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                <title>Success Story - दैनिक जागरण</title>
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                <title>गरीबी, नस्लभेद और संघर्ष से निकले ‘किंग जेम्स’, बने एथलीट ऑफ द सेंचुरी</title>
                                    <description><![CDATA[लेब्रॉन जेम्स की जिंदगी की कहानी: अभावों से शुरू होकर 1.4 बिलियन डॉलर की सफलता तक का सफर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/king-james-who-came-out-of-poverty-racism-and-struggle/article-56680"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/lebron-james-story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लेब्रॉन जेम्स, जिन्हें दुनिया “किंग जेम्स” के नाम से जानती है, आज बास्केटबॉल की दुनिया का सबसे बड़ा नाम माने जाते हैं। हाल ही में टाइम मैगजीन ने उन्हें “एथलीट ऑफ द सेंचुरी” के रूप में कवर पेज पर जगह दी, जिससे एक बार फिर उनके करियर और संघर्ष दोनों पर चर्चा तेज हो गई है। लेकिन इस ऊंचाई तक पहुंचने का उनका रास्ता आसान नहीं था, बल्कि गरीबी, टूटे परिवार और नस्लभेद जैसी चुनौतियों से भरा रहा है। 30 दिसंबर 1984 को अमेरिका के एक्रोन शहर में जन्मे लेब्रॉन जेम्स का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। उनकी मां ग्लोरिया जेम्स मात्र 16 साल की उम्र में सिंगल मदर बन गई थीं। पिता जन्म से पहले ही परिवार छोड़कर चले गए थे। ऐसे में लेब्रॉन ने अपने बचपन में पिता का साया कभी महसूस नहीं किया। शुरुआती दिनों में वह अपनी मां और नानी के साथ रहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि जीवन लगातार संघर्ष में बीतता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालात इतने खराब थे कि जब लेब्रॉन केवल 5 साल के थे, तब उनकी नानी का घर प्रशासन ने जर्जर बताकर गिरा दिया। इसके बाद मां और बेटे के पास रहने के लिए कोई स्थायी ठिकाना नहीं बचा। वे कभी रिश्तेदारों के घर तो कभी दोस्तों के घर शिफ्ट होते रहे। इस दौरान 5 से 9 साल की उम्र के बीच उन्हें करीब एक दर्जन जगहों पर रहना पड़ा। इस अस्थिर जीवन ने उनके बचपन को पूरी तरह प्रभावित किया। लेब्रॉन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि चौथी कक्षा में वह लगभग 100 दिन तक स्कूल नहीं जा पाए थे क्योंकि उनके पास स्थायी घर और संसाधन नहीं थे। मां आर्थिक रूप से कमजोर थीं और बेटे की परवरिश अकेले संभालना उनके लिए बेहद कठिन था। इसी दौरान मजबूरी में उनकी मां ने 9 साल के लेब्रॉन को अपने एक परिचित फुटबॉल कोच फ्रैंकी वॉकर के पास रहने के लिए भेज दिया। यह दौर उनके जीवन का सबसे भावनात्मक और कठिन समय माना जाता है। स्कूल और समाज में भी लेब्रॉन को कई बार नस्लभेद का सामना करना पड़ा। उनके रंग और पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणियां की जाती थीं। बड़े होने पर भी यह अनुभव खत्म नहीं हुआ, बल्कि कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से भी नस्लभेदी घटनाओं का सामना करना पड़ा। 2017 में उनके घर पर नस्लभेदी शब्द लिखे जाने की घटना ने अमेरिका में काफी विवाद खड़ा किया था। उन्होंने बाद में कहा था कि “अमेरिका में एक अश्वेत व्यक्ति के रूप में जीवन आसान नहीं होता, चाहे आप कितने भी सफल क्यों न हो जाएं।”</p>
<p style="text-align:justify;">इन कठिन हालातों के बीच लेब्रॉन का बास्केटबॉल करियर धीरे-धीरे आकार लेने लगा। कोच फ्रैंकी वॉकर ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें खेल की ओर प्रेरित किया। स्कूल टीम से खेलते हुए लेब्रॉन ने जल्दी ही अपनी अलग पहचान बना ली। हाई स्कूल टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें लगातार तीन बार “ओहायो मिस्टर बास्केटबॉल” का खिताब मिला। उनकी प्रतिभा को देखते हुए एनबीए टीम क्लीवलैंड कैवेलियर्स ने 2003 में उन्हें ड्राफ्ट किया, जहां से उनका पेशेवर करियर शुरू हुआ। इसके बाद लेब्रॉन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एनबीए में चार चैंपियनशिप जीतीं और तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अमेरिकी टीम के कप्तान भी रहे। उनकी खेल शैली, फिटनेस और निरंतरता ने उन्हें दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। आज वे एनबीए के ऑल टाइम लीडिंग स्कोरर भी हैं। मैदान के बाहर भी लेब्रॉन जेम्स एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। उनकी नेटवर्थ लगभग 1.4 बिलियन डॉलर बताई जाती है। वे कई स्पोर्ट्स ब्रांड्स के साथ जुड़े हैं और उनकी अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी भी है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी बड़ी भूमिका निभाई है। उनकी संस्था “आई प्रॉमिस स्कूल” गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा और कॉलेज स्कॉलरशिप प्रदान करती है, जो उनके बचपन के संघर्षों से प्रेरित है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेब्रॉन का जीवन यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति को रोक नहीं सकतीं, अगर उसमें मेहनत और निरंतरता हो। गरीबी से शुरू होकर दुनिया के सबसे बड़े खेल सितारों में शामिल होने तक का उनका सफर सिर्फ खेल की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी हौसले की मिसाल है। आज “किंग जेम्स” केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुके हैं, जिनकी कहानी दुनिया भर के युवाओं को यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सपनों को हासिल किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:50:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सरकारी नौकरी बेहतर या प्राइवेट जॉब? जानिए सही जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी और प्राइवेट नौकरी दोनों के अपने फायदे और चुनौतियां हैं, सही चुनाव व्यक्ति की प्राथमिकताओं, लक्ष्य और जीवनशैली पर निर्भर करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/opinion/government-job-is-better-or-private-job-know-the-right/article-56341"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/career-choice.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज के समय में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में से एक है कि सरकारी नौकरी बेहतर है या प्राइवेट नौकरी। लगभग हर युवा अपने करियर की शुरुआत में इस दुविधा से गुजरता है। कुछ लोग सरकारी नौकरी को सफलता की पहचान मानते हैं, जबकि कुछ लोगों के लिए प्राइवेट सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ने के अवसर ज्यादा आकर्षक होते हैं। मेरी राय में सरकारी और प्राइवेट नौकरी में से कोई भी पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं है। दोनों की अपनी-अपनी खूबियां और चुनौतियां हैं। इसलिए यह तय करना कि कौन-सी नौकरी बेहतर है, व्यक्ति की सोच, जरूरतों और जीवन के लक्ष्यों पर निर्भर करता है। अगर सरकारी नौकरी की बात करें तो सबसे बड़ा फायदा नौकरी की सुरक्षा है। एक बार चयन हो जाने के बाद कर्मचारी को भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती। नियमित वेतन, पेंशन जैसी सुविधाएं, मेडिकल लाभ, छुट्टियां और सामाजिक सम्मान सरकारी नौकरी को आकर्षक बनाते हैं। भारत में आज भी सरकारी कर्मचारी को समाज में विशेष सम्मान की नजर से देखा जाता है। यही वजह है कि लाखों युवा हर साल यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, रेलवे और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। सरकारी नौकरी में काम का दबाव कई मामलों में अपेक्षाकृत कम माना जाता है। कार्य के निश्चित घंटे होते हैं और निजी जीवन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। परिवार और सामाजिक जीवन को संतुलित रखने के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि सरकारी नौकरी की कुछ सीमाएं भी हैं। सबसे पहले इसमें चयन प्रक्रिया काफी कठिन और लंबी होती है। लाखों उम्मीदवारों में से बहुत कम लोगों का चयन हो पाता है। कई बार युवा वर्षों तक तैयारी करते रहते हैं और उनका कीमती समय निकल जाता है। इसके अलावा पदोन्नति की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत धीमी होती है। मेहनत करने वाले और सामान्य प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी के बीच कई बार ज्यादा अंतर नहीं दिखता। दूसरी ओर, प्राइवेट नौकरी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। आईटी, बैंकिंग, मार्केटिंग, मीडिया, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट सेक्टर ने युवाओं के लिए अनगिनत अवसर पैदा किए हैं। यहां प्रतिभा और प्रदर्शन को अधिक महत्व दिया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में कौशल, मेहनत और सीखने की इच्छा है तो वह बहुत कम समय में ऊंचे