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                <title>Fire Safety - दैनिक जागरण</title>
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                <title>कोचिंग संस्थानों को निगम का 48 घंटे का अल्टीमेटम, शपथ पत्र नहीं दिया तो 10 जुलाई से होगी सीलिंग</title>
                                    <description><![CDATA[फायर सेफ्टी नियमों के पालन को लेकर नगर निगम सख्त, 69 कोचिंग संस्थानों को 30 दिन में सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने के निर्देश; लापरवाही पर कार्रवाई तय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a4dd98f78cd2/article-58148"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/coaching-institutes.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छात्रों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने शहर के कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय अटल भवन में अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में 70 से अधिक कोचिंग संचालकों और भवन स्वामियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि तय समय सीमा के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया तो 10 जुलाई से संस्थानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सीधे कार्रवाई होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने शहर के 69 कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अगले 48 घंटे के भीतर, यानी 9 जुलाई की शाम तक 200 रुपए के न्यायिक स्टाम्प पर शपथ पत्र प्रस्तुत करें। इस शपथ पत्र में यह लिखित आश्वासन देना होगा कि संबंधित संस्थान अगले 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर देंगे। इसके साथ ही कोचिंग संचालकों को 15 दिन के भीतर यह भी बताना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब तक क्या-क्या काम किए गए हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया या सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमी पाई गई तो बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान कई कोचिंग संचालकों ने यह तर्क दिया कि जिस भवन में वे संस्थान चला रहे हैं, वह उनकी निजी संपत्ति नहीं है और भवन मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे फायर सेफ्टी के इंतजाम करें। इस पर नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भवन स्वामी पर नहीं छोड़ी जा सकती। निगम के अधिकारियों ने कहा कि चाहे भवन किराए का हो या स्वयं का, कोचिंग संस्थान संचालकों को ही फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने और उसका खर्च वहन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में कोचिंग संस्थानों के लिए लगभग 20 बिंदुओं वाली सुरक्षा गाइडलाइन का पालन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। इनमें सबसे प्रमुख निर्देश यह है कि किसी भी भवन में ऑटोमैटिक लॉक वाले दरवाजे नहीं लगाए जाएंगे। सभी भवनों में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होना अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्र और कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सकें। इन निकास मार्गों के आसपास किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, विद्युत उपकरण या अन्य अवरोधक सामग्री नहीं रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नगर निगम ने बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। गाइडलाइन के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा। यदि किसी भवन का बेसमेंट 200 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल का है तो वहां स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा भवनों में लगाए गए फायर पंपों को इस तरह जोड़ा जाएगा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी वे जनरेटर की बायपास लाइन के माध्यम से लगातार काम करते रहें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जनरेटर को किसी भी स्थिति में निकास मार्ग या रिफ्यूज एरिया में नहीं रखा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने नियमित फायर ऑडिट और विद्युत ऑडिट को भी अनिवार्य किया है। प्रत्येक वर्ष भवन का फायर ऑडिट और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराकर उसकी रिपोर्ट निगम को सौंपनी होगी। इसके साथ ही हर चार महीने में विद्यार्थियों और स्टाफ के लिए मॉक ड्रिल आयोजित करना भी जरूरी होगा। संस्थान के कर्मचारियों को अग्निशमन यंत्र चलाने का प्रशिक्षण देना होगा, जबकि सुरक्षा गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन की जानकारी होना आवश्यक होगा। निगम का मानना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही उपयोग भी सभी संबंधित लोगों को आना चाहिए।</p>
<p>नगर निगम का कहना है कि हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में समय रहते आवश्यक सुधार कराना जरूरी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में निरीक्षण अभियान और तेज किया जाएगा तथा जिन संस्थानों में नियमों का पालन नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर कलेक्टर निवास में देर रात लगी आग, शॉर्ट-सर्किट की आशंका; एक घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[फायर ब्रिगेड की टीम ने समय रहते आग बुझाई, कोई जनहानि नहीं; पार्किंग शेड, फर्नीचर और विद्युत उपकरणों को नुकसान, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/fire-broke-out-late-night-in-raipur-collectors-residence-suspicion/article-57951"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-collector-residence.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह के सरकारी निवास परिसर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पार्किंग शेड, फर्नीचर, विद्युत उपकरण और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार आग शनिवार और रविवार की दरमियानी रात लगभग दो से ढाई बजे के बीच लगी। