<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/cgpsc/tag-16462" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>CGPSC - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/16462/rss</link>
                <description>CGPSC RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में NOC विवाद, हाईकोर्ट ने 120 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति पर उठे सवाल, उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे मामले की जांच कर तय समय में निर्णय लेने के निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-high-court-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता के मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच कर 120 दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाए। मामला राजनीति शास्त्र विषय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति से जुड़ा है, जहां आरोप लगाया गया है कि हरियाणा सरकार में पहले से कार्यरत एक उम्मीदवार को आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना ही नियुक्ति दे दी गई। इस मामले को लेकर रायगढ़ निवासी अली हसन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब उच्च शिक्षा सचिव और सीजीपीएससी को पूरे रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। माना जा रहा है कि यह फैसला भविष्य की सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता अली हसन ने अपनी याचिका में बताया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2019 में राजनीति शास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक के 59 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2021 में अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई, जिसमें अली हसन को अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची में पहला स्थान मिला। चयन सूची का अध्ययन करने के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मुख्य चयन सूची में शामिल रंजन तिवारी पहले से हरियाणा सरकार के उच्चतर शिक्षा निदेशालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इसके बाद अली हसन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत हरियाणा सरकार से संबंधित जानकारी मांगी। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार रंजन तिवारी 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित शासकीय महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में सेवा दे रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के लिए अपने वर्तमान नियोक्ता से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया था और न ही उसे प्रस्तुत किया गया। इसके बावजूद 29 अप्रैल 2022 को उनकी नियुक्ति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा, जिला बलौदाबाजार में कर दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नियुक्ति सेवा नियमों और भर्ती प्रक्रिया की शर्तों के विपरीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए नई नियुक्ति स्वीकार करने से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी की सेवा स्थिति स्पष्ट रहे और नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी संभव है। मामले को मजबूत करने के लिए याचिकाकर्ता ने भाटापारा शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी। कॉलेज प्रशासन ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि रंजन तिवारी ने 23 मई 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था, लेकिन उनके कार्यालय रिकॉर्ड में नियोक्ता का अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। इस तथ्य को अदालत ने भी गंभीरता से लिया। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकल पीठ में हुई। अदालत ने तत्काल नियुक्ति रद्द करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि उच्च शिक्षा सचिव और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें और उपलब्ध दस्तावेजों, सेवा नियमों तथा संबंधित तथ्यों के आधार पर 120 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जांच में याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति पर प्रभाव पड़ सकता है और प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/noc-controversy-in-assistant-professor-recruitment-high-court-asked-for/article-58488</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/chhattisgarh-high-court-%2810%29.jpg"                         length="158046"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CGPSC भर्ती घोटाले में फिर बड़ी कार्रवाई: परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के घर रेड</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर, दुर्ग और भिलाई में जांच एजेंसियों की छापेमारी से मचा हड़कंप, भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-again-in-cgpsc-recruitment-scam-raid-at-the/article-54868"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cgpsc-scam-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की चर्चित भर्ती अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों ने रायपुर, दुर्ग और भिलाई सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई के केंद्र में परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव और राज्यपाल के पूर्व सचिव अमृत खलखो के निवास शामिल रहे। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार जांच टीम ने रायपुर स्थित परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक के निवास पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। वहीं भिलाई सेक्टर-10 स्थित रिटायर्ड आईएएस जेके ध्रुव के घर पर भी अधिकारियों की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का परीक्षण किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए संबंधित परिसरों के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों तथा करीबी उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देकर डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां दिलाई गईं। इससे हजारों योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होने की आशंका जताई गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>प्रश्नपत्र लीक और पक्षपात के आरोप</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार तत्कालीन आयोग पदाधिकारियों पर परीक्षा गोपनीयता भंग करने और प्रश्नपत्र लीक करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोपों के अनुसार कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई और किन अधिकारियों की इसमें भूमिका रही।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पूर्व अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों पर जांच का दायरा</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दायरे में केवल अधिकारी ही नहीं बल्कि चयनित अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या चयन प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों को विशेष लाभ दिया गया था। भिलाई स्थित पूर्व राजभवन सचिव अमृत खलखो के निवास पर भी जांच जारी है। जांच अधिकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण कर रहे हैं। एजेंसियों का उद्देश्य पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर तथ्यों को सामने लाना है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पिछले वर्ष हुई थीं कई गिरफ्तारियां</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">CGPSC भर्ती घोटाले की जांच के दौरान पहले भी कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पिछले वर्ष सितंबर में आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और चयनित उम्मीदवार शामिल थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अब तक प्राप्त दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>योग्य अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की कोशिश</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदेश के हजारों अभ्यर्थियों ने लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई थी। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए थे। सार्वजनिक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी बल्कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने में भी मदद मिलेगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जांच से खुल सकते हैं नए तथ्य</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ताजा छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जांच को नई दिशा दे सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-again-in-cgpsc-recruitment-scam-raid-at-the/article-54868</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/big-action-again-in-cgpsc-recruitment-scam-raid-at-the/article-54868</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:01:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/cgpsc-scam-%281%29.jpg"                         length="159170"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        