचान की, जिसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। उससे पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर पुलिस की विशेष टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां से मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p>पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और पैसों के लालच में इन्हें साइबर ठगों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर की जाती थी, ताकि वास्तविक मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।</p>
<p>जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का संचालन एक नाइजीरियन साइबर गिरोह द्वारा किया जा रहा था। यही गिरोह बैंक खातों का उपयोग कर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कई साइबर अपराधों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 1 जुलाई को हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची।</p>
<p>तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, छह बैंक पासबुक, चार चेकबुक और कई सिम कार्ड जब्त किए हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। साथ ही यह भी जानकारी मिली है कि अलग-अलग राज्यों में इन आरोपियों के खिलाफ साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं।</p>
<p>एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाते थे। पहले वे बीमा पॉलिसी का रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाते, फिर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, दस्तावेज सत्यापन, बीमा क्लियरेंस और अन्य शुल्क के नाम पर किस्तों में रकम जमा कराते थे। जब तक पीड़ित को ठगी का एहसास होता, तब तक रकम कई बैंक खातों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। बीमा रिफंड, केवाईसी अपडेट, निवेश योजना, लॉटरी, इनाम और सरकारी योजना के नाम पर आने वाले कॉल, मैसेज या ईमेल पर बिना पुष्टि किए भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।</p>
<p>दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे जमा न करें और अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दे। समय पर शिकायत दर्ज होने से ठगी की गई रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में महिला डॉक्टर से 51 लाख की ठगी, अधूरा मकान छोड़ फरार हुआ बिल्डर</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर में महिला डॉक्टर से 51 लाख लेने के बाद बिल्डर अधूरा मकान छोड़ फरार हुआ, पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e48496e113/article-57038"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-builder-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में मकान बनाने का सपना एक महिला डॉक्टर के लिए बड़ी आर्थिक और मानसिक परेशानी में बदल गया। राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में आरोप है कि एक बिल्डर ने मकान निर्माण के नाम पर 51 लाख रुपए से ज्यादा की रकम लेने के बाद काम अधूरा छोड़ दिया और अपना दफ्तर बंद कर फरार हो गया। पीड़ित महिला डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने बिल्डर और उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दोनों आरोपियों की तलाश जारी है। शिकायत के मुताबिक पीड़िता डॉ. स्नेहलता दास भाठागांव स्थित साईं विला कॉलोनी में रहती हैं और पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में सड्डू स्थित अविनाश कैपिटल्स होम्स-2 में करीब 1489 वर्गफीट का प्लॉट खरीदा था। अपना घर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने 16 मार्च 2023 को यूके कॉन्सेप्ट डिजाइनर के संचालक मोहित सोलंकी के साथ निर्माण अनुबंध किया। समझौते के अनुसार 22 मई 2024 तक मकान पूरी तरह तैयार कर उन्हें सौंपा जाना था। शुरुआत में निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन कुछ समय बाद इसकी रफ्तार धीमी हो गई और आखिरकार काम पूरी तरह बंद हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला डॉक्टर का कहना है कि मकान निर्माण की कुल लागत 51,00,916 रुपए तय की गई थी। इसके लिए उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से 45 लाख रुपए का होम लोन लिया। इसके अलावा अपनी वर्षों की बचत और रिश्तेदारों से उधार लेकर कुल 51,31,887 रुपए बैंकिंग माध्यम से बिल्डर के खाते में जमा करा दिए। उन्हें उम्मीद थी कि तय समय पर उनका घर बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बावजूद बिल्डर ने केवल मकान का ढांचा तैयार किया और प्लास्टर, ईंट का काम, फर्श, बिजली, पाइपलाइन, पेंटिंग तथा अन्य जरूरी निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए। पीड़िता के अनुसार जब उन्होंने बार-बार निर्माण कार्य पूरा करने के लिए बिल्डर से संपर्क करने की कोशिश की तो पहले अलग-अलग बहाने बनाए गए। बाद में उसका मोबाइल फोन बंद आने लगा। कुछ दिनों बाद जब वह उसके कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लगा मिला। आसपास के लोगों से जानकारी लेने पर पता चला कि कार्यालय बंद कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला डॉक्टर का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी उन पर