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                <title>Barkatullah University - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Barkatullah University RSS Feed</description>
                
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                <title>बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के प्रस्ताव पर भोपाल में विरोध तेज, पैदल मार्च का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने नाम परिवर्तन का विरोध किया, राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/protest-in-bhopal-against-the-proposal-to-change-the-name/article-55099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ एकजुट होकर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम केवल एक पहचान नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और भोपाल की विरासत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नाम परिवर्तन का प्रस्ताव न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय को कमजोर करने का प्रयास भी माना जा रहा है। इसी विरोध के तहत शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से पैदल मार्च निकाला जाएगा। मार्च में शामिल लोग राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के उन स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल थे जिन्होंने विदेशों में रहकर भी भारत की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि बरकतउल्ला ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका भी निभाई थी। उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तित्व के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके योगदान को कम करके आंकने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक संस्थान का नाम बदलने का मामला नहीं है बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों और विरासत से जुड़ा विषय है। इसी वजह से विभिन्न वर्गों के लोग इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने भी नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां मौजूद हैं और सरकार को नए तथा विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो उसके लिए नए विश्वविद्यालय खोले जा सकते हैं, लेकिन वर्षों पुरानी संस्थाओं की पहचान बदलना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए और विश्वविद्यालयों को ज्ञान तथा शोध के केंद्र के रूप में विकसित करने पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन जैसे मुद्दे छात्रों और शिक्षकों के बीच अनावश्यक बहस और विवाद की स्थिति पैदा कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विरोध करने वाले संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि यह निर्णय भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। संगठनों के अनुसार शहर के लोगों की भावनाएं इस मुद्दे से जुड़ी हुई हैं और किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनमत लिया जाना चाहिए था। कई संगठनों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से शिक्षा की गुणवत्ता या संस्थान की उपलब्धियों में कोई बदलाव नहीं आएगा, इसलिए ऐसे कदमों की आवश्यकता समझ से परे है। विरोध करने वालों का कहना है कि यदि सरकार ने प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच पैदल मार्च को लेकर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। आयोजकों ने शहर के नागरिकों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल किसी एक समुदाय या संगठन का मुद्दा नहीं बल्कि इतिहास और विरासत को संरक्षित रखने का प्रश्न है। बताया जा रहा है कि मार्च के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जाएगी और राज्यपाल के माध्यम से सरकार तक मांग पहुंचाई जाएगी। आयोजकों का दावा है कि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं और समाज के अलग-अलग वर्गों का समर्थन मिल रहा है। भोपाल में विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े सार्वजनिक मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:59:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम बदलने के प्रस्ताव पर बढ़ा विवाद, कई संगठनों ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में विरोध की आवाजें तेज, सामाजिक और छात्र संगठनों ने ऐतिहासिक विरासत से जुड़े मुद्दे को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-increased-over-the-proposal-to-change-the-name-of/article-54988"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किए जाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार गहराती जा रही है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद अब विभिन्न संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। राजधानी भोपाल में कई मंचों और छात्र संगठनों ने इसे ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे व्यक्तित्व से जुड़ा है, जिन्होंने विदेशी धरती पर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उनका तर्क है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल भवनों और पाठ्यक्रमों से नहीं बल्कि उसके इतिहास और उससे जुड़े नामों से भी बनती है। ऐसे में नाम परिवर्तन का फैसला व्यापक चर्चा और सामाजिक सहमति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जमीअत उलमा से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय के नाम का नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा हुआ है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन व्यक्तित्वों ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई, उनके नामों को संरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐतिहासिक नामों को बदलने की परंपरा बढ़ी तो आने वाली पीढ़ियां उन महान हस्तियों के योगदान से दूर होती चली जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध करने वालों ने यह भी कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों के रिक्त पद, शोध कार्यों की सीमित संभावनाएं, संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन जैसे प्रस्तावों की बजाय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अकादमिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। संगठन के नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उन समस्याओं के समाधान की बजाय नाम परिवर्तन जैसे विषयों को आगे लाया जा रहा है। छात्र नेताओं का कहना है कि यदि प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल में विश्वविद्यालय परिसर के बाहर छात्र कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित कर अपनी नाराजगी जताई। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहचान बनाए रखने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का नाम बदलने से पहले पूर्व छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों की राय लेना आवश्यक होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने कई सुझाव भी रखे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी ऐतिहासिक शासक या सांस्कृतिक व्यक्तित्व के सम्मान में नया संस्थान स्थापित करना है तो उसके लिए अलग विश्वविद्यालय या शोध केंद्र बनाया जा सकता है। मौजूदा विश्वविद्यालय का नाम बदलना समाधान नहीं माना जा सकता। कुछ संगठनों ने यह भी मांग की है कि प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों और सामाजिक सुधारकों पर विशेष शोध केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि युवाओं को उनके योगदान की जानकारी मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सर्वधर्म सद्भावना से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी बयान जारी कर कहा है कि भोपाल की पहचान हमेशा विविध संस्कृतियों और साझा विरासत से जुड़ी रही है। उनके अनुसार किसी भी ऐतिहासिक नाम को बदलने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से संवाद की प्रक्रिया शुरू करने और सभी पक्षों की बात सुनने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों का मानना है कि विश्वविद्यालयों के नाम केवल प्रशासनिक पहचान नहीं होते, बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और सामाजिक स्मृतियों का हिस्सा भी बन जाते हैं। इसी वजह से नाम परिवर्तन जैसे फैसलों पर स्वाभाविक रूप से व्यापक बहस होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:58:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया तेज, कार्य परिषद ने प्रस्ताव को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ नाम पर सहमति, अकादमिक ढांचे और विभागीय संरचना में भी बड़े बदलाव की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-process-of-changing-the-name-of-barkatullah-university-of/article-54959"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की लंबे समय से चल रही चर्चा अब प्रशासनिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद अब पूरा मामला राज्य स्तर पर आगे बढ़ेगा और अंतिम स्वीकृति के लिए संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परिषद की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई और सदस्यों ने इसे प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान यह तर्क सामने रखा गया कि मध्यप्रदेश के इतिहास में राजा भोज का विशेष स्थान रहा है और भोपाल का प्राचीन नाम भोजपाल भी उनसे जुड़ा माना जाता है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय के नाम को क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। परिषद के कई सदस्यों ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के नाम केवल पहचान का माध्यम नहीं होते बल्कि वे किसी क्षेत्र की ऐतिहासिक स्मृति और बौद्धिक विरासत को भी दर्शाते हैं। इसी सोच के साथ नए नाम को लेकर सहमति बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि केवल नाम परिवर्तन ही इस बैठक का प्रमुख विषय नहीं रहा। विश्वविद्यालय के भीतर अकादमिक ढांचे में बदलाव को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जानकारी के अनुसार कुछ विभागों के पुनर्गठन की योजना तैयार की गई है, जिसके तहत पारंपरिक भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बदलते शैक्षणिक परिवेश में विभागों को अधिक बहुआयामी बनाना जरूरी हो गया है ताकि छात्रों को व्यापक अध्ययन के अवसर मिल सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भाषा अध्ययन और सांस्कृतिक शोध को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए नई अकादमिक संरचना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग भाषाई और सांस्कृतिक विषयों को एक मंच पर लाकर अध्ययन और शोध की नई संभावनाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर के कई विश्वविद्यालय अब पारंपरिक विषयों को आधुनिक अकादमिक ढांचे के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं और भोपाल का यह विश्वविद्यालय भी उसी दिशा में कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अपने आप में काफी विस्तृत और कानूनी चरणों से गुजरने वाली होती है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के पास भेजा जाता है। वहां से विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर इसकी समीक्षा की जाती है। चूंकि विश्वविद्यालय का संचालन राज्य अधिनियम के तहत होता है, इसलिए नाम बदलने के लिए संबंधित कानून में संशोधन आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारों के अनुसार इसके लिए राज्य विधानसभा में संशोधन विधेयक लाया जाता है। विधेयक पारित होने के बाद उसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करती है, जिसके साथ नया नाम आधिकारिक रूप से लागू माना जाता है। इसके बाद विश्वविद्यालय के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, वेबसाइट, डिग्रियां, अंकसूचियां, प्रमाणपत्र और प्रशासनिक दस्तावेजों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल के शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ शिक्षाविद इसे क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि नाम परिवर्तन के साथ-साथ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध गतिविधियों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। छात्रों के बीच भी इस विषय पर चर्चा तेज है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में गिना जाता है और यहां प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र पढ़ाई करने आते हैं। विश्वविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, विधि और अन्य विषयों की पढ़ाई होती है। वर्षों से यह संस्थान क्षेत्र के उच्च शिक्षा केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में नाम परिवर्तन और अकादमिक पुनर्गठन से जुड़े फैसलों को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि संस्थान की भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:13:59 +0530</pubDate>
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