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                <title>anticipatory bail - दैनिक जागरण</title>
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                <description>anticipatory bail RSS Feed</description>
                
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                <title>वायरल गर्ल के पति को नहीं मिली अग्रिम जमानत, पॉक्सो कोर्ट ने कहा- सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[मंडलेश्वर की विशेष पॉक्सो अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और पीड़िता की उम्र का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/viral-girls-husband-did-not-get-anticipatory-bail-pocso-court/article-57652"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/viral-girl-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने चर्चित वायरल गर्ल मामले में उसके पति को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उसे जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत का मानना है कि आरोपी के फरार रहने, जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की वास्तविक उम्र का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। यह मामला उस एफआईआर से जुड़ा है जो पीड़िता के पिता ने 25 मार्च को दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले जाया गया। वहां कुछ समय तक साथ रखने के बाद आरोपी ने कथित रूप से उसे बहला-फुसलाकर विवाह कर लिया। परिवार का दावा है कि शादी के समय उनकी बेटी नाबालिग थी, इसलिए पूरा मामला पॉक्सो एक्ट के दायरे में आता है। बुधवार को मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि युवती अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों ने आपसी सहमति से विवाह किया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि केरल के थंपानूर पुलिस थाने में युवती ने स्वयं को बालिग बताया था और उसने अपने बयान में भी विवाह को अपनी इच्छा से किया गया बताया था। इसी आधार पर आरोपी को अग्रिम जमानत देने की मांग की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अभियोजन पक्ष और पीड़िता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत के सामने जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि विवाह के समय युवती नाबालिग थी और आरोपी की ओर से प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेज कानूनी रूप से प्रमाणिक नहीं हैं। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश रवि झारोला ने केस डायरी का अध्ययन किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभी मामले की जांच जारी है और पीड़िता के बयान सहित कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं। आरोपी जांच एजेंसियों के सामने उपस्थित नहीं हुआ है और फरार बताया जा रहा है। ऐसे में यदि उसे अग्रिम जमानत दी जाती है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की वास्तविक उम्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद है। इस विषय पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान प्रस्तुत होने वाले दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाएगा। फिलहाल इस स्तर पर उम्र को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में इससे पहले केरल हाईकोर्ट भी सुनवाई कर चुका है। तीन जून को केरल हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर युवती को बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान की थी। उस दौरान अदालत के सामने जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज पेश किए गए थे। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से यह दावा किया गया था कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और युवती वास्तव में नाबालिग है। हाईकोर्ट ने उस समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर राहत दी थी, लेकिन उम्र संबंधी विवाद का अंतिम फैसला नहीं सुनाया था। मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग ने दावा किया कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और विवाह के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी मामले से जुड़ा एक अन्य पहलू फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी है। युवती ने आरोप लगाया था कि जब वह नाबालिग थी तब फिल्म की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। इन आरोपों के आधार पर केरल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि फिल्म निर्देशक ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई साजिश बताया है। पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद युवती की उम्र को लेकर है। जांच के दौरान अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र सामने आए, जिनमें जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है। प्रशासन की ओर से कुछ दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। यही कारण है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का समाधान केवल ट्रायल के दौरान साक्ष्यों की जांच के बाद ही संभव होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:40:35 +0530</pubDate>
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                <title>खान सर फायरिंग मामले में सरेंडर नहीं करेंगे, अग्रिम जमानत की तैयारी</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/khan-sir-will-not-surrender-in-firing-case-preparations-for/article-55134"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khan-sir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पटना में कोचिंग संस्थान से जुड़े फायरिंग मामले को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक और लोकप्रिय शिक्षक <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">खान सर</span></span> के वकील ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल अदालत में सरेंडर नहीं करेंगे। वकील अरविंद कुमार महुआर ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) में गंभीर त्रुटियां हैं और आरोपों का वास्तविकता से कोई सीधा संबंध नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">वकील के अनुसार, खान सर की ओर से अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को अदालत में दाखिल की जाएगी। शनिवार को समय सीमा समाप्त होने के कारण यह याचिका दाखिल नहीं हो सकी थी। उन्होंने दावा किया कि मामले में पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है और घटनाक्रम को गलत तरीके से जोड़ा गया है। वकील ने यह भी कहा कि खान सर का किसी भी तरह की फायरिंग या हिंसा भड़काने में कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष योगदान नहीं है। उनके मुताबिक, गार्ड्स और अन्य लोगों के बयान को आधार बनाकर एफआईआर तैयार की गई है, जो पूरी तरह एकतरफा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कुछ ऐसे कथन जोड़ दिए हैं, जिनका कोई ठोस सबूत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, मामले में शामिल गार्ड्स प्रदीप और तारकेश्वर की ओर से भी जमानत के लिए याचिका दायर की गई है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है। पुलिस ने इन दोनों गार्ड्स को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पूरा मामला 2 जून की रात का बताया जा रहा है, जब पटना स्थित कोचिंग संस्थान परिसर में कथित तौर पर फायरिंग की घटना हुई थी। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग सेंटर के बाहर एकत्र हो गए थे। पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पटना पुलिस का दावा है कि गार्ड्स के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ी है, जिसमें यह कहा गया कि उन्हें कथित रूप से कहा गया था कि “गोली चलाओ, बाकी हम देख लेंगे।” इसी बयान के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। हालांकि, वकील इस बयान को भी गलत संदर्भ में पेश किया गया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद पुलिस ने कोचिंग परिसर में कई बार दबिश दी, लेकिन तुरंत गिरफ्तारी नहीं हो सकी। रातभर पुलिस और छात्रों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस ने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी तरह के बहकावे में न आएं और कानून व्यवस्था बनाए रखें। मामले में एक और विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ा वीडियो वायरल हुआ। इसमें कथित तौर पर गार्ड्स को फायरिंग करते हुए दिखाया गया है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोचिंग संस्थान के भीतर मौजूद छात्रों ने भी अपने समर्थन में आवाज उठाई है। कई छात्रों ने कहा कि वे अपने शिक्षक के साथ खड़े हैं और जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच हर एंगल से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वकील ने आगे कहा कि उनके मुवक्किल का उद्देश्य केवल शिक्षा देना है और वह हमेशा छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के बाद से कोचिंग संस्थान को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने पटना में शिक्षा जगत और कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि आगे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई इस केस की दिशा तय कर सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:13:24 +0530</pubDate>
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