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                <title>Engineering Student - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Engineering Student RSS Feed</description>
                
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                <title>इंदौर में एक दिन में तीन युवकों की मौत, मानसिक तनाव के अलग-अलग कारण आए सामने</title>
                                    <description><![CDATA[लॉ स्टूडेंट, इंजीनियरिंग छात्र और एमपी ऑनलाइन संचालक की मौत के मामलों में पुलिस जांच में जुटी, शुरुआती जानकारी में मानसिक तनाव की बात सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3e13b2367bf/article-56983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में गुरुवार को अलग-अलग थाना क्षेत्रों से तीन युवकों की मौत के मामले सामने आए, जिनकी शुरुआती जांच में मानसिक तनाव अलग-अलग कारणों से जुड़ा होने की बात सामने आई है। इनमें एक लॉ स्टूडेंट, एक इंजीनियरिंग छात्र और एक एमपी ऑनलाइन सेंटर संचालक शामिल हैं। तीनों मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी मामले में कोई सुसाइड नोट मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस परिजनों, दोस्तों और परिचितों से पूछताछ कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है। पहला मामला पलासिया थाना क्षेत्र की बड़ी ग्वालटोली का है। यहां रहने वाले 27 वर्षीय आदर्श सोलंकी ने इसी वर्ष एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी और अदालत में प्रैक्टिस शुरू की थी। परिवार के अनुसार उनका पेशेवर लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया चल रही थी। घटना के समय वह घर पर अकेले थे। शाम को परिजन लौटे तो घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिजनों ने बताया कि आदर्श के माता-पिता का कई वर्ष पहले अलगाव हो गया था और वह अपने मामा के परिवार के साथ रह रहे थे। दोस्तों के अनुसार पिछले कुछ समय से वह काफी शांत रहने लगे थे और कम लोगों से बातचीत करते थे। बताया जा रहा है कि वह मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। पुलिस उनके करीबी लोगों के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरा मामला हीरानगर थाना क्षेत्र के गौरी नगर का है। यहां 20 वर्षीय राजकुमार कुशवाह की मौत हुई। परिवार के अनुसार वह हैदराबाद स्थित एक राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई के लिए उन्होंने शिक्षा ऋण भी लिया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक पढ़ाई से जुड़ी चुनौतियों और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण वह लंबे समय से दबाव महसूस कर रहे थे। कुछ समय पहले वह इंदौर आए थे और यहीं रह रहे थे। घटना के समय उनके परिचित घर पर मौजूद नहीं थे। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। शिक्षा ऋण, पढ़ाई का दबाव और व्यक्तिगत परिस्थितियों सहित सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार और परिचितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जा सके। तीसरा मामला आजाद नगर थाना क्षेत्र के मूसाखेड़ी का है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय गजेंद्र, जो एमपी ऑनलाइन सेंटर संचालित करते थे, की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष पहले उनकी पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद से वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे। घटना के समय घर पर परिवार के अन्य सदस्य मौजूद नहीं थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। तीनों मामलों में एक समान बात यह सामने आई है कि संबंधित लोग किसी न किसी तरह के मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल सभी मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पढ़ाई, आर्थिक जिम्मेदारियां, पारिवारिक परिस्थितियां और व्यक्तिगत चुनौतियां कई बार लोगों पर गहरा मानसिक दबाव बना सकती हैं। ऐसे समय में परिवार, दोस्तों और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:22:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंजीनियरिंग छात्र निकला हाईटेक चोरी गैंग का मास्टरमाइंड, 94 लाख का माल बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट के जरिए करता था संपर्क, बीहड़ में छिपाकर रखा था सोना-चांदी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd53884c97/article-54839"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-theft-gang.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्वालियर में पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शहर के कई सूने मकानों को निशाना बनाया और लाखों रुपये के जेवरात व कीमती सामान पर हाथ साफ किया। इस गिरोह का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसका कथित मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया है और करीब 94 लाख 25 हजार रुपये मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। अधिकारियों के मुताबिक यह इस वर्ष की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक मानी जा रही है। मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की वारदात सामने आई। परिवार के बाहर होने का फायदा उठाकर बदमाशों ने घर का ताला तोड़ा और लाखों रुपये के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में यह एक सामान्य चोरी का मामला लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को एक संगठित और तकनीक आधारित गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिलने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस की नजर विवेक प्रजापति नामक युवक पर गई। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि विवेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है। पुलिस के अनुसार उसने कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह में अपराध का रास्ता चुना और अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य पहले ऐसे मकानों की पहचान करते थे जहां लंबे समय तक कोई मौजूद नहीं रहता था। इसके बाद रेकी कर वारदात को अंजाम दिया जाता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की कार्यप्रणाली काफी अलग थी। सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का उपयोग करने के बजाय आरोपी इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का इस्तेमाल करते थे। इससे उनके बीच होने वाली बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। जांच में सामने आया कि विवेक अपने साथियों और परिचितों से संपर्क के लिए इसी माध्यम का उपयोग करता था। यही वजह रही कि शुरुआत में पुलिस को उनके नेटवर्क तक पहुंचने में कठिनाई हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी ने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार करीब 48 घंटे तक वह लगातार अलग-अलग जानकारी देकर जांच को भटकाता रहा। हालांकि उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारियों के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ होने लगी। इसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर दबिश देकर गिरोह के अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान एक बड़ा खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने चोरी के माल को छिपाने की जगह के बारे में जानकारी दी। पुलिस टीम आरोपियों को साथ लेकर पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ इलाके में पहुंची। वहां जमीन में गाड़कर और बड़े पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया चोरी का माल बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान पुलिस को करीब 300 ग्राम सोना और साढ़े 14 किलो चांदी मिली। इसके अलावा चोरी से मिले पैसों से खरीदी गई एक आई-20 कार भी जब्त की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चोरी के कुछ जेवरात स्थानीय स्तर पर बेचने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने चोरी का सामान खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी को भी गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जरूरत पड़ी तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह में कुछ अन्य सदस्य भी शामिल थे, जिनमें एक नाबालिग का नाम भी सामने आया है। सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह ने केवल एक ही बड़ी चोरी को अंजाम दिया था या फिर शहर और आसपास के क्षेत्रों में हुई अन्य वारदातों से भी इसका संबंध है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्वालियर पुलिस का मानना है कि आधुनिक तकनीक का गलत उपयोग अपराधियों के लिए नया हथियार बनता जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड चैट और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर अपराधी पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में साइबर विश्लेषण और तकनीकी जांच की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस मामले में पुलिस की सफलता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि न केवल गिरोह का पर्दाफाश हुआ, बल्कि बड़ी मात्रा में चोरी का माल भी बरामद कर लिया गया। इससे पीड़ित परिवारों को राहत मिली है और शहर में सक्रिय एक संगठित अपराध नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:42 +0530</pubDate>
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