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                <title>Meenakshi Natarajan - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Meenakshi Natarajan RSS Feed</description>
                
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                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस आक्रामक, हाईकोर्ट और सड़क दोनों मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ कांग्रेस 15 से 17 जून तक प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी, वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी भी तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/if-meenakshi-natarajans-nomination-is-rejected-congress-is-preparing-to/article-55924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब यह मामला केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है और इसके खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष करेगी। पार्टी ने एक ओर जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार कर ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस नेताओं के अनुसार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और पार्टी इसे न्यायिक मंच पर चुनौती देगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकों का दौर चल रहा है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं की राय ली जा रही है और चुनाव याचिका का मसौदा तैयार किया जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन भी इन दिनों दिल्ली में हैं और कानूनी प्रक्रिया को लेकर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में बनी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की रणनीति केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच भी ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में 15 जून से 17 जून तक प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए जनता के बीच जाना आवश्यक है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नामांकन निरस्त होने की कार्रवाई ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े किए हैं और इसी कारण विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन की शुरुआत 15 जून को यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन से होगी। पार्टी के युवा कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इसके अगले दिन 16 जून को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई मैदान में उतरेगी। छात्र संगठन के कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करेंगे और सरकार तथा चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाएंगे। 17 जून को महिला कांग्रेस आंदोलन की कमान संभालेगी। महिला कार्यकर्ता भी इस मामले को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताएंगी। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल कानूनी विवाद के रूप में नहीं बल्कि राजनीतिक संघर्ष के रूप में भी प्रस्तुत करना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इस मुद्दे के जरिए वह कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकेगी और राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को जनचर्चा का विषय बना पाएगी। दूसरी ओर भाजपा इस पूरे मामले को चुनावी प्रक्रिया के तहत लिया गया वैधानिक निर्णय बता रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस विवाद के बीच कांग्रेस की नजर अब हाईकोर्ट पर टिकी हुई है। पार्टी का प्रयास है कि अगले सप्ताह के भीतर चुनाव याचिका दायर कर दी जाए। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस चाहती है कि 21 जून से पहले इस मामले में किसी प्रकार की राहत मिल जाए। इसका कारण यह है कि इसके बाद राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित भाजपा उम्मीदवारों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस की चिंता इस बात को लेकर भी है कि यदि समय रहते कानूनी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो मामला और जटिल हो सकता है। पार्टी इसीलिए हर कानूनी पहलू का गहन अध्ययन कर रही है। चुनाव कानून के जानकारों से सलाह ली जा रही है ताकि याचिका को मजबूत आधार पर अदालत में पेश किया जा सके। पार्टी नेताओं का कहना है कि नियमानुसार चुनाव की घोषणा के 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी के बजाय पूरी तैयारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। हालांकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को निरस्त कर दिया था। इसके अलावा निर्वाचन आयोग से भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली। इन घटनाक्रमों के बाद अब पार्टी की उम्मीदें हाईकोर्ट पर टिक गई हैं। कांग्रेस का मानना है कि अदालत में पूरे मामले की विस्तार से सुनवाई होने पर उसे न्याय मिल सकता है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा में रह सकता है क्योंकि सड़क पर आंदोलन और अदालत में कानूनी चुनौती दोनों एक साथ आगे बढ़ने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राज्यसभा उम्मीदवारी पर सुप्रीम कोर्ट से मीनााक्षी नटराजन को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से किया इनकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2bcf22157b3/article-55735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित है और ऐसे मामलों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान दखल नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा खारिज कर दिया जाता है, तब संविधान के प्रावधानों को देखते हुए अदालत सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि पहले भी कई मामलों में चुनाव प्रक्रिया के बीच अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए न्यायालयों ने हस्तक्षेप से परहेज किया है। सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि नामांकन पत्र खारिज करने में स्पष्ट और गंभीर त्रुटि हुई है। उनके अनुसार यह ऐसा मामला था जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी था। सिंघवी ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में था, तब भी चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल केवल चुनाव लड़ने का अवसर चाहती थीं। उनका तर्क था कि किसी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिलना चाहिए और अंतिम फैसला मतदाताओं या निर्वाचन प्रक्रिया पर छोड़ दिया जाना चाहिए। सिंघवी ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष की गई शिकायत पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, इसके बावजूद परिणाम घोषित कर दिए गए। हालांकि अदालत ने इस दलील पर सहमति नहीं जताई। पीठ ने पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण मौजूद है जिसमें नामांकन खारिज होने के बाद चुनाव प्रक्रिया के बीच सर्वोच्च अदालत ने हस्तक्षेप किया हो। अदालत ने कहा कि चाहे रिटर्निंग अधिकारी का निर्णय गलत ही क्यों न हो, लेकिन कानून ने इसके लिए अलग उपचार का प्रावधान किया है और चुनाव प्रक्रिया के दौरान सीधे न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान भाजपा उम्मीदवारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भी उपस्थित रहे। उन्होंने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत के कई पुराने फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि चुनाव लड़ने का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता। मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों में से एक के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन भाजपा नेताओं ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले का पूरा विवरण नहीं दिया। आपत्तियों पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि उनके द्वारा दाखिल किया गया फॉर्म-26 अधूरा था और उसमें एक न्यायिक नोटिस का उल्लेख नहीं किया गया था। रिटर्निंग अधिकारी ने इसे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने की श्रेणी में माना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौती दी। पार्टी का कहना था कि मीनाक्षी नटराजन किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं। कांग्रेस के अनुसार जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें उनका नाम केवल एक अलग निजी शिकायत में आया था और उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि प्रारंभिक नोटिस को लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, इसलिए उसका खुलासा करना आवश्यक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इन दलीलों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। अदालत ने साफ किया कि उसके आदेश का असर भविष्य में दायर की जाने वाली किसी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा। यानी यदि मीनाक्षी नटराजन या कांग्रेस इस मामले को आगे चुनाव याचिका के रूप में संबंधित उच्च न्यायालय में ले जाना चाहें तो उनके लिए रास्ता खुला रहेगा। उधर, राज्यसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबले की संभावना लगभग समाप्त हो गई थी और भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर फैसला बाकी, कांग्रेस का उपवास जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की, भोपाल में कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। आयोग की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/congress-fast-continues-pending-decision-on-meenakshi-natarajans-nomination/article-55549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहा घटनाक्रम बुधवार को भी चर्चा का केंद्र बना रहा। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में निर्वाचन आयोग पहुंचा और पूरे मामले में अपना पक्ष रखा। आयोग के साथ हुई बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उन्होंने नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। हालांकि देर शाम तक निर्वाचन आयोग की ओर से कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया था। ऐसे में राजनीतिक हलकों में पूरे दिन इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं जारी रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में आयोग से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक के बाद नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नामांकन रद्द किए जाने के पीछे जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उन पर आयोग से विस्तृत चर्चा की गई है। पार्टी का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया और चुनावी नियमों की व्याख्या को लेकर उनका अलग दृष्टिकोण है, जिसे आयोग के सामने रखा गया है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और नियमों का अध्ययन कर रहा है। आयोग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच भोपाल में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। कई कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास भी रखा। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख रहे हैं और आयोग के निर्णय का सम्मान करेंगे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद रही। पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नामांकन रद्द होने का मामला हलफनामे में दी गई जानकारी से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान चुनाव अधिकारियों ने कुछ तथ्यों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया। चुनाव प्रक्रिया में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है और उनके निर्णय चुनावी नियमों के आधार पर लिए जाते हैं। यही कारण है कि मामला अब निर्वाचन आयोग के समक्ष पहुंचा है, जहां सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संबंधित कानूनी मामले की स्थिति को लेकर उनकी अलग व्याख्या है। उनका तर्क है कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, वह अभी प्रारंभिक स्तर पर था और उसे लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हुई थीं। इसी आधार पर पार्टी ने आयोग से फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। वहीं  ऐसे मामलों में आयोग सभी दस्तावेजों और नियमों