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                <title>MovieNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने सुनाया कास्टिंग काउच का अनुभव, बोलीं- टैलेंट बेचती हूं, खुद को नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दिनों में मिली आपत्तिजनक शर्तों का खुलासा, कहा- ‘कंफर्टेबल’ शब्द का मतलब समझते ही कर दिया था इनकार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/actress-indira-krishnan-narrated-her-experience-of-casting-couch-and/article-56945"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indira-krishnan.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मशहूर फिल्म और टीवी एक्ट्रेस इंदिरा कृष्णन ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री में काम के शुरुआती दिनों में उन्हें कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। इंदिरा के मुताबिक, उनसे सीधे तौर पर कहा गया था कि अगर उन्हें बड़ा रोल चाहिए तो उन्हें “कंफर्टेबल” होना पड़ेगा। यह बयान उनके लिए उस समय बेहद असहज और साफ संकेत देने वाला था। इंदिरा कृष्णन ने बताया कि जब उनसे यह बात कही गई तो उन्होंने तुरंत समझ लिया था कि सामने वाले का इशारा किस ओर है। उन्होंने कहा कि उन्होंने उसी समय साफ शब्दों में इनकार कर दिया था। उनके अनुसार, उन्होंने उस वक्त कहा था कि वह यहां अपना टैलेंट बेचने आई हैं, न कि खुद को। यह जवाब देने के बाद उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से बाहर भी कर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर कभी समझौता नहीं किया। एक्ट्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रोड्यूसर या व्यक्ति का नाम नहीं लेना चाहतीं, लेकिन यह अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर का है। इंदिरा के मुताबिक, उस समय इंडस्ट्री में कई चीजें इतनी प्रोफेशनल नहीं थीं जितनी आज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब हालात काफी बदल चुके हैं और इंडस्ट्री पहले से ज्यादा व्यवस्थित और प्रोफेशनल हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंदिरा कृष्णन ने बताया कि इस घटना का असर उनके करियर और मानसिक स्थिति पर भी पड़ा था। कई बार उन्हें ऑफर मिलते रहे, लेकिन उस अनुभव के कारण वह लंबे समय तक साउथ फिल्मों से दूरी बनाए रहीं। उन्हें अंदर ही अंदर एक डर बैठ गया था कि कहीं फिर से ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यह डर इतना गहरा था कि वह कई अच्छे मौके भी छोड़ देती थीं। बाद में उन्होंने दोबारा साउथ इंडस्ट्री में काम किया, जब निर्माता प्रेरणा अरोड़ा ने उन्हें फिल्म ‘जटाधारा’ के लिए भरोसा दिलाया। इंदिरा के अनुसार, उस भरोसे और सुरक्षित माहौल की वजह से उन्होंने दोबारा काम करने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें महसूस हुआ कि इंडस्ट्री में कई लोग अब ईमानदारी और प्रोफेशनलिज्म के साथ काम कर रहे हैं। हालांकि, इंदिरा कृष्णन ने यह भी साफ कहा कि उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कभी इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके अनुसार, मुंबई में काम का माहौल अधिक प्रोफेशनल रहा है। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी प्रोड्यूसर या कास्टिंग डायरेक्टर से मिलीं, बातचीत हमेशा काम तक सीमित रही। अगर उन्हें कोई रोल नहीं मिला, तो उसकी वजह सिर्फ यह थी कि वह उस किरदार के लिए फिट नहीं थीं, न कि किसी तरह की शर्त या दबाव।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंदिरा ने यह भी कहा कि उन्होंने ‘तेरे नाम’, ‘एनिमल’, ‘हॉलीडे’ और ‘हे ब्रो’ जैसी फिल्मों में काम किया है और इस दौरान उन्हें कभी किसी गलत स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उनके मुताबिक, मुंबई इंडस्ट्री का अनुभव हमेशा उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक लगा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर इंडस्ट्री में कुछ अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन जरूरी है कि कलाकार अपनी सीमाओं को स्पष्ट रखें। टीवी इंडस्ट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर इंदिरा कृष्णन ने कहा कि उन्हें आज तक टेलीविजन में भी कास्टिंग काउच जैसी कोई स्थिति देखने या झेलने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि टीवी का सेटअप काफी हद तक प्रोफेशनल होता है और वहां काम का माहौल स्पष्ट और व्यवस्थित रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंदिरा ने नए कलाकारों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों से आने वाले कई युवा कलाकार बड़े सपनों के साथ मुंबई और अन्य शहरों में आते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जागरूकता बहुत जरूरी है ताकि कोई भी कलाकार गलत हाथों में न फंसे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके करियर में कोई गॉडफादर या मेंटर नहीं रहा। उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में पहचान बनाई है। इंदिरा के मुताबिक, मेहनत, धैर्य और अपने टैलेंट पर भरोसा ही उन्हें आगे लेकर गया। उन्होंने कहा कि हर कलाकार को अपनी शर्तों पर काम करना चाहिए और किसी भी तरह के दबाव में आकर अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच जैसे मुद्दों पर बहस को सामने ले आया है। जहां एक तरफ इंदिरा का अनुभव साउथ इंडस्ट्री के शुरुआती दौर से जुड़ा है, वहीं वह यह भी मानती हैं कि समय के साथ इंडस्ट्री में काफी सुधार हुआ है और अब माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित और प्रोफेशनल हो चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:47:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बुर्का और पर्दा प्रथा पर इम्तियाज अली के बयान से विवाद, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं के बुर्के में सहज होने को बताया पिछड़े समाज की निशानी, बयान के बाद समर्थन और विरोध दोनों में बंटी राय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/imtiaz-alis-statement-on-burqa-and-purdah-system-sparks-debate/article-56509"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/imtiaz-ali-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली इन दिनों अपनी नई फिल्म “मैं वापस आऊंगा” को लेकर सुर्खियों में हैं, लेकिन इसी बीच उनका एक बयान चर्चा का बड़ा कारण बन गया है। हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान उन्होंने बुर्का और पर्दा प्रथा पर अपनी राय रखी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। बयान सामने आने के बाद से ही अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। कई जगह यह चर्चा केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहकर सामाजिक बहस का रूप ले चुकी है। पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान इम्तियाज अली ने समाज, संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे विषयों पर अपनी राय साझा की। इसी दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात ठीक नहीं लगती जब कोई महिला यह कहती है कि वह बुर्के या पर्दे में सहज महसूस करती है। उनके अनुसार अगर किसी समाज में यह सोच गहराई से बैठ जाए कि इस तरह की व्यवस्था में रहना सामान्य है, तो यह कहीं न कहीं पिछड़े सामाजिक ढांचे की निशानी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वह अपनी समझ के आधार पर यह बात रख रहे हैं। उन्होंने बातचीत में आगे यह भी कहा कि कई बार लोग लंबे समय से चली आ रही परंपराओं को बिना सवाल किए स्वीकार कर लेते हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब व्यक्ति को यह महसूस ही नहीं होता कि वह किसी सीमित सोच या ढांचे के भीतर रह रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वह किसी पर अपनी राय थोपने में विश्वास नहीं रखते और हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपनी तरह से जीने का अधिकार है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ यूजर्स ने इसे महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद पर टिप्पणी बताते हुए कहा कि अगर कोई महिला अपनी मर्जी से बुर्का पहनती है तो उसे पिछड़ेपन से जोड़ना गलत है। कई लोगों का कहना था कि यह व्यक्तिगत आस्था और संस्कृति से जुड़ा मामला है, जिसे बाहरी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इम्तियाज अली के बयान का समर्थन किया और कहा कि समाज में महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि इम्तियाज अली जिस सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं, वहां बुर्का और पर्दा प्रथा लंबे समय से मौजूद रही है। ऐसे में उनके इस बयान को लेकर लोगों ने उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उन्हें पाखंडी तक कह दिया, जबकि कुछ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने विचार रखने का अधिकार है और उसे उसकी पहचान के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए। बयान के बाद बहस सिर्फ समर्थन और विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विचारों की टकराहट में बदल गई। कई यूजर्स ने लिखा कि आधुनिक समाज में किसी भी परंपरा पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन उसे अपमानजनक भाषा में नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह के बयान समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बातचीत के दौरान इम्तियाज अली ने यह भी कहा कि आज के समय में संतुलित सोच रखने वाले लोग कम होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती वैचारिक कट्टरता चिंता का विषय है और लोगों को एक-दूसरे के विचारों के प्रति सहिष्णु रहना चाहिए। हालांकि उनके इस हिस्से को भी अलग-अलग तरीके से देखा गया, कुछ ने इसे सकारात्मक बताया तो कुछ ने इसे उनके बयान का बचाव माना। इस बीच उनकी नई फिल्म “मैं वापस आऊंगा” भी चर्चा में बनी हुई है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है और एक अधूरी प्रेम कहानी को दर्शाती है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी वाघ और नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म को लेकर पहले ही अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ लोगों ने इसकी कहानी की सराहना की है, जबकि कुछ ने इसे लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण से सवाल भी उठाए हैं। फिल्म के पहले सप्ताह के कलेक्शन को लेकर भी रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिसमें बताया गया है कि फिल्म ने शुरुआती दिनों में ठीक-ठाक प्रदर्शन किया है। पाकिस्तान के कुछ फिल्म निर्माताओं और समीक्षकों ने भी इस फिल्म की तारीफ की है और इसे भावनात्मक रूप से मजबूत कहानी बताया है। इससे फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कुछ हद तक चर्चा मिली है। इम्तियाज अली हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए भावनात्मक और सामाजिक विषयों को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया है। “जब वी मेट”, “रॉकस्टार”, “हाईवे”, “तमाशा” और “लव आज कल” जैसी फिल्मों ने उन्हें खास पहचान दिलाई है। उनकी फिल्मों में अक्सर रिश्तों, भावनाओं और समाज की जटिलताओं को गहराई से दिखाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 18:01:24 +0530</pubDate>