पद तक पहुंच सकता है। प्राइवेट नौकरी का सबसे बड़ा आकर्षण बेहतर वेतन और तेज करियर ग्रोथ है। कई कंपनियां कर्मचारियों को आकर्षक सैलरी पैकेज, बोनस, इंसेंटिव और अन्य सुविधाएं देती हैं। आज अनेक युवा 25 से 30 वर्ष की उम्र में ही ऐसे पदों पर पहुंच जाते हैं, जिनके बारे में पहले सोचना भी मुश्किल था। लेकिन प्राइवेट सेक्टर की अपनी चुनौतियां भी हैं। यहां नौकरी की सुरक्षा सरकारी क्षेत्र जितनी मजबूत नहीं होती। आर्थिक मंदी, कंपनी की खराब स्थिति या प्रदर्शन में गिरावट के कारण नौकरी पर असर पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में लंबे कार्य घंटे और अधिक दबाव भी देखने को मिलता है। कर्मचारियों को लगातार खुद को अपडेट रखना पड़ता है, अन्यथा प्रतिस्पर्धा में पीछे छूटने का खतरा रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मेरे अनुसार यदि किसी व्यक्ति को स्थिर जीवन, निश्चित आय और नौकरी की सुरक्षा पसंद है तो सरकारी नौकरी उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति चुनौतियां पसंद करता है, तेजी से आगे बढ़ना चाहता है और जोखिम लेने के लिए तैयार है तो प्राइवेट नौकरी उसे अधिक अवसर दे सकती है। आज का दौर कौशल आधारित अर्थव्यवस्था का है। केवल नौकरी का प्रकार सफलता तय नहीं करता। कई सरकारी कर्मचारी शानदार कार्य कर रहे हैं, वहीं लाखों लोग प्राइवेट सेक्टर में भी उत्कृष्ट करियर बना रहे हैं। सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति अपने काम के प्रति कितना समर्पित है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि युवाओं को केवल समाज के दबाव में आकर नौकरी का चुनाव नहीं करना चाहिए। अक्सर परिवार या रिश्तेदार सरकारी नौकरी को ही अंतिम लक्ष्य मान लेते हैं, जबकि हर व्यक्ति की रुचि और क्षमता अलग होती है। किसी को प्रशासनिक सेवा पसंद हो सकती है, तो कोई तकनीकी क्षेत्र या कॉर्पोरेट दुनिया में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि सरकारी नौकरी और प्राइवेट नौकरी दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। बेहतर वही है जो आपकी प्राथमिकताओं, सपनों और जीवन के लक्ष्यों के अनुरूप हो। यदि आप मेहनती, ईमानदार और सीखने के इच्छुक हैं, तो किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकते हैं। आखिरकार नौकरी नहीं, बल्कि आपकी सोच, मेहनत और कार्य के प्रति समर्पण ही आपके भविष्य को तय करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपीनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:27:04 +0530</pubDate>
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                <title>समोसे बेचने वाले पिता की बेटी बनी सिंगिंग स्टार, 38 की हुईं नेहा कक्कड़</title>
                                    <description><![CDATA[चार साल की उम्र में जगरातों से शुरू हुआ सफर, गरीबी, संघर्ष, विवाद और सफलता के बीच नेहा कक्कड़ ने बनाई अपनी अलग पहचान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/neha-kakkar-turns-38-becomes-singing-star-daughter-of-father/article-55109"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neha-kakkar-birthday.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय संगीत जगत की लोकप्रिय गायिका नेहा कक्कड़ आज अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। लाखों दिलों की धड़कन बन चुकी नेहा की कहानी सिर्फ एक सफल सिंगर की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, मेहनत और सपनों को सच करने की मिसाल भी है। आज जिस नेहा कक्कड़ के गाने रिलीज होते ही करोड़ों व्यूज हासिल कर लेते हैं, कभी वही नेहा बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में पली-बढ़ी थीं। उनका बचपन कठिनाइयों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हालात को अपनी मंजिल के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उत्तराखंड के ऋषिकेश में जन्मी नेहा कक्कड़ तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके बड़े भाई टोनी कक्कड़ और बहन सोनू कक्कड़ भी संगीत जगत से जुड़े हुए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पूरा परिवार एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उस कमरे में अलग से रसोई तक नहीं थी। माता-पिता और तीनों बच्चे उसी एक कमरे में अपना जीवन गुजारते थे। परिवार की आर्थिक परेशानियां इतनी थीं कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था।</p>