का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालता है। राज्यसभा चुनावों में नामांकन पत्रों की जांच एक बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। कई बार तकनीकी या कानूनी पहलुओं को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं और ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित चुनावी प्राधिकरणों द्वारा ही लिया जाता है। वर्तमान मामले में भी सभी पक्ष आयोग के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल किसी भी तरह की अटकलों से बचते हुए सभी की नजर चुनाव आयोग की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर राज्यसभा चुनाव से जुड़े अन्य राज्यों के घटनाक्रम भी चर्चा में हैं। झारखंड में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध माना गया है। वहां भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी सवाल उठे थे, लेकिन बाद में संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद नामांकन को स्वीकार कर लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रक्रिया में प्रत्येक दस्तावेज और कानूनी बिंदु की सावधानीपूर्वक जांच की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक दल अब आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं। निर्वाचन आयोग के सामने प्रस्तुत तथ्यों और नियमों के आधार पर जो भी निर्णय आएगा, वह आगे की प्रक्रिया को तय करेगा। फिलहाल पूरे मामले में कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और सभी पक्ष आयोग के निष्पक्ष निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में आयोग का निर्णय केवल एक उम्मीदवार या एक दल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भविष्य में समान परिस्थितियों के लिए भी एक संदर्भ बनता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:29:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त, कांग्रेस पर सीएम मोहन यादव का बड़ा हमला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी छिपाई गई, हार के डर और आंतरिक कलह के कारण कांग्रेस ने नामांकन पत्र में गंभीर गलती की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/meenakshi-natarajans-nomination-canceled-cm-mohan-yadavs-big-attack-on/article-55510"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी शपथ पत्र में छिपाई, जिसके कारण जांच प्रक्रिया के दौरान नामांकन पत्र रद्द करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को पूरी तरह सही बताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के नियम सभी के लिए समान हैं और उनका पालन करना हर उम्मीदवार की जिम्मेदारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल तकनीकी त्रुटि का मामला नहीं है, बल्कि गंभीर लापरवाही का उदाहरण है। उनके अनुसार कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दल से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और हार के डर ने इस स्थिति को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं की नजर इस राज्यसभा सीट पर थी और इसी आंतरिक संघर्ष का असर उम्मीदवार के नामांकन पत्र तक में दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चुनाव लड़ने वाला एक सामान्य व्यक्ति भी अपना नामांकन पत्र सावधानी से भरता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गांव का पंच और सरपंच चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी अपने दस्तावेज पूरी तरह तैयार करता है, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से ऐसी चूक होना कई सवाल खड़े करता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि निर्वाचन अधिकारी के सामने कांग्रेस की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि आवश्यक जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई थी। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी द्वारा लिया गया फैसला पूरी तरह नियमों के अनुरूप है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति को अचानक गरमा दिया है। कांग्रेस लगातार इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और लापरवाही बता रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी जाती, तो यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर डालता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नियमों का पालन सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी राजनीतिक दल को इससे ऊपर नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्हें एकजुट रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं करनी पड़ रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और गुटबाजी लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि पार्टी अपने उम्मीदवार का नामांकन तक सही तरीके से दाखिल नहीं कर पाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भाजपा या किसी अन्य दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि कांग्रेस को खुद अपनी कार्यशैली पर विचार करने की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मीनाक्षी नटराजन को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले को महिला सम्मान से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार चाहे महिला हो या पुरुष, चुनावी नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। प्रत्याशी के चयन से पहले राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उससे जुड़ी सभी कानूनी और प्रशासनिक जानकारियां सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक बयानबाजी के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं और उनके नेतृत्व में भारत ने कई क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं पर काम कर रही है और देश की वैश्विक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। उन्होंने बाबा महाकाल से प्रार्थना करते हुए कहा कि आने वाले चुनावों में भी प्रधानमंत्री को इसी तरह जनता का समर्थन मिलता रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी हमेशा जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर देने की परंपरा निभाती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा में सामान्य कार्यकर्ता भी मेहनत और समर्पण के आधार पर बड़े पदों तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि पार्टी लगातार मजबूत होती जा रही है और संगठनात्मक रूप से एकजुट दिखाई देती है। एक तरफ कांग्रेस नामांकन निरस्त होने के फैसले को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की बड़ी चूक के रूप में जनता के सामने रख रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 14:18:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, मध्य प्रदेश में बढ़ी राजनीतिक हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस ने फैसले पर जताई आपत्ति, चुनाव आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/6a2901e8ed034/article-55470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-nomination.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की सियासत में मंगलवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। यह फैसला सामने आते ही राजधानी भोपाल से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सुबह से ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ने लगी और बाद में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। कुछ समय के लिए माहौल गर्म रहा, हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि यह निर्णय कई सवाल खड़े करता है और इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं के अनुसार राज्यसभा चुनाव के दौरान यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है और इससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मीनाक्षी नटराजन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक कानूनी शिकायत के आधार पर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि जब पार्टी एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया में भाग ले रही थी, तभी यह स्थिति सामने आई। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से नामांकन निरस्त किए जाने के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार पार्टी इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता और विधायक चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखने के लिए विरोध कार्यक्रम आयोजित करेंगे। पटवारी ने कहा कि पार्टी इस मामले में उपलब्ध सभी लोकतांत्रिक विकल्पों का उपयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">घटनास्थल पर मौजूद नेताओं के मुताबिक सुबह करीब 11 बजे से कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर जुटने लगे थे। नामांकन निरस्त होने की जानकारी सामने आने के बाद विरोध का स्वर तेज हो गया। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा लगातार जारी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित चुनाव अधिकारी द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर लिया जाता है। इसी वजह से अब सभी की नजर चुनाव आयोग की ओर से आने वाली विस्तृत जानकारी पर टिकी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया का प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस विषय को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी, जबकि राजनीतिक पर्यवेक्षक पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। चुनाव आयोग की ओर से यदि विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, आज नामांकन भरेंगे मीनाक्षी और महेश</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए भाजपा ने अंतिम समय में महेश केवट को उम्मीदवार बनाया, कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन पर दांव लगाया; दोनों दलों ने विधायकों की एकजुटता पर फोकस बढ़ाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/there-is-increased-excitement-in-madhya-pradesh-rajya-sabha-elections/article-55254"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-rajya-sabha-election-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महेश केवट सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस सीट को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच सियासी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा ने जहां अंतिम समय में महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, वहीं कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारकर मुकाबले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है।</p>
<p>राजधानी भोपाल में सुबह से ही राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। भाजपा की ओर से प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता एकत्रित होंगे। इसके बाद सभी नेता विधानसभा पहुंचकर महेश केवट का नामांकन दाखिल कराएंगे। दूसरी ओर कांग्रेस भी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई बड़े नेता मीनाक्षी नटराजन के साथ विधानसभा पहुंचेंगे।</p>
<p>इस चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट को लेकर हो रही है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी की ओर से पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल नामांकन दाखिल कर चुके हैं। लेकिन तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारने को लेकर भाजपा लंबे समय तक मंथन करती रही। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।</p>
<p>रविवार को पूरे दिन मुख्यमंत्री निवास और भाजपा कार्यालय में बैठकों का दौर चला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेताओं के साथ कई चरणों में चर्चा की। देर शाम भाजपा प्रदेश कार्यालय में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बैठक हुई। इसके बाद यह टीम मुख्यमंत्री निवास पहुंची जहां करीब एक घंटे तक रणनीति पर चर्चा चली। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से सहमति मिलने के बाद महेश केवट के नाम पर अंतिम मुहर लगी और देर रात उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।</p>
