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                <title>Education Reform - दैनिक जागरण</title>
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                <title>2030 तक AI से 22% नौकरियों पर असर, डिग्री से ज्यादा स्किल्स की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[WEF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 9.2 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका; चीन ने 12 हजार से ज्यादा डिग्री प्रोग्राम बंद कर AI आधारित कोर्स शुरू किए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/headline-ai-to-impact-22-jobs-by-2030-demand-for/article-56050"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ai-jobs-2030.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीक की दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेजी से रोजगार, शिक्षा और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक दुनिया की करीब 22 प्रतिशत नौकरियां AI और ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि इसके साथ ही करीब 17 करोड़ नई नौकरियां भी पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब यह है कि रोजगार के अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन काम करने का तरीका और जरूरी योग्यताएं पहले से काफी अलग होंगी। सबसे ज्यादा असर प्रशासनिक कार्यों, डेटा एंट्री, बेसिक कंटेंट राइटिंग, कस्टमर सपोर्ट और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई प्रक्रियाएं तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। दूसरी ओर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को तलाश रही हैं जो केवल डिग्रीधारी न हों, बल्कि AI टूल्स के साथ काम करने की क्षमता भी रखते हों। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नौकरी पाने और बनाए रखने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत दिखाई देने लगी है। जिन कामों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, उनमें अब AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में काम पूरा किया जा रहा है। एचआर कंपनी टीमलीज के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कंपनियां अब हाइब्रिड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। यानी उम्मीदवार के पास डिग्री के साथ AI आधारित तकनीकों की समझ होना भी जरूरी माना जा रहा है। वहीं नैस्कॉम की रिपोर्ट बताती है कि देश के 82 प्रतिशत बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है, जो भविष्य में उनके लिए चुनौती बन सकती है।  AI इंसानों की जगह पूरी तरह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग AI का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं, वे निश्चित रूप से उन लोगों से आगे निकल जाएंगे जो नई तकनीक को अपनाने से बच रहे हैं। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को ज्यादा महत्व देंगी जो AI की मदद से अपनी उत्पादकता और कार्यक्षमता बढ़ा सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच चीन ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए पिछले चार वर्षों में 12,200 से अधिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम बंद या निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें AI, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। चीन सरकार का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ऐसे युवाओं की जरूरत होगी जो नई तकनीकों के साथ काम कर सकें। यही कारण है कि कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और कुछ पारंपरिक प्रबंधन पाठ्यक्रमों में कटौती की गई है। भारत में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देने लगे हैं। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में सरकारी कॉलेजों में कम दाखिले वाले सैकड़ों पारंपरिक कोर्स कॉम्बिनेशन बंद कर दिए हैं और 1300 से ज्यादा कोर्सों में सीटें कम कर दी हैं। शिक्षा विशेषज्ञ इसे बदलती रोजगार जरूरतों का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन, शिक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जुटे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी अभियान अब सड़कों तक पहुंचा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने खींचा ध्यान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cockroach-janata-partys-demonstration-at-jantar-mantar-youth-engaged-on/article-55065"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cockroach-janata-party.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह से अलग तरह का माहौल देखने को मिला, जब सोशल मीडिया पर चर्चा में रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थक बड़ी संख्या में यहां पहुंचने लगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे इस अभियान ने पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोरी थी, लेकिन अब यह डिजिटल दुनिया से निकलकर जमीन पर दिखाई दिया। सुबह से ही जंतर-मंतर के आसपास युवाओं की भीड़ जुटने लगी थी। कई लोग हाथों में पोस्टर और बैनर लिए नजर आए, जबकि कुछ समूहों में बैठकर अपनी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करते दिखाई दिए। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही चर्चाएं तेज थीं और इसी वजह से मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शन के केंद्र में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके रहे, जिनके दिल्ली पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट साझा किए जा रहे थे। इससे पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि एयरपोर्ट पर उन्हें रोका जा सकता है या किसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि बाद में सामने आई तस्वीरों में उन्हें एयरपोर्ट से बाहर निकलते और वाहन से आगे बढ़ते देखा गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों के बीच उत्साह बढ़ गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभिजीत दीपके सीधे प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े, जहां पहले से मौजूद युवा उनका इंतजार कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जन आंदोलनों का केंद्र रहा है। संसद मार्ग के करीब स्थित यह स्थान कई बड़े आंदोलनों का गवाह बन चुका है। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी का यहां प्रदर्शन करना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारी लगातार गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चलता दिखाई दिया। युवाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी का नाम और उसकी शैली शुरू से ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रही है। व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे एक संगठित विरोध अभियान में बदलता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थक खुद को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करते हैं और व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों को लेकर इस समूह की सक्रियता बढ़ी है। यही वजह है कि जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन को केवल एक इंटरनेट ट्रेंड के रूप में नहीं देखा जा रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद कई युवाओं का कहना था कि वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग को लेकर यहां पहुंचे हैं। कुछ छात्रों ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी भी देखने को मिली। कई लोग रात में ही दिल्ली पहुंच गए थे ताकि सुबह से कार्यक्रम में शामिल हो सकें। जंतर-मंतर के आसपास दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई और माहौल लगातार सक्रिय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी सामाजिक या राजनीतिक अभियान की वास्तविक ताकत तब सामने आती है जब वह सोशल मीडिया की सीमाओं को पार कर जमीन पर लोगों को जोड़ने लगे। कॉकरोच जनता पार्टी के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह अभियान आगे चलकर एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले पाएगा या फिर यह सीमित दायरे तक ही रहेगा। फिलहाल इतना साफ दिखाई दे रहा है कि इस अभियान ने युवाओं के एक वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींचा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नारेबाजी और चर्चा का दौर जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसके मुद्दों को राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर कितनी गंभीरता से लिया जाता है। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ ने इतना संकेत जरूर दे दिया है कि सोशल मीडिया से शुरू हुई यह आवाज अब वास्तविक दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:03:20 +0530</pubDate>
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