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                <title>कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी का हाथ खींचने पर घिरे राघवेंद्र राव, वीडियो वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[फिल्म लॉन्च इवेंट के दौरान एक्ट्रेसेस को गाइड करने का तरीका बना विवाद की वजह, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/raghavendra-rao-surrounded-for-pulling-hands-of-keerthy-suresh-and/article-56425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raghavendra-rao.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्देशक के. राघवेंद्र राव एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गए हैं। हैदराबाद में आयोजित एक फिल्म लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अभिनेत्री कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी को शॉट की पोजीशन समझाते हुए उनका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कई यूजर्स ने निर्देशक के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वे सिर्फ कलाकारों को सीन के लिए निर्देश दे रहे थे। यह घटना गुरुवार को आयोजित एक फिल्म के मुहूर्त समारोह की बताई जा रही है। निर्देशक अनिल रविपुडी की नई फिल्म के शुभारंभ अवसर पर तेलुगु सिनेमा के कई बड़े नाम मौजूद थे। फिल्म में वेंकटेश दग्गुबाती, नंदमुरी कल्याणराम, कीर्ति सुरेश और कृति शेट्टी मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। पारंपरिक फिल्म लॉन्च समारोह के तहत पहले शॉट का निर्देशन करने के लिए वरिष्ठ फिल्मकार के. राघवेंद्र राव को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में निर्माता अल्लू अरविंद ने पहला क्लैप दिया, जबकि कई अन्य नामी निर्माता और फिल्म जगत से जुड़े लोग भी मंच पर मौजूद थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि शॉट शुरू होने से पहले राघवेंद्र राव कलाकारों की स्थिति तय कर रहे हैं। इसी दौरान वे पहले कीर्ति सुरेश का हाथ पकड़कर उन्हें थोड़ा आगे की ओर खींचते दिखाई देते हैं। कुछ क्षण बाद वे कृति शेट्टी की ओर बढ़ते हैं और उन्हें भी सीन के अनुसार खड़े होने का निर्देश देते हैं। इसके बाद वे फिल्म के मुख्य कलाकारों के पास जाकर उन्हें बताते हैं कि कैमरे के सामने दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए किस प्रकार खड़ा होना है और किस तरह की बॉडी लैंग्वेज रखनी है। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने कहा कि किसी भी कलाकार को निर्देश देने के लिए इस तरह शारीरिक रूप से छूना जरूरी नहीं था। कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि वरिष्ठ फिल्मकार होने के बावजूद उन्हें व्यक्तिगत सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंच पर मौजूद कलाकार स्वयं अनुभवी हैं और उन्हें केवल मौखिक निर्देश देकर भी पोजीशन समझाई जा सकती थी। वहीं कुछ लोगों ने इसे अनावश्यक विवाद बताते हुए कहा कि वीडियो के छोटे हिस्से के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के बीच राघवेंद्र राव से जुड़ा एक पुराना विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसी साल की शुरुआत में वायरल हुए एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें अभिनेत्री निहारिका कोनिडेला के साथ उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठाए गए थे। उस समय भी कुछ लोगों ने उनकी कार्यशैली पर आपत्ति जताई थी। अब नया वीडियो सामने आने के बाद पुराने विवादों को फिर से याद किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर इसकी तुलना की जा रही है। हालांकि इस मामले पर अब तक न तो राघवेंद्र राव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही कार्यक्रम में मौजूद अभिनेत्रियों की तरफ से कोई बयान जारी किया गया है। ऐसे में विवाद पूरी तरह सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उस पर हो रही प्रतिक्रियाओं तक सीमित है। फिल्म इंडस्ट्री के कई जानकारों का कहना है कि किसी भी घटना को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे संदर्भ को समझना जरूरी होता है। के. राघवेंद्र राव तेलुगु सिनेमा के सबसे सफल और प्रभावशाली निर्देशकों में गिने जाते हैं। पांच दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने सौ से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों के जरिए दक्षिण भारतीय सिनेमा को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके साथ काम करने वाले कलाकारों की सूची भी काफी लंबी है, जिसमें एनटी रामाराव, चिरंजीवी, श्रीदेवी, वेंकटेश और महेश बाबू जैसे बड़े नाम शामिल हैं। फिल्म निर्देशन के अलावा राघवेंद्र राव को कई बड़े सितारों के करियर को आगे बढ़ाने का श्रेय भी दिया जाता है। उनकी फिल्मों ने न केवल व्यावसायिक सफलता हासिल की बल्कि कई कलाकारों को स्टारडम तक पहुंचाया। यही वजह है कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले ऐसे विवाद उनके लंबे करियर पर चर्चा का नया विषय बन जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 18:40:53 +0530</pubDate>