<p>महेश केवट वर्तमान में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उनके नाम की घोषणा को भाजपा द्वारा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि इस फैसले से उसे व्यापक सामाजिक समर्थन का संदेश देने में मदद मिलेगी। वहीं कांग्रेस इसे संख्या बल से परे राजनीतिक प्रयोग मान रही है।</p>
<p>दूसरी तरफ कांग्रेस भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी को आशंका है कि मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की संभावना से मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। इसी वजह से कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी अपने विधायकों को कुछ समय के लिए दूसरे राज्य भेज सकती है ताकि किसी तरह की टूट-फूट या दबाव की स्थिति न बने। हालांकि इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन वर्तमान में तेलंगाना की प्रदेश प्रभारी भी हैं। ऐसे में तेलंगाना से जुड़े कांग्रेस नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि वहां के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी भी मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस नेतृत्व इस चुनाव को केवल एक सीट का मामला नहीं बल्कि संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा के रूप में देख रहा है। तीसरी सीट का चुनाव केवल गणित का नहीं बल्कि रणनीति और प्रबंधन का भी मुकाबला बन गया है। दोनों दल अपने-अपने विधायकों को साधने और चुनावी समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:59:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार पर सस्पेंस, बीजेपी के संकेतों से बढ़ी सियासी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान के बाद अटकलें तेज, कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी पर भी नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a23dd0479a37/article-55092"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-rajya-sabha-election.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, जबकि कांग्रेस ने अपनी ओर से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। इसी बीच बीजेपी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को उतारने की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी भले ही आधिकारिक तौर पर इस पर खुलकर कुछ नहीं कह रही हो, लेकिन नेताओं के बयान और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि अंतिम समय में कोई बड़ा राजनीतिक दांव खेला जा सकता है। इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसे जिताने की पूरी कोशिश की जाएगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्यसभा की जिन तीन सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से दो सीटें वर्तमान में बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के पास है। बीजेपी ने राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। दोनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर तीसरी सीट पर है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अंदरूनी स्तर पर तीसरे उम्मीदवार की संभावना को लेकर तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि संभावित नामांकन की प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कुछ विधायकों से प्रस्तावक के तौर पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी अंतिम समय तक अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती और विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों के साथ-साथ विपक्ष की स्थिति पर भी लगातार नजर बनाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शुक्रवार देर शाम भोपाल पहुंचे बीजेपी के राज्यसभा प्रत्याशी तरुण चुग से जब तीसरे उम्मीदवार की संभावना को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है और वह केवल संगठन के निर्णयों का पालन करते हैं। उनके इस जवाब को भी राजनीतिक जानकार संभावनाओं को खुला रखने वाला बयान मान रहे हैं। दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान काफी चर्चा में है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि पार्टी तीसरा उम्मीदवार देती है तो उसे जिताने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। उनके इस कथन को बीजेपी की रणनीतिक तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। विजयवर्गीय प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और संगठनात्मक मामलों में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इधर कांग्रेस की स्थिति भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन इस फैसले को लेकर कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की चर्चा सामने आ रही है। राजनीतिक हलकों में यह बात भी कही जा रही है कि राज्यसभा की दावेदारी रखने वाले कई नेता उम्मीदवार चयन से संतुष्ट नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत शांत रहने को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी प्रकार के मतभेद की बात स्वीकार नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी नेता संगठन के फैसले के साथ हैं और चुनाव में पूरी एकजुटता के साथ काम करेंगे।</p>
<p>बीजेपी के भीतर तीसरी सीट के लिए संभावित नामों को लेकर भी अटकलें जारी हैं। कुछ राजनीतिक सूत्र पूर्व विधायक जीतू जिराती का नाम चर्चा में बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का नाम भी राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रहा है। हालांकि इन नामों को लेकर किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि बीजेपी को आवश्यक समर्थन और संख्या बल का भरोसा मिलता है तो अंतिम समय में चौंकाने वाला फैसला सामने आ सकता है। राज्यसभा चुनाव के नामांकन और राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बीजेपी केवल दो उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में रहती है या फिर तीसरे उम्मीदवार के जरिए मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले दिन सियासी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:59:03 +0530</pubDate>
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