<p class="isSelectedEnd">जब नेहा छोटी थीं, तब उनके पिता परिवार की बेहतर आजीविका की तलाश में दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने एक स्कूल के बाहर समोसे बेचने का काम शुरू किया। इसी बीच परिवार की मदद करने के लिए बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने जगरातों में भजन गाना शुरू किया। बाद में भाई टोनी और फिर चार साल की उम्र में नेहा भी इस सफर का हिस्सा बन गईं। छोटी सी उम्र में रातभर चलने वाले जगरातों में गाना उनके जीवन का हिस्सा बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">नेहा कई बार अपने इंटरव्यू में बता चुकी हैं कि बचपन में उन्हें घंटों मंच पर गाना पड़ता था। कई बार पूरी रात कार्यक्रम चलता था और अगली सुबह स्कूल जाना संभव नहीं हो पाता था। बावजूद इसके उन्होंने संगीत के प्रति अपना जुनून नहीं छोड़ा। परिवार को मिलने वाली छोटी-सी रकम ही उनके जीवन का सहारा थी। धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों के बीच पहचान बनाने लगी। महज पांच साल की उम्र में नेहा ने एक स्थानीय संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और बड़े प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। यह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला पहला बड़ा पड़ाव था। इसके बाद उन्होंने शादियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में भी प्रस्तुति देना शुरू कर दिया। संगीत उनके जीवन का आधार बन चुका था।</p>
<p class="isSelectedEnd">साल 2003 में उनकी बड़ी बहन सोनू कक्कड़ को एक रियलिटी शो के जरिए पहचान मिली और परिवार का मुंबई से जुड़ाव शुरू हुआ। कुछ वर्षों बाद नेहा भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंचीं। उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी। संघर्ष आसान नहीं था। ऑडिशन दर ऑडिशन देना, रिजेक्शन झेलना और खुद को साबित करना उनकी दिनचर्या बन गई थी। नेहा को पहली बड़ी पहचान तब मिली जब उनका चयन लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल सीजन-2 में हुआ। हालांकि वह प्रतियोगिता नहीं जीत सकीं, लेकिन इस मंच ने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। शो से बाहर होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने म्यूजिक एल्बम और फिल्मों में गाने शुरू किए।</p>
<p class="isSelectedEnd">बॉलीवुड में उन्हें बड़ा ब्रेक फिल्म "कॉकटेल" के लोकप्रिय गीत "सेकंड हैंड जवानी" से मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक कई सुपरहिट गाने उनके खाते में जुड़े और वह देश की सबसे चर्चित महिला गायिकाओं में शामिल हो गईं। उनकी ऊर्जावान आवाज और मंच परफॉर्मेंस ने उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सफलता के साथ विवाद भी उनके जीवन का हिस्सा बने। कई रीमिक्स गानों को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर कई बार उन्हें ट्रोल भी किया गया। इंडियन आइडल में भावुक होने को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। बावजूद इसके नेहा ने हर आलोचना का सामना किया और अपने काम पर फोकस बनाए रखा। उनकी निजी जिंदगी भी लंबे समय तक सुर्खियों में रही। अभिनेता हिमांश कोहली के साथ रिश्ते और फिर ब्रेकअप ने काफी चर्चा बटोरी। ब्रेकअप के बाद नेहा ने सार्वजनिक रूप से डिप्रेशन से जूझने की बात भी स्वीकार की थी। बाद में उन्होंने गायक रोहनप्रीत सिंह से शादी की और यह शादी भी लंबे समय तक मीडिया की सुर्खियों में रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के वर्षों में परिवार से जुड़े कुछ विवाद और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें भी चर्चा का विषय बनीं, लेकिन नेहा लगातार अपने संगीत करियर पर ध्यान देती रहीं। आज वह न सिर्फ सफल गायिका हैं बल्कि कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा भी हैं। चार साल की उम्र में जगरातों से शुरुआत करने वाली नेहा कक्कड़ आज भारतीय संगीत उद्योग का बड़ा नाम हैं। गरीबी, संघर्ष, असफलता, विवाद और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत और जुनून के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। उनका जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 15:39:06 +0530</pubDate>
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