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                <title>Masik Kalashtami - दैनिक जागरण</title>
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                <title>Kalashtami 2026: आज देशभर में मासिक कालाष्टमी का पावन दिन</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान काल भैरव की आराधना के लिए विशेष व्रत और पूजा का दिन, सुबह से ही मंदिरों में दिखी भक्तों की भीड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/kalashtami-2026-today-is-the-holy-day-of-monthly-kalashtami/article-55241"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kalashtami-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज देशभर में Kalashtami 2026 का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार मासिक कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है और इसे भगवान काल भैरव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस बार यह तिथि 08 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है और सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। कई शहरों में लोग तड़के उठकर स्नान कर व्रत और पूजा की तैयारी में जुट गए। वातावरण पूरी तरह धार्मिक और भक्तिमय बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से ही घंटियों की आवाज और मंत्रोच्चारण गूंजता रहा। भक्तों ने भगवान काल भैरव के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगाईं। बताया जा रहा है कि इस दिन का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और जीवन में शांति तथा स्थिरता लाने वाला माना जाता है। मंदिरों में श्रद्धालु फूल, दीप और प्रसाद के साथ पूजा करते नजर आए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी पर भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि Lord Shiva ने जब ब्रह्मा के अहंकार को शांत करने के लिए उग्र रूप धारण किया, तब उनका यह स्वरूप Lord Bhairav कहलाया। इसी कारण काल भैरव को समय और न्याय का देवता माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष कालाष्टमी की अष्टमी तिथि 08 जून सुबह 3:25 बजे से शुरू होकर 09 जून सुबह 3:24 बजे तक रहेगी। इस दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं और कई लोग बिना अन्न-जल ग्रहण किए भगवान की आराधना करते हैं। कुछ भक्त रात में जागरण कर भजन-कीर्तन और कथा श्रवण करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सुबह से ही कई स्थानों पर यह दृश्य देखने को मिला कि श्रद्धालु अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। कुछ स्थानों पर लोग काले कुत्तों को भोजन कराते नजर आए, जिसे काल भैरव का वाहन माना जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से उत्तर भारत के कई हिस्सों में आज भी निभाई जाती है। स्थानीय पुजारियों के अनुसार यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान का ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण का भी प्रतीक है।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार इस बार मंदिरों में भीड़ पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही। सुबह के समय कई जगहों पर ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित किया गया और श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन कराए गए। लोगों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा गया और कई परिवारों ने एक साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मान्यता यह भी है कि कालाष्टमी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कई भक्तों ने गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराया और जरूरतमंदों को वस्त्र दान किए। काशी जैसे तीर्थ स्थलों में भी इस दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन किया गया पुण्य कई गुना फल देता है और जीवन की कठिनाइयों को कम करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि आज के समय में मानसिक तनाव और जीवन की भागदौड़ के बीच ऐसे धार्मिक अवसर लोगों को मानसिक शांति प्रदान करते हैं। मंदिरों में बैठकर मंत्रों का जाप और भजन सुनना लोगों के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनता है। कई जगहों पर शाम तक विशेष पूजा और आरती का आयोजन जारी रहने की उम्मीद है। Kalashtami 2026 का यह पर्व पूरे देश में आस्था, विश्वास और परंपरा का एक मजबूत उदाहरण बनकर सामने आया है। सुबह से लेकर दिनभर मंदिरों में भक्तों की भीड़, पूजा-पाठ और व्रत की परंपरा ने इस दिन को और भी विशेष बना दिया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह दिन जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आता है और भगवान काल भैरव की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ कम होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:07:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जून में कालाष्टमी 2026: 8 जून को रहेगा विशेष संयोग, जानें पूजा का महत्व और व्रत नियम</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान काल भैरव की आराधना का पावन दिन, श्रद्धालु रखेंगे व्रत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/kalashtami-2026-will-be-a-special-coincidence-on-8th-june/article-55053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/kalashtami-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जून माह की मासिक कालाष्टमी इस वर्ष 8 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। भगवान काल भैरव को समर्पित यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी व्रत रखा जाता है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से जीवन के कष्ट, भय और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। इस बार कालाष्टमी का पर्व सोमवार को पड़ रहा है, जिसे भगवान शिव का दिन माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के बीच इस तिथि को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 8 जून को सुबह 3 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 9 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसी अवधि में भक्त व्रत और पूजा का पालन करेंगे। बताया जा रहा है कि देश के कई शिव और काल भैरव मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक परंपराओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान काल भैरव की विधिवत पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय काल भैरव मंदिरों में दर्शन और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर भगवान भैरव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं। मान्यता है कि भगवान काल भैरव भगवान शिव का ही एक उग्र और शक्तिशाली स्वरूप हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ था। उसी दौरान भगवान शिव ने क्रोधित होकर काल भैरव का रूप धारण किया और ब्रह्मा के पांचवें सिर का अंत कर दिया। इसके बाद से भगवान शिव के इस स्वरूप की पूजा काल भैरव के रूप में की जाने लगी। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें समय का देवता भी कहा गया है। माना जाता है कि जो व्यक्ति काल भैरव की आराधना करता है, उसे समय और परिस्थितियों पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कालाष्टमी के दिन पितरों के निमित्त भी विशेष कर्मकांड किए जाते हैं। कई स्थानों पर सुबह के समय पूर्वजों के लिए तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस दिन किया गया दान और सेवा कार्य विशेष फलदायी माना जाता है। काशी, उज्जैन और अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। हालांकि इस बार भी स्थानीय मंदिरों में भक्तों की अच्छी खासी भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। कालाष्टमी से जुड़ी एक और विशेष परंपरा कुत्तों को भोजन कराने की है। मान्यता है कि काला कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। इसी कारण भक्त इस दिन कुत्तों को दूध, दही, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन भी कराते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे पुण्यदायी कार्य माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी इस अवसर पर सेवा कार्यों का आयोजन करती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक विद्वानों का कहना है कि कालाष्टमी का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर माना जाता है। भक्त इस दिन काल भैरव स्तोत्र, शिव मंत्र और काल भैरव कथा का पाठ करते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरी रात जागरण कर भगवान शिव और महाकाल की महिमा का श्रवण भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय, रोग तथा मानसिक परेशानियों से राहत मिलती है। 8 जून को पड़ने वाली मासिक कालाष्टमी को लेकर देशभर के शिव भक्तों में उत्साह का माहौल है। मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा की तैयारियां जारी हैं। श्रद्धालु भगवान काल भैरव की आराधना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में शुभ फल प्रदान करता है तथा भगवान शिव और काल भैरव की कृपा प्राप्त होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:53:44 +0530</pubDate>
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