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                <title>Education System India - दैनिक जागरण</title>
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                <title>संसदीय समिति ने NTA और CBSE से पेपर लीक पर मांगे जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक और OSM सिस्टम विवाद पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों संस्थानों से कड़े सवाल पूछे, बैकग्राउंड जांच और परिभाषा पर उठे गंभीर प्रश्न]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/parliamentary-committee-seeks-answers-from-nta-and-cbse-on-paper/article-55242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nta-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) से जुड़े परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर कई गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। NEET पेपर लीक विवाद और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रही जांच के बीच समिति की बैठक में माहौल काफी सख्त रहा और अधिकारियों से लिखित जवाब भी मांगे गए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद (Digvijaya Singh) की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सबसे पहले यही सवाल किया कि आखिर ‘पेपर लीक’ की परिभाषा सरकारी परीक्षा एजेंसियों के हिसाब से क्या मानी जाती है, और क्या इस परिभाषा को लेकर किसी तरह की स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद है या नहीं। बैठक में यह भी पूछा गया कि जब संस्थान खुद यह दावा करते हैं कि सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, तो फिर अलग-अलग स्तर पर सामने आने वाली गड़बड़ियों और लीक जैसे आरोपों को किस श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान समिति ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी सफाई देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि देशभर में लाखों छात्र इन परीक्षाओं पर निर्भर हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति ने विशेष रूप से National Testing Agency से 2018 के बाद आयोजित सभी प्रमुख परीक्षाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा है और पूछा है कि क्या कभी आधिकारिक रूप से किसी परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है या केवल अफवाह और तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर ही ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में एजेंसी की ओर से यह दावा किया गया था कि उनके सिस्टम में वास्तविक पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक ‘गेस पेपर’ या अनुमानित प्रश्न पत्र प्रसारित हुआ था, जिस पर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह केवल अनुमानित सामग्री थी तो फिर परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की मजबूती पर सवाल क्यों खड़े होते हैं। इसके अलावा समिति ने NTA से उसके आंतरिक ढांचे, मानव संसाधन, तकनीकी टीम और पिछले तीन वर्षों में की गई सभी नियुक्तियों का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। बताया जा रहा है कि समिति यह समझने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी परीक्षा एजेंसी के भीतर स्टाफिंग, निगरानी और तकनीकी नियंत्रण की व्यवस्था कितनी मजबूत है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बार-बार सामने आने वाले विवाद केवल बाहरी समस्या हैं या फिर सिस्टम के भीतर कोई संरचनात्मक कमजोरी मौजूद है। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठा कि क्या परीक्षा संचालन के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या निगरानी की कमी रही है, जिसके कारण छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी समिति ने विस्तृत सवाल पूछे हैं। सबसे बड़ा सवाल कोएम्प्ट (Coempt) कंपनी को दिए गए ठेके और उसके चयन की प्रक्रिया पर केंद्रित रहा। समिति ने पूछा कि क्या बोर्ड ने टेंडर देने से पहले कंपनी का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया था या नहीं, और क्या यह जानकारी थी कि कंपनी के डायरेक्टर पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज से जुड़े रहे हैं, जिस पर पहले परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि विवादित इतिहास वाली कंपनियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने की शर्त को तीसरे टेंडर में क्यों हटा दिया गया और क्या यह किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था या तकनीकी कारणों से। इसके अलावा 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक स्कैनर के बजाय सामान्य स्कैनर के उपयोग की अनुमति देने पर भी सवाल उठाए गए। समिति का कहना है कि जब परीक्षा मूल्यांकन जैसे संवेदनशील कार्य में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, तो उसमें गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसी बीच राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा तेजी से गरमाया हुआ है, खासकर जब कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने सार्वजनिक रूप से कोएम्प्ट कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब समिति की ओर से मांगे गए जवाबों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर और अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:07:15 +0530</pubDate>
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                <title>पेपर लीक के खिलाफ CJP आंदोलन को बॉलीवुड समर्थन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[ऋचा चड्ढा, अतुल कुलकर्णी, प्रकाश राज और सोनम वांगचुक ने जताया समर्थन, छात्रों ने दिल्ली में पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ खोला मोर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/bollywood-supports-cjp-movement-against-paper-leak-protest-intensifies-at/article-55117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cjp-protest-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुआ। इस आंदोलन में देशभर से बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके कर रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में छात्रों से अपील की थी कि वे परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर एकजुट हों। जंतर-मंतर पर सुबह से ही छात्रों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और धीरे-धीरे यह प्रदर्शन एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेता दिखाई दिया। मौके पर नारेबाजी और पोस्टरों के जरिए छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाई।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस प्रदर्शन को अब बॉलीवुड और सामाजिक जगत से भी समर्थन मिलने लगा है, जिससे यह आंदोलन और अधिक चर्चा में आ गया है। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने सोशल मीडिया के जरिए इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। उन्होंने लिखा कि भले ही वह देश से बाहर हैं, लेकिन उनका मन दिल्ली और वहां आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे सच्चे देशभक्त बनें और दिखावे की देशभक्ति से दूर रहें। ऋचा चड्ढा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज हो गई है और कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने भी युवाओं के इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी और उससे पहले की पीढ़ियों ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाने में चूक की है, जिसकी वजह से आज के युवाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अतुल कुलकर्णी ने छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि अब समय है कि युवा सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के साथ देश के पुनर्निर्माण में आगे आएं। उनके इस बयान को भी सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और कई लोग इसे एक जिम्मेदार स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक पार्टी, नेता या विचारधारा का नहीं होता, बल्कि यह उन नागरिकों का होता है जो सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब लोग जागरूक रहते हैं और जवाबदेही की मांग करते हैं। कुनिका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी साझा किया जिसमें उन्होंने कहा कि जब लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती, तो उन्हें अपनी बात रखने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं ताकि सिस्टम तक संदेश पहुंच सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अभिनेता प्रकाश राज का भी समर्थन मिला है। सोनम वांगचुक ने पहले ही संकेत दिए थे कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो वे इस प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। वहीं प्रकाश राज भी लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। छात्रों के बीच इस समर्थन के बाद आंदोलन को और अधिक बल मिला है और जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ में उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी ने उनके भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि मेहनत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पाता, जबकि कुछ लोग गलत तरीकों से लाभ उठा लेते हैं। इसी वजह से वे एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है। उन्होंने देश के सभी छात्रों से इस शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी, जिसके बाद जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवा पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि एक जागरूकता अभियान है जो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा तय कर सकता है। दिल्ली पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की गई है। आंदोलन को मिल रहे समर्थन और बढ़ती भागीदारी के कारण यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 16:41:32 +0530</pubDate>
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