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक परिसर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई देने पर वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और पुलिस कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, लेकिन दमकल कर्मियों ने समय रहते मोर्चा संभाल लिया। करीब एक घंटे तक लगातार पानी की बौछारें और अन्य अग्निशमन उपकरणों का उपयोग कर आग को नियंत्रित किया गया। इसके बाद यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण शॉर्ट-सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विद्युत प्रणाली में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत तकनीकी जांच और फॉरेंसिक निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा। जांच पूरी होने तक किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आग की चपेट में आने से कलेक्टर निवास परिसर का पार्किंग शेड सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इसके अलावा वहां रखे कुछ फर्नीचर, विद्युत उपकरण, वायरिंग और अन्य सामग्री भी जल गई। नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए संबंधित विभागों की टीम को निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि सभी क्षतिग्रस्त वस्तुओं का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि बिजली चालू रहती तो आग और अधिक फैल सकती थी या किसी अन्य दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती थी। बिजली विभाग की टीम ने बाद में पूरे परिसर की वायरिंग और विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने के कार्य का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग लगने के बाद सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि परिसर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित हों। इसके बाद आग को आसपास के हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित तरीके से अभियान चलाया गया। दमकल कर्मियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आग बुझाने का कार्य पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने भी बताया कि देर रात अचानक दमकल वाहनों के सायरन सुनाई दिए, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। कुछ ही देर में पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। सरकारी भवनों और आवासीय परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग, फायर सेफ्टी सिस्टम और अग्निशमन उपकरणों की जांच बेहद आवश्यक होती है। समय-समय पर फायर ऑडिट कराने से इस प्रकार की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए कर्मचारियों को भी नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रायपुर कलेक्टर निवास में लगी आग भले ही समय रहते नियंत्रित कर ली गई, लेकिन इस घटना ने सरकारी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर, नियमित फायर ऑडिट और विद्युत उपकरणों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देकर इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:40:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- टेंडर नहीं, जमीन पर कब दिखेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सुरक्षा व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिला प्रशासन ने भी जांच अभियान तेज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e422ac159a/article-57027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की अग्निशमन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करने या योजनाओं की जानकारी देने से काम नहीं चलेगा। लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था भी सक्रिय नजर आने लगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्षों से फायर सेफ्टी को मजबूत बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। यदि टेंडर जारी हो चुके हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुए और काम किस स्तर तक पहुंचा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब हाल ही में मोपका क्षेत्र में स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद मीडिया रिपोर्टों में राज्य की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया गया। इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। अदालत ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब भी तलब किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य में करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केवल योजनाओं और टेंडर की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को सुरक्षा तभी मिलेगी जब ये परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर जमीन का चयन नहीं हो पाया। राज्य के कुछ जिलों में भूमि उपलब्ध करा दी गई है और वहां निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य जिलों में अब तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अदालत ने इस देरी पर भी चिंता जताई और शासन से स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बीच जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर और अनुविभाग स्तर पर अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे, जबकि पुलिस, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने इन समितियों को दस दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों में फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकासी मार्ग मौजूद हैं या नहीं और आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में नगर निगम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों की जांच भी की थी। जांच में एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता पाया गया, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित विभागों के पास शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की पूरी और अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने फायर विभाग के रिकॉर्ड और फायर ऑडिट को जांच का मुख्य आधार बनाने का फैसला किया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या जिनका फायर ऑडिट लंबित है, वहां विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को फायर उपकरणों की खरीद, नए फायर स्टेशन निर्माण और अन्य लंबित कार्यों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा खामियां उजागर, सुधार के निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की संयुक्त टीम की जांच में फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा में मिली कई कमियां, एक सप्ताह में सुधार के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-56796"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-coaching-center-inspection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गई हैं। यह जांच अभियान जिला प्रशासन के निर्देश पर चलाया गया, जिसमें फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर कमियां दूर करने के सख्त निर्देश दिए हैं।  