पड़ा है। जिस मकान के लिए उन्होंने बैंक से बड़ा लोन लिया, उसकी हर महीने ईएमआई चुकानी पड़ रही है। इसके साथ ही ब्याज, बिजली बिल, टैक्स और अन्य खर्च भी लगातार जारी हैं। अधूरे मकान को रहने लायक बनाने के लिए अब उन्हें करीब 30 से 35 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। उनका कहना है कि जीवनभर की जमा पूंजी और उधार लेकर घर बनाने का सपना देखा था, लेकिन अब वही सपना सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। शिकायत मिलने के बाद तेलीबांधा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बिल्डर मोहित सोलंकी और उसके पिता गुलाब सिंह सोलंकी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश की धाराओं में अपराध दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार बैंक ट्रांजेक्शन, निर्माण अनुबंध, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। साथ ही दोनों आरोपियों की तलाश भी की जा रही है ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी तो नहीं की गई। यदि जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में दिए गए सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रायपुर में सामने आया यह मामला उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी माना जा रहा है जो मकान निर्माण के लिए निजी बिल्डरों या ठेकेदारों के साथ अनुबंध करते हैं। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कंपनी की विश्वसनीयता, पुराने प्रोजेक्ट, कानूनी दस्तावेज और भुगतान की शर्तों की पूरी जांच करना जरूरी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:18:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/cyber-fraud-in-the-name-of-rto-e-challan-in-raipur/article-56475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर में रातों-रात अमीर बनाने का झांसा, व्यापारी से 2.50 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[खुद को अयोध्या का पंडित बताकर फंसाया, दुर्ग से गिरफ्तार हुआ शातिर आरोपी, दूसरा अब भी फरार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/in-bilaspur-a-businessman-was-cheated-of-rs-250-lakh/article-56094"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-fraud.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में एक व्यापारी को रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाकर 2 लाख 50 हजार रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। खुद को अयोध्या का पंडित बताने वाले दो शातिर ठगों ने बड़ी चालाकी से व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और रुपयों से भरा बैग लेकर फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों व सीसीटीवी फुटेज की मदद से एक आरोपी को दुर्ग से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरा आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश लगातार जारी है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम रोगदा निवासी 57 वर्षीय जनकराम साहू किराना व्यवसायी हैं। वे बीते 12 जून को व्यापार विहार स्थित बाजार में खरीदारी करने पहुंचे थे। उनके पास एक थैला था, जिसमें व्यापारिक लेन-देन के लिए करीब ढाई लाख रुपए रखे हुए थे। बाजार में ही उनकी मुलाकात दो अनजान व्यक्तियों से हुई, जिन्होंने बातचीत के दौरान खुद को अयोध्या से आए पंडित और धार्मिक व्यक्ति बताया। प्रारंभिक बातचीत में दोनों ने व्यापारी का विश्वास जीतने की कोशिश की और धीरे-धीरे उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि आरोपियों ने व्यापारी से कहा कि उनके पास ऐसी विशेष सिद्धि और पूजा-पद्धति है, जिससे धन को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने व्यापारी को यह विश्वास दिलाया कि यदि वे कुछ समय के लिए रुपयों से भरा बैग उन्हें सौंप दें तो विशेष धार्मिक प्रक्रिया के बाद उनकी रकम कई गुना बढ़ जाएगी। शुरुआत में व्यापारी ने संकोच जताया, लेकिन ठगों ने इतनी सफाई से कहानी बुनी कि वे उनके झांसे में आ गए। ठगों की बातों पर भरोसा करते हुए जनकराम साहू ने रुपयों से भरा थैला उनके हवाले कर दिया। इसके बाद दोनों आरोपी कुछ ही मिनटों में मौके से गायब हो गए। जब काफी देर तक वे वापस नहीं लौटे तो व्यापारी को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तत्काल आसपास तलाश की, लेकिन आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तारबाहर थाना पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। तारबाहर थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में दोनों संदिग्धों की गतिविधियां दिखाई दीं, जिससे उनके हुलिए और आने-जाने के रास्तों की जानकारी मिली। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन और संपर्कों की भी जांच की। लगातार जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि घटना के बाद आरोपी दुर्ग जिले में जाकर छिप गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम दुर्ग रवाना हुई और वहां पदनाभपुर थाना क्षेत्र के केला बाड़ी इलाके में दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी हैदर अली अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूछताछ में पुलिस को आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी मिली हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक हैदर अली अंसारी के खिलाफ पहले भी चोरी, धोखाधड़ी और ठगी के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक मामलों की भी पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने इसी तरह की घटनाओं को और किन क्षेत्रों में अंजाम दिया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वारदात में उसका एक साथी वासिम खान भी शामिल था। वासिम खान, वकार अहमद खान का पुत्र है और दुर्ग जिले के केला बाड़ी क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। घटना के बाद से वह फरार है। पुलिस की टीम उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस तरह के ठग अक्सर धार्मिक आस्था, चमत्कार, तंत्र-मंत्र, धन दोगुना करने या रातों-रात अमीर बनाने जैसी बातों का सहारा लेकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। कई बार पढ़े-लिखे और व्यवसायी वर्ग के लोग भी ऐसे झांसों में फंस जाते हैं। इसलिए लोगों को किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों पर भरोसा करने से बचना चाहिए और धन संबंधी किसी भी लालच या चमत्कारिक दावे को लेकर सतर्क रहना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ठगी करने वाले अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति धन दोगुना करने, विशेष पूजा से अमीर बनाने या किसी चमत्कारिक लाभ का दावा करे तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।  गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि फरार साथी की गिरफ्तारी के बाद इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:55:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केवाईसी और धान पंजीयन के बहाने बुजुर्ग महिला की 90 लाख की संपत्ति हड़पने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[87 वर्षीय महिला ने भाजपा समर्थित पंच पर बैंक खाते, जमीन और वाहन अपने नाम कराने का आरोप लगाया, न्याय नहीं मिलने पर इच्छामृत्यु की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/allegation-of-grabbing-property-worth-rs-90-lakh-of-an/article-55984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/property-fraud-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलगहना चौकी इलाके में एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला द्वारा अपनी करीब 90 लाख रुपए की संपत्ति हड़पे जाने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। महिला ने स्थानीय भाजपा समर्थित पंच पर धोखाधड़ी कर बैंक खाते से लाखों रुपए निकालने, कृषि भूमि अपने नाम कराने और वाहनों का स्वामित्व बदलवाने का आरोप लगाया है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा करते हुए महिला ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। साथ ही उन्होंने इच्छामृत्यु की अनुमति देने की भी मांग की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक बेलगहना निवासी बालकुंवर बसोर अपने पति और तीन बेटों को पहले ही खो चुकी हैं। वर्तमान में वह अपनी बेटी के साथ रहती हैं और बांस से बनी झौवा-टुकनी बेचकर किसी तरह जीवनयापन कर रही हैं। आरोप है कि केन्दा निवासी भाजपा समर्थित पंच फगुन प्रसाद प्रजापति उर्फ मोनू ने उनकी आर्थिक और सामाजिक मजबूरी का फायदा उठाया। शुरुआत में उसने बैंक संबंधी कामों में मदद करने और केवाईसी कराने का भरोसा दिलाया। इसी दौरान उसने महिला का विश्वास जीत लिया और धीरे-धीरे महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच बना ली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पीड़िता का आरोप है कि 14 दिसंबर 2021 को आरोपी ने धोखे से उनके भारतीय स्टेट बैंक खाते से करीब 23 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। महिला का कहना है कि उन्हें उस समय पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और आरोपी ने सहायता के नाम पर दस्तावेजों और बैंकिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि इसी दौरान ग्राम पंचायत लूफा स्थित उनकी कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेजों में भी हेरफेर की गई। बाद में पता चला कि उनकी बहुमूल्य जमीन आरोपी के नाम दर्ज हो चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला के अनुसार जुलाई और सितंबर 2022 में आरोपी उन्हें कोटा तहसील कार्यालय लेकर गया था। वहां उसने कहा कि धान बेचने के लिए पंजीयन और कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इस दौरान कई दस्तावेजों पर उनसे अंगूठे के निशान लगवाए गए। बुजुर्ग महिला का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि यह प्रक्रिया धान पंजीयन से जुड़ी है, लेकिन बाद में जब उन्होंने धान बिक्री की जानकारी लेने की कोशिश की तो पूरा मामला सामने आया। सहकारी बैंक और राजस्व विभाग से जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि उनकी करीब 6.34 एकड़ कृषि भूमि आरोपी के नाम दर्ज हो चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने बीमा और दस्तावेज अपडेट कराने का बहाना बनाकर उनके दिवंगत बेटे के नाम