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                <title>'काला हिरण' विवाद पर बोले अमित जानी, कहा- यह सलमान खान की बायोपिक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[लीगल नोटिस के बाद फिल्म निर्माता का जवाब, बोले- बिश्नोई समाज के संघर्ष और विरासत पर आधारित है फिल्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/amit-jani-spoke-on-the-black-buck-controversy-and-said/article-54878"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kala-hiran-movie-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">फिल्म 'काला हिरण' को लेकर इन दिनों मनोरंजन जगत में काफी चर्चा है। फिल्म के पोस्टर और टीजर की घोषणा के बाद यह विवादों में आ गई है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की लीगल टीम द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद फिल्म के निर्माता अमित जानी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है और न ही पूरी कहानी उनके जीवन पर आधारित है। अमित जानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो में कहा कि कुछ लोग फिल्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'काला हिरण' एक सामाजिक और सांस्कृतिक विषय पर आधारित फिल्म है, जिसका मुख्य उद्देश्य बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी परंपराओं और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाना है।</p>
<h5><strong>फिल्म को लेकर बढ़ा विवाद</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">विवाद तब शुरू हुआ जब फिल्म का पोस्टर सार्वजनिक किया गया और इसके साथ घोषणा की गई कि 20 जून को फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर रिलीज किया जाएगा। पोस्टर सामने आने के बाद कई लोगों ने अनुमान लगाया कि फिल्म 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले और उससे जुड़े विवादों पर आधारित हो सकती है। इसके बाद सलमान खान की लीगल टीम ने कथित तौर पर फिल्म के निर्माताओं और संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर फिल्म के प्रचार-प्रसार और रिलीज प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। नोटिस में कहा गया कि फिल्म अभिनेता की छवि को प्रभावित कर सकती है और उनके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है।</p>
<h5><strong>अमित जानी का पक्ष</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">अमित जानी ने कहा कि फिल्म को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि फिल्म में सलमान खान का जिक्र यदि कहीं है भी, तो वह कहानी का एक छोटा हिस्सा मात्र है। पूरी फिल्म किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी नोटिस के जरिए उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि फिल्म का टीजर और प्रमोशनल गतिविधियां रोकी जा सकें। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मूल भावना है और फिल्म उसी अधिकार के तहत बनाई जा रही है।</p>
<h5><strong>बिश्नोई समाज पर केंद्रित कहानी</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">निर्माता के अनुसार फिल्म का मूल विषय बिश्नोई समाज है। बिश्नोई समुदाय सदियों से पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से काला हिरण को लेकर इस समाज की आस्था और संरक्षण की भावना देशभर में चर्चित रही है। फिल्म में समाज की परंपराओं, संघर्षों और प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दिखाने का प्रयास किया गया है। अमित जानी का कहना है कि फिल्म का मकसद किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक विषय को सामने लाना है।</p>
<h5><strong>क्या है काला हिरण शिकार मामला?</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">काला हिरण शिकार मामला वर्ष 1998 में उस समय सामने आया था जब फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' की शूटिंग राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र में चल रही थी। आरोप लगाया गया था कि शूटिंग के दौरान संरक्षित वन्यजीव काला हिरण का शिकार किया गया। इस मामले में सलमान खान के अलावा अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम का नाम भी सामने आया था। हालांकि बाद में अधिकांश कलाकारों को अदालत से राहत मिल गई, जबकि सलमान खान के खिलाफ मामला आगे बढ़ा। अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने सलमान खान को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और राजस्थान हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई जारी है।</p>
<h5><strong>फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ी बहस</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">फिल्म को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की बहस को जन्म दिया है। एक पक्ष का मानना है कि फिल्मकारों को सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाओं पर फिल्म बनाने का अधिकार है, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि किसी भी व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यदि किसी फिल्म में वास्तविक घटनाओं या व्यक्तियों का संदर्भ लिया जाता है, तो उसके लिए कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों का पालन आवश्यक होता है।</p>
<h5><strong>टीजर रिलीज पर बनी नजर</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">फिल्म 'काला हिरण' का टीजर 20 जून को रिलीज किए जाने की घोषणा की गई है। हालांकि कानूनी विवाद के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म की रिलीज प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। निर्माता अमित जानी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि फिल्म किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वहीं दूसरी ओर सलमान खान की लीगल टीम फिल्म के कंटेंट को लेकर गंभीर आपत्ति जता रही है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:01:11 +0530</pubDate>
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