निगम की टीम ने शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर छात्रों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक पाई गई, जिससे कक्षाओं में भीड़भाड़ की स्थिति बनी हुई थी। एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ के कुछ क्लासरूम में छात्रों की संख्या तय मानक से अधिक मिली, जिस पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई। इसके अलावा कई संस्थानों में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं पाई गई, जिससे छात्रों के लिए असुविधा की स्थिति बन रही थी। जांच के दौरान आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की स्थिति और भी गंभीर पाई गई। यहां फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी, आपातकालीन निकासी मार्गों की अनुपयुक्त व्यवस्था और वेंटिलेशन सिस्टम की खराब स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम की टीम ने यह भी पाया कि कई संस्थानों में लिफ्ट सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर की नियमित जांच नहीं हुई थी, जबकि आपात स्थिति में निकासी के लिए पर्याप्त संकेतक भी नहीं लगे थे। अधिकारियों ने इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निगम ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने कोचिंग सेंटरों के प्रबंधन को सुरक्षा नियमों के महत्व के बारे में भी अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं, ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपात स्थिति में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सभी संस्थानों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। निरीक्षण टीम में नगर निगम के अभियंता, अग्निशमन विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए सभी संस्थानों को नियमित रूप से नियमों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हलचल देखी जा रही है। कई संस्थानों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और सुधार कार्यों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सामने आई यह स्थिति एक गंभीर संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली होटल अग्निकांड: 6 मंजिला इमारत में लगी भीषण आग</title>
                                    <description><![CDATA[मालवीय नगर के होटल हादसे ने उजागर की लापरवाही, फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/delhi-hotel-fire-a-massive-fire-broke-out-in-a/article-54880"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/delhi-hotel-fire.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। प्रेस एन्क्लेव रोड स्थित छह मंजिला होटल ‘फ्लरिश स्टे’ में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की बताई जा रही है, जो मध्य एशिया और अफ्रीकी देशों से जुड़े थे। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब 8:50 बजे होटल के ग्राउंड फ्लोर पर संचालित रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई। शुरुआती लपटें देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गईं। कुछ ही समय में होटल के ऊपरी कमरों और बेसमेंट तक धुआं और आग पहुंच गई, जिससे अंदर ठहरे लोग फंस गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जान बचाने के लिए ऊंचाई से कूदे लोग</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">हादसे के दौरान सामने आए वीडियो बेहद भयावह थे। कई लोग तीसरी और चौथी मंजिल से अपनी जान बचाने के लिए नीचे कूदते दिखाई दिए। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल मानवता का परिचय देते हुए नीचे गद्दे और अन्य सामान बिछाए, ताकि कूदने वालों की जान बचाई जा सके। धुएं और आग के बीच फंसे लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। कुछ लोग होटल की खिड़कियों और छतों पर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते नजर आए। कई विदेशी नागरिक धुएं से घिरे हुए दिखाई दिए, जिनका बाद में रेस्क्यू किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>40 लोगों को सुरक्षित निकाला गया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से करीब 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें कई लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए थे, जिन्हें तत्काल मैक्स अस्पताल, एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बेसमेंट में भी कई लोग फंसे हुए थे। फायर ब्रिगेड की टीम ने विशेष अभियान चलाकर वहां से छह से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस के लगभग 10 जवान भी घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>फायर ब्रिगेड को करना पड़ा कड़ी मशक्कत</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाके के कारण राहत कार्य में शुरुआती चुनौतियां सामने आईं। हालांकि घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। दमकल अधिकारियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई कमरों में धुआं भर जाने से लोग बेहोश हो गए, जिससे मौतों की संख्या बढ़ गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>होटल में सुरक्षा नियमों की अनदेखी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। जानकारी के अनुसार फ्लरिश स्टे गेस्ट हाउस को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी। लेकिन वास्तविकता में वहां लगभग 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि होटल के पास वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) नहीं थी। इसके अलावा भवन में प्रवेश और निकास का केवल एक ही संकरा रास्ता था, जिससे आपात स्थिति में लोगों के बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। यदि पर्याप्त आपातकालीन निकास मार्ग और आधुनिक अग्निशमन व्यवस्था होती, तो इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विदेशी नागरिकों की मौत से बढ़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">हादसे में मारे गए लोगों में अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक उनकी आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों को भी घटना की जानकारी दी गई है। यह होटल राजधानी के प्रमुख अस्पतालों एम्स और मैक्स अस्पताल के नजदीक स्थित था। इलाज के लिए दिल्ली आने वाले मरीजों के परिजन अक्सर यहां ठहरते थे, इसलिए होटल में देश-विदेश के लोगों की आवाजाही बनी रहती थी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पिछले छह महीनों में 66 मौतें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में आग की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीनों में अलग-अलग अग्निकांडों में 66 लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक इमारतों, होटल और गेस्ट हाउसों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच और सख्त अनुपालन बेहद जरूरी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली प्रशासन ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। फायर विभाग, पुलिस और नगर निकाय संयुक्त रूप से यह पता लगाने में जुटे हैं कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किन स्तरों पर हुआ। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में लापरवाही या नियमों की अनदेखी साबित होती है तो होटल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली का यह भीषण अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी का दर्दनाक परिणाम है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:44 +0530</pubDate>
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