<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/silver-theft/tag-16439" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Silver Theft - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/16439/rss</link>
                <description>Silver Theft RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की चांदी और नकदी पर उठे सवाल, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अब आगर मालवा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की नकदी, चांदी और अभिलेखों को लेकर जांच शुरू, प्रशासन ने गठित की समिति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/baglamukhi-temple2.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चांदी और नकदी में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने मध्य प्रदेश में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आगर मालवा जिले के प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जांच केवल चांदी और नकदी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि श्रद्धालुओं की ओर से वर्षों से चढ़ाए गए सोना, चांदी, नकदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने मंदिर प्रबंधन व्यवस्था और चढ़ावे के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। सरकार ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में गड़बड़ी करने वाले लोग किसी भी तरह की रियायत के पात्र नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग राक्षस की मानसिकता वाले हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालु मंदिरों में अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि उस विश्वास के साथ किसी तरह का खिलवाड़ किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में जांच समिति को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति यह पता लगाएगी कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है। इनकी एंट्री किस प्रकार की जाती रही है, सुरक्षित रखने की व्यवस्था कैसी है और संबंधित बैंक खातों में जमा राशि का पूरा विवरण क्या है। इसके अलावा मंदिर से जुड़े अभिलेखों की भी जांच होगी ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपलब्ध रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में कहीं कोई अंतर तो नहीं है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन समिति या अन्य संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है तो उसका स्पष्ट उल्लेख रिपोर्ट में किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच दल को तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन चाहता है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो ताकि किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। सात दिनों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे का हिसाब-किताब निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रखा गया था या नहीं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण के दोषी नहीं माना जाएगा, लेकिन यदि अनियमितता साबित होती है तो कार्रवाई निश्चित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आगर मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। इस मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि यह पांडवकालीन मंदिर है और महाभारत काल में पांडवों ने कौरवों पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से यहां मां बगलामुखी की आराधना करते हुए शत्रु विजय यज्ञ किया था। इसी वजह से देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब बगलामुखी मंदिर का मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। ऐसे समय में प्रशासन की यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी चर्चा तेज हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-on-silver-and-cash-offered-in-baglamukhi-temple/article-58238</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 11:05:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/baglamukhi-temple2.jpg"                         length="477757"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंजीनियरिंग छात्र निकला हाईटेक चोरी गैंग का मास्टरमाइंड, 94 लाख का माल बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट के जरिए करता था संपर्क, बीहड़ में छिपाकर रखा था सोना-चांदी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd53884c97/article-54839"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-theft-gang.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्वालियर में पुलिस ने एक ऐसे हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शहर के कई सूने मकानों को निशाना बनाया और लाखों रुपये के जेवरात व कीमती सामान पर हाथ साफ किया। इस गिरोह का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसका कथित मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया है और करीब 94 लाख 25 हजार रुपये मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। अधिकारियों के मुताबिक यह इस वर्ष की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक मानी जा रही है। मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की वारदात सामने आई। परिवार के बाहर होने का फायदा उठाकर बदमाशों ने घर का ताला तोड़ा और लाखों रुपये के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में यह एक सामान्य चोरी का मामला लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को एक संगठित और तकनीक आधारित गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिलने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच के दौरान पुलिस की नजर विवेक प्रजापति नामक युवक पर गई। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि विवेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है। पुलिस के अनुसार उसने कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह में अपराध का रास्ता चुना और अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य पहले ऐसे मकानों की पहचान करते थे जहां लंबे समय तक कोई मौजूद नहीं रहता था। इसके बाद रेकी कर वारदात को अंजाम दिया जाता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की कार्यप्रणाली काफी अलग थी। सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का उपयोग करने के बजाय आरोपी इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का इस्तेमाल करते थे। इससे उनके बीच होने वाली बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। जांच में सामने आया कि विवेक अपने साथियों और परिचितों से संपर्क के लिए इसी माध्यम का उपयोग करता था। यही वजह रही कि शुरुआत में पुलिस को उनके नेटवर्क तक पहुंचने में कठिनाई हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी ने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार करीब 48 घंटे तक वह लगातार अलग-अलग जानकारी देकर जांच को भटकाता रहा। हालांकि उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारियों के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ होने लगी। इसके बाद पुलिस ने कई स्थानों पर दबिश देकर गिरोह के अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान एक बड़ा खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने चोरी के माल को छिपाने की जगह के बारे में जानकारी दी। पुलिस टीम आरोपियों को साथ लेकर पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ इलाके में पहुंची। वहां जमीन में गाड़कर और बड़े पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया चोरी का माल बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान पुलिस को करीब 300 ग्राम सोना और साढ़े 14 किलो चांदी मिली। इसके अलावा चोरी से मिले पैसों से खरीदी गई एक आई-20 कार भी जब्त की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चोरी के कुछ जेवरात स्थानीय स्तर पर बेचने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने चोरी का सामान खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी को भी गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जरूरत पड़ी तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह में कुछ अन्य सदस्य भी शामिल थे, जिनमें एक नाबालिग का नाम भी सामने आया है। सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह ने केवल एक ही बड़ी चोरी को अंजाम दिया था या फिर शहर और आसपास के क्षेत्रों में हुई अन्य वारदातों से भी इसका संबंध है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्वालियर पुलिस का मानना है कि आधुनिक तकनीक का गलत उपयोग अपराधियों के लिए नया हथियार बनता जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड चैट और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर अपराधी पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में साइबर विश्लेषण और तकनीकी जांच की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस मामले में पुलिस की सफलता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि न केवल गिरोह का पर्दाफाश हुआ, बल्कि बड़ी मात्रा में चोरी का माल भी बरामद कर लिया गया। इससे पीड़ित परिवारों को राहत मिली है और शहर में सक्रिय एक संगठित अपराध नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd53884c97/article-54839</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a1fd53884c97/article-54839</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/gwalior-theft-gang.jpg"                         length="148564"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        