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                <title>Protest - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Protest RSS Feed</description>
                
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                <title>दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का बवाल, NH-44 जाम; पुलिस पर पथराव, एसपी-एएसपी समेत 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की ओर से विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। एनएच-44 पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/narottam-mishra-supporters-create-ruckus-in-datia-stone-pelting-at/article-58468"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात और शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात उस समय और बिगड़ गए जब पुलिस ने हाईवे खाली कराने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल तैनात किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने लगे थे। प्रशासन का कहना है कि तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले बाजार बंद कराने का प्रयास किया और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दतिया के साथ-साथ आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के मुताबिक तड़के करीब चार बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन पथराव जारी रहने पर अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध प्रदर्शन की वजह भारतीय जनता पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताया जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन्हें टिकट देगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। जैसे ही पार्टी ने आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और वे सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया और पार्टी नेतृत्व से फैसला बदलने की मांग की। दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने दावा किया कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे और पूरी रात रामधुन गाकर पार्टी नेतृत्व से टिकट पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और भीड़ द्वारा पहले हिंसक व्यवहार किया गया। इस बीच भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और अभिभावक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और डॉ. मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा। हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया जा रहा है, जबकि पुलिस संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिलासपुर में अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई संगठनों का धरना, विकास में पिछड़ेपन का आरोप, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/demand-to-make-arpa-par-area-a-separate-municipal-corporation/article-57043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में अरपा पार सरकंडा क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अरपा पार क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसी असंतोष के बीच बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अलग नगर निगम बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कहा कि यह मांग पिछले तीन दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका आरोप था कि हर चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्थानीय विधायक ने अरपा पार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” जैसे अभियानों के जरिए अपनी आवाज को और मजबूत करेगी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण हुआ है, लेकिन इसके अनुपात में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। कई लोगों का कहना था कि सड़क, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं में लगातार कमी महसूस की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इस क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भीड़ में मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक अलग नगर निगम का गठन नहीं होता, तब तक स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से नहीं हो पाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन को लेकर मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 10 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई है। इसके बाद दूसरे चरण में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है क्योंकि वर्षों से लगातार मांग के बावजूद कोई समाधान सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिनमें श्याम मोहन दुबे, गौरव तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, दिलीप पाटिल, रामकुमार यादव, अमित सोनकर, अजय कापसे, कमल साहू और अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी आए और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि अरपा पार क्षेत्र में कुल 24 वार्ड शामिल हैं, जो वर्तमान नगर निगम व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल के बावजूद अलग प्रशासनिक इकाई नहीं होने से विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अलग नगर निगम का गठन होता है तो योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा। साथ ही नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईको पार्क शुल्क विवाद पर आप नेता प्रमोद शर्मा पर केस दर्ज, प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति धरना, सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने और हाथापाई के आरोप; अवैध वसूली का मुद्दा उठाकर कर रहे थे विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/case-registered-against-aap-leader-pramod-sharma-on-eco-park/article-56638"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eco-park-fee-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा शहर के ईको पार्क में प्रवेश शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। रविवार को पार्क परिसर में हुए हंगामे के बाद सिटी कोतवाली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन किया, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न की और पार्क परिसर में विवाद की स्थिति पैदा की। वहीं दूसरी ओर प्रमोद शर्मा का कहना है कि उनका विरोध पूरी तरह जनहित में था और वे पार्क में हो रही कथित अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।  ईको पार्क में लगाए गए प्रवेश शुल्क को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा था। आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे और प्रशासन से शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे थे। रविवार को उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्क परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पार्क के प्रवेश द्वार और परिसर के आसपास एकत्र हो गए थे, जिससे कुछ समय के लिए अव्यवस्था की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद पार्क प्रबंधन और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि प्रवेश शुल्क और उसके औचित्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात धीरे-धीरे तनावपूर्ण होते गए और कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान पार्क परिसर में मौजूद पर्यटकों और परिवारों के बीच भी असहज माहौल बन गया। कई लोग अचानक हुए विवाद से घबरा गए और पार्क से बाहर निकलने लगे। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार समय रहते हस्तक्षेप किए जाने से बड़ा विवाद टल गया। हालांकि घटना के बाद पार्क प्रबंधन और पुलिस की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर प्रमोद शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी और विरोध के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। प्रमोद शर्मा का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ और उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क कर्मचारियों ने विरोध को दबाने की कोशिश की और विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाया। दूसरी तरफ पार्क प्रबंधन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के व्यवहार के कारण कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रमोद शर्मा ने कहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य ईको पार्क में कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाना था। उनका दावा है कि पार्क में प्रति व्यक्ति 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं और इस संबंध में स्पष्ट जानकारी आम लोगों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क में प्रवेश शुल्क के नाम पर लोगों से अनुचित राशि ली जा रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्क परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ और हाथापाई की नौबत कैसे आई। जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ईको पार्क शुल्क को लेकर उठा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक वर्ग जहां प्रवेश शुल्क व्यवस्था का समर्थन कर रहा है, वहीं कुछ लोग शुल्क की दरों और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मारपीट, विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[शहीद स्मारक पर नीट पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में अचानक भीड़ ने किया हमला, पुलिस ने कई युवकों को हिरासत में लिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cjp-founder-abhijit-deepke-assaulted-uproar-during-protest-in-jaipur/article-56037"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhijeet-deepke-jaipur-incident.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">जयपुर में सोमवार को उस वक्त माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ शहीद स्मारक पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान मारपीट की घटना सामने आई। यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति पूरी तरह बदल गई और भीड़ के बीच अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और मंच के आसपास लगातार नारेबाजी चल रही थी। इसी दौरान अभिजीत दीपके अपने कुछ समर्थकों के साथ भीड़ के बीच मौजूद थे। बताया जा रहा है कि वह अपने समर्थकों के कंधों पर बैठकर लोगों को संबोधित करने या भीड़ का अभिवादन कर रहे थे, तभी अचानक कुछ युवकों ने आगे बढ़कर उन पर हमला कर दिया। यह घटना इतनी तेजी से हुई कि शुरुआती कुछ सेकंड में किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद वहां मौजूद समर्थकों और अन्य कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया। देखते ही देखते धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। कुछ लोगों ने हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की, वहीं कुछ ने स्थिति को शांत करने का प्रयास भी किया। मौके पर कुछ देर के लिए अव्यवस्था फैल गई और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे। आसपास मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसमें भीड़ के बीच अचानक हुई झड़प और अफरा-तफरी को साफ देखा जा सकता है। वीडियो में लोगों को एक-दूसरे की तरफ दौड़ते और चिल्लाते हुए देखा गया, जबकि कुछ लोग स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। इस वायरल वीडियो ने घटना को और अधिक चर्चा में ला दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के तुरंत बाद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमलावरों को पकड़कर कथित रूप से उनकी पिटाई भी की। हालांकि इसी बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से अपील की कि किसी भी तरह की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया जाना चाहिए और हमलावरों को छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाना है। मामले को लेकर सीजेपी के मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन ने दावा किया कि हमले में शामिल युवकों को पुलिस ने मौके से हिरासत में ले लिया है। वहीं जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज वर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कुल पांच लोगों को डिटेन किया गया है, जिनमें तीन युवक सीधे तौर पर मारपीट की घटना में शामिल पाए गए हैं। पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि इन युवकों का किसी संगठन से कोई संबंध है या नहीं और क्या यह हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई योजना थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को अब और मजबूत कर दिया गया है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। पूरे मामले की जांच अलग-अलग पहलुओं से की जा रही है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो भी शामिल किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के हमले उनकी आवाज को दबा नहीं सकते। उन्होंने इसे डर और कायरता की निशानी बताया और कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। दीपके ने यह भी दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी एक बार फिर से उठाई।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपके ने अपने बयान में कहा कि वह गांधी और आंबेडकर के विचारों से प्रेरित हैं और उनकी लड़ाई हमेशा अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीकों से ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हो सकती हैं, लेकिन इससे उनके इरादे नहीं बदलेंगे। सीजेपी के अन्य प्रवक्ताओं ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि हमले में शामिल कुछ लोग किसी राजनीतिक दल से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। उनका कहना है कि सभी संदिग्ध चेहरों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कुछ नेताओं ने इस घटना की निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक विरोध पर हमला बताया है। वहीं कुछ ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती, चाहे कारण कुछ भी हो। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। जयपुर पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुलिस कार्रवाई से नाराज युवक पानी टंकी पर चढ़ा, आत्महत्या की धमकी से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[मारपीट और जबरन पैसे लेने के आरोप लगाकर इंसाफ की मांग, तेज बारिश के बीच घंटों टंकी पर डटा रहा युवक; प्रशासन मनाने में जुटा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/angered-by-the-police-action-a-young-man-climbed-on/article-55616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/hardibazar-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हरदीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम नेवसा में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक गांव की ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गया और आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। युवक पुलिस कार्रवाई से नाराज बताया जा रहा है। उसने पुलिस पर मारपीट करने और जबरन पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना की खबर फैलते ही गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को भी तत्काल मौके पर पहुंचना पड़ा। कई घंटों तक चले घटनाक्रम के दौरान अधिकारी युवक को समझाने का प्रयास करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार नेवसा निवासी रफीक मोहम्मद ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि वह गुरुवार सुबह गांव की पानी टंकी पर चढ़ गया और ऊपर से ही अपनी मांगें रखने लगा। उसका कहना था कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगा। इस दौरान इलाके में तनाव का माहौल बना रहा और लोगों की निगाहें टंकी पर टिकी रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक रफीक मोहम्मद और दीपेश निर्मलकर ने हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों का दावा है कि कुछ दिन पहले पुलिस उन्हें ग्राम सिरली के पास से पकड़कर थाने ले गई थी। वहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उनसे 23 हजार 500 रुपए भी ले लिए गए। इन आरोपों को लेकर दोनों युवकों में नाराजगी थी और इसी के विरोध में रफीक ने पानी टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरुवार सुबह से ही मौसम खराब था और बीच-बीच में तेज बारिश भी हो रही थी। इसके बावजूद युवक टंकी से नीचे उतरने को तैयार नहीं था। वह ऊपर से लगातार अपनी बात दोहराता रहा और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा। ग्रामीणों का कहना था कि युवक मानसिक दबाव में दिखाई दे रहा था और अपनी शिकायतों को लेकर काफी आक्रोशित था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई। नए तहसीलदार विमल खांडेकर समेत कई अधिकारी गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने पहले परिजनों को आगे कर युवक को समझाने की कोशिश की। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और गांव के वरिष्ठ लोगों की मदद भी ली गई ताकि युवक को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में हरदीबाजार थाना प्रभारी प्रमोद कुमार डनसेना ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की थी। थाना प्रभारी के मुताबिक दोनों युवक कथित तौर पर जुआ गतिविधियों से जुड़े हुए थे और सूचना मिलने पर उनके खिलाफ धारा 151 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई थी। उन्होंने मारपीट और पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने किसी प्रकार की गैरकानूनी कार्रवाई नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि गांव के कुछ लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हाल के दिनों में पुलिस द्वारा कई लोगों को पूछताछ के नाम पर घरों से उठाकर थाने ले जाया गया है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि यदि किसी के खिलाफ शिकायत थी तो उसके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना के बाद गांव में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने एक अन्य युवक अनवर अली का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वह कई दिनों से घर नहीं लौटा है और उसके परिवार वाले भी चिंतित हैं। हालांकि इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद युवक के टंकी पर चढ़े रहने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया और लोगों को टंकी के करीब जाने से रोका गया। लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे थे। कुछ लोग युवक की मांगों को गंभीरता से लेने की बात कह रहे थे, जबकि कुछ का मानना था कि कानून हाथ में लेने के बजाय शिकायत के लिए वैधानिक रास्ता अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 13:55:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के प्रस्ताव पर भोपाल में विरोध तेज, पैदल मार्च का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने नाम परिवर्तन का विरोध किया, राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/protest-in-bhopal-against-the-proposal-to-change-the-name/article-55099"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ एकजुट होकर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम केवल एक पहचान नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और भोपाल की विरासत से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नाम परिवर्तन का प्रस्ताव न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय को कमजोर करने का प्रयास भी माना जा रहा है। इसी विरोध के तहत शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से पैदल मार्च निकाला जाएगा। मार्च में शामिल लोग राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के उन स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल थे जिन्होंने विदेशों में रहकर भी भारत की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि बरकतउल्ला ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका भी निभाई थी। उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तित्व के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके योगदान को कम करके आंकने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक संस्थान का नाम बदलने का मामला नहीं है बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों और विरासत से जुड़ा विषय है। इसी वजह से विभिन्न वर्गों के लोग इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने भी नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां मौजूद हैं और सरकार को नए तथा विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो उसके लिए नए विश्वविद्यालय खोले जा सकते हैं, लेकिन वर्षों पुरानी संस्थाओं की पहचान बदलना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए और विश्वविद्यालयों को ज्ञान तथा शोध के केंद्र के रूप में विकसित करने पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नाम परिवर्तन जैसे मुद्दे छात्रों और शिक्षकों के बीच अनावश्यक बहस और विवाद की स्थिति पैदा कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विरोध करने वाले संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि यह निर्णय भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। संगठनों के अनुसार शहर के लोगों की भावनाएं इस मुद्दे से जुड़ी हुई हैं और किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनमत लिया जाना चाहिए था। कई संगठनों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से शिक्षा की गुणवत्ता या संस्थान की उपलब्धियों में कोई बदलाव नहीं आएगा, इसलिए ऐसे कदमों की आवश्यकता समझ से परे है। विरोध करने वालों का कहना है कि यदि सरकार ने प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच पैदल मार्च को लेकर तैयारियां भी तेज हो गई हैं। आयोजकों ने शहर के नागरिकों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल किसी एक समुदाय या संगठन का मुद्दा नहीं बल्कि इतिहास और विरासत को संरक्षित रखने का प्रश्न है। बताया जा रहा है कि मार्च के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जाएगी और राज्यपाल के माध्यम से सरकार तक मांग पहुंचाई जाएगी। आयोजकों का दावा है कि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं और समाज के अलग-अलग वर्गों का समर्थन मिल रहा है। भोपाल में विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े सार्वजनिक मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:59:17 +0530</pubDate>
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