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                <title>Khamenei Funeral - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Khamenei Funeral RSS Feed</description>
                
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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटे 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, कई बड़े देशों ने नहीं भेजे शीर्ष नेता</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम विदाई की रस्में शुरू, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि, भारत सहित कई देशों ने मंत्री स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4892cddd218/article-57814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/khamenei-funeral-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला तेहरान में शुरू हो गया है। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। श्रद्धांजलि समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए नागरिकों के साथ विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, चीफ जस्टिस गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई, संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ और सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री समारोह में शामिल हुए और खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि पहुंचे, लेकिन रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों ने अपने सर्वोच्च नेताओं को नहीं भेजा। इन देशों की ओर से मंत्री स्तर या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से समारोह में मौजूद नहीं रहे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा देखने को मिली। हालांकि ईरान की ओर से कई देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन मौजूदा क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा कारणों को देखते हुए अधिकांश देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर श्रद्धांजलि दी। वहीं पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया के शीर्ष नेता स्वयं समारोह में शामिल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अलग-अलग देशों की मौजूदगी और प्रतिनिधित्व का स्तर मौजूदा कूटनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह के दौरान तेहरान में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए। राजधानी की प्रमुख सड़कों, सरकारी भवनों और संवेदनशील इलाकों में सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के जवान तैनात रहे। कई प्रमुख मार्गों पर सैन्य वाहनों की लगातार गश्त देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार समारोह में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में प्रवेश करने वाले लोगों की अलग-अलग सुरक्षा जांच की गई और पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने राजधानी में मेट्रो और सरकारी बस सेवाओं को नि:शुल्क रखा। दूसरे शहरों से आने वाले लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि कई स्कूलों, मस्जिदों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। कुछ होटलों ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए किराए में विशेष छूट दी। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना था। सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें दिखाई दीं और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग लाल झंडे लिए भी नजर आए। समारोह के दौरान कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए और क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान हालात पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना की सूचना सामने नहीं आई। कई महिलाओं को भावुक होकर रोते हुए भी देखा गया, जबकि लोगों ने शांतिपूर्वक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p style="text-align:justify;">खामेनेई का ताबूत इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला पहुंचने के बाद अंतिम श्रद्धांजलि की औपचारिक रस्में शुरू हुईं। अधिकारियों के अनुसार परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे समारोह का सीधा प्रसारण देश के कई समाचार माध्यमों पर किया गया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा। समारोह में मौजूद नेताओं ने खामेनेई के लंबे सार्वजनिक जीवन और ईरान की राजनीति में उनकी भूमिका को याद किया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का औपचारिक राजनीतिक संबोधन नहीं हुआ, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें देश के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक बताया। इस बीच दुनिया की नजर भी तेहरान पर बनी रही, क्योंकि खामेनेई के निधन के बाद ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और उसकी विदेश नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और प्रशासन लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया के व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:12 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई का अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास, मशहद में दफन की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सुप्रीम लीडर रहे खामेनेई का अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा और भीड़ के बीच मशहद में किए जाने की तैयारी, लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/khameneis-funeral-planned-in-mashhad-around-june-21/article-54882"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-supreme-leader-funeral.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर देशभर में व्यापक और संवेदनशील तैयारियां चल रही हैं। ईरानी अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से मिली जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 21 जून के आसपास आयोजित किया जा सकता है। उन्हें शिया इस्लाम के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की योजना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बन सकता है। अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार की शुरुआत ईरान की राजधानी तेहरान से होगी, जहां मुख्य राजकीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम लगभग 24 घंटे तक चलने की संभावना है और इसमें देश के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर अंतिम यात्रा के लिए मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें दफनाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">IRGC ने इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष योजना बनाई गई है क्योंकि इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि देश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह आयोजन और भी संवेदनशील हो गया है। पहले यह अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन परिस्थितियों के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। तेहरान, कुम और मशहद में जनता को अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिनों का सार्वजनिक कार्यक्रम रखा जाएगा। प्रशासन भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रूट, बैरिकेडिंग और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि यदि 2 करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे से भी बड़ा होगा। उस समय करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे और भीड़ इतनी अधिक थी कि भगदड़ जैसी स्थिति में कई लोगों की जान चली गई थी और हजारों घायल हुए थे। इस बार प्रशासन ऐसे किसी हादसे से बचने के लिए पहले से ही कड़े इंतजाम कर रहा है। मशहद में खामेनेई को दफनाने का निर्णय धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मशहद शिया इस्लाम का प्रमुख पवित्र शहर है और यहां स्थित इमाम रजा का दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और हर साल यहां भारी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। खामेनेई का यहां दफन होना उन्हें शिया धार्मिक परंपरा के ऐतिहासिक प्रतीकों से जोड़ देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस आयोजन को लेकर गहरी चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतिम संस्कार देश की आंतरिक एकता और शक्ति प्रदर्शन दोनों का माध्यम बन सकता है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान की स्थिति और उसकी राजनीतिक स्थिरता को दर्शाने का अवसर होगा। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के सैन्य ऑपरेशन के दौरान ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले हुए थे। इन हमलों में खामेनेई के आवास और कार्यालय को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई, जिसके बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा तनाव बढ़ गया। अब जबकि अंतिम संस्कार की तारीख नजदीक आ रही है, ईरानी प्रशासन और IRGC की प्राथमिकता है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नियंत्रित तरीके से संपन्न हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:11 +0530</pubDate>
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