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                <title>Criminal Arrest - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Criminal Arrest RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर में प्रेम संबंधों के विवाद में 4 साल के मासूम की हत्या, 7 महीने बाद आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मां के सामने तकिए से दबाकर ली बच्चे की जान, पुलिस जांच में सामने आया अफेयर और हत्या का चौंकाने वाला कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/accused-arrested-after-7-months-of-murder-of-4-year/article-55636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में सामने आए एक सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने सात महीने बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामला चार साल के एक मासूम बच्चे की हत्या से जुड़ा है, जिसकी मौत को शुरुआत में सामान्य घटना माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच ने पूरे मामले की सच्चाई उजागर कर दी। जांच में सामने आया कि बच्चे की हत्या उसकी मां के कथित प्रेमी ने की थी। पुलिस के अनुसार आरोपी बच्चे को अपने और महिला के संबंधों में बाधा मानता था। इसी वजह से उसने मासूम की जान लेने जैसा खौफनाक कदम उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक यह मामला रायपुर के आमानाका थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार 1 नवंबर 2025 को चार वर्षीय मयंक मिश्रा को अचेत अवस्था में अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती स्तर पर मामले को संदिग्ध मौत मानते हुए मर्ग कायम किया गया और जांच शुरू की गई। परिवार और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन शुरुआत में हत्या जैसी कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आई। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। रिपोर्ट में बच्चे की मौत दम घुटने और गला दबाने से होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने मामले को और गंभीर बना दिया। अधिकारियों के मुताबिक मृतक बच्चे की मां अपने पति से अलग रह रही थी और रायपुर में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान उसकी पहचान टाटीबंध निवासी जयदीप सिंह से हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी का महिला के घर आना-जाना भी होने लगा। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी बच्चे को पसंद नहीं करता था और उसे अपने संबंधों के बीच रुकावट मानता था। पुलिस का कहना है कि इसी सोच ने उसे अपराध की ओर धकेल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि घटना वाले दिन आरोपी महिला के घर पर मौजूद था। किसी बात को लेकर वह बच्चे से नाराज हो गया। बताया जा रहा है कि गुस्से में उसने बच्चे का मुंह और नाक तकिए से दबा दिया। उस समय बच्चे की मां भी वहीं मौजूद थी। कुछ ही देर में बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी सांसें थम गईं। वारदात के बाद आरोपी मौके से निकल गया। बाद में बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं, लेकिन हत्या की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। पुलिस के अनुसार जयदीप सिंह पेशे से ट्रक चालक है और वारदात के बाद वह अलग-अलग राज्यों में ट्रक लेकर घूमता रहा। इससे उसकी लोकेशन ट्रैक करना आसान नहीं था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य जानकारियों के आधार पर उसकी तलाश जारी रखी। इस दौरान कई संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी गई। सात महीने तक आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर रहा, लेकिन जांच टीम लगातार उसके पीछे लगी रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार 10 जून 2026 को मुखबिर से महत्वपूर्ण सूचना मिली, जिसके बाद विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी से घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान मिले तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारियों के मुताबिक हत्या के इस मामले में सभी आवश्यक पहलुओं की जांच की गई है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों के विवाद का सबसे बड़ा असर कई बार मासूम बच्चों पर पड़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:03:58 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर पुलिस का बड़ा अभियान: एक सप्ताह में 154 अपराधी जेल भेजे गए, वारंटियों और संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य जोन पुलिस की विशेष मुहिम से अपराधियों में बढ़ा खौफ, कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार जारी रहेगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-campaign-of-raipur-police-154-criminals-sent-to-jail/article-54865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cgpsc-scam.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शहर में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत मध्य जोन पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर 154 अपराधियों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई को राजधानी में अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) उमेश गुप्ता के निर्देशन में संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य फरार वारंटियों को पकड़ना, आदतन अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखना तथा असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना था। अभियान के दौरान पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार दबिश देकर अपराधियों की पहचान की और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की।</p>
<h5><span><strong>61 वारंटियों की गिरफ्तारी</strong></span></h5>
<p>विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे 61 स्थायी और गिरफ्तारी वारंटियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि कई आरोपी लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर थे, लेकिन लगातार निगरानी और सूचना तंत्र की मदद से उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता मिली। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फरार वारंटियों की गिरफ्तारी से कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों में भय का वातावरण बनता है। इसी उद्देश्य से आगे भी ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे।</p>
<h5><span><strong>93 संदिग्धों पर भी हुई कार्रवाई</strong></span></h5>
<p>अभियान के दौरान केवल वारंटियों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस ने 93 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की। इन लोगों पर विभिन्न संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का संदेह था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत इन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम भविष्य में संभावित अपराधों को रोकने और समाज में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<h5><span><strong>विभिन्न थाना क्षेत्रों में चला अभियान</strong></span></h5>
<p>मध्य जोन के अंतर्गत आने वाले कई थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सबसे अधिक कार्रवाई गंज और तेलीबांधा थाना क्षेत्रों में देखने को मिली। थाना-वार आंकड़ों के अनुसार कोतवाली क्षेत्र में 19 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। गोलबाजार थाना क्षेत्र में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौदहापारा में 10, गंज में 36, सिविल लाइन में 25, तेलीबांधा में 34 और देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र में 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में समन्वित तरीके से अभियान चलाकर अपराधियों पर दबाव बनाया है।</p>
<h5><span><strong>अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल</strong></span></h5>
<p>रायपुर पुलिस का मानना है कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार कार्रवाई ही अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है। विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने न केवल अपराधियों की धरपकड़ की बल्कि स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया। अधिकारियों के अनुसार शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस नियमित रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। इसके अलावा अपराध रिकॉर्ड रखने वाले व्यक्तियों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।</p>
<h5><span><strong>डीसीपी उमेश गुप्ता ने क्या कहा</strong></span></h5>
<p>पुलिस उपायुक्त उमेश गुप्ता ने बताया कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाया गया यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी करना नहीं बल्कि अपराध की संभावनाओं को कम करना और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहे। डीसीपी ने यह भी कहा कि पुलिस और आम जनता के सहयोग से अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।</p>
<h5><span><strong>शहरवासियों में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा</strong></span></h5>
<p>पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शहर के कई क्षेत्रों में लोगों ने राहत महसूस की है। लगातार हो रही गिरफ्तारी और निगरानी से अपराधियों के मन में भय का माहौल बनने की उम्मीद है। पुलिस का मानना है कि ऐसे अभियान न केवल अपराधियों को कानून के दायरे में लाते हैं बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:59:58 +0530</pubDate>
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