दर्ज वाहनों को भी अपने नाम करा लिया। इनमें एक सेंट्रो कार, एक एक्टिवा और एक छोटा हाथी वाहन शामिल बताया गया है। महिला का कहना है कि उन्हें यह बताया गया था कि वाहनों के बीमा और रिकॉर्ड को अपडेट करना जरूरी है, इसलिए दस्तावेजों पर अंगूठा लगाने को कहा गया। बाद में परिवार के सदस्यों से जानकारी मिली कि वाहनों का स्वामित्व बदल चुका है। पीड़िता और उनके रिश्तेदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि न्याय पाने के लिए उन्होंने पुलिस चौकी बेलगहना, एसडीओपी कार्यालय कोटा और एसपी कार्यालय बिलासपुर के कई चक्कर लगाए, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि जांच के नाम पर उन्हें लगातार इंतजार कराया गया। महिला ने यहां तक आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की गई और उन्हें अदालत जाने की सलाह देकर पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुवार को बुजुर्ग महिला अपनी शिकायत लेकर आईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों को आवेदन सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसी दौरान उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग से जुड़ा आवेदन भी प्रशासन को दिया। महिला का कहना है कि जीवनभर की कमाई और संपत्ति गंवाने के बाद अब उनके पास न्याय की उम्मीद ही बची है। अधिकारियों ने मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद जांच के निर्देश दिए गए। इसके बाद आरोपी फगुन प्रसाद प्रजापति के खिलाफ धोखाधड़ी, छलपूर्वक संपत्ति हड़पने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस अब बैंक लेन-देन, जमीन की रजिस्ट्री, राजस्व अभिलेख और वाहन ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर नगर निगम के 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा, 43 संपत्तियां अटैच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd3c560e30/article-54838"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-nagar-nigam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम से जुड़े चर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम का यह मामला सुर्खियों में आ गया है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम में ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन कार्यों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला कई वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर था। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने आपसी मिलीभगत से ऐसी योजनाओं के भुगतान स्वीकृत कराए जो या तो पूरी तरह कागजों पर थीं या जिनका वास्तविक कार्य बेहद सीमित था। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण परियोजना बताकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। ईडी को जांच के दौरान कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ी रकम निकाली गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे घोटाले की परतें और खुल सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले में गिरफ्तार पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख किरदार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार कई परियोजनाओं की स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी, लेकिन ईडी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से घोटाले से अर्जित धन के उपयोग से भी जुड़ा हुआ है। ईडी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी कड़ी में एजेंसी ने अब तक 43 संपत्तियों को अटैच किया है। इन संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक परिसंपत्तियां शामिल बताई जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईडी अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। बैंक खातों, निवेश, जमीन खरीद और अन्य वित्तीय गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से निकाली गई राशि किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित की गई और उससे कौन-कौन लाभान्वित हुआ। इंदौर नगर निगम से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से करोड़ों रुपये के भुगतान किए गए और लंबे समय तक कथित अनियमितताओं का पता नहीं चल सका, उसने सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि संबंधित विभागों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रशासनिक जवाबदेही का पहलू भी जुड़ा हुआ है। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है। फिलहाल एजेंसियां हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। ईडी की हालिया कार्रवाई के बाद नगर निगम से जुड़े कई पुराने दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस कथित घोटाले का दायरा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित था या फिर अन्य कार्यों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुईं। तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और ईडी को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आएंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:53 +0530</pubDate>
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